प्रेगनेंसी के दौरान सबसे ज़्यादा डराने वाली स्थिति तब आती है जब ब्लीडिंग हो जाये या पैंटी पर खून के धब्बे दिखाई दे जाएं। उस समय हर गर्भवती महिला के मन में यह सवाल ज़रूर आता है कि pregnancy me bleeding kab hoti hai और क्या इसका मतलब हमेशा गर्भपात यानी मिसकैरेज होता है? क्योंकि इससे डरावना और क्या हो सकता है? लेकिन रुकिए, हर ब्लीडिंग का मतलब मिसकैरेज नहीं होता। सच यह है कि तीन में से एक महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कुछ न कुछ ब्लीडिंग होती है और उनमें से ज़्यादातर की प्रेगनेंसी बिल्कुल नॉर्मल रहती है। तो फिर कैसे पता चले कि कौन सी ब्लीडिंग नॉर्मल है और कौन सी नहीं? इस आर्टिकल में बताएंगे कि pregnancy me bleeding kab hoti hai, ब्लीडिंग के दौरान खून के रंग से क्या पता चलता है, और कब इमरजेंसी की सिचुएशन होती है जिसमें तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
बहुत सी महिलाएं स्पॉटिंग और ब्लीडिंग को एक ही समझती हैं, लेकिन दोनों अलग हैं।
प्रेगनेंसी में हल्की स्पॉटिंग अक्सर नॉर्मल होती है। लेकिन अगर पीरियड्स जैसी ब्लीडिंग हो, तो यह गंभीर हो सकती है।
खून का रंग बहुत कुछ बताता है। Pregnancy me bleeding kab hoti hai इसे समझने के लिए आपको ब्लीडिंग के समय खून का रंग पहचानना आना चाहिए जिससे आप बिना पैनिक हुए कोई निर्णय ले सकें।
पहले तीन महीनों में ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं।
जब फर्टिलाइज़्ड एग गर्भाशय की दीवार से चिपकता है, तो कुछ छोटी नसें टूट सकती हैं। इससे हल्की स्पॉटिंग होती है।
प्रेगनेंसी में सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा में खून का बहाव बढ़ जाता है। सेक्स के बाद या पेल्विक एग्ज़ाम के बाद हल्की स्पॉटिंग हो सकती है।
पहली तिमाही में करीब 10-15% प्रेगनेंसी मिसकैरेज में खत्म होती हैं। इसमें ब्लीडिंग एक प्रमुख लक्षण है।
जब भ्रूण गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब में ठहर जाए, तो इसे एक्टोपिक प्रेगनेंसी कहते हैं। यह जानलेवा हो सकती है।
पहली तिमाही के बाद ब्लीडिंग होना सामान्य नहीं होता है, इसीलिए अगर ब्लीडिंग होती है तो इसे गंभीरता से लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
जब प्लेसेंटा गर्भाशय के मुँह को ढक लेता है या उसके बहुत पास होता है।
जब प्लेसेंटा समय से पहले गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाए।
अगर 37 हफ्ते से पहले ब्लीडिंग के साथ पेट में कसाव या म्यूकस प्लग निकले, तो यह प्रीटर्म लेबर हो सकता है।
ब्लीडिंग होते समय अगर नीचे दिए कुछ लक्षण दिखाई दें तो बिना इंतज़ार किये तुरंत हॉस्पिटल जाना चाहिए।
IVF से प्रेगनेंट हुई महिलाओं में शुरुआती ब्लीडिंग थोड़ी ज़्यादा कॉमन होती है।
जब ब्लीडिंग की शिकायत लेकर जाएंगी, तो डॉक्टर कुछ चीज़ें चेक करेंगे।
अगर सब ठीक है तो बेड रेस्ट और कुछ सावधानियाँ बताएंगे। अगर कोई समस्या है तो उसका इलाज करेंगे।
Pregnancy me bleeding kab hoti hai, यह समझना सिर्फ़ डर को कम करने के लिए नहीं, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेने के लिए ज़रूरी है।
याद रखें कि हर प्रेगनेंसी अलग होती है। कई बार बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग के बाद भी महिलाएं एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं, और कई बार हल्की सी स्पॉटिंग भी बड़ी चेतावनी हो सकती है।
अपने शरीर के इशारों को सुनें, नियमित रूप से अपनी सोनोग्राफी करवाएं और डॉक्टर के संपर्क में रहें । आपकी थोड़ी सी सतर्कता और डॉक्टर का सही मार्गदर्शन आपकी माँ बनने की जर्नी को सुरक्षित और सुखद बना सकता है।
हल्की स्पॉटिंग, खासकर पहली तिमाही में, आम है। लेकिन पीरियड जैसी ब्लीडिंग नॉर्मल नहीं है।
आमतौर पर 1 से 2 दिन। इससे ज़्यादा हो तो डॉक्टर से बात करें।
ज़रूरी नहीं कि ब्लीडिंग का मतलब कुछ गलत हो। अल्ट्रासाउंड से पता चलता है कि बच्चे की धड़कन ठीक है या नहीं।
प्रेगनेंसी में सर्विक्स संवेदनशील होती है। हल्की स्पॉटिंग नॉर्मल है। लेकिन अगर ज़्यादा हो या बार-बार हो, तो डॉक्टर को बताएं।
नहीं। प्रेगनेंसी में असली पीरियड नहीं आते। जो ब्लीडिंग होती है उसके दूसरे कारण होते हैं।
यह ब्लीडिंग की वजह पर निर्भर करता है। डॉक्टर आमतौर पर 24 से 48 घंटे बेड रेस्ट और 1 से 2 हफ्ते सेक्स से परहेज़ करने की सलाह देते हैं।
यह पहली तिमाही से ज़्यादा गंभीर हो सकती है। प्लेसेंटा प्रीविया या अब्रप्शन का खतरा होता है। तुरंत अस्पताल जाएं।