प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस (Pregnancy Me Vomiting Kab Hoti Hai?)

Last updated: February 10, 2026

Overview

जब आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हों और आपका प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव भी आ जाये तो यह खुशियों से भरा एक अनोखा अनुभव होता है। लेकिन फिर वह समय आता है जब प्रेगनेंसी के लक्षण आने शुरू हो जाते हैं। उन्हीं लक्षणों में से एक है उल्टी आना। लेकिन pregnancy me vomiting kab hoti hai सका कोई तय पैटर्न नहीं होता। कुछ महिलाओं को पीरियड मिस होने से पहले ही मतली आने लगती है, कुछ को दो महीने बीत जाते हैं और कुछ उल्टी आती नहीं।

असल में pregnancy me vomiting kab hoti hai इसे समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि जब आपको पहले से पता हो कि यह फेज कब शुरू होगा, कब सबसे ज़्यादा तकलीफ होगी, और कब आराम मिलेगा तो आप मानसिक रूप से इसके लिए पहले तैयार रह सकती हैं। इस आर्टिकल में आप प्रेगनेंसी में उल्टी को कैसे मैनेज करें, यह भी समझेंगी।

उल्टी शुरू कब होती है?

ज़्यादातर महिलाओं में प्रेगनेंसी की उल्टी छठे हफ्ते के आसपास शुरू होती है। लेकिन कुछ महिलाओं को यह चौथे हफ्ते में ही शुरू हो जाती है, इतनी जल्दी कि उन्हें पता भी नहीं होता कि वो प्रेगनेंट हैं। बस लगता है कि पेट खराब है या कुछ गलत खा लिया। फिर जब पीरियड नहीं आता और टेस्ट करती हैं, तब समझ आता है कि वो मतली असल में प्रेगनेंसी की वजह से हो रही थी। कुछ महिलायें ऐसी भी होती हैं जिन्हें नौवें हफ्ते तक न मतली होती है और ना ही उल्टी। फिर अचानक एक दिन उल्टी शुरू हो जाती है।

सबसे ज़्यादा तकलीफ किस हफ्ते होती है?

आठवें से दसवें हफ्ते के बीच उल्टी अपने पीक पर होती है। यही वो वक्त है जब सुबह उठते ही बाथरूम की तरफ भागना पड़ता है और जब खाने की महक से ही उबकाई आती है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन हफ्तों में hCG हॉर्मोन अपने सबसे ऊँचे लेवल पर होता है। hCG यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन, वो हॉर्मोन है जिसे प्रेगनेंसी हॉर्मोन भी कहा जाता और जो प्रेगनेंसी टेस्ट में डिटेक्ट होता है। दरअसल यही हॉर्मोन उल्टी का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

फिर जैसे-जैसे प्लेसेंटा बनता है और hCG का लेवल स्थिर होने लगता है, उल्टी भी कम होने लगती है।

उल्टी खत्म कब होती है?

बारहवें से चौदहवें हफ्ते के बीच ज़्यादातर महिलाओं को उल्टी से राहत मिलने लगती है। पहली तिमाही खत्म होते-होते वो रोज होने वाली सुबह की मतली धीरे-धीरे कम हो जाती है।

कुछ महिलाओं में यह सोलहवें हफ्ते तक चलती है, और कुछ में बीसवें हफ्ते तक हल्की मतली रहती है। लेकिन अगर बीसवें हफ्ते के बाद भी उल्टी बनी हुई है, तो डॉक्टर को जरूर बताएं। बहुत कम, करीब दो से तीन प्रतिशत, महिलाओं में उल्टी पूरी प्रेगनेंसी भर रहती है। इसे हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम (Hyperemesis Gravidarum) कहते हैं, यह एक गंभीर स्थिति है जिसके इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है।

उल्टी, सुबह में ही क्यों होती है?

इसे मॉर्निंग सिकनेस इसीलिए कहते हैं क्योंकि सुबह उठते ही सबसे ज़्यादा तकलीफ होती है। लेकिन असल में उल्टी दिन में कभी भी हो सकती है।

सबसे ज्यादा सुबह उल्टी होने की वजह है कि रातभर आपने कुछ नहीं खाया होता है और पेट खाली होता है। खाली पेट में एसिड बनता है और ब्लड शुगर लो होता है, ये दोनों मिलकर मतली बढ़ा देते हैं।

इसलिए डॉक्टर कहते हैं कि सोने से पहले कुछ हल्का खाएं और सुबह बिस्तर से उठने से पहले दो-तीन बिस्किट या टोस्ट खा लें क्योंकि पेट में कुछ रहेगा तो मतली कम होगी।

किसे ज़्यादा उल्टी होती है?

वैसे तो हर प्रेगनेंसी अलग होती है, लेकिन कुछ महिलाओं में उल्टी ज़्यादा होने की संभावना रहती है।

  • जब जुड़वाँ या उससे ज़्यादा बच्चे हों: hCG का लेवल सिंगल प्रेगनेंसी से ज़्यादा होता है, इसलिए उल्टी भी ज़्यादा होती है।
  • अगर पिछली प्रेगनेंसी में भी हुई हो: अगर पहले बच्चे के वक्त बहुत उल्टी हुई थी, तो इस बार भी होने की संभावना ज़्यादा है।
  • अगर माँ या बहन को हुई हो तो: यह फैमिली में चलती है। अगर आपकी माँ को प्रेगनेंसी में बहुत उल्टी होती थी, तो आपको भी हो सकती है।
  • माइग्रेन या मोशन सिकनेस की हिस्ट्री हो: जिन महिलाओं को गाड़ी में बैठते ही चक्कर आते हैं या सिरदर्द की समस्या रहती है, उन्हें प्रेगनेंसी में उल्टी ज़्यादा होती है।
  • IVF से प्रेगनेंसी हुई हो: IVF में हॉर्मोन सपोर्ट ज़्यादा होता है, इसलिए कुछ महिलाओं में उल्टी भी ज़्यादा होती है।

उल्टी कब चिंता की बात बन जाती है?

प्रेगनेंसी में उल्टी आम है, लेकिन कुछ सिग्नल होते हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है।

  • दिन में तीन-चार बार से ज़्यादा उल्टी हो रही है: एक-दो बार उल्टी नॉर्मल है, लेकिन अगर बार-बार हो रही है और रुक नहीं रही, तो डॉक्टर से मिलें।
  • पानी भी नहीं रुक रहा: अगर बारह घंटे से ज़्यादा समय से कुछ भी पेट में नहीं रुक रहा, तो डिहाइड्रेशन का खतरा है।
  • वज़न गिर रहा है: प्रेगनेंसी में वज़न बढ़ना चाहिए, अगर घट रहा है तो यह गंभीर बात है।
  • पेशाब का रंग गहरा पीला है: यह डिहाइड्रेशन का संकेत है।
  • चक्कर आ रहे हैं या बेहोशी जैसा लग रहा है: तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
  • उल्टी में खून दिख रहा है: यह नॉर्मल मॉर्निंग सिकनेस नहीं है, फौरन जाँच करवाएं।

उल्टी कम करने के लिए क्या करें?

  • खाली पेट रहने से बचें और दिन भर में हैवी मील्स लेने के बजाय 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा करके खाएं।
  • अदरक की चाय, अदरक की गोली या सूखा अदरक अपने पास रखें क्योंकि यह मतली को रोकने में काफी मददगार होता है।
  • जब भी जी मिचलाने जैसा महसूस हो, तो ताज़ा कटा हुआ नींबू सूँघें, इससे काफी राहत मिलती है।
  • कई बार गर्म खाने की महक से मतली बढ़ जाती है, इसलिए ठंडा दही, ताज़े फल या सलाद जैसी चीज़ें खाना बेहतर रहता है।
  • परफ्यूम, रसोई के तड़के या पेट्रोल जैसी उन सभी तेज़ महक वाली चीज़ों से दूर रहें जो आपको परेशान करती हैं।
  • शरीर को पूरा आराम दें क्योंकि बहुत ज़्यादा थकान होने से जी मिचलाने की समस्या और भी बढ़ सकती है।
  • अपने डॉक्टर की सलाह लेकर विटामिन B6 सप्लीमेंट ले सकती हैं, जिसे प्रेगनेंसी में मतली कम करने के लिए सेफ माना जाता है।
  • कलाई पर पहने जाने वाले एक्यूप्रेशर बैंड्स आज़माएँ, जो मोशन सिकनेस के साथ-साथ मॉर्निंग सिकनेस में भी काम आते हैं।

डॉक्टर से कब मिलें?

कुछ कंडीशन में घरेलू नुस्खे काम नहीं आते ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेनी बहुत ज़रूरी होती है। डॉक्टर IV ड्रिप से पानी और नमक देते हैं, एंटी-नौज़िया दवाइयाँ देते हैं, और ज़रूरत पड़े तो कुछ दिन अस्पताल में रखते हैं। अगर नीचे लिखे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर को बताएं।

  • अगर आप पानी भी नहीं पी पा रही हैं और वह तुरंत बाहर निकल रहा है।
  • पेशाब का रंग बहुत गहरा पीला हो या बहुत कम पेशाब आ रहा हो।
  • खड़े होने पर चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना।
  • 24 घंटे से ज़्यादा समय तक कुछ भी न खा पाना।
  • दिल की धड़कन बहुत तेज़ महसूस होना।

क्या उल्टी से बच्चे को नुकसान होता है?

नॉर्मल मॉर्निंग सिकनेस से बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता। असल में कुछ स्टडीज़ बताती हैं कि जिन महिलाओं को उल्टी होती है, उनमें मिसकैरेज का रिस्क थोड़ा कम होता है ऐसा शायद इसलिए होता है कि उल्टी होने का मतलब है कि hCG हॉर्मोन सही मात्रा में बन रहा है। लेकिन अगर उल्टी इतनी ज़्यादा है कि खाना-पानी नहीं रुक रहा और वज़न गिर रहा है, तो यह माँ और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसीलिए गंभीर उल्टी में डॉक्टर की मदद लेनी ज़रूरी है।

उल्टी न हो तो क्या प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत है?

तीस प्रतिशत महिलाओं को प्रेगनेंसी में उल्टी नहीं होती और उनकी प्रेगनेंसी बिल्कुल नॉर्मल रहती है। उल्टी होना प्रेगनेंसी हेल्दी होने का पक्का सबूत नहीं है, और न होना किसी समस्या का संकेत नहीं है। हर औरत का शरीर अलग तरीके से रिएक्ट करता है। कुछ को बहुत उल्टी होती है, कुछ को सिर्फ मतली, और कुछ को कुछ नहीं, तीनों कंडीशन नॉर्मल हैं।

एक्सपर्ट की सलाह (Conclusion)

माँ बनने के इस शुरुआती सफर में यह जानना कि pregnancy mein morning sickness mein kya kya hota hai, आपको मानसिक रूप से तैयार रखता है। यह याद रखें कि यह सिर्फ एक छोटा सा फेज है जो जल्द ही निकल जाएगा। अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें, अपनी डाइट में छोटे बदलाव करें और भरपूर आराम लें। अगर तकलीफ बर्दाश्त से बाहर हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेने में हिचकिचाएं नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रेगनेंसी में उल्टी कौन से महीने में होती है?

 

पहले से तीसरे महीने में सबसे ज़्यादा होती है। छठे हफ्ते से शुरू होकर बारहवें-चौदहवें हफ्ते तक चलती है।

क्या मॉर्निंग सिकनेस का मतलब है कि बच्चा स्वस्थ है?

 

कई स्टडीज़ बताती हैं कि हल्की मॉर्निंग सिकनेस इस बात का संकेत है कि प्रेगनेंसी हॉर्मोन्स अच्छे से काम कर रहे हैं और प्लेसेंटा विकसित हो रहा है।

उल्टी न हो तो क्या प्रेगनेंसी नॉर्मल है?

 

हाँ, तीस प्रतिशत महिलाओं को उल्टी नहीं होती और उनकी प्रेगनेंसी बिल्कुल नॉर्मल होती है।

सबसे ज्यादा सुबह ही क्यों उल्टी होती है?

 

रात भर पेट खाली रहने से ब्लड शुगर लो होता है और पेट में एसिड बढ़ता है, इसलिए सुबह ज़्यादा होती है। लेकिन यह दिन में कभी भी हो सकती है।

जुड़वाँ बच्चों में उल्टी ज़्यादा होती है?

 

हाँ, जुड़वाँ या उससे ज़्यादा बच्चों में hCG लेवल ज़्यादा होता है, इसलिए उल्टी भी ज़्यादा बार हो सकती है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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