Overview
इस ब्लॉग में पीरियड के दौरान सही खान-पान की जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि पीरियड में आयरन, फ़ाइबर, ओमेगा-3, अदरक और पर्याप्त पानी कैसे मदद कर सकते हैं और ज़्यादा नमक, चीनी, कैफ़ीन, तला-भुना व प्रोसेस्ड खाना किन मामलों में तकलीफ़ बढ़ा सकता है। साथ ही, पीरियड के दर्द में खाने की भूमिका, घरेलू उपाय और डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए, यह भी समझाया गया है।
पीरियड के दिनों में खाने को लेकर इंटरनेट पर सलाह की भरमार है - ये खाओ, वो मत खाओ, ये चीज़ जादू की तरह दर्द मिटा देगी।
तो शुरू में ही एक ईमानदार बात। खाना पीरियड के दर्द या तकलीफ़ का इलाज नहीं है। ये बस उसे थोड़ा आसान बना सकता है। जो लेख "ये खाते ही दर्द ग़ायब" का वादा करते हैं, वो सच से आगे जाते हैं।
पर इसका मतलब ये नहीं कि खाने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। कुछ चीज़ें सचमुच राहत देती हैं, कुछ तकलीफ़ बढ़ा सकती हैं, और एक चीज़ ऐसी है जिसका सबूत बाक़ी सबसे मज़बूत है। इन्हीं को साफ़-साफ़ समझते हैं।
पहले ये जान लेना ज़रूरी है कि दर्द होता क्यों है, क्योंकि इसी से समझ आता है कि खाना कैसे मदद करता है।
पीरियड के दौरान गर्भाशय अपनी अंदरूनी परत को बाहर निकालने के लिए सिकुड़ता है। ये सिकुड़न कुछ रसायनों की वजह से होती है, जिन्हें प्रोस्टाग्लैंडिन (Prostaglandins) कहते हैं।
जब ये रसायन ज़्यादा बनते हैं, तो सिकुड़न तेज़ होती है और दर्द बढ़ता है। और इनका सीधा संबंध शरीर में सूजन (inflammation) से है।
इसीलिए खाने का पूरा तर्क एक ही बात पर टिका है - जो चीज़ें शरीर में सूजन बढ़ाती हैं वो दर्द बढ़ा सकती हैं, और जो सूजन घटाती हैं वो राहत दे सकती हैं। बस यही पूरी कहानी की जड़ है।
और ये कोई छोटी समस्या नहीं है - पीरियड वाली 90% तक महिलाओं को कभी न कभी दर्द होता है, और 15% को इतना तेज़ कि रोज़मर्रा का काम मुश्किल हो जाए।
पीरियड में ख़ून निकलता है, और उसके साथ शरीर का आयरन भी। इसीलिए इस दौरान आयरन की कमी हो सकती है, जिससे थकान, कमज़ोरी और चक्कर आते हैं - ख़ासकर अगर ब्लीडिंग ज़्यादा हो।
आयरन के अच्छे स्रोत - हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ (पालक, मेथी), दालें और बीन्स, और चुकंदर। ये शाकाहारी स्रोत भारत के हिसाब से आसान भी हैं।
एक छोटा पर काम का नुस्खा - विटामिन C आयरन को सोखने में मदद करता है। तो आयरन वाली चीज़ के साथ नींबू, संतरा या आँवला लेने से फ़ायदा बढ़ता है। जैसे दाल पर नींबू निचोड़ लेना।
प्रोटीन और फ़ाइबर वाली चीज़ें ब्लड शुगर को स्थिर रखती हैं, जिससे अचानक की थकान और मूड के उतार-चढ़ाव कम होते हैं। फल इस मामले में ख़ास हैं - इनमें फ़ाइबर, पानी और कुदरती मिठास तीनों होती है, जो मीठा खाने की तलब को सेहतमंद तरीक़े से शांत कर देती है।
ओमेगा-3 फैटी एसिड सूजन घटाते हैं और पीरियड के दर्द को कम कर सकते हैं। इसके स्रोत - अलसी (flax seeds), अखरोट, और मछली (जो खाते हों उनके लिए)।
ये अलग से बताने लायक़ है, क्योंकि पूरी लिस्ट में यही एक ऐसी चीज़ है जिसका सबूत सचमुच ठोस है।
चिकित्सा स्रोत के मुताबिक़ अदरक - चाहे कच्ची हो, चाय में हो या किसी और रूप में - पीरियड के दर्द की तीव्रता और अवधि दोनों घटाने में असरदार पाई गई है, और इसके पीछे मज़बूत डेटा है। अदरक मिचली भी कम करती है।
तो पीरियड के पहले दो-तीन दिन एक कप अदरक की चाय एक सस्ता, सुरक्षित और सबूत वाला उपाय है।
बस एक बात - एक दिन में 4 ग्राम से ज़्यादा अदरक न लें, वरना सीने में जलन या पेट की दिक़्क़त हो सकती है।
ये अटपटा लगता है, पर पर्याप्त पानी पीना पीरियड की सूजन (bloating) और तकलीफ़ को कम करता है। शरीर में पानी की कमी होने पर वो पानी रोकने लगता है, जिससे सूजन बढ़ती है। पानी और हर्बल चाय (जैसे अदरक वाली) इसमें सबसे आसान मदद हैं।
यहाँ एक बात साफ़ कर दें - ये "पूरी तरह मना" वाली सूची नहीं है। अगर मन हो तो कभी-कभार कुछ भी खाया जा सकता है। ये बस वो चीज़ें हैं जो कुछ महिलाओं में तकलीफ़ बढ़ा सकती हैं, इसलिए इन दिनों में इन्हें कम रखना समझदारी है।
ज़्यादा नमक शरीर में पानी रोकता है, जिससे सूजन और भारीपन बढ़ता है। चिप्स, पैकेटबंद स्नैक्स, अचार, पापड़ जैसी चीज़ें इन दिनों में सूजन बढ़ा सकती हैं।
रिफ़ाइंड चीनी और प्रोसेस्ड चीज़ें सूजन बढ़ाने वाली मानी जाती हैं, और ब्लड शुगर को तेज़ी से ऊपर-नीचे करती हैं, जिससे मूड के उतार-चढ़ाव, थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ते हैं। मिठाई की तलब हो तो फल या थोड़ी डार्क चॉकलेट बेहतर विकल्प हैं।
ये भारत के लिए ख़ास बात है, जहाँ चाय दिन में कई बार पी जाती है। एक शोध-समीक्षा के मुताबिक़ कॉफ़ी समेत कुछ चीज़ें पीरियड के दर्द को बढ़ा सकती हैं - माना जाता है कि कैफ़ीन रक्त नलिकाओं को सिकोड़ता है, जिससे कुछ महिलाओं में गर्भाशय तक रक्त प्रवाह घटता है और दर्द बढ़ सकता है।
पर यहाँ ईमानदारी ज़रूरी है - इस पर सबूत मिले-जुले हैं। कुछ अध्ययनों में कैफ़ीन से दर्द बढ़ता दिखा, तो कुछ में कोई साफ़ संबंध नहीं मिला। यानी ये हर महिला में एक जैसा नहीं होता। अगर आपको चाय-कॉफ़ी के बाद दर्द या बेचैनी बढ़ती महसूस हो, तो इन दिनों उसे कम कीजिए; अगर कोई फ़र्क़ न दिखे तो पूरी तरह छोड़ने की ज़रूरत नहीं। और उसकी जगह अदरक वाली चाय एक अच्छा विकल्प है।
पैकेटबंद, तला हुआ और ज़्यादा प्रोसेस्ड खाना सूजन बढ़ाता है, जो सीधे दर्द से जुड़ा है।
एक दिलचस्प बात - रेड मीट में आयरन तो होता है, पर उसमें प्रोस्टाग्लैंडिन भी ज़्यादा होते हैं - वही रसायन जो सिकुड़न और दर्द बढ़ाते हैं। इसलिए आयरन के लिए इन दिनों पौधों वाले स्रोत बेहतर रहते हैं।
अगर किसी चीज़ से आपको वैसे भी गैस, दस्त या पेट की दिक़्क़त होती है - जैसे किसी को दूध से - तो पीरियड के दिनों में उससे ख़ास तौर पर बचिए, क्योंकि इन दिनों वो तकलीफ़ और भारी लगती है।
ये सोच ग़लत और नुक़सानदेह है।
खाना छोड़ने से ब्लड शुगर गिरता है, जिससे थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ता है - यानी पीरियड के लक्षण और बिगड़ते हैं। सूजन कम करने के लिए भूखा रहना नहीं, बल्कि हल्का, पचने में आसान और पानी वाला खाना खाना सही तरीक़ा है।
पीरियड के दिनों में शरीर को कम नहीं, सही पोषण चाहिए।
सिर्फ़ खाना पूरी कहानी नहीं है। अच्छी नींद और हल्की-फुल्की गतिविधि - जैसे टहलना, हल्का योग - भी दर्द और मूड दोनों में मदद करती है। और पेट पर गर्म सिकाई (हॉट वॉटर बैग) तो सबसे आज़माया हुआ घरेलू उपाय है ही।
खाना और घरेलू उपाय हल्के-मध्यम दर्द के लिए हैं। पर कुछ स्थितियों में डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है -
बहुत तेज़ पीरियड दर्द को "सहना ही पड़ेगा" मानकर चुप रहना ठीक नहीं - कई बार इसके पीछे कोई इलाज लायक़ वजह होती है।