सारांश (Overview)
PCOD का पता चलते ही पहला सवाल यही आता है कि अब क्या खाना है और क्या छोड़ना है, और इंटरनेट पर अलग-अलग डाइट देखकर उलझन और बढ़ जाती है। इसलिए एक बात पहले साफ कर लें। PCOS पर बनी 2023 की अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन कहती है कि कोई एक डाइट या एक्सरसाइज ऐसी नहीं है जो बाकी सबसे बेहतर साबित हुई हो। यानी किसी महंगी या सख्त डाइट के पीछे भागने की जरूरत नहीं। फर्क वही खाना डालता है जिसे आप महीनों तक चला सकें, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट हो। pcod diet chart की इस गाइड में आगे हम देखेंगे कि क्या खाना चाहिए, दिनभर का प्लान कैसा रखें, किन चीजों से दूरी बनाएं, और डॉक्टर से कब मिलना जरूरी है।
PCOD में शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता कम हो जाती है, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं। इससे खून में इंसुलिन बढ़ता है, जो ओवरी में एंड्रोजन का बनना बढ़ा देता है और ओव्यूलेशन में रुकावट डालता है।
खाना इसी कड़ी पर सीधा असर डालता है। ऐसी चीजें जो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ाती हैं, उनसे इंसुलिन एकदम से बढ़ती है यानी स्पाइक (insulin spike) होती, जबकि प्रोटीन और फाइबर वाला खाना शुगर को धीरे धीरे छोड़ता है। एक और जरूरी बात, गाइडलाइन के अनुसार वजन कम हुए बिना भी स्वस्थ जीवनशैली यानी हेल्दी लाइफस्टाइल का फायदा मिल सकता है।
प्रोटीन पेट को देर तक भरा रखता है और ब्लड शुगर स्थिर रखने में मदद करता है। दालें, राजमा, चना, पनीर, दही, अंडा और चिकन इसके अच्छे स्रोत हैं, और हर बार के खाने में इसका कुछ हिस्सा रखें।
फाइबर पाचन धीमा करता है, जिससे शुगर एक साथ नहीं चढ़ती। ओट्स, बाजरा, ज्वार, रागी, साबुत दालें और सलाद इसमें मदद करते हैं, और मैदा की जगह साबुत अनाज चुनना सबसे आसान बदलाव है।
अच्छी चर्बी हार्मोन बनाने के लिए जरूरी है, इसलिए फैट पूरी तरह बंद न करें। बादाम, अखरोट, अलसी, चिया और ऑलिव ऑयल शामिल करें। तली चीजों वाला फैट इससे अलग है और उसे कम रखें।
हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, लौकी, तोरई और टमाटर रोज रखें। ये पेट भरती हैं, फाइबर देती हैं और शुगर पर असर कम डालती हैं।
यह एक नॉर्मल जनरल डाइट चार्ट है, कोई सख्त नियम नहीं हैं। इसे अपने घर के खाने और काम के समय के हिसाब से बदल सकते हैं।
समय | क्या खा सकते हैं |
|---|---|
सुबह उठते ही | गुनगुना पानी, भीगे हुए बादाम या अखरोट |
नाश्ता | ओट्स, बेसन या मूंग का चीला, अंडा, दलिया, इडली के साथ सांभर |
मिड-मॉर्निंग | मौसमी फल, छाछ या नारियल पानी |
दोपहर का खाना | बाजरा या गेहूं की रोटी, दाल, सब्जी, दही और सलाद |
शाम का नाश्ता | भुना चना, मखाना, स्प्राउट्स या बिना चीनी की चाय |
रात का खाना | हल्की रोटी या ब्राउन राइस, सब्जी, दाल या पनीर, सूप |
सोने से पहले | जरूरत हो तो हल्का गर्म दूध |
खाने के बीच बहुत लंबा अंतर न रखें, क्योंकि इससे बाद में ज्यादा खाया जाता है। और खाने को छोड़ना PCOD में मदद नहीं करता, बल्कि थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ाता है।
सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि PCOD में फल बंद कर देने चाहिए। ऐसा नहीं है, क्योंकि फल फाइबर, विटामिन और मिनरल का अच्छा स्रोत हैं।
अमरूद, सेब, नाशपाती, संतरा, पपीता, जामुन और अनार अच्छे विकल्प हैं। आम और अंगूर जैसे मीठे फल भी लिए जा सकते हैं, बस मात्रा सीमित रखें और उन्हें नट्स या दही के साथ लें। जूस निकालने के बजाय पूरा फल खाएं, क्योंकि जूस में फाइबर निकल जाता है।
मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाले जूस और चीनी वाली चाय ब्लड शुगर तेजी से बढ़ाते हैं। इन्हें रोज की आदत से हटाकर कभी-कभार तक रखें।
मैदा से बनी चीजें जैसे ब्रेड, बिस्किट, नान और नूडल्स जल्दी पचकर शुगर बढ़ा देती हैं। इनकी जगह साबुत अनाज लेना ज्यादा फायदेमंद है।
बाहर का तला खाना, चिप्स और पैकेट वाला खाना पेट तो भरते हैं पर पोषण नहीं देते, और इनकी वजह से वजन भी बढ़ता है।
वजन ज्यादा होने पर उसमें थोड़ी कमी भी इंसुलिन के काम को बेहतर करती है, जिससे पीरियड्स नियमित होने की संभावना बढ़ती है। पर संतुलन जरूरी है, क्योंकि गाइडलाइन के अनुसार वजन को लेकर शर्मिंदगी या दबाव नहीं होना चाहिए, और PCOS में खाने से जुड़ी गड़बड़ियों तथा बॉडी इमेज पर भी ध्यान देना चाहिए।
इसका सीधा मतलब यह है कि डाइट का उद्देश्य सिर्फ वजन का नंबर कम करना नहीं है बल्कि इंसुलिन का संतुलन, नियमित पीरियड्स और बेहतर एनर्जी है, और ये सब वजन कम हुए बिना भी सुधर सकते हैं।
PCOD में डाइट का सबसे बड़ा उद्देश्य सिर्फ वजन कम करना नहीं, बल्कि इंसुलिन और हार्मोन के बैलेंस को बेहतर रखना है। इसके लिए खाने में प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट, फल और सब्जियां शामिल करें, जबकि ज्यादा चीनी और मैदा कम रखें। फल खाने से बचने की जरूरत नहीं है, बस उनकी मात्रा और तरीका सही होना चाहिए। खाना छोड़ने के बजाय दिनभर का प्लान ऐसा रखें जिसमें बहुत लंबा गैप न हो।
कोई एक डाइट बाकी से बेहतर साबित नहीं हुई है, इसलिए वही डाइट चुनें जिसे लंबे समय तक फॉलो कर सकें। इसके साथ नियमित एक्सरसाइज और पूरी नींद भी जरूरी है। लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लें।