महिलाओं के शरीर में बनने वाला ओवम (Ovum) रिप्रोडक्टिव सिस्टम का प्रमुख हिस्सा होता है। जब एक बच्ची अपनी माँ के गर्भ में होती है, उसी समय उसकी ओवरी में लाखों Ovum बन चुके होते हैं जो उसके पीरियड शुरू होने की उम्र से लेकर मेनोपॉज़ तक धीरे-धीरे उपयोग होते रहते हैं।
अब समझते हैं Ovum meaning in hindi, तो Ovum को हिंदी में अंडाणु या डिंब कहा जाता है। इसे अंग्रेज़ी में एग (Egg) या ओसाइट (Oocyte) भी कहा जाता है। जब Ovum स्पर्म से मिलता है तब निषेचन यानी फर्टिलाइजेशन (fertilization) शुरू होता है।
जब ओवुलेशन (ovulation) के दौरान Ovum ओवरी से बाहर निकलता है, तो आमतौर पर यह लगभग 12 से 24 घंटे तक ही जीवित रहता है। अगर इस समय सीमा के भीतर ओवम और स्पर्म से तब ही फर्टिलाइजेशन होता है और भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (embryo) बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
Ovum meaning in hindi आर्टिकल में जानेंगे कि ओवम यानी एग कब और कैसे बनता है, हर महीने ओवरी के अंदर क्या होता है, और IVF ट्रीटमेंट में कैसे एग की जरुरत होती है।
क्या आपको पता है कि महिलाओं के शरीर में मौजूद Ovum यानी एग्स जन्म के बाद नहीं बनते? आप अपने पूरे एग्स के साथ ही पैदा होती हैं जो आपके अपनी माँ के पेट होने के दौरान ही बन चुके होते हैं।
जब आप अपनी माँ के गर्भ में होती है, तब आपकी ओवरी में लगभग 60 से 70 लाख एग्स बन चुके होते हैं। जैसे जैसे आपका जन्म लेने का समय नजदीक आता है वैसे वैसे उनकी संख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है। और जन्म के समय तक यह संख्या घटकर लगभग 10 से 20 लाख रह जाती है।
जब तक आपकी पहली माहवारी यानी प्यूबर्टी (puberty) शुरू होती है, तब तक ओवरी में लगभग 3 से 4 लाख एग्स ही बचते हैं।
इसके बाद हर महीने ओवरी के अंदर कई छोटे फॉलिकल (follicle) एक्टिव होते हैं। इनमें से आमतौर पर एक फॉलिकल पूरी तरह मैच्योर होता है और उसी से एक एग ओवुलेशन (ovulation) के दौरान बाहर निकलता है।
इसका मतलब यह है कि महिलाओं में एग की संख्या सीमित होती है। इसलिए उम्र बढ़ने के साथ-साथ एग की संख्या और उनकी क्वालिटी, दोनों धीरे-धीरे कम होती जाती हैं।
महिलाओं में जो Ovum जन्म के समय से मौजूद होते हैं, वही उनकी पूरी प्रजनन उम्र यानी प्यूबर्टी शुरू होने से लेकर मेनोपॉज़ तक धीरे-धीरे उपयोग होते रहते हैं।
हर मेंस्ट्रुअल साइकिल में ओवरी के अंदर कई छोटे-छोटे फॉलिकल्स एक्टिव होने लगते हैं। लेकिन इनमें से आमतौर पर केवल एक ही फॉलिकल पूरी तरह मैच्योर हो पाता है।
पीरियड के पहले दिन से FSH यानी फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (Follicle Stimulating Hormone) ओवरी को फॉलिकल्स की ग्रोथ शुरू करने सिग्नल देता है।
यह सिग्नल मिलने के बाद ओवरी के अंदर लगभग 10 से 20 छोटे फॉलिकल बढ़ने लगते हैं। हर फॉलिकल के अंदर एक अपरिपक्व एग यानी Ovum मौजूद होता है।
कुछ दिनों बाद इन फॉलिकल्स में से एक फॉलिकल बाकी की तुलना में तेजी से बढ़ने लगता है। इसी को डॉमिनेंट फॉलिकल (Dominant Follicle) कहा जाता है।
जैसे-जैसे यह फॉलिकल बड़ा होता है, बाकी फॉलिकल्स की ग्रोथ रुक जाती है और शरीर उन्हें धीरे-धीरे अवशोषित यानी अब्सॉर्ब (absorb) कर लेता है।
जब डॉमिनेंट फॉलिकल लगभग 18 से 24 मिलीमीटर तक पहुँच जाता है, तब शरीर में एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन का लेवल बढ़ने लगता है।
इसके बाद LH यानी ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (Luteinizing Hormone) अचानक बढ़ता है। इसे एलएच सर्ज (LH surge) कहा जाता है।
एलएच सर्ज के लगभग 24 से 36 घंटे बाद फॉलिकल फटता है और उसमें मौजूद एग बाहर निकलता है। इसी प्रक्रिया को ओवुलेशन (ovulation) कहा जाता है।
जब ओवुलेशन होता है, तब ओवरी से एक मैच्योर एग यानी Ovum बाहर निकलता है और फैलोपियन ट्यूब की ओर बढ़ना शुरू करता है। फैलोपियन ट्यूब वही जगह होती है जहाँ नेचुरल प्रेगनेंसी में स्पर्म और एग मिलते हैं और फिर फर्टिलाइजेशन होता है।
ओवुलेशन के बाद Ovum आमतौर पर लगभग 12 से 24 घंटे तक ही जीवित रहता है। अगर इस समय के भीतर स्पर्म उससे नहीं मिलता, तो वह Ovum निष्क्रिय हो जाता है और फर्टिलाइजेशन संभव नहीं हो पाता।
लेकिन स्पर्म महिला के शरीर के अंदर लगभग 3 से 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं। इसी कारण अगर ओवुलेशन से कुछ दिन पहले शारीरिक संबंध बनाए गए हों, तो भी स्पर्म फैलोपियन ट्यूब में मौजूद रह सकते हैं और Ovum से मिल सकते हैं।
रिप्रोडक्शन के सन्दर्भ में इसी समय टाइमलाइन को फर्टिलिटी विंडो (Fertility Window) कहा जाता है।
आमतौर पर ओवुलेशन से लगभग 5 दिन पहले से लेकर ओवुलेशन के अगले दिन तक कंसीव करने की संभावना सबसे अधिक होती है।
रिप्रोडक्शन के लिए महिला की उम्र बहुत मायने रखती है क्योंकि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे Ovum की संख्या और उनकी क्वालिटी दोनों धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।
इस उम्र में आमतौर पर Ovum की संख्या भी अच्छी होती है और उनकी क्वालिटी भी बढ़िया रहती है। इसी वजह से इस समय नेचुरल प्रेगनेंसी होने की संभावना अधिक मानी जाती है।
इस उम्र के दौरान Ovum की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगती है। साथ ही उनकी क्वालिटी में भी हल्की गिरावट आना शुरू हो सकती है, हालांकि इस समय भी कई महिलाओं में नेचुरल कंसीव करना संभव होता है।
35 वर्ष के बाद Ovum की संख्या और उनकी क्वालिटी में गिरावट थोड़ी तेज़ हो सकती है। इसी समय एग में क्रोमोसोम से संबंधित गड़बड़ियाँ यानी क्रोमोसोमल एबनॉर्मलिटीज़ (chromosomal abnormalities) होने की संभावना भी बढ़ने लगती है।
40 वर्ष की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते ओवरी में बचे Ovum की संख्या काफी कम हो सकती है और उनकी क्वालिटी भी प्रभावित हो सकती है। इसी कारण इस उम्र में नेचुरल प्रेगनेंसी की संभावना पहले की तुलना में कम हो जाती है।
एक हेल्दी Ovum के अंदर कुल 23 क्रोमोसोम होते हैं। जब यह Ovum स्पर्म से मिलता है (उसमें भी 23 क्रोमोसोम होते हैं), तब दोनों मिलकर 46 क्रोमोसोम वाला एम्ब्रीओ बनाते हैं। यही प्रोसेस प्रेगनेंसी शुरू होना कहलाता है।
लेकिन अगर Ovum के अंदर क्रोमोसोम की संख्या सही न हो, तो फर्टिलाइजेशन में समस्या हो सकती है या फिर एम्ब्रीओ की ग्रोथ नॉर्मल तरीके से नहीं हो पाती।
इसी कंडीशन को एनीयूप्लॉइडी (Aneuploidy) कहते हैं, जिसमें कई बार एम्ब्रीओ की या तो नॉर्मल तरीके ग्रोथ नहीं हो पाती या फिर शुरुआती समय में प्रेगनेंसी रुक जाती है।
इसके अलावा कुछ अन्य फैक्टर भी एग की क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं।
IVF ट्रीटमेंट में एग की जर्नी नेचुरल साइकिल से थोड़ी अलग होती है। इसमें डॉक्टर दवाइयों और कुछ मेडिकल प्रोसीजर की मदद से एग्स को तैयार करते हैं।
सबसे पहले इंजेक्शन देकर ओवरी को स्टिमुलेट किया जाता है ताकि एक की जगह कई फॉलिकल्स एक साथ डेवलप हो सकें। इन फॉलिकल्स के अंदर एग यानी Ovum होते हैं।
जब फॉलिकल्स सही साइज के हो जाते हैं, तब hCG ट्रिगर इंजेक्शन दिया जाता है ताकि वे पूरी तरह मैच्योर हो सके।
ट्रिगर इंजेक्शन के लगभग 34 से 36 घंटे बाद ओवरी से एग निकाले जाते हैं। यह छोटा सा प्रोसीजर होता है. जो हल्का एनेस्थीसिया (anaesthesia) देकर किया जाता है।
निकाले गए एग्स को लैब में एम्ब्रायोलॉजिस्ट चेक करते हैं और उन्हें उनकी मैच्योरिटी के आधार पर अलग करते हैं।
इसके बाद मैच्योर एग्स को स्पर्म से मिलाया जाता है। कई केसों में ICSI यानी इंट्रासाइटोप्लाज़्मिक स्पर्म इंजेक्शन (Intracytoplasmic Sperm Injection) टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है।
ये टेस्ट बस एग्स की संख्या का अंदाज़ा देते हैं। एग की असली क्वालिटी का पता IVF ट्रीटमेंट के दौरान ही चलता है।
Ovum यानी अंडाणु फीमेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम का सबसे जरूरी हिस्सा होता है, जो स्पर्म से मिलकर फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू करता है और आगे चलकर प्रेगनेंसी बनती है।
महिलाओं में एग्स की संख्या जन्म के समय ही फिक्स हो जाती है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह धीरे-धीरे कम होती जाती है। इसके साथ एग की क्वालिटी भी ख़राब होने लगती है। ओवुलेशन के बाद Ovum आमतौर पर लगभग 12 से 24 घंटे तक ही जीवित रहता है।
इसी वजह से अगर कोई महिला प्रेगनेंसी की योजना बना रही है, तो समय रहते अपनी ओवेरियन रिज़र्व और फर्टिलिटी के बारे में जानकारी लेना समझदारी होती है।