पोस्टीरियर प्लेसेंटा क्या है? लक्षण, कारण और गर्भावस्था में महत्व (Posterior Placenta in Hindi)

Last updated: December 22, 2025

Overview

प्लेसेंटा यानी गर्भनाल गर्भाशय की दीवार से जुड़कर माँ और बच्चे के बीच पोषण, ऑक्सीजन और वेस्ट प्रोडक्ट्स का आदान-प्रदान करता है। पोस्टीरियर प्लेसेंटा या प्लेसेंटा पोस्टीरियर सबसे सामान्य और सुरक्षित पोजीशन मानी जाती है। आगे समझते हैं Placenta Posterior Meaning in Hindi, इसके क्या फायदे हैं, क्या कोई जोखिम है, और प्रेगनेंसी में इसका क्या महत्व है।

प्लेसेंटा क्या होता है? (What is Placenta)

प्लेसेंटा एक अस्थायी अंग है जो सिर्फ प्रेगनेंसी के दौरान बनता है और बच्चे के जन्म के बाद शरीर से बाहर निकल जाता है। यह आमतौर पर गर्भधारण के 10-12 हफ्ते तक पूरी तरह विकसित हो जाता है और पूरी प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे की लाइफलाइन बना रहता है।

प्लेसेंटा के मुख्य कार्य:

  • माँ के खून से पोषक तत्व और ऑक्सीजन लेकर बच्चे तक पहुंचाना
  • बच्चे के वेस्ट प्रोडक्ट्स और कार्बन डाइऑक्साइड को माँ के शरीर में भेजना ताकि वे बाहर निकल सकें
  • हॉर्मोन्स बनाना जो प्रेगनेंसी को बनाए रखने में मदद करते हैं
  • बच्चे को इंफेक्शन और हानिकारक पदार्थों से बचाना
  • इम्यून प्रोटेक्शन प्रदान करना

प्लेसेंटा एक चपटे, गोल आकार की संरचना होती है जो पूरी तरह विकसित होने पर लगभग 15-20 सेंटीमीटर व्यास की और 2-3 सेंटीमीटर मोटा होता है। इसका वजन लगभग 500-600 ग्राम होता है।

Placenta posterior meaning in Hindi है "पिछली दीवार पर स्थित प्लेसेंटा"। जब प्लेसेंटा गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की पिछली दीवार (यानी रीढ़ की हड्डी की तरफ) पर अटैच होता है, तो इसे पोस्टीरियर प्लेसेंटा कहते हैं। यह प्लेसेंटा की सबसे आम पोजीशन है और लगभग 50-60% प्रेगनेंसीज़ में पाई जाती है।

प्लेसेंटा की विभिन्न पोजीशन (Placenta Positions in Hindi)

प्लेसेंटा गर्भाशय में कहीं भी अटैच हो सकता है। इसकी मुख्य पोजीशन हैं:

पोस्टीरियर प्लेसेंटा (Posterior Placenta):

गर्भाशय की पिछली दीवार पर, रीढ़ की तरफ। यह सबसे सामान्य और सुरक्षित पोजीशन है। इसमें बच्चे की गतिविधियां जल्दी महसूस होती हैं क्योंकि प्लेसेंटा पेट की अगली दीवार और बच्चे के बीच में नहीं आता।

एंटीरियर प्लेसेंटा (Anterior Placenta):

इस पोजीशन में गर्भाशय की अगली दीवार पर यानी पेट की तरफ प्लेसेंटा लगा होता है। यह भी बिल्कुल नॉर्मल है। इसमें बच्चे की हलचल थोड़ी देर से या कम महसूस हो सकती है क्योंकि प्लेसेंटा बीच में कुशन की तरह काम करता है।

फंडल प्लेसेंटा (Fundal Placenta):

गर्भाशय के ऊपरी हिस्से (फंडस) पर प्लेसेंटा लगा होता है जो नॉर्मल पोजीशन है।

लेटरल प्लेसेंटा (Lateral Placenta):

इस पोजीशन में प्लेसेंटा यूट्रस की दाईं या बाईं दीवार पर लगता है। यह भी सामान्य है।

लो-लाइंग प्लेसेंटा या प्लेसेंटा प्रीविया (Low-lying Placenta/Placenta Previa):

जब प्लेसेंटा गर्भाशय के निचले हिस्से में, सर्विक्स के पास या उसे ढकते हुए लगता है। यह सामान्य नहीं है और इसमें विशेष देखभाल की ज़रूरत होती है।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा की खूबियाँ

पोस्टीरियर प्लेसेंटा की कई खूबियां हैं जो प्रेगनेंसी को आसान और सुखद बनाती हैं:

बच्चे की हलचल जल्दी और साफ महसूस होना:

चूंकि प्लेसेंटा पीछे की तरफ है और पेट की अगली दीवार खाली है, इसलिए बच्चे की किक्स और मूवमेंट्स बहुत साफ और जल्दी महसूस होती हैं। ज़्यादातर महिलाएं 18-20 हफ्ते में ही बच्चे की हलचल महसूस करने लगती हैं, कभी-कभी और भी जल्दी।

नॉर्मल डिलीवरी में आसानी:

पोस्टीरियर प्लेसेंटा वाली महिलाओं में नॉर्मल वजाइनल डिलीवरी की संभावना अच्छी होती है क्योंकि प्लेसेंटा बर्थ कैनाल से दूर है।

अल्ट्रासाउंड में बच्चे की बेहतर इमेजिंग:

डॉक्टर को अल्ट्रासाउंड के दौरान बच्चे की स्पष्ट तस्वीरें मिलती हैं क्योंकि प्लेसेंटा बीच में नहीं आता।

कम कम्प्लेक्सिटी:

पोस्टीरियर प्लेसेंटा वाली महिलाओं में प्लेसेंटल एब्रप्शन (प्लेसेंटा का समय से पहले अलग होना) का खतरा थोड़ा कम होता है।

भ्रूण का ऑप्टिमल पोजीशन:

कुछ स्टडीज़ के अनुसार, पोस्टीरियर प्लेसेंटा होने पर बच्चे के हेड-डाउन पोजीशन (ऑक्सिपिटो-एंटीरियर) में होने की संभावना थोड़ी ज़्यादा होती है, जो नॉर्मल डिलीवरी के लिए आदर्श पोजीशन है।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा के लक्षण

दरअसल, पोस्टीरियर प्लेसेंटा के कोई विशेष लक्षण नहीं होते। यह सिर्फ प्लेसेंटा की पोजीशन है, कोई बीमारी या समस्या नहीं। इसका पता अल्ट्रासाउंड से ही चलता है। हालांकि, कुछ चीज़ें आपको नोटिस हो सकती हैं:

बच्चे की हलचल जल्दी महसूस होना:

अगर आपको 18-20 हफ्ते या उससे पहले ही बच्चे की किक्स साफ महसूस होने लगें, तो यह पोस्टीरियर प्लेसेंटा का संकेत हो सकता है।

तेज़ और स्पष्ट किक्स:

पोस्टीरियर प्लेसेंटा में बच्चे की हर हलचल बहुत साफ और तेज़ महसूस होती है।

बेबी बंप आगे की तरफ ज़्यादा उभरा हुआ:

कभी-कभी पोस्टीरियर प्लेसेंटा वाली महिलाओं का बेबी बंप आगे की तरफ ज़्यादा निकला हुआ दिखता है।

लेकिन याद रखें प्लेसेंटा की सटीक पोजीशन सिर्फ अल्ट्रासाउंड से ही पता चलती है। प्लेसेंटा की पोजीशन प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ी बदल सकती है क्योंकि गर्भाशय बढ़ता है, लेकिन आमतौर पर दूसरी तिमाही तक यह अपनी फाइनल पोजीशन ले लेती है।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा और बेबी जेंडर

एक आम मिथक है कि प्लेसेंटा की पोजीशन से बच्चे का लिंग पता चल सकता है। कुछ लोग "रामज़ी थ्योरी" का दावा करते हैं कि पोस्टीरियर प्लेसेंटा का मतलब लड़की होती है और एंटीरियर का मतलब लड़का। लेकिन यह बिल्कुल गलत है और इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। प्लेसेंटा की पोजीशन पूरी तरह से रैंडम होती है और बच्चे के लिंग से इसका कोई संबंध नहीं है। बच्चे का लिंग सिर्फ जेनेटिक्स और क्रोमोसोम्स से तय होता है।

क्या पोस्टीरियर प्लेसेंटा में कोई जोखिम है?

पोस्टीरियर प्लेसेंटा अपने आप में कोई जोखिम नहीं है। यह बिल्कुल नॉर्मल और सुरक्षित पोजीशन है। हालांकि, कुछ स्थितियों में सावधानी बरतनी चाहिए:

पोस्टीरियर लो-लाइंग प्लेसेंटा:

अगर प्लेसेंटा पोस्टीरियर है लेकिन बहुत नीचे यानी सर्विक्स के पास है, तो इसे "पोस्टीरियर प्लेसेंटा प्रीविया" कहते हैं। इसमें ब्लीडिंग का खतरा रहता है और C-सेक्शन की ज़रूरत हो सकती है। हालांकि, ज़्यादातर केसेस में प्रेगनेंसी बढ़ने के साथ प्लेसेंटा ऊपर की तरफ माइग्रेट कर जाती है।

एपिड्यूरल एनेस्थीसिया:

अगर डिलीवरी के दौरान एपिड्यूरल (दर्द निवारक इंजेक्शन) की ज़रूरत हो, तो पोस्टीरियर प्लेसेंटा होने पर इसे देना थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि प्लेसेंटा रीढ़ के पास होती है। लेकिन अनुभवी एनेस्थीसियोलॉजिस्ट इसे आसानी से मैनेज कर लेते हैं।

पीठ दर्द:

कुछ महिलाओं को पोस्टीरियर प्लेसेंटा होने पर प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ा ज़्यादा पीठ दर्द महसूस हो सकता है, खासकर अगर बच्चा भी पोस्टीरियर पोजीशन यानी बैक-टू-बैक (back-to-back) में हो। हालांकि, यह बहुत आम नहीं है।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा और IVF/ART प्रेगनेंसी

जो महिलाएं IVF (In Vitro Fertilization) या दूसरी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीकों से प्रेग्नेंट होती हैं, उनमें भी प्लेसेंटा की पोजीशन बिल्कुल नॉर्मल प्रेगनेंसी की तरह ही रैंडम होती है। IVF से प्लेसेंटा की पोजीशन प्रभावित नहीं होती। कुछ बातें ध्यान रखें:

IVF प्रेगनेंसी में करीबी मॉनिटरिंग:

IVF से हुई प्रेगनेंसी में वैसे भी ज़्यादा सावधानी बरती जाती है। नियमित अल्ट्रासाउंड से प्लेसेंटा की पोजीशन, ग्रोथ और फंक्शन की जांच होती रहती है।

मल्टिपल प्रेगनेंसी:

IVF में ट्विन्स या ट्रिपलेट्स की संभावना ज़्यादा होती है। मल्टिपल प्रेगनेंसी में हर बच्चे की अपनी अलग प्लेसेंटा हो सकती है या एक ही प्लेसेंटा शेयर हो सकती है।

प्लेसेंटल कॉम्प्लिकेशन्स का रिस्क:

IVF प्रेगनेंसी में प्लेसेंटा प्रीविया, प्लेसेंटल एब्रप्शन जैसी जटिलताओं का खतरा थोड़ा बढ़ जाता है, इसलिए नियमित चेकअप बहुत ज़रूरी है।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा बिल्कुल नॉर्मल है:

अगर IVF के बाद आपकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में "posterior placenta" लिखा है, तो घबराने की कोई बात नहीं। यह एक अच्छा और सुरक्षित साइन है।

प्लेसेंटा की सेहत कैसे बनाए रखें?

चाहे आपकी प्लेसेंटा पोस्टीरियर हो या किसी और पोजीशन में, उसकी सेहत बनाए रखना बेहद ज़रूरी है:

  • संतुलित आहार: हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अंडे, मछली, दूध, फल, ड्राई फ्रूट्स खाएं। ये सभी प्लेसेंटा को स्वस्थ रखते हैं।
  • फोलिक एसिड और आयरन सप्लीमेंट: डॉक्टर की सलाह से नियमित लें।
  • स्ट्रेस मैनेजमेंट: तनाव प्लेसेंटा के ब्लड फ्लो को कम कर सकता है। योगा, मेडिटेशन और सकारात्मक सोच रखें।
  • नियमित हल्का व्यायाम: प्रेगनेंसी-सेफ एक्सरसाइज़ करें जैसे वॉकिंग, स्विमिंग (डॉक्टर की सलाह से)।
  • ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर कंट्रोल में रखें: हाई BP और डायबिटीज प्लेसेंटा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा और डिलीवरी

पोस्टीरियर प्लेसेंटा वाली ज़्यादातर महिलाओं की नॉर्मल वजाइनल डिलीवरी होती है। यह पोजीशन नॉर्मल डिलीवरी के लिए बिल्कुल सुरक्षित है। डिलीवरी के तुरंत बाद प्लेसेंटा भी बाहर निकल जाती है, जिसे "थर्ड स्टेज ऑफ लेबर" कहते हैं। डॉक्टर प्लेसेंटा को जांचते हैं यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह पूरी तरह बाहर आ गई है और कोई टुकड़ा अंदर नहीं रह गया है।

अगर किसी कारणवश C-सेक्शन की ज़रूरत हो, जैसे ब्रीच बेबी, मल्टिपल प्रेगनेंसी, या अन्य मेडिकल कारण, तो पोस्टीरियर प्लेसेंटा कोई समस्या नहीं बनती। डॉक्टर आसानी से बच्चे और प्लेसेंटा दोनों को निकाल लेते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

Placenta posterior meaning in Hindi को समझें तो यह गर्भाशय की पिछली दीवार पर स्थित प्लेसेंटा है, और यह बिल्कुल नॉर्मल, सुरक्षित और सबसे आम पोजीशन है। इसका मतलब है कि आपकी प्लेसेंटा सही जगह पर है और आपकी प्रेगनेंसी सामान्य रूप से आगे बढ़ रही है। बस नियमित प्रीनेटल चेकअप, पौष्टिक आहार, और सकारात्मक सोच के साथ अपनी प्रेगनेंसी का आनंद लें। याद रखें, चाहे आपकी प्रेगनेंसी नेचुरल हो या IVF से, प्लेसेंटा की पोजीशन रैंडम होती है और पोस्टीरियर प्लेसेंटा आपके और आपके बच्चे के लिए सुरक्षित है।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Placenta posterior meaning in Hindi क्या है?

 

Placenta posterior का मतलब है गर्भाशय की पिछली दीवार (रीढ़ की तरफ) पर स्थित प्लेसेंटा। यह सबसे सामान्य और सुरक्षित पोजीशन है।

क्या पोस्टीरियर प्लेसेंटा खतरनाक है?

 

बिल्कुल नहीं। पोस्टीरियर प्लेसेंटा बिल्कुल नॉर्मल और सुरक्षित है। यह सबसे आम प्लेसेंटल पोजीशन है।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा के क्या फायदे हैं?

 

बच्चे की हलचल जल्दी और साफ महसूस होना, नॉर्मल डिलीवरी में आसानी, अल्ट्रासाउंड में बेहतर इमेजिंग, और कम जटिलताएं इसके मुख्य फायदे हैं।

क्या पोस्टीरियर प्लेसेंटा से बच्चे का लिंग पता चल सकता है?

 

नहीं, यह बिल्कुल गलत धारणा है। प्लेसेंटा की पोजीशन से बच्चे के लिंग का कोई संबंध नहीं है।

क्या पोस्टीरियर प्लेसेंटा होने पर नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है?

 

हाँ, बिल्कुल। पोस्टीरियर प्लेसेंटा नॉर्मल वजाइनल डिलीवरी के लिए बिल्कुल सुरक्षित है।

क्या IVF प्रेगनेंसी में पोस्टीरियर प्लेसेंटा अलग होती है?

 

नहीं, IVF या नेचुरल प्रेगनेंसी में प्लेसेंटा की पोजीशन एक जैसी ही रैंडम होती है। IVF से प्लेसेंटा की पोजीशन प्रभावित नहीं होती।

पोस्टीरियर प्लेसेंटा में कौन सी सावधानियां रखनी चाहिए?

 

कोई विशेष सावधानियां नहीं हैं। बस नियमित प्रीनेटल चेकअप, संतुलित आहार, पर्याप्त आराम, और डॉक्टर की सलाह फॉलो करें।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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