जब आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हों और आपका प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव भी आ जाये तो यह खुशियों से भरा एक अनोखा अनुभव होता है। लेकिन फिर वह समय आता है जब प्रेगनेंसी के लक्षण आने शुरू हो जाते हैं। उन्हीं लक्षणों में से एक है उल्टी आना। लेकिन pregnancy me vomiting kab hoti hai सका कोई तय पैटर्न नहीं होता। कुछ महिलाओं को पीरियड मिस होने से पहले ही मतली आने लगती है, कुछ को दो महीने बीत जाते हैं और कुछ उल्टी आती नहीं।
असल में pregnancy me vomiting kab hoti hai इसे समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि जब आपको पहले से पता हो कि यह फेज कब शुरू होगा, कब सबसे ज़्यादा तकलीफ होगी, और कब आराम मिलेगा तो आप मानसिक रूप से इसके लिए पहले तैयार रह सकती हैं। इस आर्टिकल में आप प्रेगनेंसी में उल्टी को कैसे मैनेज करें, यह भी समझेंगी।
ज़्यादातर महिलाओं में प्रेगनेंसी की उल्टी छठे हफ्ते के आसपास शुरू होती है। लेकिन कुछ महिलाओं को यह चौथे हफ्ते में ही शुरू हो जाती है, इतनी जल्दी कि उन्हें पता भी नहीं होता कि वो प्रेगनेंट हैं। बस लगता है कि पेट खराब है या कुछ गलत खा लिया। फिर जब पीरियड नहीं आता और टेस्ट करती हैं, तब समझ आता है कि वो मतली असल में प्रेगनेंसी की वजह से हो रही थी। कुछ महिलायें ऐसी भी होती हैं जिन्हें नौवें हफ्ते तक न मतली होती है और ना ही उल्टी। फिर अचानक एक दिन उल्टी शुरू हो जाती है।
आठवें से दसवें हफ्ते के बीच उल्टी अपने पीक पर होती है। यही वो वक्त है जब सुबह उठते ही बाथरूम की तरफ भागना पड़ता है और जब खाने की महक से ही उबकाई आती है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन हफ्तों में hCG हॉर्मोन अपने सबसे ऊँचे लेवल पर होता है। hCG यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन, वो हॉर्मोन है जिसे प्रेगनेंसी हॉर्मोन भी कहा जाता और जो प्रेगनेंसी टेस्ट में डिटेक्ट होता है। दरअसल यही हॉर्मोन उल्टी का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
फिर जैसे-जैसे प्लेसेंटा बनता है और hCG का लेवल स्थिर होने लगता है, उल्टी भी कम होने लगती है।
बारहवें से चौदहवें हफ्ते के बीच ज़्यादातर महिलाओं को उल्टी से राहत मिलने लगती है। पहली तिमाही खत्म होते-होते वो रोज होने वाली सुबह की मतली धीरे-धीरे कम हो जाती है।
कुछ महिलाओं में यह सोलहवें हफ्ते तक चलती है, और कुछ में बीसवें हफ्ते तक हल्की मतली रहती है। लेकिन अगर बीसवें हफ्ते के बाद भी उल्टी बनी हुई है, तो डॉक्टर को जरूर बताएं। बहुत कम, करीब दो से तीन प्रतिशत, महिलाओं में उल्टी पूरी प्रेगनेंसी भर रहती है। इसे हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम (Hyperemesis Gravidarum) कहते हैं, यह एक गंभीर स्थिति है जिसके इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है।
इसे मॉर्निंग सिकनेस इसीलिए कहते हैं क्योंकि सुबह उठते ही सबसे ज़्यादा तकलीफ होती है। लेकिन असल में उल्टी दिन में कभी भी हो सकती है।
सबसे ज्यादा सुबह उल्टी होने की वजह है कि रातभर आपने कुछ नहीं खाया होता है और पेट खाली होता है। खाली पेट में एसिड बनता है और ब्लड शुगर लो होता है, ये दोनों मिलकर मतली बढ़ा देते हैं।
इसलिए डॉक्टर कहते हैं कि सोने से पहले कुछ हल्का खाएं और सुबह बिस्तर से उठने से पहले दो-तीन बिस्किट या टोस्ट खा लें क्योंकि पेट में कुछ रहेगा तो मतली कम होगी।
वैसे तो हर प्रेगनेंसी अलग होती है, लेकिन कुछ महिलाओं में उल्टी ज़्यादा होने की संभावना रहती है।
प्रेगनेंसी में उल्टी आम है, लेकिन कुछ सिग्नल होते हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है।
कुछ कंडीशन में घरेलू नुस्खे काम नहीं आते ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेनी बहुत ज़रूरी होती है। डॉक्टर IV ड्रिप से पानी और नमक देते हैं, एंटी-नौज़िया दवाइयाँ देते हैं, और ज़रूरत पड़े तो कुछ दिन अस्पताल में रखते हैं। अगर नीचे लिखे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर को बताएं।
नॉर्मल मॉर्निंग सिकनेस से बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता। असल में कुछ स्टडीज़ बताती हैं कि जिन महिलाओं को उल्टी होती है, उनमें मिसकैरेज का रिस्क थोड़ा कम होता है ऐसा शायद इसलिए होता है कि उल्टी होने का मतलब है कि hCG हॉर्मोन सही मात्रा में बन रहा है। लेकिन अगर उल्टी इतनी ज़्यादा है कि खाना-पानी नहीं रुक रहा और वज़न गिर रहा है, तो यह माँ और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसीलिए गंभीर उल्टी में डॉक्टर की मदद लेनी ज़रूरी है।
तीस प्रतिशत महिलाओं को प्रेगनेंसी में उल्टी नहीं होती और उनकी प्रेगनेंसी बिल्कुल नॉर्मल रहती है। उल्टी होना प्रेगनेंसी हेल्दी होने का पक्का सबूत नहीं है, और न होना किसी समस्या का संकेत नहीं है। हर औरत का शरीर अलग तरीके से रिएक्ट करता है। कुछ को बहुत उल्टी होती है, कुछ को सिर्फ मतली, और कुछ को कुछ नहीं, तीनों कंडीशन नॉर्मल हैं।
माँ बनने के इस शुरुआती सफर में यह जानना कि pregnancy mein morning sickness mein kya kya hota hai, आपको मानसिक रूप से तैयार रखता है। यह याद रखें कि यह सिर्फ एक छोटा सा फेज है जो जल्द ही निकल जाएगा। अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें, अपनी डाइट में छोटे बदलाव करें और भरपूर आराम लें। अगर तकलीफ बर्दाश्त से बाहर हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेने में हिचकिचाएं नहीं।
पहले से तीसरे महीने में सबसे ज़्यादा होती है। छठे हफ्ते से शुरू होकर बारहवें-चौदहवें हफ्ते तक चलती है।
कई स्टडीज़ बताती हैं कि हल्की मॉर्निंग सिकनेस इस बात का संकेत है कि प्रेगनेंसी हॉर्मोन्स अच्छे से काम कर रहे हैं और प्लेसेंटा विकसित हो रहा है।
हाँ, तीस प्रतिशत महिलाओं को उल्टी नहीं होती और उनकी प्रेगनेंसी बिल्कुल नॉर्मल होती है।
रात भर पेट खाली रहने से ब्लड शुगर लो होता है और पेट में एसिड बढ़ता है, इसलिए सुबह ज़्यादा होती है। लेकिन यह दिन में कभी भी हो सकती है।
हाँ, जुड़वाँ या उससे ज़्यादा बच्चों में hCG लेवल ज़्यादा होता है, इसलिए उल्टी भी ज़्यादा बार हो सकती है।