‘ओव्यूलेशन 14वें दिन होता है’ यह वाक्य आपने ovulation kab hota hai के जवाब में सुना होगा या शायद हर फर्टिलिटी ब्लॉग, ऐप और व्हाट्सएप फॉरवर्ड में पढ़ा भी होगा। इसी भरोसे आपने हर महीने पीरियड के 12वें से 16वें दिन तक संबंध बनाए, लेकिन प्रेगनेंसी नहीं हुई। दरअसल समस्या आपकी कोशिश नहीं है, बल्कि यह ब्लैंकेट फॉर्मूला ही गलत है। मेडिकल साइंस के अनुसार 14वें दिन वाला नियम सिर्फ लगभग 30% महिलाओं पर लागू होता है, जिनकी मेंस्ट्रुअल साइकिल 28 दिन की होती है । बाकी 70% महिलाओं में ओव्युलेशन या तो इससे पहले होता है या काफी बाद में। एक बड़ी रिसर्च में लगभग 700 मेंस्ट्रुअल साइकिल का अध्ययन किया गया और पाया गया कि ज्यादातर महिलाओं की फर्टाइल विंडो (Fertile Window) उन दिनों में नहीं आती जो किताबों में बताए जाते हैं। जिन दिनों को सेफ समझा जाता है, उन्हीं दिनों कई महिलाएं असल में फर्टाइल होती हैं। यह आर्टिकल उन महिलाओं के लिए है जो सच-मुच जानना चाहती हैं कि ovulation kab hota hai, अपनी फर्टाइल विंडो कैसे पहचानें और कब संबंध बनायें जिससे प्रेगनेंसी की संभावना सबसे ज़्यादा हो।
यह फॉर्मूला एक पुरानी धारणा पर आधारित है जिसके अनुसार हर महिला का मासिक धर्म चक्र यानी मेंस्ट्रुअल साइकिल 28 दिन की होती है और ओव्यूलेशन ठीक बीच में होता है। लेकिन एडवांस रिसर्च के अनुसार सिर्फ 16% महिलाओं की साइकिल ठीक 28 दिन की होती है। बाकी में यह 21 से 35 दिन तक कुछ भी हो सकती है, और एक ही महिला में हर महीने यह साइकिल बदल भी सकती है।
मेंस्ट्रुअल साइकिल के दो हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा, यानी पीरियड के पहले दिन से ओव्यूलेशन तक का समय फॉलिक्युलर फेज़ (Follicular Phase) कहते हैं । यह हिस्सा बहुत अनिश्चित होता है, किसी महिला में 10 दिन का, किसी में 20 दिन का। एक स्टडी में 6 लाख से ज्यादा महिलाओं की मेंस्ट्रुअल साइकिल का डेटा देखा गया और औसत फॉलिक्युलर फेज़ 16.9 दिन निकला, न कि 14 दिन का।
दूसरा हिस्सा ल्यूटियल फेज़ (Luteal Phase) कहलाता है जो ओव्यूलेशन से अगले पीरियड तक होता है। यह फेज़ लगभग 12-14 दिन का होता है और ज्यादा स्थिर रहता है। इसीलिए ओव्यूलेशन का अंदाज़ा लगाने का सही तरीका है अगले पीरियड से पीछे गिनना, न कि पिछले पीरियड से आगे।
ओव्यूलेशन किसी तय तारीख़ पर नहीं होता, बल्कि तब होता है जब शरीर के हार्मोन सही क्रम में काम करते हैं। यही वजह है कि दो अलग महिलाओं में ही नहीं, बल्कि एक ही महिला में भी हर महीने ओव्यूलेशन का दिन थोड़ा आगे पीछे हो सकता है।
कुछ महिलाओं में यह पीरियड के तुरंत बाद हो जाता है, तो कुछ में काफ़ी देर से। इसलिए यह मान लेना कि हर महिला एक ही पैटर्न फॉलो करेगी, वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं है। यही कारण है कि ओव्यूलेशन को पता करने के लिए सिर्फ कैलेंडर नहीं, बल्कि शरीर के संकेतों पर ध्यान देना ज़रूरी होता है।
Fertile window वह समय होता है जब संबंध बनाने से प्रेगनेंसी हो सकती है। यह सिर्फ ओव्यूलेशन का ही दिन नहीं होता, बल्कि उसके आसपास के कुछ दिन भी होते हैं।
स्पर्म शरीर के अंदर 3 से 5 दिन तक जीवित रह सकता है, जबकि एग सिर्फ 12 से 24 घंटे जिन्दा रहता है। इसलिए अगर स्पर्म पहले से मौजूद है और उसी दौरान एग रिलीज़ होता है, तो गर्भधारण संभव हो जाता है।
इसीलिए ओव्यूलेशन के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले संबंध बनाना ज़्यादा मायने रखता है। Fertile window को समझना, केवल ओव्यूलेशन का दिन ढूंढने से ज़्यादा अहम है।
| साइकिल की लंबाई | ओव्यूलेशन का अनुमानित दिन | Fertile Window |
|---|---|---|
| 26 दिन | Day 12 (26 - 14 = 12) | Day 7 से 12 |
| 28 दिन | Day 14 (28 - 14 = 14) | Day 9 से 14 |
| 30 दिन | Day 16 (30 - 14 = 16) | Day 11 से 16 |
| 32 दिन | Day 18 (32 - 14 = 18) | Day 13 से 18 |
| 35 दिन | Day 21 (35 - 14 = 21) | Day 16 से 21 |
आपका शरीर ओव्यूलेशन से पहले कई संकेत देता है। इन्हें पहचानना सीखें तो आपको किसी ऐप या किट की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
हर तरीका अपने आप में परफेक्ट नहीं होता। OPK यूरिन में हार्मोन के बदलाव को पकड़ता है, लेकिन यह ओव्यूलेशन से ठीक पहले का संकेत देता है, न कि पूरी फर्टाइल विंडो का ।
सर्वाइकल म्यूकस शरीर का रियल-टाइम संकेत है, लेकिन इसे समझने में थोड़ा समय लगता है। BBT यानी बेसल बॉडी टेम्परेचर (Basal Body Temperature) ओव्यूलेशन के बाद बढ़ता है, यानी यह ओव्यूलेशन की पुष्टि करता है, पहले से नहीं बताता।
| तरीका | कैसे काम करता है | सटीकता | फायदा/नुकसान |
|---|---|---|---|
| OPK Kit | यूरिन में LH surge को पकड़ता है | 90% | आसान है, पर PCOS में कभी-कभी गलत हो सकता है। |
| म्यूकस ट्रैक | डिस्चार्ज में बदलाव देखना | 70-80% | मुफ्त है, पर इसे समझने में समय लगता है। |
| BBT | ओव्यूलेशन के बाद तापमान बढ़ना | 75-80% | सस्ता है, पर यह ओव्यूलेशन होने के बाद बताता है। |
अगर पीरियड्स हर महीने एक जैसे नहीं आते यानी कभी 25 दिन, कभी 40 दिन के अंतर पर आते हैं, तो कैलेंडर के हिसाब से चलना अक्सर बेकार साबित होता है। ऐसे मामलों में शरीर के इशारे ज़्यादा भरोसेमंद होते हैं।
सबसे आम गलती यह है कि कपल सिर्फ ओव्यूलेशन वाले दिन संबंध बनाते हैं। अक्सर तब तक fertile window का सबसे अच्छा समय निकल चुका होता है।
बेहतर तरीका यह है कि फर्टाइल विंडो के दौरान हर 1 से 2 दिन में संबंध बनाए जाएँ। इससे स्पर्म की क्वालिटी भी बनी रहती है और सही समय पर एग के मिलने की संभावना भी बढ़ती है
IVF और IUI में ओव्यूलेशन की टाइमिंग का महत्व कहीं ज़्यादा होता है, क्योंकि यहाँ एग और स्पर्म को लैब में ;मिलाया जाता है। यहाँ कुछ घंटों का फर्क भी रिज़ल्ट को प्रभावित कर सकता है। इसीलिए IVF में केवल घरेलू किट पर निर्भर नहीं रहा जाता बल्कि अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट के ज़रिए यह तय किया जाता है कि एग कब सबसे सही स्टेज पर है।
ओव्यूलेशन किसी तय तारीख़ पर नहीं होता, और 14वें दिन वाला फॉर्मूला ज़्यादातर महिलाओं पर लागू नहीं होता। अपने शरीर के संकेत समझना, फर्टाइल विंडो को पहचानना और सही समय पर संबंध बनाना यही प्रेगनेंसी की संभावना बढ़ाने का व्यावहारिक तरीका है। Ovulation kab hota hai का जवाब हर महिला के लिए अलग है और यही समझना सबसे जरूरी है। अगर 35 से कम उम्र है और 1 साल से कोशिश कर रही हैं या 35 से ज्यादा है और 6 महीने हो गए हैं, तो डॉक्टर से मिलें।
यह आपकी मेसेंट्रुअल साइकिल पर निर्भर करता है। अगले पीरियड से 14 दिन पहले ओव्यूलेशन होता है।
नॉर्मली हाँ, लेकिन कभी-कभी बिना ओव्यूलेशन के भी पीरियड आ सकता है। स्ट्रेस, बीमारी, या PCOS में ऐसा हो सकता है।
अपने अनुमानित ओव्यूलेशन से 3-4 दिन पहले से। 28 दिन की साइकिल है तो Day 10-11 से शुरू करें।
पानी ज्यादा पिएं और उंगली से सर्विक्स के पास चेक करें। अगर फिर भी नहीं दिखता, तो OPK पर भरोसा करें।
बहुत मुश्किल है। एग सिर्फ 12 से 24 घंटे जीवित रहता है। इसीलिए ओव्यूलेशन से पहले संबंध बनाना ज्यादा जरूरी है।
सबको नहीं। सिर्फ 20% महिलाओं को ओव्यूलेशन दर्द होता है।