PCOD ठीक होने के 10 लक्षण

Last updated: February 10, 2026

Overview

PCOD का इलाज शुरू करने के बाद कैसे पता करें कि दवाइयाँ और लाइफस्टाइल में बदलाव का कुछ असर हो रहा है या नहीं ? क्योंकि PCOD यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसीज़ (Polycystic Ovarian Disease) एक ऐसी कंडीशन है जो धीरे-धीरे बनती है और धीरे-धीरे ही ठीक होती है। Pcod thik hone ke lakshan in hindi समझना इसीलिए ज़रूरी है ताकि आप ट्रैक कर सकें कि आपकी मेहनत रंग ला रही है या नहीं। कुछ बदलाव आपको खुद दिखेंगे जैसे पीरियड्स का रेगुलर होना या स्किन का साफ होना। कुछ रिजल्ट टेस्ट में दिखेंगे जैसे हॉर्मोन लेवल में सुधार। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि PCOD में सुधार कैसे दिखता है, कौन से लक्षण पहले ठीक होते हैं और कौन से बाद में, और कैसे पक्का करें कि यह असली रिकवरी है न कि सिर्फ़ अस्थायी राहत।

PCOD ठीक होने का मतलब क्या है?

सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि PCOD पूरी तरह सही नहीं होता, बल्कि ‘मैनेज’ और ‘रिवर्स’ हो सकता है। इसका मतलब है कि सही लाइफस्टाइल और ट्रीटमेंट से लक्षण इतने कम हो सकते हैं कि वो आपकी ज़िंदगी को प्रभावित न करें।

जब डॉक्टर कहते हैं कि PCOD कंट्रोल में है, तो इसका मतलब है कि पीरियड्स रेगुलर हो गए हैं, ओव्यूलेशन हो रहा है, हॉर्मोन लेवल नॉर्मल रेंज में आ गए हैं, और अगर कंसीव करना है तो कर सकती हैं।

लेकिन अगर लाइफस्टाइल फिर से बिगड़ जाए मतलब वज़न बढ़ जाये, स्ट्रेस बढ़ जाये, या डाइट खराब हो जाये तो PCOD के लक्षण वापस आ सकते हैं। इसीलिए PCOD एक लाइफलॉन्ग मैनेजमेंट है।

PCOD में पहले क्या सही होता है?

PCOD रिकवरी सब कुछ एक साथ ठीक नहीं होता, एक क्रम में आप कुछ चीज़ें मैनेज करती हैं।

पहले 1–3 महीनों में क्या बदलाव दिखते हैं?

  • सबसे पहले एनर्जी लेवल में सुधार दिखने लगता है।
  • बिना वजह रहने वाली थकान कम महसूस होने लगती है।
  • दिनभर की रोज़मर्रा की एक्टिविटी करना आसान लगने लगता है।
  • पेट फूलने यानी ब्लोटिंग की समस्या धीरे-धीरे कम होती है।
  • मूड स्विंग्स पहले की तुलना में हल्के होने लगते हैं।

3–6 महीनों के बीच क्या सुधार आता है?

  • पीरियड्स की साइकिल में धीरे-धीरे सुधार दिखने लगता है।
  • पहले जो 2–3 महीने में एक बार पीरियड आता था, वह अब 35–40 दिन के अंतर में आने लगता है।
  • नए पिंपल्स निकलने की समस्या कम होने लगती है।
  • अगर डाइट और एक्सरसाइज़ सही हो, तो वज़न भी धीरे-धीरे कम होना शुरू हो जाता है।

6–12 महीनों में क्या बदलाव आता है?

  • पीरियड्स 28–35 दिन की रेगुलर साइकिल में आने लगते हैं।
  • ओव्यूलेशन शुरू हो सकता है, जिसे टेस्ट के ज़रिये कंफर्म किया जा सकता है।
  • चेहरे और शरीर पर अनचाहे बालों की बढ़त धीरे-धीरे कम होने लगती है।
  • बालों का झड़ना पहले की तुलना में कम महसूस होता है।

12 महीने के बाद

  • हॉर्मोन लेवल नॉर्मल रेंज में आकर स्थिर होने लगते हैं।
  • फर्टिलिटी में सुधार दिखता है और कंसीव करना आसान हो सकता है।
  • अल्ट्रासाउंड में सिस्ट छोटे दिखाई देने लगते हैं या पूरी तरह गायब भी हो सकते हैं।

ऐसे 10 सुधार शरीर में दिखाई देते हैं

1. पीरियड्स का रेगुलर होना

यह सबसे बड़ा और पहला pcod thik hone ke lakshan है। जो पीरियड्स पहले 2-3 महीने में एक बार आते थे या बिल्कुल नहीं आते थे, वो अब हर महीने आने लगते हैं। साइकिल 28 से 35 दिन के बीच स्टेबल हो जाती है।

2. ओव्यूलेशन के संकेत दिखना

जब PCOD कंट्रोल में आता है तो ओव्यूलेशन होने लगता है। इसके लक्षण हैं मेंस्ट्रुअल साइकिल के बीच में पतला, चिपचिपा डिस्चार्ज, हल्का पेट दर्द, और ब्रेस्ट में हल्की टेंडरनेस।

3. वज़न का कम होना या स्टेबल रहना

PCOD में वज़न बढ़ना और घटाना मुश्किल होता है। अगर आपका वज़न बिना ज़्यादा मेहनत के स्टेबल रहने लगा है या धीरे-धीरे कम हो रहा है, तो यह सुधार का संकेत है।

4. स्किन का साफ होना

PCOD में एंड्रोजन यानी पुरुष हॉर्मोन बढ़ने से पिंपल्स और एक्ने होते हैं। जब हॉर्मोन बैलेंस होने लगते हैं तो नए पिंपल्स आना कम हो जाता है और स्किन साफ दिखने लगती है।

5. अनचाहे बालों की ग्रोथ धीमी होना

चेहरे, ठोड़ी, छाती, या पेट पर जो अनचाहे बाल आते थे, उनकी ग्रोथ धीमी हो जाती है। पहले से मौजूद बाल तुरंत नहीं जाते, लेकिन नए बालों का आना कम हो जाता है।

6. बालों का झड़ना कम होना

PCOD में सिर के बाल पतले होने लगते हैं और झड़ते हैं। रिकवरी में बालों का झड़ना कम होता है और धीरे-धीरे नए बाल आने लगते हैं।

7. एनर्जी लेवल बढ़ना

PCOD में थकान बहुत कॉमन है। जब हॉर्मोन और इंसुलिन बैलेंस होने लगते हैं, तो एनर्जी बढ़ती है और दिनभर थकान नहीं रहती।

8. मूड में सुधार

चिड़चिड़ापन, एंग्ज़ाइटी, और डिप्रेशन जैसे मूड इश्यूज़ PCOD के साथ आते हैं। रिकवरी में मूड स्टेबल होता है और इमोशनल वेलबीइंग बेहतर होती है।

9. नींद में सुधार

PCOD में नींद की समस्या होती है। जब हॉर्मोन बैलेंस होते हैं तो नींद गहरी और पूरी आती है।

10. शुगर क्रेविंग कम होना

PCOD में इंसुलिन रेज़िस्टेंस होता है जिससे मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है। जब इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधरती है, तो क्रेविंग कम हो जाती है।

टेस्ट में कैसे दिखेगा सुधार?

शरीर में दिखने वाले लक्षणों के अलावा कुछ टेस्ट से भी आप PCOD में रिकवरी कंफर्म कर सकती हैं।

हॉर्मोन प्रोफाइल

LH और FSH का अनुपात नॉर्मल होना चाहिए। PCOD में LH:FSH रेशियो 2:1 या 3:1 होता है, रिकवरी होने के दौरान यह 1:1 के करीब आ जाता है।

महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होना चाहिए लेकिन PCOD में यह बढ़ा हुआ होता है जिसकी वजह से मुँहासे और अनचाहे बाल आ जाते हैं।

इंसुलिन और ब्लड शुगर

जब PCOD नहीं होता है तब फास्टिंग इंसुलिन लेवल नॉर्मल रेंज में आना चाहिए। HOMA-IR इंडेक्स जो इंसुलिन रेज़िस्टेंस दिखाता है, वो कम होना चाहिए।

अल्ट्रासाउंड

ओवरी में सिस्ट की संख्या कम होनी चाहिए या सिस्ट का साइज़ छोटा होना चाहिए। कुछ महिलाओं में सिस्ट पूरी तरह गायब भी हो जाते हैं।

AMH लेवल

AMH यानी एंटी-मुलेरियन हॉर्मोन (Anti-Mullerian Hormone) PCOD में बढ़ा होता है। रिकवरी में यह धीरे-धीरे नॉर्मल रेंज में आता है।

असली रिकवरी और अस्थायी राहत में फर्क

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि कभी-कभी लक्षण अस्थायी रूप से कम होते हैं जो असली रिकवरी नहीं होती।

अस्थायी राहत के संकेत

दवाई बंद करते ही पीरियड्स फिर से अनियमित हो जाएं, वज़न फिर से बढ़ने लगे, पिंपल्स वापस आ जाएं। इन सबसे पता चलता है कि लक्षण दबे हुए थे, यानी समस्या की जड़ का इलाज नहीं हुआ था।

असली रिकवरी के संकेत

दवाई कम करने या बंद करने के बाद भी पीरियड्स रेगुलर रहें, लाइफस्टाइल मेंटेन करने पर वज़न संतुलित रहे, टेस्ट में हॉर्मोन लेवल नॉर्मल रहें।

कितने समय में क्या उम्मीद करें?

PCOD रिकवरी में धैर्य यानी पेशेंस बहुत ज़रूरी है। सबसे ज़रूरी बात जल्दी रिज़ल्ट की उम्मीद में शॉर्टकट न लें। धीरे-धीरे लेकिन स्थायी सुधार ही असली रिकवरी है।

  • अगर PCOD अर्ली स्टेज में है और लाइफस्टाइल चेंजेस सही हैं, तो 3-6 महीने में सुधार दिखने लगता है।
  • अगर PCOD कई सालों से है और गंभीर है, तो 6-12 महीने या उससे ज़्यादा समय लग सकता है।

निष्कर्ष

अपनी प्रोग्रेस को ट्रैक करने और खुद को मोटिवेटेड रखने के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि आपका शरीर अंदर से कैसे बदल रहा है। पीरियड्स का समय पर आना, एनर्जी बढ़ना और स्किन का साफ होना बताते हैं कि PCOD ठीक हो रहा है और इसे आप pcod thik hone ke lakshan in hindi में पढ़ कर समझ गयी होंगी। अगर आप इसी तरह अनुशासन बनाए रखती हैं, तो हॉर्मोनल बैलेंस को लंबे समय तक बरकरार रखना काफी आसान हो जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

PCOD कितने दिन में ठीक होता है?

 

यह PCOD की सीवेरिटी पर निर्भर करता है। अर्ली स्टेज में 3-6 महीने में सुधार दिख सकता है, सीवियर केस में 12 महीने या उससे ज़्यादा लग सकते हैं।

PCOD ठीक होने का सबसे पहला संकेत क्या है?

 

आमतौर पर पीरियड्स का रेगुलर होना सबसे पहला और सबसे बड़ा संकेत है। इसके साथ एनर्जी लेवल में सुधार भी जल्दी दिखता है।

क्या अल्ट्रासाउंड में सिस्ट गायब हो सकते हैं?

 

हाँ, सही ट्रीटमेंट और लाइफस्टाइल से सिस्ट की संख्या और साइज़ कम हो सकता है। कुछ महिलाओं में सिस्ट पूरी तरह गायब भी हो जाते हैं।

दवाई बंद करने के बाद PCOD वापस आ सकता है?

 

अगर सिर्फ़ दवाई से लक्षण कंट्रोल किए गए और लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं किया, तो दवाई बंद करने पर लक्षण वापस आ सकते हैं।

PCOD ठीक होने पर प्रेगनेंसी आसान हो जाती है?

 

हाँ, जब पीरियड्स रेगुलर होते हैं और ओव्यूलेशन होने लगता है, तो नेचुरल कंसेप्शन की संभावना काफी बढ़ जाती है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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