पीरियड आने से पहले के 10 लक्षण (PMS Symptoms in Hindi)

Last updated: February 10, 2026

Overview

पीरियड की तारीख़ नज़दीक आते ही शरीर कुछ बदलाव होने लगता है। कभी बिना वजह रोने का मन करता है, तो कभी चॉकलेट खाने का, तो कभी पेट में हल्की ऐंठन शुरू हो जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो यह Period aane se pehle ke lakshan यानी PMS हैं, जिसका पूरा मतलब होता है प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (Premenstrual Syndrome) और ये पीरियड शुरू होने से 7 से 10 दिन पहले दिखने लगते हैं।

PMS हर महिला में अलग-अलग होते हैं। किसी को सिर्फ़ हल्की थकान होती है, किसी को इतना तेज़ मूड स्विंग होता है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो जाती है। कुछ महिलाओं को लगभग कोई लक्षण नहीं होते, जबकि कुछ के लिए यह समय बहुत मुश्किल होता है।

इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि पीरियड से पहले शरीर में हर दिन क्या बदलाव आते हैं, कौन से लक्षण नॉर्मल हैं और कब डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। यह भी जानेंगे कि PMS और प्रेगनेंसी के लक्षणों में फर्क कैसे करें?

PMS क्यों होता है?

Period aane se pehle ke lakshan यानी PMS हॉर्मोन में बदलाव होने की वजह से दिखाई देते हैं। ओव्यूलेशन के बाद शरीर में प्रोजेस्टेरोन का लेवल बढ़ता है और एस्ट्रोजन कम होने लगता है। यह हॉर्मोन्स में यह बदलाव दिमाग यानी ब्रेन के सेरोटोनिन लेवल को प्रभावित करता है। सेरोटोनिन ही आपके मूड को कंट्रोल करता है।

जब सेरोटोनिन कम होता है तो मूड खराब होता है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है, और खाने की क्रेविंग होती है। साथ ही प्रोजेस्टेरोन की वजह से शरीर में पानी रुकने लगता है जिससे ब्लोटिंग और भारीपन महसूस होता है।

हर महिला में हॉर्मोन सेंसिटिविटी अलग होती है, इसीलिए किसी को PMS के लक्षण ज़्यादा होते हैं और किसी को कम।

पीरियड से पहले हर दिन क्या होता है?

7 से 10 दिन पहले

इस टाइम पर लक्षण हल्के होते हैं और कई बार ध्यान भी नहीं जाता। ब्रेस्ट में हल्का भारीपन शुरू हो सकता है। मूड थोड़ा ऑफ़ लग सकता है। स्किन पर छोटे-छोटे पिंपल्स आने लगते हैं क्योंकि हॉर्मोन में चेंज होने से शरीर में तेल का प्रोडक्शन बढ़ता है।

4 से 6 दिन पहले

इस समय तक लक्षण थोड़े बढ़ जाते हैं। ब्रेस्ट में दर्द या टेंडरनेस बढ़ जाती है, पेट फूला हुआ लगता है और कपड़े टाइट महसूस होने लगते हैं। थकान बढ़ती है और एनर्जी कम लगती है। मीठा या नमकीन खाने की क्रेविंग शुरू हो जाती है।

1 से 3 दिन पहले

यह पीक टाइम होता है जब लक्षण सबसे ज़्यादा महसूस होते हैं। पेट के निचले हिस्से में हल्की ऐंठन शुरू हो सकती है, कमर में दर्द हो सकता है। मूड स्विंग तेज़ हो जाता है जैसे एक पल में ठीक लग रहा होता है, और अगले ही पल रोने का मन करता है। सिरदर्द हो सकता है और नींद में दिक्कत आ सकती है।

पीरियड शुरू होने पर

Period aane se pehle ke lakshan यानी PMS पीरियड शुरू होते ही कम होने लगते हैं या गायब हो जाते हैं। यही PMS और प्रेगनेंसी के लक्षणों में सबसे बड़ा फर्क है।

PMS यानी पीरियड आने से पहले के लक्षण क्या हैं?

ब्रेस्ट में भारीपन और दर्द

यह सबसे कॉमन period aane se pehle ke lakshan में से एक है। ब्रेस्ट टिश्यू हॉर्मोन सेंसिटिव होते हैं, इसीलिए प्रोजेस्टेरोन बढ़ने पर सूजन और दर्द होता है। कुछ महिलाओं को इतना दर्द होता है कि ब्रा पहनना भी मुश्किल लगता है।

पेट में ऐंठन

यूट्रस की मांसपेशियाँ पीरियड की तैयारी में सिकुड़ने लगती हैं जिससे पेट के निचले हिस्से में क्रैम्प्स होते हैं। यह दर्द हल्का भी हो सकता है और तेज़ भी।

ब्लोटिंग

पेट फूला हुआ लगता है, जींस टाइट फील होती है। यह शरीर में वॉटर रिटेंशन की वजह से होता है। कुछ महिलाओं का वज़न भी 1-2 किलो बढ़ जाता है जो पीरियड के बाद वापस नॉर्मल हो जाता है।

थकान

बिना कुछ किए भी थकान लगती है। एनर्जी कम रहती है और काम में मन नहीं लगता। यह हॉर्मोनल शिफ्ट और सेरोटोनिन के कम होने की वजह से होता है।

सिरदर्द

एस्ट्रोजन लेवल गिरने से कुछ महिलाओं को सिरदर्द या माइग्रेन हो जाता है। यह पीरियड से 1-2 दिन पहले सबसे ज़्यादा होता है।

स्किन में बदलाव

पिंपल्स या एक्ने निकल आते हैं क्योंकि स्किन ऑयली हो जाती है। यह हॉर्मोनल फ्लक्चुएशन की वजह से होता है।

मानसिक और भावनात्मक बदलाव

मूड स्विंग

यह period aane se pehle ke lakshan में सबसे ज़्यादा परेशान करने वाला होता है। एक मिनट में खुश, अगले मिनट में उदास। छोटी-छोटी बातों पर इरिटेशन होती है। बिना किसी ख़ास वजह के रोने का मन करता है।

चिड़चिड़ापन

धैर्य यानी पेशेंस कम हो जाता है। परिवार या पार्टनर की छोटी-सी बात पर भी गुस्सा आ जाता है। यह सेरोटोनिन लेवल गिरने की वजह से होता है।

एंग्ज़ाइटी या बेचैनी

मन में अजीब-सी बेचैनी रहती है। कुछ महिलाओं को पैनिक अटैक जैसा भी महसूस होता है।

फूड क्रेविंग

चॉकलेट, आइसक्रीम, चिप्स या कुछ ख़ास खाने की बहुत इच्छा होती है। मीठा खाने से अस्थायी रूप से मूड बेहतर होता है, इसे सेरोटोनिन लेवल बढ़ाने का, दिमाग का अपना तरीका कह सकते हैं।

PMS के लक्षण और प्रेगनेंसी के लक्षण में फर्क

लक्षणों की अवधि

PMS के लक्षण पीरियड शुरू होते ही कम हो जाते हैं या गायब हो जाते हैं। प्रेगनेंसी के लक्षण बने रहते हैं और समय के साथ बढ़ जाते हैं।

ब्रेस्ट में दर्द

PMS में ब्रेस्ट में दर्द होता है जो पीरियड आने पर कम हो जाता है। प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट में दर्द के साथ निप्पल्स का रंग गहरा होने लगता है और यह कम नहीं होता।

मतली या उल्टी

PMS में मतली बहुत रेयर होती है। प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस यानी मतली और उल्टी कॉमन है, ख़ासकर सुबह के समय।

ब्लीडिंग

PMS के बाद नॉर्मल पीरियड ब्लीडिंग होती है जो 3-7 दिन तक चलती है। प्रेगनेंसी में बहुत हल्की, पिंक या ब्राउन रंग की, इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग हो सकती है जो 1-2 दिन में खत्म हो जाती है।

पेशाब की फ्रीक्वेंसी

PMS में पेशाब की फ्रीक्वेंसी नॉर्मल रहती है। प्रेगनेंसी में बार-बार पेशाब आना कॉमन है क्योंकि hCG हॉर्मोन किडनी में ब्लड फ्लो बढ़ाता है।

कौन से लक्षण नॉर्मल हैं और कौन से नहीं?

नॉर्मल PMS

  • नॉर्मल PMS में हल्की से मध्यम क्रैम्प्स होते हैं, जो पेनकिलर से ठीक हो जाते हैं।
  • मूड में बदलाव होते हैं, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी ज़्यादा प्रभावित नहीं होती।
  • थकान रहती है, जो आराम करने से बेहतर हो जाती है।
  • ब्रेस्ट में भारीपन होता है, लेकिन असहनीय दर्द नहीं होता।

PMDD यानी जब PMS गंभीर हो जाए

  • पीएमडीडी यानी प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर, PMS का गंभीर रूप होता है।
  • इसमें लक्षण इतने ज़्यादा बढ़ जाते हैं कि रोज़मर्रा का काम और रिश्ते संभालना मुश्किल हो जाता है।
  • उदासी या डिप्रेशन इतना बढ़ सकता है कि कुछ भी करने का मन नहीं करता।
  • बहुत ज़्यादा घबराहट या पैनिक जैसा महसूस हो सकता है।
  • मूड तेज़ी से बदलता है और गुस्सा कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।
  • नींद ठीक से नहीं आती या बार-बार टूट जाती है।
  • कुछ महिलाओं को खुद को नुकसान पहुँचाने जैसे विचार भी आ सकते हैं।

अगर इनमें से कोई भी लक्षण हो तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें। PMDD का इलाज संभव है।

PMS से राहत के लिए क्या करें?

खानपान में बदलाव

नमक कम खायें क्योंकि इससे ब्लोटिंग बढ़ती है। कैफीन कम करें क्योंकि यह ब्रेस्ट टेंडरनेस और एंग्ज़ाइटी बढ़ा सकता है। छोटे-छोटे मील्स खाएं ताकि ब्लड शुगर स्टेबल रहे। कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर डाइट जैसे दूध, दही, पालक, और बादाम खाएं।

एक्सरसाइज़

हल्की वॉक, योगा, या स्विमिंग से एंडॉर्फिन रिलीज़ होता है जो नेचुरल पेनकिलर और मूड बूस्टर है। हफ्ते में कम से कम 3-4 बार 30 मिनट की एक्सरसाइज़ करें।

स्ट्रेस मैनेजमेंट

PMS के समय स्ट्रेस इसके लक्षणों को और बढ़ा देता है ऐसे में डीप ब्रीदिंग, मेडिटेशन, या कोई भी रिलैक्सिंग एक्टिविटी मददगार होती है।

पर्याप्त नींद

7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी मूड स्विंग और थकान को बढ़ाती है।

गर्म सिकाई

पेट में ऐंठन के लिए हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल से सिकाई करें। इससे मसल्स को आराम मिलता है।

निष्कर्ष

Period aane se pehle ke lakshan को समझना और पहचानना ज़रूरी है। अगर आप जानती हैं कि पीरियड से 5-7 दिन पहले आपका मूड खराब होता है या पेट में भारीपन आता है, तो आप पहले से तैयार रह सकती हैं।

ज़्यादातर PMS नॉर्मल होते हैं और लाइफस्टाइल में बदलाव से मैनेज हो जाते हैं। लेकिन अगर लक्षण इतने गंभीर हों कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो, तो डॉक्टर से बात करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पीरियड से कितने दिन पहले PMS के लक्षण शुरू होते हैं?

 

आमतौर पर 7 से 10 दिन पहले। कुछ महिलाओं में ओव्यूलेशन के तुरंत बाद यानी 14 दिन पहले से भी शुरू हो सकते हैं।

PMS और प्रेगनेंसी के लक्षण में क्या फर्क है?

 

PMS के लक्षण पीरियड आने पर खत्म हो जाते हैं, प्रेगनेंसी के लक्षण बने रहते हैं। प्रेगनेंसी में मतली और बार-बार पेशाब आना ज़्यादा कॉमन है।

क्या PMS के लक्षण हर महीने एक जैसे होते हैं?

 

ज़रूरी नहीं। स्ट्रेस, डाइट, नींद, और अन्य फैक्टर्स की वजह से हर महीने लक्षणों की तीव्रता अलग हो सकती है।

PMS के लिए डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

 

जब लक्षण इतने गंभीर हों कि काम या रिश्ते प्रभावित हों, जब डिप्रेशन या एंग्ज़ाइटी बहुत तीव्र हो, या जब घरेलू उपाय काम न करें।

क्या PMS के लक्षण उम्र के साथ बदलते हैं?

 

हाँ, 30 और 40 की उम्र में PMS के लक्षण बढ़ सकते हैं। पेरीमेनोपॉज़ के दौरान भी लक्षणों में बदलाव आता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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