पीरियड मिस होना और प्रेगनेंसी टेस्ट का 'नेगेटिव' आना एक ऐसी कंडीशन है जिसकी वजह से किसी भी महिला को तनाव हो सकता है। यह स्ट्रेस उस कंडीशन में और भी बढ़ जाता है जब आप आईवीएफ ट्रीटमेंट से संतान सुख प्राप्त करना चाह रही हों। क्योंकि बिना पीरियड्स के एग (egg) रिलीज होने की टाइमिंग का पता लगाना असंभव है। इन परिस्थितियों में Period Na Aaye To Kya Kare? इस आर्टिकल में आपको रुकी हुई मेंस्ट्रुअल साइकिल को रेगुलर करने के मेडिकल तरीके, दवाएं और लाइफस्टाइल बदलाव के बारे में जानकारी दी गयी जिन्हें अपना कर आप अपने पीरियड्स को न सिर्फ रेगुलर कर सकती हैं बल्कि अपने माँ बनने के सुख को भी प्राप्त कर सकती हैं।
भारत में हर 5 में से 1 महिला पीसीओएस से प्रभावित है। इसमें ओवरी में छोटे सिस्ट बन जाते हैं और एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है। इसके कारण अंडे समय पर मैच्योर नहीं होते और पीरियड्स रुक जाते हैं। Ministry of Health and Family Welfare के अनुसार, जीवनशैली में बदलाव इसका प्राथमिक उपचार है।
थायराइड ग्रंथि आपके मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। यदि आपको हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड कम होना) है, तो शरीर में प्रोलैक्टिन बढ़ सकता है, जो ओव्यूलेशन को रोकता है। TSH का स्तर 2.5 mIU/L से अधिक होना अक्सर अनियमित पीरियड्स का कारण बनता है।
जब आप तनाव में होती हैं, तो शरीर कोर्टिसोल बनाता है। यह हार्मोन मस्तिष्क के 'हाइपोथैलेमस' को संकेत भेजता है कि शरीर अभी प्रेगनेंसी या पीरियड्स के लिए सुरक्षित स्थिति में नहीं है, जिससे साइकिल रुक जाती है।
यदि आपकी उम्र 40 से कम है और पीरियड्स आने बंद हो गए हैं, तो यह POF का संकेत हो सकता है। इसमें ओवरी में अंडों का स्टॉक (AMH) खत्म होने लगता है।
जब आप पूछती हैं कि period na aaye to kya kare, तो सबसे पहले यह पक्का करना जरूरी है कि क्या आप वाकई प्रेगनेंट नहीं हैं। कई बार जल्दी प्रेगनेंसी टेस्ट कर लेने से यूरिन टेस्ट में hCG का लेवल पकड़ में नहीं आता। अगर आपने घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट किया है और रिजल्ट नेगेटिव है लेकिन पीरियड 10 दिन से ज्यादा लेट हो गए हैं, तो तुरंत लैब जाकर Beta-hCG ब्लड टेस्ट करवाएं। यह यूरिन टेस्ट से कहीं ज्यादा सटीक है और हल्की से हल्की प्रेगनेंसी को भी पकड़ लेता है। इसके साथ ही एक 'पेल्विक अल्ट्रासाउंड' करवाएं ताकि बच्चेदानी की परत की मोटाई और ओवरी में एग्स (eggs) की स्थिति स्पष्ट हो सके।
यदि टेस्ट और अल्ट्रासाउंड में प्रेगनेंसी नहीं है, तो डॉक्टर का सबसे पहला कदम पीरियड्स को इंड्यूस (Induce) करना होता है। पीरियड्स इंड्यूस करने के लिए महिला को 5 से 10 दिनों के लिए प्रोजेस्टेरोन की गोलियां दी जाती हैं। ये गोलियां शरीर को यह एहसास कराती हैं कि ओव्यूलेशन हो चुका है। जैसे ही आप दवा का कोर्स खत्म करती हैं, शरीर में प्रोजेस्टेरोन का स्तर अचानक गिरता है। इस गिरावट की वजह से बच्चेदानी की परत टूटकर बाहर आती है, जिसे विड्रॉल ब्लीडिंग कहते हैं। यह रुकी हुई साइकिल को रीसेट (reset) करने का सबसे मेडिकल तरीका है।
अगर पीसीओएस की वजह से पीरियड नहीं आ रहे, तो केवल विड्रॉल ब्लीडिंग से समस्या हल नहीं होगी यानी पीरियड्स रेगुलर नहीं होंगे। पीसीओएस को मैनेज करने के लिए आपको समस्या की जड़ पर काम करना होगा।
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कई बार पीरियड्स न आने की वजह आपकी ओवरी नहीं, बल्कि गले में मौजूद थायराइड ग्लैंड या दिमाग की पिट्यूटरी ग्लैंड होती है।
यदि डॉक्टर ने किसी गंभीर बीमारी को रूल-आउट कर दिया है, तो आप अपनी लाइफस्टाइल में ये तीन बदलाव करके अपने पीरियड्स वापस शुरू कर सकती हैं।
संतान के लिए प्रयास कर रही महिलायें period na aaye to kya kare? वह नीचे दिए कुछ घरेलु उपायों के माध्यम से पीरियड्स को रेगुलर करने की कोशिश कर सकती हैं। नीचे दिए गए नुस्खे सब पर समान रूप से काम नहीं करते क्योंकि हर महिला का शरीर अलग होता है।
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जब आपके पीरियड्स रेगुलर होते हैं, तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स के लिए आपके ओव्यूलेशन और एग्स की ग्रोथ को ट्रैक करना कहीं ज्यादा सटीक हो जाता है। अनियमित पीरियड्स का सीधा मतलब यह है कि शरीर के अंदर एग्स के मैच्योर होने की प्रक्रिया में कोई हार्मोनल रुकावट आ रही है। इसका असर आईवीएफ में एग रिट्रीवल के समय मिलने वाले एग्स की संख्या और उनकी क्वालिटी पर भी पड़ सकता है। आईवीएफ की सक्सेस रेट हेल्दी एम्ब्रीओ (Embryo) पर निर्भर होती है, जिसके लिए अच्छी क्वालिटी के एग्स सबसे पहली जरूरत हैं और अच्छी क्वालिटी के एग्स तभी बनते हैं जब पीरियड्स रेगुलर और हेल्दी हों।
पीरियड्स का न आना केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है बल्कि आपके हार्मोन्स बैलेंस न होने की तरफ इशारा भी है। period na aaye to kya kare का जवाब ढूँढ रही महिलायें इस बात को समझ कर सही दिशा में कदम बढ़ाएं। घर पर बैठकर इंतज़ार करने या केवल घरेलू नुस्ख़ों के भरोसे बैठने के बजाय, सही समय पर डॉक्टर से मिलें और हार्मोनल जांच कराये। एक बार जब पीरियड्स रेगुलर हो जाते हैं तो आपके ओव्यूलेशन की संभावना बढ़ जाती है, जिससे गर्भधारण यानी प्रेगनेंसी भी आसान हो जाती है।
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नहीं, पहले अल्ट्रासाउंड से यह देखना जरूरी है कि बच्चेदानी की परत की मोटाई कितनी है। बिना डॉक्टर की सलाह के हार्मोनल दवाएं न लें।
हाँ, बहुत कम कैलोरी लेने से शरीर 'सर्वाइवल मोड' में चला जाता है और ओव्यूलेशन बंद कर देता है, जिससे पीरियड्स रुक जाते हैं।
नहीं, पीरियड्स का न आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ओव्यूलेशन नहीं हो रहा है यानी यानी एग रिलीज नहीं हो रहे।
अगर आपकी परत बहुत ज्यादा मोटी हो गई थी, तो विड्रॉल ब्लीडिंग थोड़ी हैवी हो सकती है, जो कि सामान्य है।
तनाव कम करने से हार्मोनल सिग्नल सुधरते हैं, लेकिन साइकिल को वापस सेट होने में आमतौर पर 1 से 2 महीने का समय लगता है।
हल्की एक्सरसाइज (जैसे वॉक या योग) ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है, लेकिन बहुत ज्यादा इंटेंस वर्कआउट पीरियड्स को और ज्यादा रोक सकता है।
यदि आपकी साइकिल अक्सर 35 से 40 दिन से ऊपर जाती है, तो आपको अपनी रुकी हुई फर्टिलिटी विंडो को दोबारा खोलने के लिए विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।