Pregnancy Me Bleeding Kab Hoti Hai? नॉर्मल और रिस्क फैक्टर्स

Last updated: February 10, 2026

Overview

प्रेगनेंसी के दौरान सबसे ज़्यादा डराने वाली स्थिति तब आती है जब ब्लीडिंग हो जाये या पैंटी पर खून के धब्बे दिखाई दे जाएं। उस समय हर गर्भवती महिला के मन में यह सवाल ज़रूर आता है कि pregnancy me bleeding kab hoti hai और क्या इसका मतलब हमेशा गर्भपात यानी मिसकैरेज होता है? क्योंकि इससे डरावना और क्या हो सकता है? लेकिन रुकिए, हर ब्लीडिंग का मतलब मिसकैरेज नहीं होता। सच यह है कि तीन में से एक महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कुछ न कुछ ब्लीडिंग होती है और उनमें से ज़्यादातर की प्रेगनेंसी बिल्कुल नॉर्मल रहती है। तो फिर कैसे पता चले कि कौन सी ब्लीडिंग नॉर्मल है और कौन सी नहीं? इस आर्टिकल में बताएंगे कि pregnancy me bleeding kab hoti hai, ब्लीडिंग के दौरान खून के रंग से क्या पता चलता है, और कब इमरजेंसी की सिचुएशन होती है जिसमें तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

स्पॉटिंग और ब्लीडिंग में क्या फ़र्क है?

बहुत सी महिलाएं स्पॉटिंग और ब्लीडिंग को एक ही समझती हैं, लेकिन दोनों अलग हैं।

  • स्पॉटिंग: जब कपड़े पर बस कुछ बूँदें या हल्का सा दाग लगे और टॉयलेट पेपर से पोंछने पर उस पर हल्का गुलाबी या भूरा रंग दिखे।। इसमें फ्लो इतना कम होता है कि पैड लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
  • ब्लीडिंग: जब खून पीरियड्स जैसा आए, ब्लीडिंग का रंग गहरा लाल हो और उसमें फ्लो हो। इस समय पैड लगाने की जरुरत पड़ सकती है।

प्रेगनेंसी में हल्की स्पॉटिंग अक्सर नॉर्मल होती है। लेकिन अगर पीरियड्स जैसी ब्लीडिंग हो, तो यह गंभीर हो सकती है।

ब्लीडिंग के समय खून का रंग क्या बताता है?

खून का रंग बहुत कुछ बताता है। Pregnancy me bleeding kab hoti hai इसे समझने के लिए आपको ब्लीडिंग के समय खून का रंग पहचानना आना चाहिए जिससे आप बिना पैनिक हुए कोई निर्णय ले सकें।

  • हल्का गुलाबी या पिंक: अगर ब्लीडिंग का रंग हल्का गुलाबी यानी पिंक है तो यह ताज़ा खून है जो थोड़ी मात्रा में निकला होता है। इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग या सर्विक्स में हल्की जलन से ऐसा होता है जो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती।
  • भूरा या कत्थई: अगर ब्लीडिंग का रंग भूरा या कत्थई है, तो यह पुराना खून होता है जिसे बाहर निकलने में समय लगा। अक्सर यह इम्प्लांटेशन के बाद या शरीर द्वारा पुराने खून की सफ़ाई के दौरान दिखता है और ज़्यादातर मामलों में नॉर्मल माना जाता है।
  • गहरा लाल: अगर ब्लीडिंग का रंग गहरा लाल है, तो यह ताज़ा खून होने का संकेत देता है और मात्रा भी ज़्यादा हो सकती है। अगर इसके साथ खून के थक्के निकलें या पेट में दर्द हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
  • चमकीला लाल और लगातार: अगर खून का रंग चमकीला लाल है और ब्लीडिंग रुक नहीं रही है, तो यह गंभीर स्थिति हो सकती है। यह प्लेसेंटा की समस्या या मिसकैरेज के लक्षण हो सकते हैं, इसलिए बिना देर किए अस्पताल जाना ज़रूरी है।

पहली तिमाही में ब्लीडिंग क्यों होती है?

पहले तीन महीनों में ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं।

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग

जब फर्टिलाइज़्ड एग गर्भाशय की दीवार से चिपकता है, तो कुछ छोटी नसें टूट सकती हैं। इससे हल्की स्पॉटिंग होती है।

  • कब होती है: पीरियड मिस होने से 2-3 दिन पहले या आसपास
  • कैसी होती है: हल्की गुलाबी या भूरी, 1-2 दिन में खत्म, बिना दर्द के
  • क्या करें: कुछ नहीं, यह नॉर्मल है इसलिए सिर्फ प्रेगनेंसी टेस्ट करें।

सर्विक्स में बदलाव

प्रेगनेंसी में सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा में खून का बहाव बढ़ जाता है। सेक्स के बाद या पेल्विक एग्ज़ाम के बाद हल्की स्पॉटिंग हो सकती है।

  • कब होती है: सेक्स या इंटरनल चेकअप के बाद
  • कैसी होती है: हल्की गुलाबी, कुछ घंटों में बंद
  • क्या करें: घबराएं नहीं। अगर बार-बार हो तो डॉक्टर को बताएं।

मिसकैरेज का खतरा

पहली तिमाही में करीब 10-15% प्रेगनेंसी मिसकैरेज में खत्म होती हैं। इसमें ब्लीडिंग एक प्रमुख लक्षण है।

  • कब होती है: 6 से 12 हफ्ते के बीच
  • कैसी होती है: गहरे लाल रंग की, क्लॉट्स के साथ, तेज़ पेट दर्द या कमर दर्द
  • क्या करें: तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। अल्ट्रासाउंड से स्थिति साफ होगी।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी

जब भ्रूण गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब में ठहर जाए, तो इसे एक्टोपिक प्रेगनेंसी कहते हैं। यह जानलेवा हो सकती है।

  • कब होती है: 4 से 10 हफ्ते के बीच
  • कैसी होती है: एक तरफ पेट में तेज़ दर्द के साथ ब्लीडिंग, चक्कर आना, कंधे में दर्द
  • क्या करें: यह इमरजेंसी है, तुरंत अस्पताल जाएं।

दूसरी और तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग

पहली तिमाही के बाद ब्लीडिंग होना सामान्य नहीं होता है, इसीलिए अगर ब्लीडिंग होती है तो इसे गंभीरता से लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

प्लेसेंटा प्रीविया

जब प्लेसेंटा गर्भाशय के मुँह को ढक लेता है या उसके बहुत पास होता है।

  • कब होती है: 20 हफ्ते के बाद, अक्सर तीसरी तिमाही में
  • कैसी होती है: बिना दर्द के चमकीली लाल ब्लीडिंग, अचानक शुरू होती है
  • क्या करें: तुरंत अस्पताल जाएं। बेड रेस्ट या अर्ली डिलीवरी की ज़रूरत पड़ सकती है।

प्लेसेंटल अब्रप्शन

जब प्लेसेंटा समय से पहले गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाए।

  • कब होती है: आमतौर पर तीसरी तिमाही में
  • कैसी होती है: गहरे रंग की ब्लीडिंग, तेज़ पेट दर्द, पेट कड़ा महसूस होना
  • क्या करें: यह इमरजेंसी है। तुरंत अस्पताल जाएं।

प्रीटर्म लेबर के संकेत

अगर 37 हफ्ते से पहले ब्लीडिंग के साथ पेट में कसाव या म्यूकस प्लग निकले, तो यह प्रीटर्म लेबर हो सकता है।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?

ब्लीडिंग होते समय अगर नीचे दिए कुछ लक्षण दिखाई दें तो बिना इंतज़ार किये तुरंत हॉस्पिटल जाना चाहिए।

  • पैड 2 घंटे में भीग जाए।
  • बड़े क्लॉट्स निकलें।
  • तेज़ पेट दर्द या कमर दर्द हो।
  • चक्कर आए या बेहोशी जैसा लगे।
  • बुखार हो।
  • बदबूदार डिस्चार्ज हो।

IVF प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग

IVF से प्रेगनेंट हुई महिलाओं में शुरुआती ब्लीडिंग थोड़ी ज़्यादा कॉमन होती है।

  • क्यों होती है: एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट की वजह से सर्विक्स संवेदनशील हो जाती है। ट्विन प्रेगनेंसी में भी ब्लीडिंग ज़्यादा होती है।
  • क्या करें: अपने IVF डॉक्टर को तुरंत बताएं। वो bHCG लेवल और अल्ट्रासाउंड से स्थिति समझेंगे और उसके अनुसार आगे कोई एक्शन लेंगे।

ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर क्या करेंगे?

जब ब्लीडिंग की शिकायत लेकर जाएंगी, तो डॉक्टर कुछ चीज़ें चेक करेंगे।

  • पहला: अल्ट्रासाउंड से देखेंगे कि बच्चे की धड़कन आ रही है या नहीं, प्लेसेंटा कहाँ है, और गर्भाशय में सब ठीक है या नहीं।
  • दूसरा: bHCG ब्लड टेस्ट से देखेंगे कि प्रेगनेंसी हॉर्मोन सही तरह से बढ़ रहा है या नहीं। दो दिन के अंतर पर दोबारा टेस्ट करके तुलना करेंगे।
  • तीसरा: इंटरनल एग्ज़ाम से देखेंगे कि सर्विक्स बंद है या खुल रहा है। बंद सर्विक्स अच्छा संकेत है।

अगर सब ठीक है तो बेड रेस्ट और कुछ सावधानियाँ बताएंगे। अगर कोई समस्या है तो उसका इलाज करेंगे।

ब्लीडिंग हो तो क्या करें?

  • सबसे पहले घबराएँ नहीं: अचानक ब्लीडिंग देखकर डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन पहले खुद को शांत करें और कुछ गहरी साँसें लें। घबराहट से स्थिति समझना और सही फैसला लेना मुश्किल हो जाता है।
  • ब्लीडिंग को ध्यान से नोट करें: खून का रंग कैसा है, मात्रा कितनी है, और क्या क्लॉट्स निकल रहे हैं, इन बातों पर ध्यान दें।
  • पैड का इस्तेमाल करें: ब्लीडिंग के दौरान पैड लगाएँ, टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल न करें। इससे इंफेक्शन का खतरा कम रहता है और ब्लीडिंग का सही अंदाज़ा भी मिलता है।
  • सेक्स और भारी काम से बचें: फिलहाल सेक्स, ज़ोर लगाने वाला काम या भारी सामान उठाने से दूर रहें, ताकि ब्लीडिंग और न बढ़े।
  • डॉक्टर से संपर्क करें: अपनी स्थिति डॉक्टर को फोन पर साफ़-साफ़ बताएं और उनकी सलाह के अनुसार अगला कदम उठाएँ। अगर डॉक्टर आने को कहें, तो देर न करें।

एक्सपर्ट की सलाह

Pregnancy me bleeding kab hoti hai, यह समझना सिर्फ़ डर को कम करने के लिए नहीं, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेने के लिए ज़रूरी है।

याद रखें कि हर प्रेगनेंसी अलग होती है। कई बार बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग के बाद भी महिलाएं एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं, और कई बार हल्की सी स्पॉटिंग भी बड़ी चेतावनी हो सकती है।

अपने शरीर के इशारों को सुनें, नियमित रूप से अपनी सोनोग्राफी करवाएं और डॉक्टर के संपर्क में रहें । आपकी थोड़ी सी सतर्कता और डॉक्टर का सही मार्गदर्शन आपकी माँ बनने की जर्नी को सुरक्षित और सुखद बना सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना नॉर्मल है?

 

हल्की स्पॉटिंग, खासकर पहली तिमाही में, आम है। लेकिन पीरियड जैसी ब्लीडिंग नॉर्मल नहीं है।

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग कितने दिन होती है?

 

आमतौर पर 1 से 2 दिन। इससे ज़्यादा हो तो डॉक्टर से बात करें।

ब्लीडिंग हो तो क्या बच्चा ठीक है?

 

ज़रूरी नहीं कि ब्लीडिंग का मतलब कुछ गलत हो। अल्ट्रासाउंड से पता चलता है कि बच्चे की धड़कन ठीक है या नहीं।

सेक्स के बाद ब्लीडिंग हो तो क्या करें?

 

प्रेगनेंसी में सर्विक्स संवेदनशील होती है। हल्की स्पॉटिंग नॉर्मल है। लेकिन अगर ज़्यादा हो या बार-बार हो, तो डॉक्टर को बताएं।

क्या प्रेगनेंसी में पीरियड आ सकते हैं?

 

नहीं। प्रेगनेंसी में असली पीरियड नहीं आते। जो ब्लीडिंग होती है उसके दूसरे कारण होते हैं।

ब्लीडिंग के बाद कितने दिन आराम करना चाहिए?

 

यह ब्लीडिंग की वजह पर निर्भर करता है। डॉक्टर आमतौर पर 24 से 48 घंटे बेड रेस्ट और 1 से 2 हफ्ते सेक्स से परहेज़ करने की सलाह देते हैं।

दूसरी या तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग हो तो क्या करें?

 

यह पहली तिमाही से ज़्यादा गंभीर हो सकती है। प्लेसेंटा प्रीविया या अब्रप्शन का खतरा होता है। तुरंत अस्पताल जाएं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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