कैसे पक्का करें कि आप प्रेग्नेंट हैं? (Pregnancy Symptoms in Hindi)

Last updated: February 23, 2026

Overview

अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं और आपके पीरियड की डेट निकल गई है, शरीर में थोड़ी थकान है, ब्रेस्ट में हल्का दर्द है, और मूड भी ठीक नहीं लग रहा। अब आप निश्चय नहीं कर पा रहीं कि यह PMS है या प्रेगनेंसी?

यह कन्फ्यूज़न इसलिए होता है क्योंकि PMS और early pregnancy ke symptoms एक जैसे हो सकते हैं। दोनों में प्रोजेस्टेरोन बढ़ता है, दोनों में थकान होती है, और दोनों में ब्रेस्ट में भारीपन आता है। फिर फर्क कैसे पता करें?

इस आर्टिकल में हम pregnancy symptoms in hindi में समझेंगे कि प्रेगनेंसी और पीएमएस में अंतर कैसे पहचानें। प्रेगनेंसी के समय दिखने वाले लक्षण क्यों होते हैं, कौन सा हॉर्मोन उसके पीछे है। साथ ही, जो महिलाएं IVF या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बाद लक्षण ट्रैक कर रही हैं, उनके लिए भी खास जानकारी है।

प्रेगनेंसी में शरीर में क्या बदलता है?

Pregnancy symptoms in hindi समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि प्रेगनेंसी होने पर शरीर के अंदर क्या बदलता है।

जब स्पर्म एग से मिलता है और फर्टिलाइज़ेशन होता है, तो एक एम्ब्रीओ (embryo) बनता है। यह एम्ब्रीओ फैलोपियन ट्यूब से होता हुआ यूटेरस तक पहुंचता है और वहां की दीवार में जुड़ जाता है, जिसे इम्प्लांटेशन कहते हैं। यह प्रोसेस ओव्यूलेशन के 6 से 10 दिन बाद होता है।

इम्प्लांटेशन होते ही शरीर एक खास हॉर्मोन बनाना शुरू करता है जिसे hCG यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (Human Chorionic Gonadotropin) कहते हैं। यही वो हॉर्मोन है जो प्रेगनेंसी टेस्ट में डिटेक्ट होता है। और यही हॉर्मोन शरीर को सिग्नल देता है कि अब प्रोजेस्टेरोन बनाते रहो।

प्रोजेस्टेरोन वो हॉर्मोन है जो प्रेगनेंसी को सपोर्ट करता है। यही यूट्रस की लाइनिंग को मोटा रखता है ताकि एम्ब्रीओ वहां टिका रहे। और यही हॉर्मोन प्रेगनेंसी के ज़्यादातर शुरुआती लक्षणों के पीछे होता है।

सबसे पहले कौन सा लक्षण दिखता है?

बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि पीरियड मिस होना प्रेगनेंसी का पहला लक्षण है। लेकिन असल में कुछ लक्षण पीरियड मिस होने से पहले भी दिख सकते हैं।

  • इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग या स्पॉटिंग: जब एम्ब्रीओ यूटेरस की दीवार में जुड़ता है, तो हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। यह पीरियड की तारीख से 3-4 दिन पहले होती है और पीरियड जैसी हैवी नहीं होती।
  • हल्की क्रैम्पिंग: इम्प्लांटेशन के दौरान पेट के निचले हिस्से में हल्की ऐंठन महसूस हो सकती है। यह पीरियड क्रैम्प्स जैसा लगता है लेकिन उससे हल्का होता है।
  • थकान: प्रोजेस्टेरोन अचानक बढ़ने से बहुत ज़्यादा थकान होती है, जो रात भर सोने के बाद भी नहीं जाती।

ये तीन लक्षण अक्सर पीरियड मिस होने से पहले ही दिखने लगते हैं।

PMS और प्रेगनेंसी में फर्क कैसे करें?

PMS यानी प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में भी प्रोजेस्टेरोन बढ़ता है, इसीलिए दोनों के लक्षण मिलते-जुलते हैं। लेकिन कुछ फर्क हैं जिन पर ध्यान देना जरुरी है।

  • ब्रेस्ट में दर्द: PMS में ब्रेस्ट में दर्द होता है जो पीरियड आते ही कम हो जाता है। प्रेगनेंसी में यह दर्द बढ़ता जाता है और निप्पल्स का रंग गहरा होने लगता है।
  • थकान का पैटर्न: PMS में थकान पीरियड के पहले कुछ दिन रहती है। प्रेगनेंसी में थकान लगातार बनी रहती है और कम नहीं होती।
  • मूड स्विंग्स: PMS में चिड़चिड़ापन ज़्यादा होता है। प्रेगनेंसी में इमोशनल सेंसिटिविटी ज़्यादा होती है और छोटी-छोटी बातों पर आंखें भर आती हैं।
  • क्रेविंग्स: PMS में मीठा या नमकीन खाने का मन करता है। प्रेगनेंसी में अजीब क्रेविंग्स होती हैं, जैसे आम के साथ नमक, या खट्टी चीज़ों की तीव्र इच्छा।
  • सबसे बड़ा फर्क: PMS में पीरियड आ जाता है और लक्षण खत्म हो जाते हैं। प्रेगनेंसी में पीरियड नहीं आता और लक्षण बढ़ते जाते हैं।

हर लक्षण के पीछे क्या वजह है?

Pregnancy symptoms in hindi में जब हर लक्षण का कारण समझ लें, तो याद रखना आसान हो जाता है।

  • जी मिचलाना और उल्टी (Morning Sickness): hCG हॉर्मोन का लेवल तेज़ी से बढ़ता है जो ब्रेन के वोमिटिंग सेंटर को ट्रिगर करता है। यह सुबह ज़्यादा होता है क्योंकि रात भर खाली पेट रहने से एसिडिटी बढ़ती है। 70 से 80% महिलाओं को यह होता है, इसका मतलब है कि hCG ठीक से बढ़ रहा है और यह अच्छा संकेत माना जाता है।
  • बार-बार पेशाब आना: प्रेगनेंसी में ब्लड वॉल्यूम बढ़ता है जिससे किडनी ज़्यादा काम करती है। साथ ही, बढ़ता हुआ यूटेरस ब्लैडर पर दबाव डालता है। यह लक्षण शुरुआती हफ्तों में आता है, फिर दूसरी तिमाही में थोड़ा कम होता है, और तीसरी तिमाही में फिर बढ़ जाता है।
  • ब्रेस्ट में बदलाव: एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन मिलकर ब्रेस्ट टिश्यू को दूध बनाने के लिए तैयार करते हैं। इसीलिए ब्रेस्ट भारी लगते हैं, निप्पल्स सेंसिटिव हो जाते हैं, और एरोला यानी निप्पल के आसपास का हिस्सा गहरा हो जाता है।
  • सूंघने की शक्ति बढ़ना: एस्ट्रोजन बढ़ने से ओल्फैक्टरी सेंस यानी सूंघने की क्षमता तेज़ हो जाती है। इसीलिए कुछ खुशबू अचानक असहनीय लगने लगती हैं और कुछ खाने से मन भर जाता है।
  • कब्ज़ होना: प्रोजेस्टेरोन मांसपेशियों यानी मसल्स को रिलैक्स करता है जिसमें आंतों की मसल्स भी शामिल हैं। जब आंतें धीमी हो जाती हैं, तो पाचन भी धीमा होता है और कब्ज़ हो जाती है।
  • मूड स्विंग्स: hCG और प्रोजेस्टेरोन ब्रेन के न्यूरोट्रांसमीटर्स को प्रभावित करते हैं। इसीलिए बिना किसी वजह रोना आता है, छोटी बातों पर गुस्सा आता है, या अचानक बहुत खुशी होती है।

लक्षणों की टाइमलाइन

हर लक्षण एक तय समय पर दिखता है। यह टाइमलाइन समझने से आप बेहतर तरीके से ट्रैक कर सकती हैं।

  • Week 3-4 (पीरियड मिस होने से पहले या आसपास): इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग, हल्की क्रैम्पिंग, थकान, और बेसल बॉडी टेम्परेचर बढ़ा रहना।
  • Week 4-5 (पीरियड मिस होने के बाद): पीरियड मिस होना, ब्रेस्ट में दर्द और भारीपन, बार-बार पेशाब आना, और हल्का जी मिचलाना शुरू।
  • Week 5-6: मॉर्निंग सिकनेस बढ़ना, खाने से मन भरना, कुछ चीज़ों की क्रेविंग शुरू, थकान और भी बढ़ना।
  • Week 6-8: मॉर्निंग सिकनेस पीक पर, सूंघने की शक्ति बहुत तेज़, मूड स्विंग्स, और पेट में हल्का खिंचाव।
  • Week 8-12: धीरे-धीरे मॉर्निंग सिकनेस कम होने लगती है, एनर्जी वापस आने लगती है, और पहली तिमाही खत्म होने को आती है।

IVF के बाद प्रेगनेंसी के लक्षण कैसे अलग होते हैं?

जो महिलाएं IVF या अन्य ART यानी असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी से कंसीव करती हैं, उनके लिए Pregnancy symptoms को समझना थोड़ा अलग होता है।

IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद इंजेक्शन, जेल, या सपोसिटरी के रूप में प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट दिया जाता है। इसकी वजह से कुछ लक्षण जैसे ब्रेस्ट में दर्द, थकान, और ब्लोटिंग प्रोजेस्टेरोन की दवाई से भी हो सकते हैं, भले ही प्रेगनेंसी न हुई हो।

IVF के बाद किन लक्षणों पर भरोसा करें?

  • इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग अगर एम्ब्रीओ ट्रांसफर के 6 से 10 दिन बाद हो, तो यह अच्छा सिग्नल हो सकता है। लेकिन हल्की स्पॉटिंग प्रोजेस्टेरोन सपोसिटरी से भी हो सकती है।
  • मॉर्निंग सिकनेस अगर एम्ब्रीओ ट्रांसफर के 2 हफ्ते बाद शुरू हो, तो यह प्रेगनेंसी का संकेत हो सकता है क्योंकि यह hCG से होती है, प्रोजेस्टेरोन से नहीं।

IVF में सबसे भरोसेमंद तरीका: लक्षणों से ज़्यादा भरोसा Beta hCG ब्लड टेस्ट पर करें। यह एम्ब्रीओ ट्रांसफर के 10 से 14 दिन बाद किया जाता है और प्रेगनेंसी कंफर्म करता है।

प्रेगनेंसी टेस्ट कब और कैसे करें?

प्रेगनेंसी टेस्ट तब करें जब hCG का लेवल इतना बढ़ जाए कि टेस्ट उसे डिटेक्ट कर सके।

होम प्रेगनेंसी टेस्ट: पीरियड मिस होने के 5-7 दिन बाद यूरिन टेस्ट करें। सुबह का पहला यूरिन सबसे अच्छा होता है क्योंकि उसमें hCG की कंसंट्रेशन सबसे ज़्यादा होती है।

अगर लाइन हल्की आए: हल्की लाइन का मतलब है कि hCG अभी कम है लेकिन मौजूद है। 2-3 दिन बाद फिर से टेस्ट करें। अगर प्रेगनेंसी है तो लाइन गहरी होगी।

ब्लड टेस्ट (Beta hCG): यह सबसे सटीक तरीका है। यह यूरिन टेस्ट से पहले ही प्रेगनेंसी डिटेक्ट कर सकता है। IVF पेशेंट्स के लिए यही स्टैंडर्ड टेस्ट है।

ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से मिलें

ज़्यादातर pregnancy symptoms नॉर्मल होते हैं। लेकिन कुछ लक्षण हैं जिन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।

  • हैवी ब्लीडिंग: पीरियड जैसी ब्लीडिंग या क्लॉट्स आना मिसकैरेज या एक्टोपिक प्रेगनेंसी का संकेत हो सकता है।
  • तेज़ पेट दर्द: एक तरफ तेज़ दर्द एक्टोपिक प्रेगनेंसी का संकेत हो सकता है जिसमें एम्ब्रीओ फैलोपियन ट्यूब में इम्प्लांट हो जाता है।
  • बहुत ज़्यादा उल्टी: अगर कुछ भी खाना-पीना नहीं रुक रहा और डिहाइड्रेशन हो रहा है, तो यह हाइपरेमेसिस ग्रेविडेरम हो सकता है जिसमें IV फ्लूइइड्स की ज़रूरत पड़ सकती है।
  • बुखार: प्रेगनेंसी में हल्का तापमान बढ़ना नॉर्मल है, लेकिन 100°F से ज़्यादा बुखार इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
  • अचानक सब कुछ नॉर्मल लगना: अगर पहली तिमाही में अचानक सारे लक्षण जैसे मॉर्निंग सिकनेस, ब्रेस्ट सॉफ्ट गायब हो जाएं तो डॉक्टर से चेक करवाएं।

एक्सपर्ट की सलाह

Pregnancy symptoms in hindi में पढ़ कर अब आप समझ गई होंगी कि hCG और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन मिलकर शरीर में वो सारे बदलाव लाते हैं जो प्रेगनेंसी को सपोर्ट करते हैं।

PMS और प्रेगनेंसी में कन्फ्यूज़न होना नॉर्मल है क्योंकि दोनों में प्रोजेस्टेरोन बढ़ता है। लेकिन जब पीरियड मिस हो जाए और लक्षण बढ़ते जाएं, तो टेस्ट करना सही रहता है।

अगर आप IVF या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बाद symptoms ट्रैक कर रही हैं, तो याद रखें कि प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट से भी कुछ लक्षण होते हैं। Beta hCG टेस्ट ही सबसे भरोसेमंद तरीका है।

और सबसे ज़रूरी बात कि हर महिला का अनुभव अलग होता है। कुछ को बहुत लक्षण होते हैं, कुछ को बिल्कुल नहीं और दोनों ही कंडीशन नॉर्मल हैं। अगर कोई भी चिंताजनक लक्षण हो, तो अपने डॉक्टर से ज़रूर मिलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रेगनेंसी के लक्षण कितने दिन में दिखते हैं?

 

इम्प्लांटेशन के बाद यानी ओव्यूलेशन के 6-10 दिन बाद कुछ लक्षण शुरू हो सकते हैं। लेकिन ज़्यादातर लक्षण पीरियड मिस होने के बाद यानी 4-5 हफ्ते में साफ दिखते हैं।

क्या बिना लक्षणों के भी प्रेगनेंसी हो सकती है?

 

हाँ, करीब 20 से 30% महिलाओं को शुरुआती हफ्तों में कोई खास लक्षण नहीं होते और यह पूरी तरह नॉर्मल है।

मॉर्निंग सिकनेस सिर्फ सुबह होती है?

 

नाम के बावजूद, यह दिन में कभी भी हो सकती है। कुछ महिलाओं को सुबह ज़्यादा होती है, कुछ को शाम को, और कुछ को पूरे दिन मॉर्निंग सिकनेस हो सकती है।

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग और पीरियड में फर्क कैसे करें?

 

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग हल्की होती है, गुलाबी या भूरे रंग की स्पॉटिंग जो 1-2 दिन में खत्म हो जाती है। पीरियड हैवी होता है, लाल रंग का, और 3 से 5 दिन चलता है।

IVF के बाद कब प्रेगनेंसी टेस्ट करें?

 

एम्ब्रीओ ट्रांसफर के 10 से 14 दिन बाद Beta hCG ब्लड टेस्ट किया जाता है। इससे पहले होम टेस्ट न करें क्योंकि गलत रिज़ल्ट आ सकता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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