अगर किसी महिला रेगुलर और नॉर्मल पीरियड्स आते हैं, और अगले महीने पीरियड्स मिस हो जायें, तो यह प्रेगनेंसी के लिए कोशिश कर रहे कपल के लिए बड़ी खुशी की बात हो सकती है, लेकिन बिना किसी कारण के पीरियड मिस हो जायें तो यह सामान्य नहीं है यानी शरीर के अंदर जरूर कुछ चल रहा है।
दरअसल period miss hone ke lakshan दिखाई देने का मतलब यह नहीं होता कि महिला प्रेगनेंट ही है बल्कि बिना प्रेगनेंसी के भी पीरियड्स मिस हो सकते हैं। और यह चिंता करने वाली बात हो सकती है क्योंकि कई बार हॉर्मोन्स में बदलाव, थकान, या लाइफस्टाइल की वजह से भी पीरियड्स लेट या मिस हो सकते हैं। इस आर्टिकल में हम गहराई से समझेंगे कि period miss hone ke lakshan क्या-क्या हो सकते हैं, पीरियड मिस होने पर शरीर में कौन से बदलाव दिखते हैं, प्रेगनेंसी और बिना प्रेगनेंसी के बीच का फर्क कैसे पहचानें जिससे कुछ समस्या होने पर डॉक्टर से जल्दी ही संपर्क किया जा सके।
अगर प्रेगनेंसी हुई है, तो पीरियड मिस होने से पहले ही शरीर में कुछ बदलाव शुरू हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जैसे ही फर्टिलाइज्ड एग यूट्रस में इम्प्लांट होता है, शरीर में hCG, प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हॉर्मोन तेज़ी से बढ़ने लगते हैं। ये हॉर्मोन ही वो बदलाव लाते हैं जिन्हें हम प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण कहते हैं।
इन लक्षणों को पहचानना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं, तो आप जल्दी कंफर्म कर सकती हैं। और अगर प्लान नहीं कर रहीं, तो भी सही समय पर सही फैसला ले सकती हैं।
यह सबसे आम और शुरुआती संकेतों में से एक है। ब्रेस्ट भारी लगने लगते हैं, छूने पर दर्द होता है, और कभी-कभी निप्पल का रंग गहरा होने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रेगनेंसी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन बढ़ता है जो ब्रेस्ट टिशू को प्रभावित करता है। साथ ही दूध बनाने की तैयारी में ब्रेस्ट की नसें बड़ी होने लगती हैं। यह लक्षण पीरियड आने से पहले भी होता है, लेकिन प्रेगनेंसी में यह ज़्यादा तीव्र होता है और पीरियड की तारीख निकलने के बाद भी बना रहता है।
बिना ज़्यादा काम किए भी थकान लगना प्रेगनेंसी का एक अहम संकेत है। शरीर में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन बढ़ने से नींद ज़्यादा आती है और एनर्जी कम लगती है। शरीर अब एक नई ज़िंदगी को सपोर्ट करने की तैयारी कर रहा है, इसलिए एनर्जी का खर्च बढ़ जाता है। अगर आप सामान्य दिनों में एक्टिव रहती हैं लेकिन अचानक बिना वजह थकान महसूस हो रही है, तो यह ध्यान देने वाली बात है।
मॉर्निंग सिकनेस आमतौर पर प्रेगनेंसी के 4-6 हफ्ते बाद शुरू होती है, लेकिन कुछ महिलाओं को पीरियड मिस होने से पहले ही हल्की मतली महसूस होने लगती है। सुबह उठते ही जी मिचलाना, कुछ खास गंध से उल्टी जैसा लगना, ये सब hCG हॉर्मोन के बढ़ने की वजह से होता है।
अगर आपको सामान्य से ज़्यादा बार पेशाब जाना पड़ रहा है, खासकर रात में, तो यह प्रेगनेंसी का संकेत हो सकता है। प्रेगनेंसी में शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है जिससे किडनी को ज़्यादा फ़िल्टर करना पड़ता है। नतीजा बार-बार बाथरूम जाना पड़ता है।
अचानक बिना वजह रोना आ जाए, छोटी बात पर गुस्सा आ जाए, या फिर बहुत खुशी महसूस हो, ये सब हॉर्मोन में बदलाव की वजह से होता है। प्रेगनेंसी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल तेज़ी से बदलता है जो इमोशंस को प्रभावित करता है।
कुछ महिलाओं को पीरियड की तारीख से कुछ दिन पहले हल्की पिंक या ब्राउन स्पॉटिंग होती है। इसे इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग कहते हैं। यह तब होती है जब फर्टिलाइज्ड एग यूट्रस की दीवार से जुड़ता है। यह पीरियड जैसी हैवी ब्लीडिंग नहीं होती और 1-2 दिन में खत्म हो जाती है।
अचानक कुछ खास खाने का मन करना या फिर पसंदीदा खाने से भी मन उचट जाना, ये दोनों प्रेगनेंसी के लक्षण हो सकते हैं। हॉर्मोन में बदलाव स्वाद ग्रंथियों यानी टैस्ट बड्स (taste buds) और गंध यानी स्मैल ( smell) को प्रभावित करते हैं।
पीरियड जैसी हल्की क्रैम्पिंग भी प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकती है। क्रैम्पिंग इम्प्लांटेशन के समय होती है, जब एग यूट्रस में सेटल हो रहा होता है। लेकिन यह दर्द बहुत तेज़ नहीं होता और कुछ घंटों में कम हो जाता है।
खाने- पीने की चीज़ या परफ्यूम की गंध से चिढ़ होने लगती है。
पेट फूला हुआ महसूस होना और कब्ज की समस्या होना, क्योंकि हॉर्मोन्स में बदलाव की वजह से पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है और खाना सामान्य से देर में पचता है।
PMS यानी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षण और प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण काफ़ी मिलते-जुलते हैं। दोनों में ब्रेस्ट में दर्द, थकान, मूड स्विंग्स और क्रैम्पिंग हो सकती है।
फ़र्क कैसे करें? PMS के लक्षण पीरियड आने के साथ खत्म हो जाते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी में ये लक्षण पीरियड की तारीख निकलने के बाद भी बने रहते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते हैं। अगर पीरियड की तारीख निकल गई है और लक्षण कम होने की जगह बढ़ रहे हैं, तो प्रेगनेंसी टैस्ट करना सही रहेगा।
हर बार पीरियड मिस होने का मतलब प्रेगनेंसी नहीं होता। इसकी कई और वजहें भी हो सकती हैं।
अगर पीरियड 7 दिन से ज़्यादा लेट हो गया है और आप यौन रूप से सक्रिय यानी सेक्सुअली एक्टिव (sexually active) हैं, तो सबसे पहले घर पर प्रेगनेंसी टैस्ट करें। सुबह का पहला यूरिन सबसे सटीक रिज़ल्ट देता है क्योंकि उसमें hCG हॉर्मोन का कंसंट्रेशन ज़्यादा होता है।
अगर टैस्ट में प्रेगनेंसी कन्फर्म नहीं होती है मतलब टैस्ट का रिजल्ट नेगेटिव है और पीरियड भी नहीं आया है, तो 3-4 दिन बाद दोबारा टैस्ट करें। कभी-कभी शुरुआती दिनों में hCG लेवल इतना कम होता है कि टैस्ट पकड़ नहीं पाता।
अगर दो बार टैस्ट नेगेटिव आने के बाद भी पीरियड्स नहीं आते, तो डॉक्टर से मिलें। ब्लड टैस्ट से प्रेगनेंसी की पुष्टि ज़्यादा सही तरीके से हो सकती है।
अगर प्रेगनेंसी टैस्ट नेगेटिव है, लेकिन 2-3 महीने से पीरियड नहीं आया है, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है। इसी तरह पेट में तेज़ दर्द हो, अचानक बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग शुरू हो जाए, या बार-बार चक्कर और कमज़ोरी महसूस हो तो इसे नज़रअंदाज़ न करें।
ये लक्षण एक्टोपिक प्रेगनेंसी या किसी हॉर्मोन में गड़बड़ी जैसी गंभीर समस्या के लक्षण हो सकते हैं।
Period miss hone ke lakshan को पहचानना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इससे आप सही समय पर डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं । अगर प्रेगनेंसी है तो जल्दी पता चलने से आप अपना और बच्चे का ख्याल रख सकती हैं। और अगर कोई और वजह है तो उसका इलाज समय पर हो सकता है। शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को ध्यान से नोटिस करें, ज़रूरत पड़े तो टैस्ट करें, और किसी भी संदेह में डॉक्टर से बात करें।
पीरियड की अगली अनुमानित डेट के 7 दिन बाद टैस्ट करें। इससे पहले hCG लेवल कम हो सकता है और रिज़ल्ट गलत आ सकता है।
हाँ, शुरुआती दिनों में hCG लेवल कम होने से टैस्ट नेगेटिव आ सकता है। 3-4 दिन बाद दोबारा टैस्ट करें।
ब्रेस्ट में भारीपन और थकान सबसे शुरुआती संकेतों में से हैं जो पीरियड मिस होने से पहले भी दिख सकते हैं।
स्ट्रेस से पीरियड कुछ दिनों से लेकर कई हफ्तों तक लेट हो सकता है। अगर 2-3 महीने से ज़्यादा हो जाए तो डॉक्टर से मिलें।
PCOS में वज़न बढ़ना, चेहरे पर बाल आना, एक्ने, और पीरियड का बहुत अनियमित होना ये सब लक्षण हो सकते हैं।