पीरियड्स में नहाना सही है या नहीं? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Last updated: September 02, 2026

सारांश (Overview)

पीरियड्स में नहाना चाहिए या नहीं, यह सवाल आज भी कई घरों में उलझन बना हुआ है। कहीं पहले दिन नहाने से मना किया जाता है, तो कहीं बाल धोने पर रोक लगाई जाती है, और यह सब सेहत के नाम पर कहा जाता है। लेकिन असल में इन बातों का कोई मेडिकल आधार नहीं है। उलटा, इन दिनों में शरीर से खून, पसीना और स्राव निकलता रहता है, इसलिए सफाई की जरूरत बाकी दिनों से ज्यादा होती है। भारत में हुई स्टडी  में यह साफ कहा गया है कि पीरियड्स के दौरान न नहाना सफाई से समझौता करता है और इससे प्रजनन तंत्र के इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। periods me nahana chahiye ya nahi का सीधा जवाब यही है कि हां, नहाना चाहिए, और रोज नहाना चाहिए। आगे हम देखेंगे कि इससे फायदे क्या हैं, नहाने का सही तरीका क्या है, कौन से मिथक चल रहे हैं, और हाइजीन के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

पीरियड्स में नहाना चाहिए या नहीं?

पीरियड्स में नहाना पूरी तरह सेफ है और डॉक्टर इन्हीं दिनों में सफाई पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह देते हैं।

नहाने से न ब्लीडिंग बढ़ती है, न रुकती है, और न ही पीरियड्स की अवधि पर कोई असर पड़ता है। पानी शरीर के बाहर से बहता है, जबकि ब्लीडिंग गर्भाशय की परत निकलने से होती है, जो हार्मोन से तय होती है। इन दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है।

पीरियड्स में नहाना क्यों जरूरी है?

साफ-सफाई बनाए रखने के लिए

इन दिनों खून, पसीना और रक्तस्राव यानी ब्लड फ्लो मिलकर बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना देते हैं। रोज नहाने से यह गंदगी का जमाव हट जाता है और इन्फेक्शन का रिस्क घट जाता है।

शरीर की दुर्गंध कम करने के लिए

दुर्गंध की वजह खून नहीं, बल्कि उसका लंबे समय तक त्वचा और पैड पर बने रहना है। नहाने और पैड समय पर बदलने से यह समस्या अपने आप हल हो जाती है, इसके लिए किसी खुशबूदार प्रोडक्ट की जरूरत नहीं होती।

ताजगी और आराम महसूस करने के लिए

गुनगुने पानी से मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं, जिससे पेट और कमर की ऐंठन में आराम महसूस होता है। थकान और चिड़चिड़ापन भी कम लगता है।

पीरियड्स में नहाने के क्या फायदे हैं?

  • शरीर की सफाई बनी रहती है, जिससे इंफेक्शन का खतरा कम होता है।
  • गुनगुने पानी से ऐंठन और कमर दर्द में राहत मिलती है।
  • पसीने और खून की वजह से होने वाली खुजली और जलन कम होती है।
  • मूड बेहतर होता है और थकान कम लगती है।
  • रात में नहाने से नींद अच्छी आती है।

पीरियड्स में कैसे नहाना चाहिए?

  • नहाने से पहले इस्तेमाल किया हुआ पैड निकालकर ठीक से लपेटकर फेंकें और हाथ धोएं।
  • गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें, बहुत गर्म पानी त्वचा को रूखा करता है।
  • बाहरी हिस्से यानी वल्वा को सादे पानी या माइल्ड, बिना खुशबू वाले साबुन से धोएं।
  • वेजाइना के अंदर पानी या कोई घोल डालकर सफाई यानी डूशिंग बिल्कुल न करें, क्योंकि अंदर की सफाई शरीर खुद करता है।
  • आगे से पीछे की ओर धोएं, ताकि बैक्टीरिया आगे की तरफ न आएं।
  • नहाने के बाद उस हिस्से को साफ तौलिये से अच्छी तरह सुखाएं और फिर नया पैड लगाएं।

पीरियड्स में नहाने से जुड़े आम मिथक

इन दिनों को लेकर चली आ रही ज्यादातर रोक टोक के पीछे परंपरा और सामाजिक रूढ़ियाँ ज़िम्मेदार हैं, इनका हेल्थ से कोई संबंध नहीं है।

 

आम धारणा

असल में क्या है

पहले दिन नहाना नहीं चाहिए

पहले दिन नहाना पूरी तरह सुरक्षित है

नहाने से ब्लीडिंग रुक जाती है

पानी का ब्लीडिंग पर कोई असर नहीं पड़ता

बाल धोने से पीरियड्स पर असर होता है

बालों और गर्भाशय का कोई संबंध नहीं है

ठंडे पानी से पीरियड्स जल्दी खत्म होते हैं

पानी का तापमान अवधि नहीं बदलता

न नहाने से शरीर की गर्मी बनी रहती है

न नहाने से सिर्फ इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है

पीरियड्स में नहाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • बाथरूम और बाल्टी साफ रखें, क्योंकि इन दिनों इंफेक्शन की आशंका थोड़ी ज्यादा रहती है।
  • खुशबू वाले साबुन, स्प्रे और इंटिमेट वॉश से बचें, ये त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं।
  • जोर से रगड़कर न धोएं, हल्के हाथ से साफ करना काफी है।
  • बहुत देर तक भरे हुए टब में न बैठें, बहते पानी से नहाना बेहतर रहता है।
  • चक्कर या बहुत कमजोरी लगे तो खड़े होकर नहाने के बजाय बैठकर नहाएं।

पीरियड्स में पर्सनल हाइजीन कैसे मैंटेन करें?

पैड को हर चार से छह घंटे में बदलें, चाहे ब्लीडिंग कम ही क्यों न हो। भारत में हुए एक बड़े अध्ययन में मेंस्ट्रुअल हाइजीन के तरीकों का सीधा संबंध प्रजनन तंत्र के इंफेक्शन यानी रिप्रोडक्टिव सिस्टम के इन्फेक्शन से देखा गया है, इसलिए रेगुलर इंटरवल पर पैड बदलने की यह आदत सबसे ज्यादा मायने रखती है।

 

क्या करें

क्यों जरूरी है

पैड हर 4 से 6 घंटे में बदलें

बैक्टीरिया के बढ़ने से बचाव

पैड बदलने से पहले और बाद में हाथ धोएं

इंफेक्शन एक जगह से दूसरी जगह न फैले

सूती अंडरवियर पहनें और रोज बदलें

नमी कम रहती है

इस्तेमाल किया पैड लपेटकर फेंकें

सफाई और सुरक्षा दोनों के लिए

कपड़ा इस्तेमाल करें तो धूप में सुखाएं

नमी में बैक्टीरिया पनपते हैं

पीरियड्स में कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

  • ब्लीडिंग इतनी ज्यादा हो कि हर एक-दो घंटे में पैड बदलना पड़े।
  • पीरियड्स सात दिन से ज्यादा चलें या बहुत अनियमित हों।
  • दर्द इतना तेज हो कि रोजमर्रा का काम रुक जाए।
  • बदबूदार डिस्चार्ज, तेज खुजली या पेशाब में जलन हो।
  • बुखार के साथ पेट के निचले हिस्से में दर्द हो।
  • पीरियड्स तीन महीने से ज्यादा न आएं।

निष्कर्ष (Conclusion)

पीरियड्स में नहाना पूरी तरह सुरक्षित है और इन दिनों सफाई का ध्यान रखना और भी जरूरी हो जाता है। खून, पसीने और स्राव की वजह से इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। नहाने से न ब्लीडिंग बढ़ती है और न ही रुकती है। गुनगुने पानी से नहाने पर ऐंठन में राहत मिल सकती है और नींद भी बेहतर होती है। 

नहाते समय पैड निकालकर गुनगुने पानी और माइल्ड साबुन से सिर्फ बाहरी हिस्से को साफ करें। डूशिंग न करें और नहाने के बाद अच्छी तरह सुखाकर नया पैड लगाएं। पहले दिन न नहाने या बाल न धोने की बातें सिर्फ मिथक हैं। बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, तेज दर्द या बदबूदार डिस्चार्ज हो, तो डॉक्टर से मिलें। 

पीरियड्स में नहाने के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या पीरियड्स के पहले दिन नहा सकते हैं?

2. क्या पीरियड्स में ठंडे पानी से नहाना चाहिए?

3. क्या पीरियड्स में गर्म पानी से नहाना फायदेमंद है?

4. क्या पीरियड्स में रोज नहाना जरूरी है?

5. क्या पीरियड्स में नहाने से ब्लीडिंग बढ़ जाती है?

6. क्या पीरियड्स में बाल धो सकते हैं?

7. क्या पीरियड्स में नहाने से पीरियड्स जल्दी खत्म हो जाते हैं?

8. क्या पीरियड्स में नहाने से इंफेक्शन का खतरा कम होता है?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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