ओवरी सिस्ट क्या है? क्या हैं इसके कारण, लक्षण और उपचार (Ovary Cyst in Hindi)

Last updated: December 26, 2025

Overview

ओवरी यानी अंडाशय महिला के रिप्रोडक्टिव सिस्टम का मुख्य हिस्सा है। इनमें कभी-कभी सिस्ट यानी गांठें बन जाती हैं जिन्हें ओवरी सिस्ट या ओवेरियन सिस्ट कहते हैं। ज़्यादातर ओवरी सिस्ट हानिरहित होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं। अगर आप प्रेगनेंसी की प्लानिंग कर रही हैं, तो ओवरी के स्वास्थ्य और सिस्ट के बारे में जानना बेहद ज़रूरी है। चलिए समझते हैं Ovary meaning in Hindi, इसमें सिस्ट कैसे बनती है, इसके लक्षण क्या हैं, और इलाज के क्या विकल्प उपलब्ध हैं।

ओवरी क्या होती है? (Ovary Meaning in Hindi)

पहले समझते हैं Ovary meaning in Hindi, तो ओवरी यानी अंडाशय महिला के शरीर में दो बादाम के आकार के अंग होते हैं जो गर्भाशय मतलब यूट्रस (Uterus) के दोनों तरफ स्थित होते हैं। हर ओवरी लगभग 3 से 5 सेंटीमीटर लंबी होती है।

ओवरी के मुख्य कार्य:

एग प्रोडक्शन:

हर महीने एक ओवरी एक परिपक्व अंडा (मैच्योर एग) रिलीज़ करती है, जिसे ओव्यूलेशन कहते हैं। यह अंडा फर्टिलाइज़ेशन के लिए फैलोपियन ट्यूब में जाता है। लड़की के जन्म के समय उसकी दोनों ओवरीज़ में लगभग 1 से 2 मिलियन एग्स होते हैं। प्यूबर्टी तक यह संख्या 3 से 4 लाख रह जाती है।

हॉर्मोन प्रोडक्शन:

ओवरी एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे महत्वपूर्ण हॉर्मोन्स बनाती है। एस्ट्रोजन महिला की सेकेंडरी सेक्शुअल कैरेक्टरिस्टिक्स जैसे ब्रेस्ट डेवलपमेंट, बॉडी शेप के विकास के लिए ज़रूरी है। प्रोजेस्टेरोन मेंस्ट्रुअल साइकिल को रेगुलेट करता है और प्रेगनेंसी को बनाए रखने में मदद करता है।

रिप्रोडक्टिव हेल्थ:

स्वस्थ ओवरी नियमित पीरियड्स, सामान्य फर्टिलिटी, और हॉर्मोनल बैलेंस के लिए ज़रूरी हैं।

ओवरी सिस्ट क्या होती है? (Ovary Cyst in Hindi)

ओवेरियन सिस्ट यानी ओवरीज़ में तरल पदार्थ, खून, या टिशू से भरी एक थैली या गांठ का बन जाना। ये सिस्ट ओवरी की सतह पर या अंदर बन सकती हैं। कुछ सिस्ट बहुत छोटी होती हैं , जबकि कुछ 10 से 15 सेंटीमीटर या इससे भी बड़ी हो सकती हैं।

ज़्यादातर ओवेरियन सिस्ट सौम्य यानी बिनाइन (Benign) होती हैं मतलब इनसे कैंसर नहीं होता। कई सिस्ट बिना किसी इलाज के अपने आप ही 2 से 3 महीने में गायब हो जाती हैं। हालांकि, कुछ सिस्ट बढ़ती रहती हैं और आगे चलकर समस्या पैदा कर सकती हैं।

ओवेरियन सिस्ट के प्रकार (Types of Ovarian Cysts)

ओवेरियन सिस्ट कई प्रकार की होती हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दो कैटेगरी में बांटा जाता है:

फंक्शनल सिस्ट

ये सबसे कॉमन सिस्ट हैं जो नॉर्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान बनती हैं। ये आमतौर पर हानिरहित होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं।

  • फॉलिक्युलर सिस्ट (Follicular Cyst): हर महीने ओवरी में एक फॉलिकल बनता है जिसमें एग होता है। जब यह फॉलिकल ठीक से नहीं फटता और एग रिलीज़ नहीं होता, तो यह बढ़कर सिस्ट बन जाता है। यह आमतौर पर 1-3 महीने में अपने आप गायब हो जाती है।
  • कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट (Corpus Luteum Cyst): ओव्यूलेशन के बाद जो फॉलिकल खाली रह जाता है, वह कॉर्पस ल्यूटियम बन जाता है। अगर इसमें तरल या खून भर जाए, तो यह सिस्ट बन जाती है। यह भी अक्सर अपने आप ठीक हो जाती है।

पैथोलॉजिकल सिस्ट

ये सिस्ट नॉर्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल से जुड़ी नहीं होतीं और इनके इलाज की ज़रूरत हो सकती है।

  • डर्मॉइड सिस्ट (Dermoid Cyst or Teratoma): यह जन्मजात होती है और इसमें बाल, दांत, त्वचा, या अन्य टिशू हो सकते हैं। यह धीरे-धीरे बढ़ती है और सर्जरी से निकालनी पड़ती है।
  • एंडोमेट्रियोमा (Endometrioma or Chocolate Cyst): यह एंडोमेट्रियोसिस की वजह से बनती है। इसमें पुराना खून भरा होता है जो चॉकलेट जैसा गाढ़ा और भूरा होता है। यह फर्टिलिटी को गंभीर रूप से प्रभावित करती है और इसे हटाना ज़रूरी होता है।
  • सिस्टएडेनोमा (Cystadenoma): यह ओवरी की सतह की कोशिकाओं से बनती है। दो प्रकार होती हैं - सीरस सिस्टएडेनोमा (पानी जैसे तरल से भरी) और म्यूसिनस सिस्टएडेनोमा (गाढ़े जेली जैसे पदार्थ से भरी)। ये बहुत बड़ी हो सकती हैं।
  • पॉलीसिस्टिक ओवरीज़ (Polycystic Ovaries): PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) में ओवरी में कई छोटी-छोटी सिस्ट होती हैं। यह हॉर्मोनल डिसऑर्डर है जो फर्टिलिटी को प्रभावित करता है।

ओवेरियन सिस्ट के कारण

ओवेरियन सिस्ट बनने के कई कारण हो सकते हैं।

हॉर्मोनल असंतुलन:

अनियमित या असंतुलित हॉर्मोन्स की वजह से फंक्शनल सिस्ट बन सकती हैं। PCOS में भी हॉर्मोनल इम्बैलेंस मुख्य कारण है।

एंडोमेट्रियोसिस:

जब एंडोमेट्रियल टिशू ओवरी पर बढ़ता है, तो एंडोमेट्रियोमा बनती है।

प्रेगनेंसी:

अर्ली प्रेगनेंसी में कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट बन सकती है जो प्रेगनेंसी को सपोर्ट करती है।

पेल्विक इंफेक्शन:

गंभीर पेल्विक इंफेक्शन ओवरी में फैलकर सिस्ट बना सकता है।

पिछली ओवेरियन सिस्ट:

अगर पहले सिस्ट हो चुकी है, तो दोबारा होने का खतरा बढ़ जाता है।

ओवेरियन सिस्ट के लक्षण (Ovarian Cyst Symptoms in Hindi)

आकर में छोटी सिस्ट में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते लेकिन बड़ी या कॉम्प्लिकेटेड सिस्ट होने पर नीचे दिए लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • पेल्विक यानी पेड़ू का दर्द: पेट के निचले हिस्से में एक तरफ या दोनों तरफ दर्द। दर्द हल्का, तेज़, लगातार या कभी-कभी हो सकता है। ओव्यूलेशन या पीरियड्स के समय दर्द बढ़ सकता है।
  • पेट में भारीपन या दबाव: ऐसा महसूस होना कि पेट में कुछ भारी है या फूला हुआ है।
  • अनियमित पीरियड्स: सिस्ट हॉर्मोन को प्रभावित करती है जिससे पीरियड्स अनियमित, भारी, या हल्के हो सकते हैं। कभी-कभी पीरियड्स मिस हो सकते हैं।
  • पेनफुल सेक्स (Dyspareunia): शारीरिक संबंध बनाते समय दर्द या असुविधा।
  • बार-बार पेशाब आना या पेशाब में दिक्कत: अगर सिस्ट ब्लैडर पर दबाव बना रही हो।
  • कब्ज़ या मल त्याग में दिक्कत: अगर सिस्ट आंतों को दबा रही हो तो मोशन आने में परेशानी होती है।
  • पेट फूलना: बड़ी सिस्ट से पेट फूला हुआ दिख सकता है।
  • मतली और उल्टी: खासकर अगर सिस्ट ट्विस्ट हो जाए (ओवेरियन टॉर्शन) या फट जाए (रप्चर)।
  • पीठ दर्द या जांघ में दर्द: बड़ी सिस्ट नसों को दबाकर पीठ या पैर में दर्द कर सकती है।

ओवेरियन सिस्ट का डायग्नोसिस

जब डॉक्टर को ओवेरियन सिस्ट का संदेह होता है, तो कई तरह की जांच की जा सकती हैं:

फिजिकल एग्ज़ामिनेशन:

सबसे पहले डॉक्टर पेल्विक एरिया की जांच करते हैं। इसमें ओवरी का साइज़ बढ़ा हुआ या किसी तरह की असामान्यता महसूस हो सकती है।

अल्ट्रासाउंड स्कैन:

यह सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट है जो सिस्ट को देखने के लिए किया जाता है। ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVS) में योनि के रास्ते एक प्रोब डालकर ओवरी की क्लियर इमेज ली जाती है। इससे सिस्ट कितनी बड़ी है, कहां है, और इसमें क्या भरा है, पानी, खून, या सॉलिड टिशू, सब पता चल जाता है।

खून की जांच:

फर्टिलिटी हॉर्मोन्स जैसे एलएच, एफएसएच, और एएमएच की जांच से यह पता चलता है कि ओवरी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है। अगर डॉक्टर को कोई गंभीर समस्या का शक हो, तो CA-125 मार्कर टेस्ट भी किया जा सकता है।

यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट:

कई बार प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट बन जाती है। इसलिए प्रेगनेंसी को रूल आउट करने के लिए यह टेस्ट किया जाता है।

डायग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी:

जब अल्ट्रासाउंड से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती या सिस्ट की जांच के लिए टिशू सैंपल चाहिए, तब छोटा सा चीरा लगाकर कैमरा डालकर सीधे ओवरी को देखा जाता है।

ओवेरियन सिस्ट का इलाज (Ovarian Cyst Treatment in Hindi)

ओवेरियन सिस्ट का इलाज कई बातों को ध्यान में रखकर तय किया जाता है जैसे कि सिस्ट कितनी बड़ी है, किस प्रकार की है, कौन से लक्षण हैं, महिला की उम्र क्या है, और क्या वह भविष्य में माँ बनना चाहती है।

वेट एंड वॉच अप्रोच (Wait and Watch)

जब सिस्ट छोटी हो यानी 5 सेंटीमीटर से कम और फंक्शनल टाइप की हो, तो डॉक्टर कुछ महीने इंतज़ार कर सकते हैं। इस दौरान हर 6 से 8 हफ्ते में अल्ट्रासाउंड करके देखा जाता है कि सिस्ट घट रही है या बढ़ रही है। अक्सर ये सिस्ट बिना किसी ट्रीटमेंट के खुद ही गायब हो जाती हैं।

दवाओं से ट्रीटमेंट

हॉर्मोनल थेरेपी कुछ केसेस में मददगार होती है। यह मौजूदा सिस्ट को तो छोटा नहीं करती, लेकिन भविष्य में नई सिस्ट बनने से रोकने में मदद करती है। PCOS जैसी स्थितियों में लाइफस्टाइल में बदलाव (वजन कम करना, व्यायाम, संतुलित आहार) के साथ हॉर्मोनल दवाएं दी जाती हैं।

सर्जिकल ऑप्शन्स

जब सिस्ट का साइज़ बड़ा हो, तेज़ी से बढ़ रही हो, गंभीर लक्षण दे रही हो, या प्रेगनेंसी में रुकावट बन रही हो, तब सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है। तीन मुख्य सर्जिकल विकल्प हैं:

सिस्टेक्टॉमी (Cystectomy) -

लैप्रोस्कोपी में सिर्फ सिस्ट को हटाया जाता है जिससे ओवरी को बचाया जा सकता है। पेट में 2 - 3 छोटे चीरे लगाकर कैमरा और इंस्ट्रूमेंट्स डाले जाते हैं। यह ऑपरेशन उन महिलाओं के लिए बेस्ट है जो आगे माँ बनना चाहती हैं। इसमें रिकवरी भी जल्दी होती है और 2-3 दिन में घर जा सकते हैं।

ओपन सर्जरी यानी लैपरोटॉमी:

जब सिस्ट बहुत बड़ी हो या उसकी प्रकृति के बारे में शक हो, तब पेट में बड़ा चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है। इसमें रिकवरी में थोड़ा ज़्यादा समय लगता है।

अंडाशय को हटाना यानी ओवेरेक्टॉमी:

बहुत गंभीर मामलों में जब ओवरी बुरी तरह डैमेज हो या कैंसर की आशंका हो, तब पूरी ओवरी निकालनी पड़ सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

ओवरी यानी अंडाशय महिला की फर्टिलिटी कैपेसिटी का केंद्र है। Ovary meaning in Hindi में समझें तो यह वह अंग है जो हर महीने एग मैच्योर करता है और शरीर के लिए ज़रूरी हॉर्मोन्स का उत्पादन करता है। इस महत्वपूर्ण अंग में बनने वाली सिस्ट ज़्यादातर एक सामान्य स्थिति है। अधिकांश सिस्ट खतरनाक नहीं होतीं और कुछ हफ्तों या महीनों में अपने आप समाप्त हो जाती हैं।

अगर सिस्ट ने फर्टिलिटी को प्रभावित किया है, तो IVF जैसी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीकें आपके माँ बनने के सपने को साकार कर सकती हैं।

ओवेरियन सिस्ट के बारे में आम सवाल (FAQs)

सिस्ट के मुख्य संकेत क्या होते हैं?

 

पेट के निचले हिस्से में दर्द, मासिक धर्म में अनियमितता, पेट में सूजन या फूलापन, बार-बार यूरिन पास करने की ज़रूरत, और इंटरकोर्स के समय असुविधा प्रमुख संकेत हैं। हालांकि, छोटी सिस्ट में कोई संकेत नहीं होते।

सिस्ट होने पर क्या गर्भधारण हो सकता है?

 

छोटी फंक्शनल सिस्ट आमतौर पर गर्भधारण में बाधा नहीं डालतीं। लेकिन एंडोमेट्रियोमा और PCOS जैसी स्थितियों में कंसीव करना मुश्किल हो सकता है। उचित ट्रीटमेंट के बाद प्रेगनेंसी संभव है।

कितनी बड़ी सिस्ट के लिए ऑपरेशन ज़रूरी होता है?

 

सामान्यतः जब सिस्ट का आकार 5 सेंटीमीटर से अधिक हो, तेज़ी से बढ़ रही हो, या चॉकलेट सिस्ट (एंडोमेट्रियोमा) हो, तब सर्जरी की सलाह दी जाती है।

क्या सिस्ट IVF ट्रीटमेंट में दिक्कत करती है?

 

बड़ी सिस्ट या चॉकलेट सिस्ट को IVF शुरू करने से पहले हटवाना उचित होता है। छोटी सिस्ट से आमतौर पर IVF की सफलता पर असर नहीं पड़ता।

सिस्ट बनने से कैसे बचा जा सकता है?

 

उचित वजन बनाए रखें, पौष्टिक भोजन खाएं, रोज़ाना व्यायाम करें, तनाव को मैनेज करें, और हर साल महिला रोग विशेषज्ञ से जांच करवाएं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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