विस्तार से समझें कि पीसीओडी कैसे होता है? (PCOD Kaise Hota Hai?)

Last updated: January 28, 2026

Overview

आज के समय में भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ती लाइफस्टाइल की वजह से महिलाओं में हार्मोनल प्रॉब्लम्स तेजी से बढ़ रही हैं। पीरियड्स लेट होना, वज़न बढ़ना, चेहरे पर बाल आना इन सबको अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। ज़्यादातर महिलाएं तब तक इन समस्याओं को छोटा मान कर इन्हें गंभीरता से नहीं लेतीं। जब तक बात समझ में आती है, तब तक ये छोटी-छोटी दिक्कतें एक बड़ी प्रॉब्लम का रूप ले चुकी होती हैं जिसे पीसीओडी (PCOD) यानी पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज के नाम से जाना जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार भारत में लगभग 10% महिलाएं पीसीओडी से जूझ रही हैं। यानी हर दस में से एक महिला इस समस्या का सामना कर रही है। पीसीओडी का डर सबसे ज्यादा उन महिलाओं को होता है जो प्रेगनेंसी प्लान कर रही होती हैं क्योंकि उनके मन में पहला सवाल यही आता है कि क्या मैं माँ बन पाऊंगी?

सच यह है कि पीसीओडी में प्रेगनेंसी मुश्किल होती है, लेकिन यह नामुमकिन नहीं होती। एक रिसर्च में 1,779 पीसीओडी महिलाओं को फॉलो किया गया और पाया गया कि 67% महिलाएं पीसीओडी की समस्या को ठीक करके माँ बन सकीं।

पीसीओडी को लेकर आम तौर पर यही उलझन रहती है कि यह समस्या आखिर पैदा कैसे होती है और क्या इसकी वजह से प्रेगनेंसी में परेशानी होना तय है। इस आर्टिकल में हम पीसीओडी संबंधित सभी जानकारी जैसे कि pcod kaise hota hai, इसमें शरीर के अंदर किस तरह के बदलाव आते हैं, और पीसीओडी होने पर प्रेगनेंसी यानी गर्भधारण की प्रक्रिया में क्या दिक्कतें आती हैं तथा किस तरह पीसीओडी होने बाद भी माँ बनना संभव होता है।

पीसीओडी क्या है?

सामान्य मेंस्ट्रुअल साइकिल में हर महीने ओवरी में कई छोटे-छोटे फॉलिकल्स (follicles) बनते हैं, जिनमें से एक फॉलिकल परिपक्व यानी मैच्योर होता है और उसमें से एग रिलीज़ होता है। इसी को ओव्यूलेशन कहते हैं। ओव्यूलेशन के बाद अगर एग स्पर्म से मिल जाए तो गर्भधारण होता है, नहीं तो पीरियड्स आ जाते हैं। PCOD में शरीर में पुरुष हार्मोन यानी एंड्रोजन (androgen) का लेवल बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ हार्मोन उन फॉलिकल्स को मैच्योर होने से रोक देता है। नतीजा यह होता है कि कोई भी एग रिलीज नहीं हो पाता और वे छोटे-छोटे पानी के बुलबुलों जैसे सिस्ट्स (cysts) बनकर ओवरी के किनारों पर जमा हो जाते हैं। अल्ट्रासाउंड में यही 'मोतियों की माला' जैसा दिखता है, जिसे लोग गलती से सिस्ट या गांठ समझ लेते हैं।

पीसीओडी कैसे होता है? (PCOD Kaise Hota Hai)

पीसीओडी होने का कोई एक कारण नहीं होता। कई चीज़ें मिलकर इसे ट्रिगर करती हैं।

  • जेनेटिक्स (Genetics): अगर आपकी माँ या बहन को PCOD की समस्या रही है, तो आपके शरीर में भी हॉर्मोनल इम्बैलेंस (hormonal imbalance) होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • एंड्रोजन (Androgen) का बढ़ना: एंड्रोजन को पुरुष हॉर्मोन कहा जाता है। PCOD में ओवरी ज़रूरत से ज्यादा एंड्रोजन बनाने लगती है। यह हॉर्मोन न सिर्फ एग्स को रिलीज होने से रोकता है, बल्कि चेहरे पर बाल और मुंहासों जैसी समस्याएं खड़ी करता है।
  • इन्फ्लेमेशन (Inflammation): शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन या इन्फ्लेमेशन ओवरी को ज्यादा एंड्रोजन बनाने के लिए ट्रिगर करती है।
  • क्रोनिक स्ट्रेस (Chronic Stress): जब आप ज्यादा स्ट्रेस लेती हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल (cortisol) हॉर्मोन बढ़ता है। यह हॉर्मोन ओवरी के काम में रुकावट पैदा करता है और एग्स को सही से मैच्योर नहीं होने देता।

इंसुलिन रेजिस्टेंस PCOD का सबसे बड़ा कारण

PCOD होने की सबसे बड़ी और कॉमन वजह इंसुलिन रेजिस्टेंस है। इंसुलिन एक हॉर्मोन है जो आपके खाने को एनर्जी में बदलता है।

जब आपकी लाइफस्टाइल खराब होती है, तो शरीर की सेल्स (cells) इंसुलिन के प्रति रेजिस्टेंट (resistant) हो जाती हैं। यानी शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता। इसके जवाब में शरीर और ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है। खून में बढ़ा हुआ यह इंसुलिन लेवल सीधे ओवरी पर हमला करता है और उसे एंड्रोजन बनाने के लिए मजबूर करता है।

यही वजह है कि PCOD वाली महिलाओं का वजन जल्दी बढ़ता है और उन्हें मीठा खाने की इच्छा यानी क्रेविंग (craving) ज्यादा होती है। इंसुलिन को कंट्रोल करना ही PCOD को ठीक करने का पहला स्टेप है।

खान-पान और खराब डाइट

जब हम पूछते हैं कि pcod kaise hota hai, तो इसमें आपकी डाइट का बहुत बड़ा हाथ होता है। आज के समय में हमारा खाना-पीना PCOD का सबसे बड़ा ट्रिगर बन गया है।

  • मैदा और चीनी: ज्यादा चीनी और मैदा (refined carbs) खाने से शरीर में इंसुलिन का लेवल अचानक बढ़ जाता है।
  • प्रोसेस्ड फूड (Processed Food): पैकेट बंद खाना, चिप्स, और कोल्ड ड्रिंक्स में ऐसे प्रिजर्वेटिव्स (preservatives) होते हैं जो शरीर के हॉर्मोन्स को बिगाड़ देते हैं।
  • दूध और मीट में हॉर्मोन्स: आजकल डेयरी प्रोडक्ट्स (dairy products) और मीट में पशुओं को दिए जाने वाले हॉर्मोन्स के अंश हो सकते हैं, जो महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन (hormonal imbalance) पैदा करते हैं।

ख़राब लाइफस्टाइल PCOD को कैसे बढ़ावा देती है?

PCOD को एक 'लाइफस्टाइल डिसऑर्डर' (lifestyle disorder) कहा जाता है। आपकी ये अनहेल्दी लाइफस्टाइल और ख़राब आदतें इसे बढ़ावा देती हैं।

  • सेडेंटरी लाइफस्टाइल (Sedentary Lifestyle): घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी से शरीर की चर्बी बढ़ती है। यह चर्बी हॉर्मोन्स को जमा यानी स्टोर करती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करती है।
  • नींद की कमी: देर रात तक मोबाइल देखना और कम सोना आपके सरकेडियन रिदम (circadian rhythm) यानी शरीर की प्राकृतिक घड़ी को बिगाड़ देता है। इससे ओव्यूलेशन का प्रोसेस डिस्टर्ब (disturb) हो जाता है।
  • प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल: प्लास्टिक की बोतलों या टिफिन में खाना गर्म करने से बीपीए (BPA) जैसे हानिकारक केमिकल्स शरीर में जाते हैं, जो एंडोक्राइन डिसरप्टर्स (endocrine disruptors) का काम करते हैं और PCOD को ट्रिगर करते हैं।

PCOD प्रेगनेंसी को कैसे प्रभावित करता है?

PCOD माँ बनने की राह में रुकावट ज़रूर डालता है, लेकिन यह निःसंतानता यानी इनफर्टिलिटी नहीं है। यह प्रेगनेंसी को तीन मुख्य तरीकों से प्रभावित करता है।

  • अनियमित ओव्यूलेशन (Anovulation): जब एग समय पर रिलीज नहीं होता, तो प्रेगनेंसी के मौके कम हो जाते हैं। अगर साइकिल (cycle) 40-50 दिन की है, तो साल में ओव्यूलेशन के मौके बहुत कम मिलते हैं।
  • कंसीव करने में देरी: एग समय पर रिलीज नहीं होने की वजह से प्रेगनेंसी के मौके कम हो जाते हैं।
  • एग क्वालिटी (Egg Quality): हॉर्मोन्स के असंतुलन की वजह से एग्स की क्वालिटी कमजोर हो सकती है, जिससे स्पर्म के साथ फर्टिलाइजेशन में दिक्कत आती है।
  • मिसकैरेज (Miscarriage) का रिस्क: PCOD में प्रोजेस्टेरोन (progesterone) हॉर्मोन की कमी हो सकती है, जो प्रेगनेंसी को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है। इससे शुरुआती हफ्तों में मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाता है।

PCOD को मैनेज करने के प्रभावी तरीके

  • वजन कम करना यानी वेट लॉस: अगर आप अपने कुल वजन का सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत भी कम कर लेती हैं, तो आपका ओव्यूलेशन अपने आप शुरू हो सकता है।
  • हाई प्रोटीन डाइट: अपनी डाइट में प्रोटीन और फाइबर बढ़ाएं ताकि इंसुलिन कंट्रोल में रहे।
  • योग और एक्सरसाइज: हफ्ते में कम से कम 150 मिनट एक्टिव रहें।
  • सप्लीमेंट्स: डॉक्टर की सलाह पर मायो-इनोसिटोल (Myo-inositol) जैसे सप्लीमेंट्स एग्स की क्वालिटी सुधारने में मदद करते हैं।

जब नैचुरली प्रेगनेंट न हों तब आईवीएफ (IVF) ही एकमात्र सहारा

अगर लाइफस्टाइल बदलाव और दवाओं के बाद भी प्रेगनेंसी नहीं हो रही, तो आईवीएफ (IVF) एक कामयाब विकल्प हो सकता है। PCOD वाली महिलाओं के लिए आईवीएफ बहुत सफल होता है क्योंकि उनके पास एग रिजर्व (egg reserve) बहुत अच्छा होता है। आईवीएफ में एग रिट्रीवल के दौरान एक साथ कई मैच्योर एग्स मिल जाते हैं, जिससे अच्छे एम्ब्रीओ (embryo) बनने की संभावना बढ़ जाती है।

एक्सपर्ट की सलाह (Conclusion)

pcod kaise hota hai यह सवाल आपकी माँ बनने की क्षमता पर सवाल नहीं है। यह सिर्फ कंडीशन है जो खुद की केयर और अनुशासन से सही हो सकती है। PCOD के साथ भी माँ बनना पूरी तरह संभव है। ज़रुरत है तो बस सही समय पर सही सलाह की। अपनी डाइट पर ध्यान दें, एक्टिव रहें और अगर 6 महीने कोशिश के बाद भी कंसीव न हो, तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट (fertility expert) से मिलकर दूसरे विकल्पों जैसे IVF इत्यादि पर विचार करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या PCOD में नैचुरली प्रेगनेंसी हो सकती है?

 

हाँ, 80% महिलाएं सही लाइफस्टाइल और मामूली दवाओं की मदद से नैचुरली कंसीव करती हैं।

क्या बहुत ज्यादा चाय या कॉफी से PCOD होता है?

 

ज्यादा कैफीन हॉर्मोन्स को डिस्टर्ब कर सकता है और इंसुलिन लेवल को बढ़ा सकता है, जो PCOD को और खराब कर सकता है।

क्या पतली महिलाओं को भी PCOD हो सकता है?

 

हाँ, इसे लीन पीसीओडी (Lean PCOD) कहते हैं। इसमें वजन नहीं बढ़ता, लेकिन अंदरूनी हॉर्मोनल गड़बड़ी वैसी ही रहती है।

क्या मोबाइल की स्क्रीन से PCOD पर असर पड़ता है?

 

देर रात तक स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन (melatonin) हॉर्मोन कम बनता है, जो एग्स की क्वालिटी और ओव्यूलेशन को प्रभावित करता है।

क्या PCOD को दवाइयों से हमेशा के लिए जड़ से खत्म किया जा सकता है?

 

नहीं, दवाइयां सिर्फ आपके सिम्पटम्स (symptoms) जैसे पीरियड्स को रेगुलर करने या ओव्यूलेशन में मदद करती हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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