Pregnancy Test Kab Karna Chahiye? सही टाइमिंग जानें

Last updated: February 09, 2026

Overview

अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं तो प्रेगनेंसी टेस्ट के बारे में आपको अक्सर यह सलाह दी गयी होगी कि ‘पीरियड मिस होने के बाद टेस्ट करें। लेकिन यह सलाह तब काम करती है जब आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल रेगुलर हो। अगर आपको PCOS है और तीन-तीन महीने पीरियड नहीं आते, तो पीरियड मिस होने का मतलब ही नहीं बनता। या अगर आपने IVF करवाया है और एम्ब्रीओ ट्रांसफर हो चुका है, तो टेस्ट का टाइम बिल्कुल अलग होता है। या फिर पहले मिसकैरेज हो चुका है और इस बार जल्दी कंफर्म करना चाहती हैं तब क्या करें? आपकी मेडिकल हिस्ट्री, साइकिल पैटर्न, और कंसीव करने का तरीका, ये सब मिलकर तय करते हैं कि आपको Pregnancy test kab karna chahiye क्योंकि प्रेगनेंसी टेस्ट की सही टाइमिंग हर महिला के लिए अलग होती है।

इस आर्टिकल में हम उन सारी सिचुएशन्स को कवर करेंगे जिनकी जानकारी अक्सर इंटरनेट पर आसानी से नहीं मिलती, जैसे PCOS में टेस्ट कब करें, थायराइड की समस्या हो तो क्या ध्यान रखें, IVF/IUI के बाद कितने दिन इंतज़ार करें, और कौन सी किट किस सिचुएशन में बेस्ट रहती है।

PCOS में प्रेगनेंसी टेस्ट कब करें?

PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि ओव्यूलेशन कब होगा यह पता नहीं चलता। कभी 30 दिन में ओव्यूलेशन होता है, कभी 45 दिन में, कभी 60 दिन में। और जब ओव्यूलेशन का पता ही नहीं तो पीरियड मिस होने का कैलकुलेशन कैसे करें?

PCOS वाली महिलाओं के लिए एक गलती बहुत कॉमन है वह यह कि वे सोचती हैं कि 30 दिन हो गए मतलब पीरियड मिस हो गया, अब टेस्ट कर लेती हूँ। लेकिन अगर ओव्यूलेशन 25वें दिन हुआ था, तो 30वें दिन तक hCG बना ही नहीं होगा और टेस्ट नेगेटिव आएगा।

PCOS में प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें?

पीरियड मिस होने के बजाय ओव्यूलेशन के हिसाब से दिन गिनें। अगर आप OPK किट या बेसल टेम्परेचर से ओव्यूलेशन ट्रैक कर रही हैं तो ओव्यूलेशन के 14 से 16 दिन बाद टेस्ट करें।

अगर ओव्यूलेशन ट्रैक नहीं कर पा रहीं, तो अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें। इतने दिनों में अगर कंसेप्शन हुआ है तो hCG डिटेक्टेबल लेवल पर पहुँच जाता है।

एक और बात PCOS में अर्ली डिटेक्शन टेस्ट यूज़ करने से बचें। ये टेस्ट कम hCG लेवल पर भी पॉज़िटिव दिखाने का दावा करते हैं, लेकिन PCOS में लेट ओव्यूलेशन की वजह से फॉल्स नेगेटिव का रिस्क ज़्यादा रहता है। इसीलिए थोड़ा इंतज़ार करें और स्टैंडर्ड सेंसिटिविटी (25 mIU/mL) वाली किट ही यूज़ करें।

थायराइड की समस्या हो तो टेस्ट टाइमिंग कैसे तय करें?

थायराइड डिसऑर्डर, चाहे हाइपोथायराइड हो या हाइपरथायराइड, दोनों ओव्यूलेशन को प्रभावित करते हैं। थायराइड हॉर्मोन रिप्रोडक्टिव हॉर्मोन से जुड़े होते हैं, इसीलिए TSH लेवल डिसबैलेंस होने पर पीरियड्स भी इर्रेगुलर हो जाते हैं।

थायराइड की वजह से अनियमित साइकिल हो तो PCOS जैसी ही अप्रोच फॉलो करें यानी पीरियड मिस के बजाय इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें।

थायराइड पेशेंट्स की अक्सर दवाइयाँ चल रही होती हैं। ये दवाइयाँ प्रेगनेंसी टेस्ट को सीधे प्रभावित नहीं करतीं, लेकिन अगर टेस्ट पॉज़िटिव आए तो तुरंत डॉक्टर को बताएं क्योंकि प्रेगनेंसी में थायराइड मेडिसिन की डोज़ एडजस्ट करनी पड़ती है।

अनियमित पीरियड्स में टेस्ट का सही समय

इर्रेगुलर पीरियड्स की वजह सिर्फ PCOS या थायराइड नहीं होती। स्ट्रेस, वेट फ्लक्चुएशन, एक्सरसाइज़ पैटर्न, या बिना किसी डायग्नोज़्ड कंडीशन के भी पीरियड्स इर्रेगुलर हो सकते हैं।

इर्रेगुलर साइकिल में टेस्ट का फॉर्मूला

अपनी सबसे लंबी साइकिल को बेस मानें। अगर पिछले 6 महीनों में आपकी सबसे लंबी साइकिल 45 दिन की थी, तो 45 दिन पूरे होने के बाद टेस्ट करें या फिर अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें। यह रूल हर सिचुएशन में काम करता है क्योंकि 21 दिन में इम्प्लांटेशन और hCG प्रोडक्शन दोनों के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

अगर पहला टेस्ट नेगेटिव आए और पीरियड भी न आए, तो हर हफ्ते एक टेस्ट करती रहें जब तक पीरियड न आ जाए या टेस्ट पॉज़िटिव न हो जाए।

IVF/IUI के बाद प्रेगनेंसी टेस्ट कब करें?

IVF और IUI में टेस्ट की टाइमिंग बिल्कुल अलग होती है क्योंकि यहाँ नेचुरल कंसेप्शन नहीं हो रहा। डॉक्टर एक स्पेसिफिक डेट देते हैं जिसे बीटा डे (Beta Day) कहते हैं, इस दिन ब्लड टेस्ट से hCG लेवल चेक होता है।

IVF में टाइमिंग

  • अगर Day 5 ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर हुआ है, तो एम्ब्रीओ ट्रांसफर के 9 से 11 दिन बाद होम टेस्ट से हल्का पॉज़िटिव आ सकता है। लेकिन क्लिनिक का बीटा टेस्ट आमतौर पर ट्रांसफर के 10 से 14 दिन बाद होता है।
  • अगर Day 3 एम्ब्रीओ ट्रांसफर हुआ है तो ट्रांसफर के 12 से 14 दिन बाद टेस्ट करें।

IUI में टाइमिंग

  • IUI प्रोसीजर के 14 से 16 दिन बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करें। IUI में स्पर्म को यूट्रस में डायरेक्ट इंजेक्ट किया जाता है, इसीलिए फर्टिलाइज़ेशन और इम्प्लांटेशन की टाइमलाइन नेचुरल कंसेप्शन जैसी ही होती है।

ट्रिगर शॉट का ध्यान रखें

  • IVF/IUI में अक्सर hCG ट्रिगर शॉट दिया जाता है जो ओव्यूलेशन को ट्रिगर करता है। यह इंजेक्शन शरीर में hCG डालता है जो 10 से 14 दिन तक रह सकता है। अगर इस दौरान टेस्ट किया तो फॉल्स पॉज़िटिव आएगा क्योंकि टेस्ट इंजेक्शन वाले hCG को पकड़ लेगा, प्रेगनेंसी वाले को नहीं।
  • इसीलिए डॉक्टर की बताई डेट से पहले टेस्ट न करें। जल्दबाज़ी में किया गया टेस्ट सिर्फ कन्फ्यूज़न और स्ट्रेस देगा।

मिसकैरेज के बाद दोबारा टेस्ट कब करें?

सेफ अप्रोच

मिसकैरेज के बाद शरीर में hCG धीरे-धीरे कम होता है। इसमें 4 से 6 हफ्ते लग सकते हैं जब तक hCG ज़ीरो न हो जाए। अगर इस दौरान टेस्ट किया तो पॉज़िटिव आ सकता है जो पुरानी प्रेगनेंसी का hCG होगा, नई का नहीं।

मिसकैरेज के बाद पहले पीरियड का इंतज़ार करें। पीरियड आने का मतलब है कि शरीर रिकवर हो गया और hCG ज़ीरो हो गया। इसके बाद अगली साइकिल में कंसीव करने पर नॉर्मल टाइमिंग फॉलो करें।

अगर डॉक्टर ने कंसीव करने की परमिशन दे दी है और पीरियड अभी तक नहीं आया, तो ब्लड टेस्ट से hCG लेवल कंफर्म करवाएं कि वो ज़ीरो है। उसके बाद ही नई प्रेगनेंसी के लिए टेस्ट करें।

दूसरी या तीसरी प्रेगनेंसी में टेस्ट अलग क्यों होता है?

पहली प्रेगनेंसी में ज़्यादातर महिलाएं पीरियड मिस होने तक इंतज़ार करती हैं। लेकिन दूसरी या तीसरी प्रेगनेंसी में शरीर के सिग्नल्स पहचानना आसान हो जाता है। कई महिलाएं पीरियड मिस होने से पहले ही महसूस कर लेती हैं कि कुछ अलग है।

अगर आपको पहली प्रेगनेंसी में जो लक्षण जैसे ब्रेस्ट में भारीपन, थकान, या स्मेल सेंसिटिविटी थे, वो फिर से महसूस हो रहे हैं, तो आप पीरियड मिस होने से 2-3 दिन पहले भी अर्ली डिटेक्शन टेस्ट ट्राई कर सकती हैं।

लेकिन याद रखें, पिछली प्रेगनेंसी में कोई कॉम्प्लिकेशन जैसे एक्टोपिक प्रेगनेंसी या मिसकैरेज था, तो इस बार पॉज़िटिव आते ही डॉक्टर से मिलें और ब्लड टेस्ट से hCG लेवल मॉनिटर करवाएं।

कौन सी प्रेगनेंसी किट किस सिचुएशन में यूज़ करें?

  • स्ट्रिप टेस्ट (Strip Test) यह सबसे सस्ती और बेसिक किट है । इसे यूरिन में डुबोना होता है। इसे रेगुलर साइकिल वाली महिलाओं के लिए पीरियड मिस होने के बाद यूज़ करना बेस्ट है। इसकी सेंसिटिविटी आमतौर पर 25 mIU/mL होती है।
  • मिडस्ट्रीम टेस्ट (Midstream Test) इसमें कंटेनर की ज़रूरत नहीं होती और किट को सीधे यूरिन स्ट्रीम में रखना होता है । यह यूज़ करने में आसान और हाइजीनिक होती है । मिडस्ट्रीम किट PCOS या इर्रेगुलर साइकिल वाली महिलाओं के लिए अच्छा ऑप्शन है।
  • डिजिटल टेस्ट (Digital Test) यह लाइन्स के बजाय ‘Pregnant’ या ‘Not Pregnant’ लिखा हुआ दिखाती है। इसमें फैंट लाइन का कन्फ्यूज़न नहीं होता। यह किट IVF पेशेंट्स के लिए अच्छी है क्योंकि इसमें क्लियर रिज़ल्ट पढ़ सकते हैं। लेकिन यह किट महँगी होती है।
  • अर्ली डिटेक्शन टेस्ट (Early Detection Test) यह किट 10-15 mIU/mL पर भी hCG डिटेक्ट कर सकती है और रेगुलर साइकिल और ओव्यूलेशन ट्रैक करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है। इससे पीरियड मिस होने से 4-5 दिन पहले भी पॉज़िटिव देखा जा सकता है। लेकिन PCOS वाली महिलाएं इसे इस्तेमाल न करें तो ठीक है क्योंकि लेट ओव्यूलेशन की वजह से फॉल्स नेगेटिव आने का रिस्क रहता है।

ओव्यूलेशन ट्रैक नहीं किया तो क्या करें?

अगर आपने ओव्यूलेशन ट्रैक नहीं किया और अब पता नहीं कि टेस्ट कब करें, तो यह यूनिवर्सल रूल फॉलो करें।

आखिरी अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें क्योंकि इसमें हर संभव सिचुएशन, चाहे ओव्यूलेशन जल्दी हुआ हो या लेट, इम्प्लांटेशन जल्दी हुआ हो या देर से, कवर हो जाती है, ।

अगर 21 दिन बाद भी नेगेटिव आए और पीरियड न आए, तो एक हफ्ते बाद दोबारा टेस्ट करें। दो बार नेगेटिव आने के बाद भी पीरियड न आए तो डॉक्टर से मिलें।

hCG डबलिंग क्यों ज़रूरी है समझना?

हेल्दी प्रेगनेंसी में hCG हर 48 से 72 घंटे में डबल होता है। इसीलिए अगर आज फेंट लाइन आई है, तो 2-3 दिन बाद दोबारा टेस्ट करने पर लाइन गहरी होनी चाहिए।

अगर लाइन गहरी नहीं हो रही या हल्की होती जा रही है, तो यह केमिकल प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है। IVF पेशेंट्स और जिन्हें पहले मिसकैरेज हुआ हो, उनके लिए डॉक्टर 48 घंटे के गैप पर ब्लड टेस्ट करवाते हैं।

निष्कर्ष

अगर आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल रेगुलर है तो पीरियड मिस होने के बाद टेस्ट प्रेगनेंसी टेस्ट करें। PCOS या अनियमित साइकिल है तो अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें। IVF/IUI में pregnancy test kab karna chahiye, इसका जवाब है डॉक्टर की बताई डेट फॉलो करें और मिसकैरेज के बाद पहले पीरियड का इंतज़ार करें।

ध्यान रहे कि जल्दबाज़ी में टेस्ट करने से सिर्फ़ कन्फ्यूज़न और स्ट्रेस मिलता है, इसीलिए पढ़ कर और समझ कर सही टाइमिंग पर ही टेस्ट करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

PCOS में प्रेगनेंसी टेस्ट कब करना चाहिए?

 

ओव्यूलेशन के 14-16 दिन बाद या अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद। पीरियड मिस होने के हिसाब से न गिनें क्योंकि PCOS में ओव्यूलेशन लेट होता है।

IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर के कितने दिन बाद टेस्ट करें?

 

Day 5 ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर के 10-14 दिन बाद। ट्रिगर शॉट की वजह से पहले टेस्ट करने पर फॉल्स पॉज़िटिव आ सकता है।

मिसकैरेज के बाद प्रेगनेंसी टेस्ट कब करें?

 

पहले पीरियड आने के बाद ही नई प्रेगनेंसी के लिए टेस्ट करें। उससे पहले पुरानी प्रेगनेंसी का hCG शरीर में रह सकता है।

कौन सी प्रेगनेंसी किट PCOS के लिए बेस्ट है?

 

स्टैंडर्ड सेंसिटिविटी (25 mIU/mL) वाली मिडस्ट्रीम या डिजिटल किट। अर्ली डिटेक्शन किट से बचें क्योंकि फॉल्स नेगेटिव का रिस्क ज़्यादा है।

अनियमित पीरियड्स में टेस्ट का क्या फॉर्मूला है?

 

अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें। यह रूल हर सिचुएशन में काम करता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
© 2026 Indira IVF Hospital Limited. All Rights Reserved. T&C Apply | Privacy Policy| *Disclaimer