माँ बनने का एहसास जितना सुखद होता है, मन में जिज्ञासा और घबराहट भी उतनी ही होती है। हर गर्भवती महिला चाहती है कि उसका बच्चा पेट के अंदर सुरक्षित रहे और सही तरह से विकसित हो। अक्सर नई माताओं के मन में यह उलझन रहती है कि आखिर pregnancy me ultrasound kab kab hota hai और क्या इतने सारे स्कैन कराना बच्चे के लिए सुरक्षित है? अच्छी बात यह है कि सोनोग्राफी पूरी तरह से सुरक्षित है क्योंकि इसमें रेडिएशन के बजाय साउंड वेव्स का इस्तेमाल होता है । इस आर्टिकल को आप पूरे नौ महीने की अल्ट्रासाउंड डायरी समझ सकती हैं, जो आपको बतायेगी कि किस हफ्ते में कौन सा स्कैन होना है, आपको उसमें क्या देखना चाहिए और स्कैन के लिए जाने से पहले आपको क्या तैयारी करनी चाहिए।
यह प्रेगनेंसी का पहला और सबसे इमोशनल अल्ट्रासाउंड होता है इसे वायबिलिटी स्कैन यानी डेटिंग स्कैन भी कहते हैं। इसमें पहली बार बच्चे की धड़कन सुनाई देती है। इस स्कैन से पता चलता है कि प्रेगनेंसी वायबल है यानी बच्चा ठीक से बढ़ रहा है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी का भी इसी समय पता चलता है।
बच्चे का साइज: इस समय तक बच्चा एक राजमा के दाने या ब्लूबेरी के बराबर करीब 1 से 1.5 सेंटीमीटर तक का होता है।
कब होता है? 6 से 8 हफ्ते के बीच।
कैसे होता है? यह TVS यानी ट्रांसवेजाइनल सोनोग्राफी (TVS) होता है क्योंकि इतने छोटे भ्रूण को पेट के ऊपर से देखना मुश्किल होता है। TVS में योनि मतलब वेजाइना (vagina) के अंदर प्रोब डाल कर बच्चे के एकदम करीब से इमेज ली जाती है।
क्या देखते हैं?
इसे एनटी स्कैन यानी न्यूकल ट्रांसलुसेंसी स्कैन कहते हैं। यह स्कैन डाउन सिंड्रोम और कुछ अन्य क्रोमोसोम से सम्बंधित गड़बड़ियों को चेक करने के लिए किया जाता है। इसके साथ डबल मार्कर ब्लड टेस्ट भी होता है। 14 हफ्ते के बाद यह स्कैन नहीं हो सकता क्योंकि NT स्कैन की विंडो बहुत छोटी होती है, इसलिए इसे समय पर करवाना ज़रूरी है।
बच्चे का साइज: अब तक बच्चा एक नींबू के आकार का हो जाता है और उसके सिर से कूल्हे तक की लंबाई करीब 6 से 8 सेंटीमीटर हो चुकी होती है।
कब होता है? 11 से 13 हफ्ते + 6 दिन तक।
कैसे होता है? पेट के ऊपर से यानी एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड क्योंकि अब बच्चा इतना बड़ा हो चुका होता है कि पेट वाले अल्ट्रासाउंड से देखा जा सके।
क्या देखते हैं?
इसे एनॉमली स्कैन यानी लेवल 2 अल्ट्रासाउंड कहा जाता है, इसमें 30 से 45 मिनट लगते हैं। इस अल्ट्रासाउंड से 90% जन्मजात विकृतियों का पता चल जाता है जिससे अगर कोई समस्या हो तो समय रहते ट्रीटमेंट प्लान बन सकता है।
22 हफ्ते के बाद बच्चे की पोज़ीशन और साइज़ की वजह से कुछ अंग ठीक से नहीं दिखते। यह स्कैन किसी भी हाल में मिस नहीं करना चाहिए।
बच्चे का साइज़: इस स्टेज पर बच्चे का साइज एक केला या शरीफ़ा जितना बड़ा होता है जिसकी लंबाई करीब 25 सेंटीमीटर और वज़न लगभग 300-500 ग्राम होता है।
कब होता है? 18 से 22 हफ्ते के बीच लेकिन बीसवें हफ़्ते को आइडियल समय माना जाता है.
कैसे होता है? पेट के ऊपर से यानी एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड
क्या देखते हैं?
अब इस स्टेज पर बच्चा तेज़ी से बढ़ रहा होता है और इस अल्ट्रासाउंड से पता चलता है कि ग्रोथ सही रफ्तार से हो रही है या नहीं इसीलिए इसे ग्रोथ स्कैन कहते हैं। IUGR यानी इंट्रायूटेराइन ग्रोथ रिस्ट्रिक्शन इसी स्कैन में पकड़ में आता है।
बच्चे का साइज: बच्चा अब एक अनानास यानी पाइनएप्पल के आकार का होता है जिसकी लंबाई करीब 40 से 42 सेंटीमीटर और वज़न लगभग 1.5 से 2 किलो होता है।
कब होता है? 28 से 32 हफ्ते के बीच
कैसे होता है? यह भी पेट के ऊपर से यानी एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड होता है।
क्या देखते हैं?
डॉपलर एक स्पेशल अल्ट्रासाउंड है जो सिर्फ उस प्रेगनेंसी में होता है जिनमें कोई रिस्क फैक्टर जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, बच्चे की कम ग्रोथ, कम एमनीओटिक फ्लूइड, या पिछली प्रेगनेंसी में कोई समस्या रही हो।
अगर बच्चे को ऑक्सीजन या पोषण कम मिल रहा है, तो डॉप्लर से पता चलता है।
बच्चे का साइज: इस स्टेज पर बच्चे का साइज एक बड़े पपीते जितना होता है, जिसकी लंबाई करीब 46 से 48 सेंटीमीटर और वज़न लगभग 2 से 2.5 किलो हो।
कब होता है? 32 से 36 हफ्ते
कैसे होता है? 12 हफ़्ते के बाद ज्यादातर स्कैन पेट के ऊपर से ही किये जाते हैं, इसीलिए डॉप्लर भी एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड होता है।
क्या देखते हैं?
यह डिलीवरी से पहले आखिरी बार सब कुछ चेक करने के लिए किया जाता है। इससे डॉक्टर तय करते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी ट्राई करनी है या सीज़ेरियन प्लान करना है।
बच्चे का साइज: इस समय बच्चा पूरी तरह डेवलप होकर एक छोटे तरबूज (Watermelon) के आकार का होता है। नार्मल कंडीशन में उसकी लंबाई 50 सेंटीमीटर से अधिक और वज़न 2.5 से 3.5 किलो या उससे ज़्यादा होता है।
कब किया जाता है? 36 से 40 हफ्ते के बीच
कैसे किया जाता है? यह भी एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड है।
क्या देखते हैं?
IVF से प्रेगनेंट हुई महिलाओं के लिए शुरुआती हफ्तों में ज़्यादा स्कैन होते हैं। आठवें हफ्ते के बाद IVF प्रेगनेंसी का स्कैन शेड्यूल नॉर्मल प्रेगनेंसी जैसा ही हो जाता है।
नीचे दिए तीन स्कैन हर हाल में होने चाहिए। बाकी स्कैन डॉक्टर ज़रूरत के हिसाब से लिखते हैं।
प्रेगनेंसी के इस पूरे सफ़र में अल्ट्रासाउंड ही वह ज़रिया है, जिससे आप और आपके डॉक्टर बच्चे पर नज़र रख सकते हैं, Pregnancy me ultrasound kab kab hota hai जान कर आप उसकी ग्रोथ और गर्भ में उसके हर माइलस्टोन को देख सकते हैं। अल्ट्रासाउंड से न डरें, यह पूरी तरह सेफ है और इसमें कोई रेडिएशन नहीं होता।
नॉर्मल प्रेगनेंसी में 4 से 5 स्कैन होते हैं। हाई रिस्क प्रेगनेंसी में ज़्यादा हो सकते हैं।
6 से 8 हफ्ते के बीच। इससे पहले करवाने पर कुछ नहीं दिखता।
नहीं। अल्ट्रासाउंड में साउंड वेव्स होती हैं, रेडिएशन नहीं। यह पूरी तरह सेफ है।
एनॉमली स्कैन 90% समस्याएं पकड़ लेता है, लेकिन कुछ चीज़ें जन्म के बाद ही पता चलती हैं।
यह सिर्फ बच्चे का चेहरा देखने के लिए होता है। डॉक्टर तभी लिखते हैं जब कोई खास वजह हो।