ओव्यूलेशन क्या होता है? जानें सही समय और फर्टिलिटी पर इसका असर

Last updated: January 16, 2026

Overview

माँ बनने का सफर एक महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत अनुभव होता है, लेकिन इस सफर की शुरुआत शरीर के अंदर होने वाली एक बहुत ही बारीक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया से होती है। जब कोई कपल प्रेगनेंसी (Pregnancy) प्लान करता है, तो अक्सर तारीखों और समय को लेकर उलझन रहती है। अक्सर महिलाएं इंटरनेट पर सर्च करती हैं कि आखिर ovulation kya hota hai? क्या यह सिर्फ पीरियड्स (Periods) से जुड़ी कोई बात है या इसका संबंध सीधे गर्भधारण (Conception) से है? असल में, ओव्यूलेशन वह समय है जब आपके माँ बनने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। यदि आप अपने इन खास दिनों को पहचान लें, तो कंसीव (Conceive) करना काफी आसान हो जाता है।

ओव्यूलेशन का मतलब (Ovulation meaning in Hindi)

ओव्यूलेशन महिला के मासिक धर्म चक्र यानी मेंस्ट्रुअल साइकिल (Menstrual Cycle) का वह हिस्सा है जब अंडाशय (Ovary) से एक मैच्योर (Mature) अंडा यानी एग (Egg) बाहर निकलता है। जब कोई महिला पूछती है कि ovulation kya hota hai, तो इसे प्रेगनेंसी का पहला स्टेप माना जा सकता है।

हर महीने, महिला के शरीर में हार्मोन्स के बदलाव की वजह से ओवरी के अंदर कुछ एग्स विकसित होना शुरू होते हैं। इनमें से जो एग सबसे ज्यादा हेल्दी और मैच्योर होता है, वह ओवरी से बाहर निकलकर फैलोपियन ट्यूब (Fallopian Tube) में आ जाता है। यहाँ यह एग लगभग 12 से 24 घंटे तक जीवित रहता है और स्पर्म (Sperm) का इंतजार करता है। यदि इस दौरान एग और स्पर्म मिल जाते हैं, तो फर्टिलाइजेशन (Fertilization) हो जाता है और प्रेगनेंसी की शुरुआत होती है।

ओव्यूलेशन की प्रक्रिया शरीर में कैसे काम करती है?

ओव्यूलेशन की प्रक्रिया पूरी तरह से आपके दिमाग और ओवरी के बीच होने वाले हार्मोनल संवाद (Communication) पर टिकी है। इसे समझने के लिए हमें मुख्य रूप से दो हार्मोन्स पर ध्यान देना होगा।

  • एफएसएच (FSH - Follicle Stimulating Hormone): यह हार्मोन पीरियड्स के शुरुआती दिनों में एग्स को बढ़ने में मदद करता है।
  • एलएच (LH - Luteinizing Hormone): जब एग पूरी तरह तैयार हो जाता है, तो शरीर में एलएच (LH) का लेवल अचानक बढ़ जाता है। इसे 'एलएच सर्ज' (LH Surge) कहते हैं। इसके ठीक 24 से 36 घंटे बाद ओव्यूलेशन होता है।

एक सामान्य 28 दिनों की साइकिल में, ओव्यूलेशन आमतौर पर 14वें दिन के आसपास होता है। लेकिन हर महिला की साइकिल अलग होती है, इसलिए ओव्यूलेशन का समय भी बदल सकता है।

ओव्यूलेशन को कैसे पहचानें?

आपका शरीर ओव्यूलेशन के समय कई संकेत देता है। अगर आप इन पर ध्यान दें, तो आप बिना किसी टेस्ट के जान सकती हैं कि ovulation kya hota hai और यह कब हो रहा है।

  • सर्वाइकल म्यूकस (Cervical Mucus) में बदलाव: ओव्यूलेशन के करीब आते ही आपका डिस्चार्ज (Discharge) कच्चे एग की सफेदी जैसा साफ, गीला और खिंचने वाला (Stretchy) हो जाता है। यह स्पर्म को एग तक पहुँचने में मदद करता है।
  • शरीर के तापमान में बढ़ोतरी: ओव्यूलेशन के ठीक बाद शरीर का बेसल बॉडी टेम्परेचर (Basal Body Temperature) थोड़ा बढ़ जाता है। इसे एक विशेष थर्मामीटर से सुबह उठते ही नापा जा सकता है।
  • पेट के एक तरफ हल्का दर्द: कुछ महिलाओं को ओव्यूलेशन के दौरान पेट के निचले हिस्से में एक तरफ हल्का दर्द या मरोड़ महसूस होती है, जिसे 'मिट्ठलश्मर्ज' (Mittelschmerz) कहते हैं।
  • ब्रेस्ट में भारीपन: हार्मोनल बदलाव की वजह से ब्रेस्ट में हल्का दर्द या संवेदनशीलता (Tenderness) महसूस हो सकती है।
  • सेक्स की इच्छा बढ़ना: प्रकृति के अनुसार, ओव्यूलेशन के समय महिलाओं में लिबिडो (Libido) यानी सेक्स की इच्छा बढ़ जाती है।

फर्टाइल विंडो (Fertile Window) क्या है और यह क्यों जरूरी है?

प्रेग्नेंसी के लिए केवल ओव्यूलेशन का दिन ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के दिन भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसे 'फर्टाइल विंडो' कहा जाता है। चूंकि स्पर्म महिला के शरीर में 5 दिनों तक जीवित रह सकता है और एग केवल 12-24 घंटे, इसलिए ओव्यूलेशन से 2-3 दिन पहले संबंध बनाना सबसे ज्यादा असरदार होता है।

यदि आप जानती हैं कि ovulation kya hota hai, तो आप अपनी फर्टाइल विंडो को आसानी से कैलकुलेट (Calculate) कर सकती हैं। आमतौर पर ओव्यूलेशन का दिन और उससे पहले के 5 दिन आपके सबसे फर्टाइल दिन होते हैं।

ओव्यूलेशन ट्रैक (Track) करने के तरीके

आजकल ओव्यूलेशन को ट्रैक करने के लिए कई आधुनिक और भरोसेमंद तरीके उपलब्ध हैं।

  • ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट (OPK): यह प्रेग्नेंसी टेस्ट किट जैसी ही होती है। यह आपके यूरिन (Urine) में एलएच (LH) हार्मोन के बढ़े हुए स्तर को पहचानती है।
  • मोबाइल ऐप्स: कई फर्टिलिटी ऐप्स आपके पिछले पीरियड्स के डेटा के आधार पर ओव्यूलेशन की तारीख का अंदाजा लगाते हैं।
  • फॉलिकुलर स्टडी (Follicular Study): यह सबसे सटीक तरीका है। इसमें आईवीएफ क्लिनिक (IVF Clinic) में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) के जरिए देखते हैं कि एग्स का साइज कितना बढ़ा है और वे कब रिलीज होने वाले हैं।

फर्टाइल विंडो (Fertile Window) क्या है और यह क्यों जरूरी है?

प्रेग्नेंसी के लिए केवल ओव्यूलेशन का दिन ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के दिन भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसे 'फर्टाइल विंडो' कहा जाता है। चूंकि स्पर्म महिला के शरीर में 5 दिनों तक जीवित रह सकता है और एग केवल 12-24 घंटे, इसलिए ओव्यूलेशन से 2-3 दिन पहले संबंध बनाना सबसे ज्यादा असरदार होता है।

यदि आप जानती हैं कि ovulation kya hota hai, तो आप अपनी फर्टाइल विंडो को आसानी से कैलकुलेट (Calculate) कर सकती हैं। आमतौर पर ओव्यूलेशन का दिन और उससे पहले के 5 दिन आपके सबसे फर्टाइल दिन होते हैं।

ओव्यूलेशन ट्रैक (Track) करने के तरीके

आजकल ओव्यूलेशन को ट्रैक करने के लिए कई आधुनिक और भरोसेमंद तरीके उपलब्ध हैं।

  • ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट (OPK): यह प्रेग्नेंसी टेस्ट किट जैसी ही होती है। यह आपके यूरिन (Urine) में एलएच (LH) हार्मोन के बढ़े हुए स्तर को पहचानती है।
  • मोबाइल ऐप्स: कई फर्टिलिटी ऐप्स आपके पिछले पीरियड्स के डेटा के आधार पर ओव्यूलेशन की तारीख का अंदाजा लगाते हैं।
  • फॉलिकुलर स्टडी (Follicular Study): यह सबसे सटीक तरीका है। इसमें आईवीएफ क्लिनिक (IVF Clinic) में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) के जरिए देखते हैं कि एग्स का साइज कितना बढ़ा है और वे कब रिलीज होने वाले हैं।

डाइट और लाइफस्टाइल का ओव्यूलेशन पर असर

आपके खान-पान का सीधा संबंध आपके एग्स की हैल्थ से है। ओव्यूलेशन को बेहतर बनाने के लिए अपनी डाइट में ये बदलाव करें।

  • एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidants): रंग-बिरंगे फल और सब्जियां एग्स को डैमेज (Damage) होने से बचाती हैं।
  • हेल्दी फैट्स: अखरोट, फ्लैक्स सीड्स और ओमेगा-3 युक्त खाना हार्मोन्स को बैलेंस करता है।
  • शुगर कम करें: बहुत ज्यादा चीनी खाने से इंसुलिन बढ़ता है, जो ओव्यूलेशन में बाधा डाल सकता है।

आईवीएफ (IVF) में ओव्यूलेशन की भूमिका

असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) जैसे आईवीएफ (IVF) में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को डॉक्टर पूरी तरह अपने कंट्रोल में ले लेते हैं।

  • ओवेरियन स्टिमुलेशन (Ovarian Stimulation): इसमें इंजेक्शन के जरिए ओवरी को उत्तेजित किया जाता है ताकि एक के बजाय कई एग्स बनें।
  • ट्रिगर शॉट (Trigger Shot): जब एग्स सही साइज के हो जाते हैं, तो एक खास इंजेक्शन दिया जाता है ताकि ओव्यूलेशन का सटीक समय पता चल सके।
  • एग रिट्रीवल (Egg Retrieval): ओव्यूलेशन होने से ठीक पहले, डॉक्टर एक छोटी प्रक्रिया के जरिए एग्स को शरीर से बाहर निकाल लेते हैं ताकि उन्हें लैब (Lab) में फर्टिलाइज किया जा सके।
  • एम्ब्रीओ ट्रांसफर (Embryo Transfer): एग्स और स्पर्म के मिलन से बने भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (Embryo) को सही समय पर बच्चेदानी यानी यूट्रस (Uterus) में ट्रांसफर किया जाता है।

एग्स की क्वालिटी और ओव्यूलेशन का संबंध

सिर्फ ओव्यूलेशन होना ही काफी नहीं है, एग्स की क्वालिटी भी अच्छी होनी चाहिए। बढ़ती उम्र के साथ एग्स की संख्या और क्वालिटी दोनों कम होने लगती हैं। यदि ओव्यूलेशन समय पर हो रहा है लेकिन एग्स हेल्दी नहीं हैं, तो एम्ब्रीओ (Embryo) के यूट्रस (Uterus) में चिपकने यानी इम्प्लांटेशन (Implantation) में दिक्कत आ सकती है। इसलिए फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स अक्सर ओव्यूलेशन के साथ-साथ एग्स की हेल्थ सुधारने के लिए सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

ओव्यूलेशन महिला के शरीर की वह शक्ति है जो एक नए जीवन को जन्म देने की क्षमता रखती है। "ovulation kya hota hai" को समझना आपके फर्टिलिटी के सफर को आसान बना देता है। अपने शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को पहचानना, सही डाइट लेना और तनावमुक्त रहना आपके ओव्यूलेशन को बेहतर बना सकता है। यदि किसी कारणवश नेचुरल ओव्यूलेशन में दिक्कत आ रही है, तो घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि मॉडर्न मेडिकल साइंस और आईवीएफ (IVF) जैसी तकनीकों ने अब नामुमकिन को भी मुमकिन बना दिया है। सही समय पर सही सलाह और आधुनिक इलाज के जरिए आप भी माँ बनने के अपने सपने को सच कर सकती हैं।

Common Questions Asked

क्या हर महीने ओव्यूलेशन होना जरूरी है?

 

नियमित साइकिल वाली महिलाओं में आमतौर पर हर महीने ओव्यूलेशन होता है, लेकिन पीसीओएस (PCOS) जैसी स्थितियों में एग्स रिलीज न होने की समस्या हो सकती है।

क्या पीरियड्स के दौरान सेक्स करने से प्रेग्नेंसी हो सकती है?

 

संभावना कम है लेकिन असंभव नहीं, खासकर उन महिलाओं में जिनकी साइकिल बहुत छोटी (Short Cycle) होती है, क्योंकि स्पर्म शरीर में 5 दिनों तक जीवित रह सकता है।

ओव्यूलेशन के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट करना चाहिए?

 

ओव्यूलेशन के लगभग 12 से 14 दिन बाद या पीरियड्स मिस होने के अगले दिन टेस्ट करना सबसे सटीक परिणाम देता है।

क्या एक महीने में दो बार ओव्यूलेशन हो सकता है?

 

यह बहुत दुर्लभ (Rare) है, लेकिन कभी-कभी 24 घंटे के भीतर दो एग्स रिलीज हो सकते हैं, जिसकी वजह से जुड़वां बच्चे (Fraternal Twins) होते हैं।

ओव्यूलेशन किट (OPK) का इस्तेमाल कब शुरू करना चाहिए?

 

यदि आपकी साइकिल 28 दिनों की है, तो पीरियड्स शुरू होने के 10वें या 11वें दिन से टेस्ट शुरू करना सबसे अच्छा होता है।

आईवीएफ (IVF) में ओव्यूलेशन को कैसे ट्रैक किया जाता है?

 

आईवीएफ में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट के जरिए एग्स की ग्रोथ की बारीकी से निगरानी करते हैं ताकि उन्हें ओव्यूलेशन से ठीक पहले कलेक्ट (Collect) किया जा सके।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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