अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं तो प्रेगनेंसी टेस्ट के बारे में आपको अक्सर यह सलाह दी गयी होगी कि ‘पीरियड मिस
होने के बाद टेस्ट करें। लेकिन यह सलाह तब काम करती है जब आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल रेगुलर हो। अगर आपको PCOS है और
तीन-तीन महीने पीरियड नहीं आते, तो पीरियड मिस होने का मतलब ही नहीं बनता। या अगर आपने IVF करवाया है और एम्ब्रीओ
ट्रांसफर हो चुका है, तो टेस्ट का टाइम बिल्कुल अलग होता है। या फिर पहले मिसकैरेज हो चुका है और इस बार जल्दी कंफर्म
करना चाहती हैं तब क्या करें?
आपकी मेडिकल हिस्ट्री, साइकिल पैटर्न, और कंसीव करने का तरीका, ये सब मिलकर तय करते हैं कि आपको Pregnancy test kab
karna chahiye क्योंकि प्रेगनेंसी टेस्ट की सही टाइमिंग हर महिला के लिए अलग होती है।
इस आर्टिकल में हम उन सारी सिचुएशन्स को कवर करेंगे जिनकी जानकारी अक्सर इंटरनेट पर आसानी से नहीं मिलती, जैसे PCOS में
टेस्ट कब करें, थायराइड की समस्या हो तो क्या ध्यान रखें, IVF/IUI के बाद कितने दिन इंतज़ार करें, और कौन सी किट किस
सिचुएशन में बेस्ट रहती है।
PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि ओव्यूलेशन कब होगा यह पता नहीं चलता। कभी 30 दिन में ओव्यूलेशन होता है, कभी 45 दिन में, कभी 60 दिन में। और जब ओव्यूलेशन का पता ही नहीं तो पीरियड मिस होने का कैलकुलेशन कैसे करें?
PCOS वाली महिलाओं के लिए एक गलती बहुत कॉमन है वह यह कि वे सोचती हैं कि 30 दिन हो गए मतलब पीरियड मिस हो गया, अब टेस्ट कर लेती हूँ। लेकिन अगर ओव्यूलेशन 25वें दिन हुआ था, तो 30वें दिन तक hCG बना ही नहीं होगा और टेस्ट नेगेटिव आएगा।
पीरियड मिस होने के बजाय ओव्यूलेशन के हिसाब से दिन गिनें। अगर आप OPK किट या बेसल टेम्परेचर से ओव्यूलेशन ट्रैक कर रही हैं तो ओव्यूलेशन के 14 से 16 दिन बाद टेस्ट करें।
अगर ओव्यूलेशन ट्रैक नहीं कर पा रहीं, तो अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें। इतने दिनों में अगर कंसेप्शन हुआ है तो hCG डिटेक्टेबल लेवल पर पहुँच जाता है।
एक और बात PCOS में अर्ली डिटेक्शन टेस्ट यूज़ करने से बचें। ये टेस्ट कम hCG लेवल पर भी पॉज़िटिव दिखाने का दावा करते हैं, लेकिन PCOS में लेट ओव्यूलेशन की वजह से फॉल्स नेगेटिव का रिस्क ज़्यादा रहता है। इसीलिए थोड़ा इंतज़ार करें और स्टैंडर्ड सेंसिटिविटी (25 mIU/mL) वाली किट ही यूज़ करें।
थायराइड डिसऑर्डर, चाहे हाइपोथायराइड हो या हाइपरथायराइड, दोनों ओव्यूलेशन को प्रभावित करते हैं। थायराइड हॉर्मोन रिप्रोडक्टिव हॉर्मोन से जुड़े होते हैं, इसीलिए TSH लेवल डिसबैलेंस होने पर पीरियड्स भी इर्रेगुलर हो जाते हैं।
थायराइड की वजह से अनियमित साइकिल हो तो PCOS जैसी ही अप्रोच फॉलो करें यानी पीरियड मिस के बजाय इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें।
थायराइड पेशेंट्स की अक्सर दवाइयाँ चल रही होती हैं। ये दवाइयाँ प्रेगनेंसी टेस्ट को सीधे प्रभावित नहीं करतीं, लेकिन अगर टेस्ट पॉज़िटिव आए तो तुरंत डॉक्टर को बताएं क्योंकि प्रेगनेंसी में थायराइड मेडिसिन की डोज़ एडजस्ट करनी पड़ती है।
इर्रेगुलर पीरियड्स की वजह सिर्फ PCOS या थायराइड नहीं होती। स्ट्रेस, वेट फ्लक्चुएशन, एक्सरसाइज़ पैटर्न, या बिना किसी डायग्नोज़्ड कंडीशन के भी पीरियड्स इर्रेगुलर हो सकते हैं।
अपनी सबसे लंबी साइकिल को बेस मानें। अगर पिछले 6 महीनों में आपकी सबसे लंबी साइकिल 45 दिन की थी, तो 45 दिन पूरे होने के बाद टेस्ट करें या फिर अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें। यह रूल हर सिचुएशन में काम करता है क्योंकि 21 दिन में इम्प्लांटेशन और hCG प्रोडक्शन दोनों के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
अगर पहला टेस्ट नेगेटिव आए और पीरियड भी न आए, तो हर हफ्ते एक टेस्ट करती रहें जब तक पीरियड न आ जाए या टेस्ट पॉज़िटिव न हो जाए।
IVF और IUI में टेस्ट की टाइमिंग बिल्कुल अलग होती है क्योंकि यहाँ नेचुरल कंसेप्शन नहीं हो रहा। डॉक्टर एक स्पेसिफिक डेट देते हैं जिसे बीटा डे (Beta Day) कहते हैं, इस दिन ब्लड टेस्ट से hCG लेवल चेक होता है।
मिसकैरेज के बाद शरीर में hCG धीरे-धीरे कम होता है। इसमें 4 से 6 हफ्ते लग सकते हैं जब तक hCG ज़ीरो न हो जाए। अगर इस दौरान टेस्ट किया तो पॉज़िटिव आ सकता है जो पुरानी प्रेगनेंसी का hCG होगा, नई का नहीं।
मिसकैरेज के बाद पहले पीरियड का इंतज़ार करें। पीरियड आने का मतलब है कि शरीर रिकवर हो गया और hCG ज़ीरो हो गया। इसके बाद अगली साइकिल में कंसीव करने पर नॉर्मल टाइमिंग फॉलो करें।
अगर डॉक्टर ने कंसीव करने की परमिशन दे दी है और पीरियड अभी तक नहीं आया, तो ब्लड टेस्ट से hCG लेवल कंफर्म करवाएं कि वो ज़ीरो है। उसके बाद ही नई प्रेगनेंसी के लिए टेस्ट करें।
पहली प्रेगनेंसी में ज़्यादातर महिलाएं पीरियड मिस होने तक इंतज़ार करती हैं। लेकिन दूसरी या तीसरी प्रेगनेंसी में शरीर के सिग्नल्स पहचानना आसान हो जाता है। कई महिलाएं पीरियड मिस होने से पहले ही महसूस कर लेती हैं कि कुछ अलग है।
अगर आपको पहली प्रेगनेंसी में जो लक्षण जैसे ब्रेस्ट में भारीपन, थकान, या स्मेल सेंसिटिविटी थे, वो फिर से महसूस हो रहे हैं, तो आप पीरियड मिस होने से 2-3 दिन पहले भी अर्ली डिटेक्शन टेस्ट ट्राई कर सकती हैं।
लेकिन याद रखें, पिछली प्रेगनेंसी में कोई कॉम्प्लिकेशन जैसे एक्टोपिक प्रेगनेंसी या मिसकैरेज था, तो इस बार पॉज़िटिव आते ही डॉक्टर से मिलें और ब्लड टेस्ट से hCG लेवल मॉनिटर करवाएं।
अगर आपने ओव्यूलेशन ट्रैक नहीं किया और अब पता नहीं कि टेस्ट कब करें, तो यह यूनिवर्सल रूल फॉलो करें।
आखिरी अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें क्योंकि इसमें हर संभव सिचुएशन, चाहे ओव्यूलेशन जल्दी हुआ हो या लेट, इम्प्लांटेशन जल्दी हुआ हो या देर से, कवर हो जाती है, ।
अगर 21 दिन बाद भी नेगेटिव आए और पीरियड न आए, तो एक हफ्ते बाद दोबारा टेस्ट करें। दो बार नेगेटिव आने के बाद भी पीरियड न आए तो डॉक्टर से मिलें।
हेल्दी प्रेगनेंसी में hCG हर 48 से 72 घंटे में डबल होता है। इसीलिए अगर आज फेंट लाइन आई है, तो 2-3 दिन बाद दोबारा टेस्ट करने पर लाइन गहरी होनी चाहिए।
अगर लाइन गहरी नहीं हो रही या हल्की होती जा रही है, तो यह केमिकल प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है। IVF पेशेंट्स और जिन्हें पहले मिसकैरेज हुआ हो, उनके लिए डॉक्टर 48 घंटे के गैप पर ब्लड टेस्ट करवाते हैं।
अगर आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल रेगुलर है तो पीरियड मिस होने के बाद टेस्ट प्रेगनेंसी टेस्ट करें। PCOS या अनियमित साइकिल है तो अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें। IVF/IUI में pregnancy test kab karna chahiye, इसका जवाब है डॉक्टर की बताई डेट फॉलो करें और मिसकैरेज के बाद पहले पीरियड का इंतज़ार करें।
ध्यान रहे कि जल्दबाज़ी में टेस्ट करने से सिर्फ़ कन्फ्यूज़न और स्ट्रेस मिलता है, इसीलिए पढ़ कर और समझ कर सही टाइमिंग पर ही टेस्ट करें।
ओव्यूलेशन के 14-16 दिन बाद या अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद। पीरियड मिस होने के हिसाब से न गिनें क्योंकि PCOS में ओव्यूलेशन लेट होता है।
Day 5 ब्लास्टोसिस्ट ट्रांसफर के 10-14 दिन बाद। ट्रिगर शॉट की वजह से पहले टेस्ट करने पर फॉल्स पॉज़िटिव आ सकता है।
पहले पीरियड आने के बाद ही नई प्रेगनेंसी के लिए टेस्ट करें। उससे पहले पुरानी प्रेगनेंसी का hCG शरीर में रह सकता है।
स्टैंडर्ड सेंसिटिविटी (25 mIU/mL) वाली मिडस्ट्रीम या डिजिटल किट। अर्ली डिटेक्शन किट से बचें क्योंकि फॉल्स नेगेटिव का रिस्क ज़्यादा है।
अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के 21 दिन बाद टेस्ट करें। यह रूल हर सिचुएशन में काम करता है।