जिस तरह दिल की धड़कन हमारे जिंदा होने का प्रमाण है, उसी तरह महिलाओं के शरीर में मासिक धर्म यानी पीरियड्स (Periods) का होना उनके इंटरनल सिस्टम के सुचारू रूप से काम करने का एक 'मंथली फीडबैक' (Monthly Feedback) है। अक्सर समाज में इसे "गंदगी बाहर निकलना" जैसे पुराने नजरिए से देखा जाता है, लेकिन असल में period kya hota hai यह सवाल हमारे शरीर के उस जटिल बायोलॉजिकल क्लॉक (Biological Clock) से जुड़ा है जो यह तय करता है कि हमारे हार्मोन्स बैलेंस में हैं या नहीं। पीरियड्स केवल कुछ दिनों की ब्लीडिंग (Bleeding) नहीं है, बल्कि यह आपके मस्तिष्क और प्रजनन अंगों यानी रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स (Reproductive Organs) के बीच होने वाले कम्युनिकेशन का परिणाम है। आगे हम पीरियड्स को एक नए और वैज्ञानिक नजरिए से समझेंगे कि कैसे यह आपकी ओवरऑल सेहत और माँ बनने की संभावना को नियंत्रित करता है।
जब हम वैज्ञानिक नजरिए से पूछते हैं कि period kya hota hai, तो इसे एक 'वाइटल साइन' (Vital Sign) की तरह देखा जाना चाहिए। यह आपके शरीर की वह मंथली रिपोर्ट कार्ड है जो बताती है कि आपका एंडोक्राइन सिस्टम (Endocrine System) सही से काम कर रहा है। पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग असल में गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम (Endometrium) का रिप्लेसमेंट (Replacement) है।
हर महीने शरीर पुरानी परत को हटाकर नई और फ्रेश परत बनाता है। यह प्रक्रिया उतनी ही जरूरी है जितनी कि फेफड़ों का सांस लेना। अगर यह चक्र रुक जाता है या इसमें गड़बड़ी आती है, तो इसका मतलब केवल यह नहीं है कि गर्भधारण (Pregnancy) में दिक्कत है, बल्कि यह इशारा है कि शरीर के अंदरूनी मेटाबॉलिज्म (Metabolism) या स्ट्रेस लेवल (Stress Level) में कुछ बड़ा बदलाव हुआ है।
मेंस्ट्रुएशन (Menstruation) यानी पीरियड्स की प्रक्रिया पूरी तरह से नर्वस सिस्टम (Nervous System) और ओवरी (Ovary) के बीच के तालमेल पर आधारित है। इसे समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि यह ब्लीडिंग केवल खून नहीं है। इसमें म्यूकस, टिश्यू (Tissue) और वे तरल पदार्थ होते हैं जो यूट्रस की लाइनिंग का हिस्सा थे। जब दिमाग का एक हिस्सा, जिसे हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) कहते हैं, शरीर में हार्मोन्स के कम स्तर को नोटिस करता है, तो वह पिट्यूटरी ग्लैंड (Pituitary Gland) को संकेत भेजता है। इसके बाद एक पूरी चेन रिएक्शन (Chain Reaction) शुरू होती है, जिसका अंत पीरियड्स के रूप में होता है। यही कारण है कि अगर कोई महिला बहुत ज्यादा मानसिक तनाव में होती है, तो उसका दिमाग इस सिग्नल को रोक देता है और पीरियड्स मिस हो जाते हैं।
शरीर में हार्मोन्स का बहना किसी ऑर्केस्ट्रा की धुन जैसा है, जहाँ मधुर संगीत के लिए हर इंस्ट्रूमेंट का सही समय पर बजना जरूरी है।
जैसे ही प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिरता है, पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। period kya hota hai को समझने के लिए इन हार्मोन्स के उतार-चढ़ाव को समझना सबसे सटीक (Exact) तरीका है।
एक औसत मेंस्ट्रुअल साइकिल (Cycle) 28 दिनों की होती है, जिसे मुख्य रूप से दो बड़े हिस्सों में बांटा जाता है।
यदि आप अपनी साइकिल को ट्रैक कर रही हैं, तो इन फेज की लंबाई यह बता सकती है कि आपकी फर्टिलिटी (Fertility) की स्थिति क्या है। उदाहरण के लिए, यदि ल्यूटियल फेज बहुत छोटा है, तो एम्ब्रीओ (Embryo) को यूट्रस में चिपकने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
बहुत सी महिलाएं period kya hota hai तो जानती हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि उनके पीरियड्स 'हेल्दी' (Healthy) हैं या नहीं।
period kya hota hai यह जानने के बाद इसे नेचुरल तरीके से बैलेंस करना आपके हाथ में है।
असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) जैसे आईवीएफ (IVF) में, पीरियड्स के पहले दो दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
पीरियड्स को केवल एक 'तारीख' या 'महीने की परेशानी' के रूप में देखना बंद करना चाहिए। "period kya hota hai" का असली उत्तर आपके शरीर की उस अद्भुत क्षमता में छिपा है जो हर महीने खुद को रिन्यू (Renew) करती है। आपकी साइकिल आपकी सेहत का आईना है जो आपके स्ट्रेस, आपकी डाइट और आपकी फर्टिलिटी (Fertility) के बारे में सब कुछ बताती है। यदि इसमें कोई बदलाव आता है, तो इसे दबाने के बजाय इसके पीछे की वजह को समझना जरूरी है। आधुनिक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट और आईवीएफ (IVF) जैसी तकनीकों ने आज यह संभव कर दिया है कि पीरियड्स की किसी भी जटिलता को सुलझाकर माँ बनने का सपना सच किया जा सकता है।
नहीं, काला या गहरा भूरा ब्लड आमतौर पर 'पुराना खून' होता है जो यूट्रस से बाहर निकलने में थोड़ा समय लेता है। यह अक्सर पीरियड्स की शुरुआत या अंत में दिखता है।
आमतौर पर 45 से 55 साल की उम्र के बीच पीरियड्स स्थायी रूप से बंद हो जाते हैं, जिसे मेनोपॉज (Menopause) कहा जाता है।
अगर किसी महिला को पीरियड्स नहीं आ रहे, तो इसका मतलब है कि ओव्यूलेशन नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में नेचुरल प्रेग्नेंसी बहुत मुश्किल होती है, और मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है।
जी हाँ, हल्की एक्सरसाइज (जैसे वॉक या योग) करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और दर्द कम होता है। बस बहुत ज्यादा भारी वर्कआउट से बचना चाहिए।
हार्मोनल बदलाव और ब्लड लॉस की वजह से शरीर में आयरन की कमी हो सकती है, जिससे एनीमिया (Anemia) और थकान महसूस होती है।
आईवीएफ (IVF) ट्रीटमेंट की पूरी टाइमलाइन पीरियड्स के दूसरे दिन से शुरू होती है, इसलिए तारीख का सटीक रिकॉर्ड रखना बहुत जरूरी है।
यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है। मेंस्ट्रुअल कप (Menstrual Cup) ज्यादा हाइजीनिक और ईको-फ्रेंडली (Eco-friendly) विकल्प माना जाता है क्योंकि यह ब्लड को सोखने के बजाय इकट्ठा करता है।