पीरियड्स के 3 से 5 दिन हर महिला के लिए एक बड़ी चुनौती होते हैं। पेट के निचले हिस्से में तेज़ मरोड़, कमर में खिंचाव और कभी-कभी तो पैरों में इतनी जान भी नहीं बचती कि इंसान खड़ा हो सके। अक्सर जब हम पूछते हैं कि period ka dard kaise kam kare, तो लोग इसे नॉर्मल कहकर टाल देते हैं। लेकिन दर्द अगर आपकी डेली लाइफ में परेशानी बन रहा है, तो उसे सहना बहादुरी नहीं है। इंटरनेट पर ज्यादातर पुराने नुस्खे बताए गए हैं, लेकिन हम यह नहीं जान पाते कि वे काम कैसे करते हैं, किस तरह के दर्द में कौन सा तरीका काम आता है और इसके पीछे का साइंटिफिक कारण क्या है। इस आर्टिकल में हम पीरियड्स के दर्द को कम करने के साइंटिफिक तरीके बताएँगे जो पीरियड्स के दिनों में शर्तिया आराम पहुँचाते हैं, जिससे आप अपनी ज़िंदगी को बिना रोके एंजॉय कर सकें।
गर्म पानी की बोतल या हीटिंग पैड से निकलने वाली गर्मी यूट्रस की मांसपेशियों यानी मसल्स तक पहुँचती है। गर्मी से मसल्स ढीली यानी रिलैक्स होती हैं। जब मसल्स रिलैक्स होती हैं तो सिकुड़न यानी क्रैम्पिंग कम होती है। और जब क्रैम्पिंग कम होती है तो दर्द भी कम हो जाता है।
सिकाई का असर 10-15 मिनट में शुरू हो जाता है । 2018 की एक स्टडी में पाया गया कि हीट थेरेपी ibuprofen जितनी ही असरदार है।
अदरक में जिंजरोल (Gingerol) नाम का कंपाउंड होता है, जो एक पॉवरफुल एंटी-इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) है। जिंजरोल प्रोस्टाग्लैंडिन्स को बनने से रोकता है। जब प्रोस्टाग्लैंडिन्स कम बनेंगे तो यूट्रस कम सिकुड़ेगा और दर्द कम होगा।
एक स्टडी में अदरक को ibuprofen और mefenamic acid जितना असरदार पाया गया।
अदरक वाली चाय का असर 30 से 45 मिनट में शुरू हो जाता है, इसे पीरियड के पहले 3 दिन रोज़ पिएं।
एक्सरसाइज करने से शरीर में एंडॉर्फिन रिलीज़ होते हैं। एंडॉर्फिन हमारे दर्द के रिसेप्टर्स को ब्लॉक कर देते हैं। जब ये रिसेप्टर्स ब्लॉक हो जाते हैं, तो दर्द का सिग्नल दिमाग तक ठीक से पहुँच ही नहीं पाता।
पीरियड पेन के लिए नॉन-ड्रग ट्रीटमेंट्स में एक्सरसाइज़ सबसे ज़्यादा असरदार उपायों में से एक है।
एक्सरसाइज़ करते समय और तुरंत बाद ही हल्का आराम महसूस होने लगता है। अगर हफ्ते में 3 से 4 बार नियमित एक्सरसाइज़ की जाए, तो हर महीने पीरियड के दर्द की तीव्रता धीरे-धीरे कम होती जाती है।
पीरियड्स से कुछ दिन पहले से दिन में 1-2 केले खाना शुरू करें।
केले में मैग्नीशियम और पोटैशियम होते हैं। मैग्नीशियम मसल्स को रिलैक्स करता है। यूट्रस भी एक मसल इसलिए इसके रिलैक्स होने से आराम मिलता है। पोटैशियम मसल क्रैम्प्स और पेट की सूजन में मदद करता है।
मैग्नीशियम का असर तुरंत नहीं होता। पीरियड से 4–5 दिन पहले से रोज़ केला खाने पर ही फ़र्क दिखाई देता है।
सैल्मन मछली और अलसी यानी फ़्लैक्स सीड में ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं। पीरियड पेन के लिए ज़िम्मेदार प्रोस्टाग्लैंडिन्स, एराकिडोनिक एसिड से बनते हैं। ओमेगा-3 इस एराकिडोनिक एसिड की जगह ले लेता है, जिससे प्रोस्टाग्लैंडिन्स कम बनते हैं और दर्द भी कम होता है। ओमेगा-3 लेने वाली महिलाओं को दर्द की दवा कम लेनी पड़ती है।
यह लॉन्ग-टर्म उपाय है और इसका तुरंत असर नहीं होता। 2–3 महीने नियमित रूप से सैल्मन मछली या फ़्लैक्स सीड खाने पर हर साइकिल में दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है।
गर्म पानी अंदर से मसल्स को रिलैक्स करता है। पर्याप्त पानी से पेट भी नहीं फूलता है।
हाइड्रेशन का असर धीरे-धीरे होता है। पूरे दिन गर्म पानी पीती रहें।
मसाज से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है जिससे मसल्स रिलैक्स होती हैं। लैवेंडर ऑयल में लिनालूल होता है, जो मन और मसल्स को रिलैक्स करता है और दर्द को कम करता है।
मसाज के दौरान और तुरंत बाद आराम मिल जाता है।
70% या उससे ज़्यादा कोको वाली डार्क चॉकलेट का 20–30 ग्राम का छोटा टुकड़ा खाएं। मिल्क चॉकलेट की जगह केवल डार्क चॉकलेट चुनें।
डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम भरपूर होता है, जो मसल्स को रिलैक्स करता है। इसमें मौजूद थियोब्रोमाइन ब्लड वेसल्स को फैलाता है, जिससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है। फिनाइलएथाइलअमीन मूड को बेहतर करता है और शरीर में फील-गुड केमिकल्स रिलीज़ करता है।
15–20 मिनट में मूड बेहतर होने लगता है। मैग्नीशियम का पूरा असर कुछ दिनों में महसूस होता है।
कैमोमाइल में एपिजेनिन नाम का कंपाउंड होता है, जिसमें इन्फ्लेमेशन कम करने और मसल्स क्रैम्प को कम करने वाले गुण होते हैं। एपिजेनिन मसल्स की अचानक सिकुड़ने को कम करता है और ग्लाइसिन का लेवल बढ़ाता है, जो नर्व और मसल्स को रिलैक्स करता है। साथ ही कैमोमाइल चाय तनाव और बेचैनी कम करती है, जिससे दर्द कम महसूस होता है।
कैमोमाइल चाय से 20 से 30 मिनट में रिलैक्सेशन महसूस होने लगता है। बेहतर असर के लिए पीरियड से कुछ दिन पहले से शुरू करें।
| ज़रूरत | क्या करें |
|---|---|
| 5-15 मिनट में राहत चाहिए | गर्म पानी की बोतल से सिकाई + एक्यूप्रेशर |
| 30 से 45 मिनट में राहत चाहिए | अदरक की चाय + पेट की हल्की मसाज |
| हर महीने दर्द कम करना हो | ओमेगा-3 (अलसी) + रेगुलर एक्सरसाइज |
| दर्द और ब्लोटिंग (गैस) दोनों हों | केला खाएं + गुनगुना पानी पिएं |
| दर्द के साथ मूड भी खराब हो | डार्क चॉकलेट + कैमोमाइल चाय |
| रात को दर्द की वजह से नींद न आए | गर्म सिकाई + कैमोमाइल चाय |
पीरियड में हल्का से मध्यम दर्द सामान्य माना जाता है। लेकिन दर्द इतना हो कि रोज़मर्रा का काम करना मुश्किल हो जाए, दर्द की दवाएँ भी असर न करें, हर महीने दर्द बढ़ता जाए, या ब्लीडिंग बहुत ज़्यादा हो इस स्थिति में डॉक्टर से मिलना जरुरी हो जाता है। ये लक्षण एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स या पीसीओएस जैसी समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।
Period ka dard kaise kam kare इसका जवाब है अलग मौकों पर अलग तरीका काम आता है। तुरंत राहत के लिए गर्म सिकाई और अदरक की चाय कारगर होती हैं। लंबे समय के समाधान के लिए ओमेगा-3 और नियमित एक्सरसाइज़ ज़्यादा असर दिखाती हैं।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि हर उपाय के पीछे विज्ञान है। जब आप समझती हैं कि कोई तरीका क्यों और कब काम करता है, तो उसे भरोसे के साथ अपना पाती हैं जो आपकी लाइफ को आसान बनाता है।
अदरक की चाय सबसे असरदार है वहीँ कैमोमाइल रिलैक्स करती है और पेपरमिंट इन्फ्लेमेशन कम करती है।
हाँ, हल्की एक्सरसाइज़ सेफ है और दर्द कम करती है। भारी वर्कआउट से बचें।
15 से 20 मिनट, दिन में 2 से 3 बार। बहुत ज़्यादा गर्म न हो।
आज से शुरू करें। असर 2–3 महीने में दिखता है।
कभी-कभी ठीक है लेकिन रोज़-रोज़ लेने से बेहतर है प्राकृतिक उपाय अपनाना।
1 - 2 दिन का हल्के से मीडियम दर्द नार्मल है। ज़्यादा दर्द हो या बढ़ रहा हो तो डॉक्टर से मिलें।