पीरियड्स समय पर नहीं आ रहे, 40–50 दिन का गैप हो रहा है। चेहरे या ठुड्डी पर अनचाहे बाल दिखने लगे हैं। वज़न धीरे-धीरे बढ़ रहा है और कम करना मुश्किल लग रहा है। साथ ही बार-बार मुँहासे भी हो रहे हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो मन में PCOD का शक आना स्वाभाविक है।
समस्या यह है कि PCOD के लक्षण साफ और एक जैसे नहीं होते।
थायरॉइड की गड़बड़ी में भी पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।, ज्यादा तनाव से भी वज़न बढ़ सकता है।,उम्र के साथ या लाइफस्टाइल बदलने से भी हार्मोनल बदलाव दिख सकते हैं।
इसीलिए सिर्फ एक-दो लक्षण देखकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। इस आर्टिकल pcod symptoms in hindi में हम व्यवस्थित तरीके से समझेंगे कि कौन-से लक्षण PCOD की ओर इशारा करते हैं, किन परिस्थितियों में टेस्ट करवाना ज़रूरी होता है, और लंबे समय तक इसे अनदेखा करने से फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ सकता है। साथ ही यह भी समझेंगे कि कब सामान्य लाइफस्टाइल मैनेजमेंट पर्याप्त होता है और कब आगे के ट्रीटमेंट विकल्पों पर विचार करना पड़ता है।
PCOD symptoms in hindi में सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि PCOD के लक्षण हर महिला में एक जैसे नहीं होते। कुछ महिलाओं में सिर्फ पीरियड्स की समस्या होती है, कुछ में सिर्फ स्किन और बालों की, और कुछ में दोनों।
PCOD के लक्षणों को दो तरह से समझ सकते हैं। पहले वो जो बाहर दिखते हैं यानी शरीर पर नज़र आते हैं, और दूसरे वो जो अंदर चल रहे होते हैं और सिर्फ टेस्ट से पता चलते हैं।
ये वो लक्षण हैं जो आप खुद देख सकती हैं या महसूस कर सकती हैं।
ये लक्षण शरीर के अंदर होते हैं और इनका पता टेस्ट से चलता है।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण कई और कंडीशन से मिलते-जुलते हैं। PCOD symptoms in hindi के इस आर्टिकल में आइए समझें कि PCOD और दूसरी कंडीशन में फर्क कैसे करें।
अगर आप सोच रही हैं कि क्या आपको PCOD है, तो ये सवाल खुद से पूछें।
अगर इनमें से 3 या ज़्यादा का जवाब हाँ है, तो आपको गाइनेकोलॉजिस्ट से मिलकर टेस्ट करवाने चाहिए।
PCOD को कंफर्म करने के लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट करवाते हैं।
ये टेस्ट पीरियड के दूसरे या तीसरे दिन करवाने से सबसे सही रिज़ल्ट आते हैं।
PCOD में सबसे बड़ी चिंता फर्टिलिटी से जुड़ी होती है। अगर आप माँ बनना चाहती हैं, तो PCOD symptoms in hindi में यह समझना ज़रूरी है कि कौन से लक्षण फर्टिलिटी पर असर डालते हैं।
PCOD में IVF ट्रीटमेंट स्टेप बाई स्टेप होता है।
PCOD में IVF की सक्सेस रेट अच्छी होती है क्योंकि एग रिज़र्व अच्छा होता है। हालांकि, PCOD पेशेंट्स में ओवरी के ओवर-रिस्पॉन्ड करने का रिस्क होता है जिसे OHSS कहते हैं। लेकिन आजकल एडवांस प्रोटोकॉल से यह रिस्क काफी कम हो गया है।
PCOD symptoms in hindi में जानने के बाद सबसे पहले खुद से वो 7 सवाल पूछें यानी सेल्फ़ डायग्नोज़ करें क्योंकि हर लक्षण PCOD नहीं होता, लेकिन कई लक्षण एक साथ हों तो टेस्ट करवाना ज़रूरी है। अल्ट्रासाउंड और हॉर्मोन टेस्ट से PCOD कंफर्म होता है।
अगर PCOD है तो घबराएं नहीं। यह एक मैनेज होने वाली कंडीशन है। सही लाइफस्टाइल, ज़रूरत हो तो दवाइयां, और अगर फर्टिलिटी में दिक्कत हो तो IUI या IVF जैसे विकल्प मौजूद हैं।
और सबसे ज़रूरी बात कि जल्दी पता चलना अच्छा है। जितनी जल्दी PCOD पकड़ में आए, इसे कंट्रोल करना उतना ही आसान है।
PCOD में ओवरी में ज़्यादा फॉलिकल्स होते हैं लेकिन यह कम गंभीर होता है। PCOS में हॉर्मोनल और मेटाबॉलिक समस्याएं ज़्यादा होती हैं और डायबिटीज़ तथा हार्ट डिज़ीज़ का रिस्क बढ़ जाता है।
हाँ, 70-80% PCOD पेशेंट्स सही इलाज से माँ बन जाती हैं। कई तो सिर्फ लाइफस्टाइल बदलाव से नैचुरली कंसीव कर लेती हैं।
पेल्विक अल्ट्रासाउंड और हॉर्मोन टेस्ट से PCOD का पता चलता है। अल्ट्रासाउंड में पॉलीसिस्टिक ओवरी दिखती है और हॉर्मोन टेस्ट में LH बढ़ा हुआ और टेस्टोस्टेरोन हाई होता है।
नहीं। AMH हाई होना PCOD में आम है, लेकिन सिर्फ एक ब्लड टेस्ट के आधार पर PCOD की पुष्टि नहीं की जाती। डायग्नोसिस के लिए अनियमित पीरियड्स, ओव्यूलेशन की स्थिति और अल्ट्रासाउंड के निष्कर्षों को साथ में देखा जाता है।
PCOD पूरी तरह ठीक नहीं होता, लेकिन इसे मैनेज किया जा सकता है। सही लाइफस्टाइल से लक्षण कम हो जाते हैं और कई महिलाओं में पीरियड्स रेगुलर हो जाते हैं।