PCOD के लक्षण क्या हैं? इसे खुद से पहचानें (PCOD Symptoms in Hindi)

Last updated: February 23, 2026

Overview

पीरियड्स समय पर नहीं आ रहे, 40–50 दिन का गैप हो रहा है। चेहरे या ठुड्डी पर अनचाहे बाल दिखने लगे हैं। वज़न धीरे-धीरे बढ़ रहा है और कम करना मुश्किल लग रहा है। साथ ही बार-बार मुँहासे भी हो रहे हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो मन में PCOD का शक आना स्वाभाविक है। समस्या यह है कि PCOD के लक्षण साफ और एक जैसे नहीं होते। थायरॉइड की गड़बड़ी में भी पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।, ज्यादा तनाव से भी वज़न बढ़ सकता है।,उम्र के साथ या लाइफस्टाइल बदलने से भी हार्मोनल बदलाव दिख सकते हैं।

इसीलिए सिर्फ एक-दो लक्षण देखकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। इस आर्टिकल pcod symptoms in hindi में हम व्यवस्थित तरीके से समझेंगे कि कौन-से लक्षण PCOD की ओर इशारा करते हैं, किन परिस्थितियों में टेस्ट करवाना ज़रूरी होता है, और लंबे समय तक इसे अनदेखा करने से फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ सकता है। साथ ही यह भी समझेंगे कि कब सामान्य लाइफस्टाइल मैनेजमेंट पर्याप्त होता है और कब आगे के ट्रीटमेंट विकल्पों पर विचार करना पड़ता है।

PCOD के लक्षण कैसे पहचानें?

PCOD symptoms in hindi में सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि PCOD के लक्षण हर महिला में एक जैसे नहीं होते। कुछ महिलाओं में सिर्फ पीरियड्स की समस्या होती है, कुछ में सिर्फ स्किन और बालों की, और कुछ में दोनों।

PCOD के लक्षणों को दो तरह से समझ सकते हैं। पहले वो जो बाहर दिखते हैं यानी शरीर पर नज़र आते हैं, और दूसरे वो जो अंदर चल रहे होते हैं और सिर्फ टेस्ट से पता चलते हैं।

बाहर से नज़र आने वाले लक्षण

ये वो लक्षण हैं जो आप खुद देख सकती हैं या महसूस कर सकती हैं।

  • अनियमित पीरियड्स: यह PCOD का सबसे कॉमन लक्षण है। पीरियड्स 35 दिन से ज़्यादा बाद आना, साल में 8 से कम पीरियड्स होना, या कई महीने पीरियड न आना PCOD का संकेत हो सकता है। लेकिन सिर्फ एक-दो बार पीरियड लेट होना PCOD नहीं है क्योंकि स्ट्रेस, ट्रैवल, या वज़न में बदलाव से भी ऐसा हो सकता है।
  • चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल: इसे हिर्सुटिज़्म (Hirsutism) कहते हैं। ठोड़ी पर, ऊपरी होंठ पर, छाती पर, या पेट पर मोटे और काले बाल आना PCOD का स्ट्रॉंग इंडिकेटर है। यह तब होता है जब शरीर में एंड्रोजन यानी मेल हॉर्मोन बढ़ जाते हैं।
  • ठीक न होने वाले मुँहासे: टीनएज में मुंहासे यानी एक्ने (acne) होना नॉर्मल है, लेकिन अगर 20 के बाद भी जॉलाइन, ठोड़ी, और गालों पर गहरी, दर्दनाक एक्ने बनी रहे, तो यह हॉर्मोनल एक्ने हो सकती है जो PCOD का लक्षण है।
  • वज़न बढ़ना जो कम न हो: खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होना और डाइट-एक्सरसाइज़ करने के बाद भी वज़न न घटना PCOD में बहुत कॉमन है। यह इंसुलिन रेज़िस्टेंस की वजह से होता है।
  • सिर के बाल पतले होना या झड़ना: जबकि शरीर पर बाल बढ़ रहे हैं, सिर के बाल पतले हो रहे हैं। यह पैटर्न PCOD का टिपिकल साइन है। बालों की पार्टिंग चौड़ी होना या माथे के पास बाल कम होना इसके संकेत हैं।
  • स्किन का कालापन: गर्दन के पीछे, बगल में, या जांघों के बीच स्किन का गहरा होना जिसे एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स (Acanthosis Nigricans) कहते हैं। यह इंसुलिन रेज़िस्टेंस का साफ संकेत है।

अंदर चल रहे लक्षण

ये लक्षण शरीर के अंदर होते हैं और इनका पता टेस्ट से चलता है।

  • ओव्यूलेशन न होना: हर महीने एग रिलीज़ न होना PCOD का मुख्य कारण है जिसकी वजह से पीरियड्स अनियमित होते हैं और प्रेगनेंसी में दिक्कत आती है।
  • ओवरी में छोटे-छोटे फॉलिकल्स: अल्ट्रासाउंड में ओवरी के किनारे पर 12 या उससे ज़्यादा छोटे फॉलिकल्स दिखना जिन्हें पॉलीसिस्टिक अपीयरेंस कहते हैं।
  • हॉर्मोन्स का असंतुलन: LH और FSH का रेशियो बिगड़ना, टेस्टोस्टेरोन बढ़ना, और AMH यानी एंटी-मुलेरियन हॉर्मोन का हाई होना।
  • इंसुलिन रेज़िस्टेंस: फास्टिंग इंसुलिन लेवल बढ़ा होना जो आगे चलकर डायबिटीज़ का रिस्क बढ़ाता है।

ये PCOD है या कुछ और?

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण कई और कंडीशन से मिलते-जुलते हैं। PCOD symptoms in hindi के इस आर्टिकल में आइए समझें कि PCOD और दूसरी कंडीशन में फर्क कैसे करें।

  • PCOD vs थायरॉइड: थायरॉइड में भी पीरियड्स अनियमित होते हैं, वज़न बढ़ता है, और बाल झड़ते हैं। फर्क यह है कि थायरॉइड में थकान बहुत ज़्यादा होती है, ठंड ज़्यादा लगती है, और चेहरे पर सूजन आती है। PCOD में चेहरे पर बाल और एक्ने ज़्यादा होती है। दोनों को कंफर्म करने के लिए TSH और T3/T4 टेस्ट ज़रूरी है।
  • PCOD vs स्ट्रेस: लंबे समय का स्ट्रेस भी पीरियड्स को अनियमित कर सकता है और वज़न बढ़ा सकता है। लेकिन स्ट्रेस में चेहरे पर बाल नहीं आते और अल्ट्रासाउंड नॉर्मल होता है।
  • PCOD vs PCOS: बहुत से लोग इन दोनों को एक मानते हैं, लेकिन PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम PCOD से ज़्यादा गंभीर होता है। PCOS में मेटाबॉलिक समस्याएं, डायबिटीज़ का रिस्क, और हार्ट डिज़ीज़ का खतरा ज़्यादा होता है।
  • PCOD vs नॉर्मल हॉर्मोन में बदलाव: टीनएज में या मेनोपॉज़ के पास पीरियड्स अनियमित होना नॉर्मल है। लेकिन 18-40 की उम्र में लगातार अनियमित पीरियड्स नॉर्मल नहीं माने जाते।

PCOD को खुद से कैसे पहचानें? (PCOD Self Diagnosis)

अगर आप सोच रही हैं कि क्या आपको PCOD है, तो ये सवाल खुद से पूछें।

  • पहला सवाल: क्या पिछले 6 महीने में आपके पीरियड्स 35 दिन से ज़्यादा के गैप पर आए हैं?
  • दूसरा सवाल: क्या ठोड़ी, ऊपरी होंठ, या छाती पर मोटे काले बाल आ रहे हैं?
  • तीसरा सवाल: क्या 20 की उम्र के बाद भी जॉलाइन पर गहरी एक्ने है?
  • चौथा सवाल: क्या डाइट और एक्सरसाइज़ के बावजूद वज़न कम नहीं हो रहा?
  • पांचवां सवाल: क्या सिर के बाल पतले हो रहे हैं जबकि शरीर पर बाल बढ़ रहे हैं?
  • छठा सवाल: क्या गर्दन के पीछे या बगल में स्किन गहरी हो गई है?
  • सातवां सवाल: क्या आप 1 साल से प्रेगनेंसी के लिए कोशिश कर रही हैं लेकिन सफलता नहीं मिली?

अगर इनमें से 3 या ज़्यादा का जवाब हाँ है, तो आपको गाइनेकोलॉजिस्ट से मिलकर टेस्ट करवाने चाहिए।

PCOD में कौन से टेस्ट होते हैं ?

PCOD को कंफर्म करने के लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट करवाते हैं।

  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड: इससे ओवरी की साइज़ और उसमें फॉलिकल्स की संख्या पता चलती है। पॉलीसिस्टिक ओवरी में एक ओवरी में 12 या ज़्यादा छोटे फॉलिकल्स दिखते हैं।
  • हॉर्मोन प्रोफाइल: इसमें LH, FSH, प्रोलैक्टिन, टेस्टोस्टेरोन, और DHEAS चेक होते हैं। PCOD में अक्सर LH बढ़ा होता है और LH:FSH रेशियो 2:1 या 3:1 होता है।
  • AMH टेस्ट: एंटी-मुलेरियन हॉर्मोन ओवरी के एग रिज़र्व का पता देता है। PCOD में AMH आमतौर पर हाई होता है।
  • थायरॉइड प्रोफाइल: TSH टेस्ट से थायरॉइड की समस्या रूल आउट होती है।
  • फास्टिंग इंसुलिन और ग्लूकोज़: इससे इंसुलिन रेज़िस्टेंस का पता चलता है।

ये टेस्ट पीरियड के दूसरे या तीसरे दिन करवाने से सबसे सही रिज़ल्ट आते हैं।

PCOD और फर्टिलिटी का कनेक्शन

PCOD में सबसे बड़ी चिंता फर्टिलिटी से जुड़ी होती है। अगर आप माँ बनना चाहती हैं, तो PCOD symptoms in hindi में यह समझना ज़रूरी है कि कौन से लक्षण फर्टिलिटी पर असर डालते हैं।

  • जब पीरियड्स नियमित नहीं हैं, तो ओव्यूलेशन भी नियमित नहीं होता है और कंसीव करने का सही समय समझना मुश्किल हो जाता है।
  • अगर कई महीने तक पीरियड नहीं आता, तो इसका मतलब है कि उन महीनों में ओव्यूलेशन हुआ ही नहीं है और बिना ओव्यूलेशन के प्रेगनेंसी संभव नहीं होती।
  • PCOD में AMH अक्सर बहुत ज़्यादा हाई होता है, जो यह दिखाता है कि ओवरी में फॉलिकल्स तो अधिक हैं लेकिन वे सही तरह से मैच्योर नहीं हो रहे।
  • PCOD में एग रिज़र्व आमतौर पर अच्छा रहता है, समस्या मुख्य रूप से ओव्यूलेशन की होती है जिसका इलाज संभव है।

PCOD में IVF की ज़रूरत कब पड़ती है?

PCOD में IVF ट्रीटमेंट स्टेप बाई स्टेप होता है।

  • पहला स्टेप लाइफस्टाइल में बदलाव: इसमें वज़न कम करना, डाइट सही करना, और एक्सरसाइज़ करना शामिल है। सिर्फ 5 से 10% वज़न कम करने से भी कई महिलाओं में ओव्यूलेशन शुरू हो जाता है।
  • दूसरा स्टेप ओव्यूलेशन इंडक्शन: इसमें दवाइयों से ओवरी को स्टिम्युलेट किया जाता है ताकि एग मैच्योर हो और रिलीज़ हो। PCOD में इस तरीके से बहुत सी महिलाएं कंसीव कर लेती हैं।
  • तीसरा स्टेप IUI: अगर ओव्यूलेशन हो रहा है लेकिन नैचुरली प्रेगनेंसी नहीं हो रही, तो IUI यानी इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन ट्राई किया जाता है।
  • चौथा स्टेप IVF: जब 3-4 साइकिल ओव्यूलेशन इंडक्शन और IUI से सफलता नहीं मिलती, उम्र 35 से ज़्यादा है, या कोई और फर्टिलिटी इश्यू भी है, तब IVF की सलाह दी जाती है।

PCOD में IVF की सक्सेस रेट अच्छी होती है क्योंकि एग रिज़र्व अच्छा होता है। हालांकि, PCOD पेशेंट्स में ओवरी के ओवर-रिस्पॉन्ड करने का रिस्क होता है जिसे OHSS कहते हैं। लेकिन आजकल एडवांस प्रोटोकॉल से यह रिस्क काफी कम हो गया है।

एक्सपर्ट की सलाह

PCOD symptoms in hindi में जानने के बाद सबसे पहले खुद से वो 7 सवाल पूछें यानी सेल्फ़ डायग्नोज़ करें क्योंकि हर लक्षण PCOD नहीं होता, लेकिन कई लक्षण एक साथ हों तो टेस्ट करवाना ज़रूरी है। अल्ट्रासाउंड और हॉर्मोन टेस्ट से PCOD कंफर्म होता है।

अगर PCOD है तो घबराएं नहीं। यह एक मैनेज होने वाली कंडीशन है। सही लाइफस्टाइल, ज़रूरत हो तो दवाइयां, और अगर फर्टिलिटी में दिक्कत हो तो IUI या IVF जैसे विकल्प मौजूद हैं।

और सबसे ज़रूरी बात कि जल्दी पता चलना अच्छा है। जितनी जल्दी PCOD पकड़ में आए, इसे कंट्रोल करना उतना ही आसान है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

PCOD और PCOS में क्या फर्क है?

 

PCOD में ओवरी में ज़्यादा फॉलिकल्स होते हैं लेकिन यह कम गंभीर होता है। PCOS में हॉर्मोनल और मेटाबॉलिक समस्याएं ज़्यादा होती हैं और डायबिटीज़ तथा हार्ट डिज़ीज़ का रिस्क बढ़ जाता है।

क्या PCOD में प्रेगनेंसी हो सकती है?

 

हाँ, 70-80% PCOD पेशेंट्स सही इलाज से माँ बन जाती हैं। कई तो सिर्फ लाइफस्टाइल बदलाव से नैचुरली कंसीव कर लेती हैं।

PCOD का पता कैसे चलता है?

 

पेल्विक अल्ट्रासाउंड और हॉर्मोन टेस्ट से PCOD का पता चलता है। अल्ट्रासाउंड में पॉलीसिस्टिक ओवरी दिखती है और हॉर्मोन टेस्ट में LH बढ़ा हुआ और टेस्टोस्टेरोन हाई होता है।

क्या सिर्फ AMH बहुत ज़्यादा हाई होना ही PCOD का पक्का संकेत है?

 

नहीं। AMH हाई होना PCOD में आम है, लेकिन सिर्फ एक ब्लड टेस्ट के आधार पर PCOD की पुष्टि नहीं की जाती। डायग्नोसिस के लिए अनियमित पीरियड्स, ओव्यूलेशन की स्थिति और अल्ट्रासाउंड के निष्कर्षों को साथ में देखा जाता है।

क्या PCOD हमेशा के लिए रहता है?

 

PCOD पूरी तरह ठीक नहीं होता, लेकिन इसे मैनेज किया जा सकता है। सही लाइफस्टाइल से लक्षण कम हो जाते हैं और कई महिलाओं में पीरियड्स रेगुलर हो जाते हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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