ओवरी यानी अंडाशय महिला के रिप्रोडक्टिव सिस्टम का मुख्य हिस्सा है। इनमें कभी-कभी सिस्ट यानी गांठें बन जाती हैं जिन्हें ओवरी सिस्ट या ओवेरियन सिस्ट कहते हैं। ज़्यादातर ओवरी सिस्ट हानिरहित होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं। अगर आप प्रेगनेंसी की प्लानिंग कर रही हैं, तो ओवरी के स्वास्थ्य और सिस्ट के बारे में जानना बेहद ज़रूरी है। चलिए समझते हैं Ovary meaning in Hindi, इसमें सिस्ट कैसे बनती है, इसके लक्षण क्या हैं, और इलाज के क्या विकल्प उपलब्ध हैं।
पहले समझते हैं Ovary meaning in Hindi, तो ओवरी यानी अंडाशय महिला के शरीर में दो बादाम के आकार के अंग होते हैं जो गर्भाशय मतलब यूट्रस (Uterus) के दोनों तरफ स्थित होते हैं। हर ओवरी लगभग 3 से 5 सेंटीमीटर लंबी होती है।
हर महीने एक ओवरी एक परिपक्व अंडा (मैच्योर एग) रिलीज़ करती है, जिसे ओव्यूलेशन कहते हैं। यह अंडा फर्टिलाइज़ेशन के लिए फैलोपियन ट्यूब में जाता है। लड़की के जन्म के समय उसकी दोनों ओवरीज़ में लगभग 1 से 2 मिलियन एग्स होते हैं। प्यूबर्टी तक यह संख्या 3 से 4 लाख रह जाती है।
ओवरी एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे महत्वपूर्ण हॉर्मोन्स बनाती है। एस्ट्रोजन महिला की सेकेंडरी सेक्शुअल कैरेक्टरिस्टिक्स जैसे ब्रेस्ट डेवलपमेंट, बॉडी शेप के विकास के लिए ज़रूरी है। प्रोजेस्टेरोन मेंस्ट्रुअल साइकिल को रेगुलेट करता है और प्रेगनेंसी को बनाए रखने में मदद करता है।
स्वस्थ ओवरी नियमित पीरियड्स, सामान्य फर्टिलिटी, और हॉर्मोनल बैलेंस के लिए ज़रूरी हैं।
ओवेरियन सिस्ट यानी ओवरीज़ में तरल पदार्थ, खून, या टिशू से भरी एक थैली या गांठ का बन जाना। ये सिस्ट ओवरी की सतह पर या अंदर बन सकती हैं। कुछ सिस्ट बहुत छोटी होती हैं , जबकि कुछ 10 से 15 सेंटीमीटर या इससे भी बड़ी हो सकती हैं।
ज़्यादातर ओवेरियन सिस्ट सौम्य यानी बिनाइन (Benign) होती हैं मतलब इनसे कैंसर नहीं होता। कई सिस्ट बिना किसी इलाज के अपने आप ही 2 से 3 महीने में गायब हो जाती हैं। हालांकि, कुछ सिस्ट बढ़ती रहती हैं और आगे चलकर समस्या पैदा कर सकती हैं।
ओवेरियन सिस्ट कई प्रकार की होती हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दो कैटेगरी में बांटा जाता है:
ये सबसे कॉमन सिस्ट हैं जो नॉर्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान बनती हैं। ये आमतौर पर हानिरहित होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं।
ये सिस्ट नॉर्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल से जुड़ी नहीं होतीं और इनके इलाज की ज़रूरत हो सकती है।
ओवेरियन सिस्ट बनने के कई कारण हो सकते हैं।
अनियमित या असंतुलित हॉर्मोन्स की वजह से फंक्शनल सिस्ट बन सकती हैं। PCOS में भी हॉर्मोनल इम्बैलेंस मुख्य कारण है।
जब एंडोमेट्रियल टिशू ओवरी पर बढ़ता है, तो एंडोमेट्रियोमा बनती है।
अर्ली प्रेगनेंसी में कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट बन सकती है जो प्रेगनेंसी को सपोर्ट करती है।
गंभीर पेल्विक इंफेक्शन ओवरी में फैलकर सिस्ट बना सकता है।
अगर पहले सिस्ट हो चुकी है, तो दोबारा होने का खतरा बढ़ जाता है।
आकर में छोटी सिस्ट में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते लेकिन बड़ी या कॉम्प्लिकेटेड सिस्ट होने पर नीचे दिए लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
जब डॉक्टर को ओवेरियन सिस्ट का संदेह होता है, तो कई तरह की जांच की जा सकती हैं:
यह सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट है जो सिस्ट को देखने के लिए किया जाता है। ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVS) में योनि के रास्ते एक प्रोब डालकर ओवरी की क्लियर इमेज ली जाती है। इससे सिस्ट कितनी बड़ी है, कहां है, और इसमें क्या भरा है, पानी, खून, या सॉलिड टिशू, सब पता चल जाता है।
फर्टिलिटी हॉर्मोन्स जैसे एलएच, एफएसएच, और एएमएच की जांच से यह पता चलता है कि ओवरी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है। अगर डॉक्टर को कोई गंभीर समस्या का शक हो, तो CA-125 मार्कर टेस्ट भी किया जा सकता है।
कई बार प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट बन जाती है। इसलिए प्रेगनेंसी को रूल आउट करने के लिए यह टेस्ट किया जाता है।
जब अल्ट्रासाउंड से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती या सिस्ट की जांच के लिए टिशू सैंपल चाहिए, तब छोटा सा चीरा लगाकर कैमरा डालकर सीधे ओवरी को देखा जाता है।
ओवेरियन सिस्ट का इलाज कई बातों को ध्यान में रखकर तय किया जाता है जैसे कि सिस्ट कितनी बड़ी है, किस प्रकार की है, कौन से लक्षण हैं, महिला की उम्र क्या है, और क्या वह भविष्य में माँ बनना चाहती है।
जब सिस्ट छोटी हो यानी 5 सेंटीमीटर से कम और फंक्शनल टाइप की हो, तो डॉक्टर कुछ महीने इंतज़ार कर सकते हैं। इस दौरान हर 6 से 8 हफ्ते में अल्ट्रासाउंड करके देखा जाता है कि सिस्ट घट रही है या बढ़ रही है। अक्सर ये सिस्ट बिना किसी ट्रीटमेंट के खुद ही गायब हो जाती हैं।
हॉर्मोनल थेरेपी कुछ केसेस में मददगार होती है। यह मौजूदा सिस्ट को तो छोटा नहीं करती, लेकिन भविष्य में नई सिस्ट बनने से रोकने में मदद करती है। PCOS जैसी स्थितियों में लाइफस्टाइल में बदलाव (वजन कम करना, व्यायाम, संतुलित आहार) के साथ हॉर्मोनल दवाएं दी जाती हैं।
जब सिस्ट का साइज़ बड़ा हो, तेज़ी से बढ़ रही हो, गंभीर लक्षण दे रही हो, या प्रेगनेंसी में रुकावट बन रही हो, तब सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है। तीन मुख्य सर्जिकल विकल्प हैं:
लैप्रोस्कोपी में सिर्फ सिस्ट को हटाया जाता है जिससे ओवरी को बचाया जा सकता है। पेट में 2 - 3 छोटे चीरे लगाकर कैमरा और इंस्ट्रूमेंट्स डाले जाते हैं। यह ऑपरेशन उन महिलाओं के लिए बेस्ट है जो आगे माँ बनना चाहती हैं। इसमें रिकवरी भी जल्दी होती है और 2-3 दिन में घर जा सकते हैं।
जब सिस्ट बहुत बड़ी हो या उसकी प्रकृति के बारे में शक हो, तब पेट में बड़ा चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है। इसमें रिकवरी में थोड़ा ज़्यादा समय लगता है।
बहुत गंभीर मामलों में जब ओवरी बुरी तरह डैमेज हो या कैंसर की आशंका हो, तब पूरी ओवरी निकालनी पड़ सकती है।
ओवरी यानी अंडाशय महिला की फर्टिलिटी कैपेसिटी का केंद्र है। Ovary meaning in Hindi में समझें तो यह वह अंग है जो हर महीने एग मैच्योर करता है और शरीर के लिए ज़रूरी हॉर्मोन्स का उत्पादन करता है। इस महत्वपूर्ण अंग में बनने वाली सिस्ट ज़्यादातर एक सामान्य स्थिति है। अधिकांश सिस्ट खतरनाक नहीं होतीं और कुछ हफ्तों या महीनों में अपने आप समाप्त हो जाती हैं।
अगर सिस्ट ने फर्टिलिटी को प्रभावित किया है, तो IVF जैसी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीकें आपके माँ बनने के सपने को साकार कर सकती हैं।
पेट के निचले हिस्से में दर्द, मासिक धर्म में अनियमितता, पेट में सूजन या फूलापन, बार-बार यूरिन पास करने की ज़रूरत, और इंटरकोर्स के समय असुविधा प्रमुख संकेत हैं। हालांकि, छोटी सिस्ट में कोई संकेत नहीं होते।
छोटी फंक्शनल सिस्ट आमतौर पर गर्भधारण में बाधा नहीं डालतीं। लेकिन एंडोमेट्रियोमा और PCOS जैसी स्थितियों में कंसीव करना मुश्किल हो सकता है। उचित ट्रीटमेंट के बाद प्रेगनेंसी संभव है।
सामान्यतः जब सिस्ट का आकार 5 सेंटीमीटर से अधिक हो, तेज़ी से बढ़ रही हो, या चॉकलेट सिस्ट (एंडोमेट्रियोमा) हो, तब सर्जरी की सलाह दी जाती है।
बड़ी सिस्ट या चॉकलेट सिस्ट को IVF शुरू करने से पहले हटवाना उचित होता है। छोटी सिस्ट से आमतौर पर IVF की सफलता पर असर नहीं पड़ता।
उचित वजन बनाए रखें, पौष्टिक भोजन खाएं, रोज़ाना व्यायाम करें, तनाव को मैनेज करें, और हर साल महिला रोग विशेषज्ञ से जांच करवाएं।