अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं और आपके पीरियड की डेट निकल गई है, शरीर में थोड़ी थकान है, ब्रेस्ट में हल्का दर्द है, और मूड भी ठीक नहीं लग रहा। अब आप निश्चय नहीं कर पा रहीं कि यह PMS है या प्रेगनेंसी?
यह कन्फ्यूज़न इसलिए होता है क्योंकि PMS और early pregnancy ke symptoms एक जैसे हो सकते हैं। दोनों में प्रोजेस्टेरोन बढ़ता है, दोनों में थकान होती है, और दोनों में ब्रेस्ट में भारीपन आता है। फिर फर्क कैसे पता करें?
इस आर्टिकल में हम pregnancy symptoms in hindi में समझेंगे कि प्रेगनेंसी और पीएमएस में अंतर कैसे पहचानें। प्रेगनेंसी के समय दिखने वाले लक्षण क्यों होते हैं, कौन सा हॉर्मोन उसके पीछे है। साथ ही, जो महिलाएं IVF या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बाद लक्षण ट्रैक कर रही हैं, उनके लिए भी खास जानकारी है।
Pregnancy symptoms in hindi समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि प्रेगनेंसी होने पर शरीर के अंदर क्या बदलता है।
जब स्पर्म एग से मिलता है और फर्टिलाइज़ेशन होता है, तो एक एम्ब्रीओ (embryo) बनता है। यह एम्ब्रीओ फैलोपियन ट्यूब से होता हुआ यूटेरस तक पहुंचता है और वहां की दीवार में जुड़ जाता है, जिसे इम्प्लांटेशन कहते हैं। यह प्रोसेस ओव्यूलेशन के 6 से 10 दिन बाद होता है।
इम्प्लांटेशन होते ही शरीर एक खास हॉर्मोन बनाना शुरू करता है जिसे hCG यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (Human Chorionic Gonadotropin) कहते हैं। यही वो हॉर्मोन है जो प्रेगनेंसी टेस्ट में डिटेक्ट होता है। और यही हॉर्मोन शरीर को सिग्नल देता है कि अब प्रोजेस्टेरोन बनाते रहो।
प्रोजेस्टेरोन वो हॉर्मोन है जो प्रेगनेंसी को सपोर्ट करता है। यही यूट्रस की लाइनिंग को मोटा रखता है ताकि एम्ब्रीओ वहां टिका रहे। और यही हॉर्मोन प्रेगनेंसी के ज़्यादातर शुरुआती लक्षणों के पीछे होता है।
बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि पीरियड मिस होना प्रेगनेंसी का पहला लक्षण है। लेकिन असल में कुछ लक्षण पीरियड मिस होने से पहले भी दिख सकते हैं।
ये तीन लक्षण अक्सर पीरियड मिस होने से पहले ही दिखने लगते हैं।
PMS यानी प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में भी प्रोजेस्टेरोन बढ़ता है, इसीलिए दोनों के लक्षण मिलते-जुलते हैं। लेकिन कुछ फर्क हैं जिन पर ध्यान देना जरुरी है।
Pregnancy symptoms in hindi में जब हर लक्षण का कारण समझ लें, तो याद रखना आसान हो जाता है।
हर लक्षण एक तय समय पर दिखता है। यह टाइमलाइन समझने से आप बेहतर तरीके से ट्रैक कर सकती हैं।
जो महिलाएं IVF या अन्य ART यानी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी से कंसीव करती हैं, उनके लिए Pregnancy symptoms को समझना थोड़ा अलग होता है।
IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद इंजेक्शन, जेल, या सपोसिटरी के रूप में प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट दिया जाता है। इसकी वजह से कुछ लक्षण जैसे ब्रेस्ट में दर्द, थकान, और ब्लोटिंग प्रोजेस्टेरोन की दवाई से भी हो सकते हैं, भले ही प्रेगनेंसी न हुई हो।
IVF में सबसे भरोसेमंद तरीका: लक्षणों से ज़्यादा भरोसा Beta hCG ब्लड टेस्ट पर करें। यह एम्ब्रीओ ट्रांसफर के 10 से 14 दिन बाद किया जाता है और प्रेगनेंसी कंफर्म करता है।
प्रेगनेंसी टेस्ट तब करें जब hCG का लेवल इतना बढ़ जाए कि टेस्ट उसे डिटेक्ट कर सके।
होम प्रेगनेंसी टेस्ट: पीरियड मिस होने के 5-7 दिन बाद यूरिन टेस्ट करें। सुबह का पहला यूरिन सबसे अच्छा होता है क्योंकि उसमें hCG की कंसंट्रेशन सबसे ज़्यादा होती है।
अगर लाइन हल्की आए: हल्की लाइन का मतलब है कि hCG अभी कम है लेकिन मौजूद है। 2-3 दिन बाद फिर से टेस्ट करें। अगर प्रेगनेंसी है तो लाइन गहरी होगी।
ब्लड टेस्ट (Beta hCG): यह सबसे सटीक तरीका है। यह यूरिन टेस्ट से पहले ही प्रेगनेंसी डिटेक्ट कर सकता है। IVF पेशेंट्स के लिए यही स्टैंडर्ड टेस्ट है।
ज़्यादातर pregnancy symptoms नॉर्मल होते हैं। लेकिन कुछ लक्षण हैं जिन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
Pregnancy symptoms in hindi में पढ़ कर अब आप समझ गई होंगी कि hCG और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन मिलकर शरीर में वो सारे बदलाव लाते हैं जो प्रेगनेंसी को सपोर्ट करते हैं।
PMS और प्रेगनेंसी में कन्फ्यूज़न होना नॉर्मल है क्योंकि दोनों में प्रोजेस्टेरोन बढ़ता है। लेकिन जब पीरियड मिस हो जाए और लक्षण बढ़ते जाएं, तो टेस्ट करना सही रहता है।
अगर आप IVF या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बाद symptoms ट्रैक कर रही हैं, तो याद रखें कि प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट से भी कुछ लक्षण होते हैं। Beta hCG टेस्ट ही सबसे भरोसेमंद तरीका है।
और सबसे ज़रूरी बात कि हर महिला का अनुभव अलग होता है। कुछ को बहुत लक्षण होते हैं, कुछ को बिल्कुल नहीं और दोनों ही कंडीशन नॉर्मल हैं। अगर कोई भी चिंताजनक लक्षण हो, तो अपने डॉक्टर से ज़रूर मिलें।
इम्प्लांटेशन के बाद यानी ओव्यूलेशन के 6-10 दिन बाद कुछ लक्षण शुरू हो सकते हैं। लेकिन ज़्यादातर लक्षण पीरियड मिस होने के बाद यानी 4-5 हफ्ते में साफ दिखते हैं।
हाँ, करीब 20 से 30% महिलाओं को शुरुआती हफ्तों में कोई खास लक्षण नहीं होते और यह पूरी तरह नॉर्मल है।
नाम के बावजूद, यह दिन में कभी भी हो सकती है। कुछ महिलाओं को सुबह ज़्यादा होती है, कुछ को शाम को, और कुछ को पूरे दिन मॉर्निंग सिकनेस हो सकती है।
इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग हल्की होती है, गुलाबी या भूरे रंग की स्पॉटिंग जो 1-2 दिन में खत्म हो जाती है। पीरियड हैवी होता है, लाल रंग का, और 3 से 5 दिन चलता है।
एम्ब्रीओ ट्रांसफर के 10 से 14 दिन बाद Beta hCG ब्लड टेस्ट किया जाता है। इससे पहले होम टेस्ट न करें क्योंकि गलत रिज़ल्ट आ सकता है।