पीरियड में रक्त कम होना – कारण, लक्षण और समाधान

Last updated: December 22, 2025

Overview

कई महिलाओं को यह महसूस होता है कि पहले पीरियड्स में जितना ब्लड आता था, अब उतना नहीं आ रहा। कभी सिर्फ़ 1 या 2 दिन बस हल्का बहाव यानी लाइट फ्लो, कभी बस स्पॉटिंग जैसी स्थिति। ऐसे में मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या periods me blood kam aana नॉर्मल है, या शरीर किसी समस्या का संकेत दे रहा है?

पीरियड्स में ब्लड कम आना हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ स्थितियों में यह हार्मोन, प्रेगनेंसी या फर्टिलिटी से जुड़ी कंडीशन की तरफ इशारा देता है।

आगे हम समझेंगे कि पीरियड्स में ब्लड कम आने का क्या मतलब होता है, इसके कारण क्या हैं, प्रेगनेंसी से इसका क्या संबंध है और कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी हो जाता है।

पीरियड्स में ब्लड कम आना क्या होता है? (Medical Meaning)

पीरियड्स के दौरान निकलने वाला ब्लड असल में गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) की अंदरूनी परत एंडोमेट्रियम (endometrium) का हिस्सा होता है, जो हर महीने प्रेगनेंसी की तैयारी में बनती है।

जब यह परत पूरी तरह नहीं बनती या शरीर इसे कम मात्रा में बाहर निकालता है, तो पीरियड्स में ब्लड कम आता है। हर महिला के पीरियड्स का पैटर्न अलग होता है, इसलिए सिर्फ़ किसी और से तुलना करके यह तय नहीं किया जा सकता कि ब्लड “कम” है या नहीं।

लेकिन अगर पहले के मुकाबले साफ़ तौर पर फ्लो कम हो गया हो, तो उस बदलाव को समझना ज़रूरी हो जाता है।

कितनी मात्रा को “कम पीरियड्स” माना जाता है?

आमतौर पर पीरियड्स में 3 से 7 दिन तक बहाव रहना और हर दिन लाइट-मीडियम फ्लो होना नॉर्मल माना जाता है। अगर बहाव बहुत हल्का हो, सिर्फ़ दाग जैसा दिखे या 1–2 दिन में ही खत्म हो जाए, तो इसे मेडिकल भाषा में हाइपोमेनोरिया (hypomenorrhea) कहा जाता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर यही पैटर्न शुरू से रहा है, तो यह नॉर्मल भी हो सकता है। लेकिन अगर फ्लो अचानक कम हो गया है, तो इसके पीछे कारण जानना ज़रूरी हो जाता है।

पीरियड्स में ब्लड कम आने के आम कारण

हार्मोनल कारणों से ब्लड काम आना

  • महिला शरीर में एस्ट्रोजन (estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (progesterone) का संतुलन पीरियड्स के फ्लो को तय करता है। अगर एस्ट्रोजन कम हो जाए, तो एंडोमेट्रियम ठीक से मोटा नहीं बनता और उसी वजह से ब्लड कम निकलता है।
  • थायरॉइड (thyroid) की समस्या या पीसीओएस (PCOS) जैसी स्थितियों में भी यही हार्मोनल असंतुलन देखने को मिलता है, जिससे पीरियड्स हल्के हो सकते हैं।

लाइफस्टाइल से जुड़े कारण

  • बहुत कम वजन होना, अचानक वजन घट जाना या बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज करना शरीर को “सर्वाइवल मोड” में डाल सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर रिप्रोडक्टिव प्रोसेस को प्राथमिकता नहीं देता और पीरियड्स का फ्लो कम हो सकता है।
  • लगातार तनाव, नींद की कमी और मानसिक थकान भी हार्मोन के सिग्नल को प्रभावित करती है, जिससे Periods me blood kam aana हो सकता है।

मेडिकल और शारीरिक कारण

  • अगर एंडोमेट्रियम बार-बार ठीक से नहीं बन रहा, तो हर महीने निकलने वाला ब्लड भी कम हो जाएगा। यह स्थिति कभी-कभी गर्भाशय में पहले हुई सर्जरी, इंफेक्शन या बार-बार डी-एंड-सी (D&C) जैसी प्रक्रियाओं के बाद देखी जाती है।
  • लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियाँ लेने से भी कुछ महिलाओं में पीरियड्स बहुत हल्के हो जाते हैं, जो कई बार दवा बंद करने के बाद भी कुछ समय तक बना रह सकता है।

पीरियड्स में ब्लड कम आना और प्रेगनेंसी का क्या संबंध है?

यह सवाल सबसे ज़्यादा परेशान करता है। साफ़ शब्दों में समझें तो Periods me blood kam aana अपने आप में प्रेग्नेंसी को नहीं रोकता। अगर ओव्यूलेशन हो रहा है, तो हल्के पीरियड्स के बावजूद प्रेगनेंसी संभव होती है।

लेकिन अगर ब्लड कम आने की वजह एंडोमेट्रियम का बहुत पतला होना है, तो एम्ब्रीओ के ठीक से चिपकने यानी इम्प्लांटेशन (implantation) में दिक्कत आ सकती है।

इसलिए प्रेगनेंसी प्लानिंग के दौरान लगातार बहुत हल्के पीरियड्स को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

पीरियड्स में ब्लड कम आना और फर्टिलिटी पर असर

फर्टिलिटी का सीधा संबंध सिर्फ़ पीरियड्स की मात्रा से नहीं, बल्कि ओव्यूलेशन और एंडोमेट्रियम की क्वालिटी से होता है। अगर एंडोमेट्रियम बार-बार पतला बन रहा है, तो भले ही एग और स्पर्म मिल जाएँ, लेकिन प्रेगनेंसी रुकना मुश्किल हो सकता है। हालाँकि हर महिला में यह नियम लागू नहीं होता। इसीलिए सही निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए जाँच ज़रूरी होती है, न कि सिर्फ फ्लो देखकर डर जाना।

पीरियड्स में ब्लड कम आना कब नॉर्मल माना जाता है?

कुछ परिस्थितियों में Periods me blood kam aana बिल्कुल सामान्य माना जाता है। जैसे पीरियड्स की शुरुआत के पहले कुछ साल, डिलीवरी के बाद, ब्रेस्टफीडिंग के दौरान या गर्भनिरोधक दवाओं के इस्तेमाल के समय ब्लड फ्लो का कम होना नॉर्मल होता है।

इन फ़ेज़ों में शरीर हार्मोनल एडजस्टमेंट से गुजर रहा होता है, और हल्का फ्लो किसी बीमारी का संकेत नहीं होता।

कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है?

  • अगर पीरियड्स लगातार 2–3 महीने से बहुत हल्के आ रहे हों और पहले ऐसा नहीं था, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।
  • ब्लड कम आने के साथ में अगर थकान, वजन में बदलाव, बाल झड़ना या मूड ख़राब रहने लगा हो, तो यह हार्मोनल समस्या का संकेत हो सकता है।
  • अगर आप प्रेग्नेंसी की कोशिश कर रही हैं और पीरियड्स बहुत हल्के हैं, तो डॉक्टर से मिलने में देरी नहीं करनी चाहिए।

पीरियड्स में ब्लड कम हो तो क्या करें?

अगर पीरियड्स में ब्लड पहले के मुकाबले कम दिखने लगा है, तो सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि शरीर किस तरह का संकेत दे रहा है। कुछ साधारण लेकिन सही कदम कई बार हार्मोनल संतुलन को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।

  • वजन संतुलन में रखें - बहुत कम या बहुत ज़्यादा वजन होने पर हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे मेंस्ट्रुअल साइकिल प्रभावित होती है और Periods me blood kam aana और भी कम हो सकता है, इसलिए स्वस्थ वजन बनाए रखना ज़रूरी होता है।
  • नियमित लेकिन संतुलित एक्सरसाइज करें - हल्की से मध्यम एक्सरसाइज हार्मोन बैलेंस को बेहतर बनाने में मदद करती है, लेकिन बहुत ज़्यादा हैवी एक्सरसाइज से बचना चाहिए क्योंकि इससे पीरियड्स और भी हल्के हो सकते हैं।
  • हार्मोनल दवाइयाँ बिना सलाह के न लें- गर्भनिरोधक गोलियाँ लेने से पीरियड्स का फ्लो हल्का होना आम बात है, लेकिन इन्हें सिर्फ़ पीरियड “खुलवाने” के लिए या बिना डॉक्टर की सलाह के लेना सही नहीं होता।
  • लाइफस्टाइल में सकारात्मक बदलाव लाएँ - पूरी नींद, संतुलित आहार, तनाव कम करना और नियमित योग या मेडिटेशन से शरीर को हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है, जिससे पीरियड्स का पैटर्न भी बेहतर हो सकता है।

पीरियड्स में ब्लड कम हो तो क्या न करें?

  • पीरियड “खुलवाने” के लिए घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें - पीरियड्स को ज़बरदस्ती खुलवाने का कोई सुरक्षित घरेलू तरीका नहीं होता, और ऐसे उपाय शरीर के हार्मोनल संतुलन को और बिगाड़ सकते हैं।
  • खुद से हार्मोनल या पीरियड की दवाइयाँ शुरू न करें- बिना जाँच और डॉक्टर की सलाह के दवाइयाँ लेने से असली कारण छिप सकता है और समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है।
  • इंटरनेट पर पढ़ी सलाह के आधार पर साइकिल बदलने की कोशिश न करें- हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए किसी और के अनुभव को अपना इलाज मान लेना सही नहीं होता।
  • लगातार बदलाव को नज़रअंदाज़ न करें - अगर पीरियड्स का फ्लो कई महीनों से लगातार कम बना हुआ है, तो यह सोचकर छोड़ देना कि “अपने आप ठीक हो जाएगा” सही नहीं होता।

निष्कर्ष (Conclusion)

Periods me blood kam aana आना हमेशा किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता, लेकिन यह शरीर का एक महत्वपूर्ण इशारा ज़रूर हो सकता है। कई महिलाओं में यह हार्मोनल बदलाव, तनाव या जीवनशैली से जुड़ा हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में इसका संबंध प्रेगनेंसी प्लानिंग और फर्टिलिटी से भी जुड़ सकता है।

सबसे सही तरीका यही है कि सिर्फ़ ब्लड की मात्रा देखकर घबराने या खुद से इलाज शुरू करने के बजाय अपने पीरियड पैटर्न को समझें और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

Common Questions Asked

क्या पीरियड्स में ब्लड कम आना नॉर्मल हो सकता है?

 

हाँ, अगर शुरुआत से ही पीरियड्स हल्के रहे हैं या किसी खास फेज जैसे वजन में बदलाव, तनाव या गर्भनिरोधक इस्तेमाल के दौरान ऐसा हो रहा है, तो यह कई बार नॉर्मल भी हो सकता है।

क्या पीरियड्स में ब्लड कम आने से प्रेग्नेंसी में दिक्कत आती है?

 

Periods me blood kam aana अपने आप में प्रेग्नेंसी को नहीं रोकता, लेकिन अगर इसकी वजह एंडोमेट्रियम का ठीक से न बनना है, तो गर्भधारण या इम्प्लांटेशन में दिक्कत आ सकती है।

क्या कम ब्लड आने पर भी ओव्यूलेशन हो सकता है?

 

हाँ, अगर ओव्यूलेशन नियमित रूप से हो रहा है, तो हल्के पीरियड्स के बावजूद प्रेग्नेंसी संभव होती है, इसलिए सिर्फ फ्लो देखकर किसी नतीजे पर नहीं पहुँचना चाहिए।

पीरियड्स में सिर्फ स्पॉटिंग आना किसका संकेत हो सकता है?

 

लगातार स्पॉटिंग हार्मोनल असंतुलन, तनाव या कभी-कभी ओव्यूलेशन से जुड़ी हो सकती है, लेकिन अगर यह बार-बार हो रही है तो जाँच ज़रूरी होती है।

पीरियड्स में ब्लड कम हो तो कितने समय बाद डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

 

अगर 2–3 लगातार साइकल तक ब्लड बहुत कम आ रहा हो या इसके साथ थकान, वजन बदलाव या साइकल गड़बड़ हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना सही रहता है।

क्या पीरियड “खुलवाने” के लिए घरेलू उपाय सुरक्षित होते हैं?

 

नहीं, पीरियड्स को ज़बरदस्ती खुलवाने का कोई सुरक्षित घरेलू तरीका नहीं होता, और ऐसे प्रयोग शरीर के हार्मोनल संतुलन को और बिगाड़ सकते हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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