अगर आप आईवीएफ (IVF) या नैचुरल तरीके से कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं, तो वो आपके लिए दो हफ्तों का इंतज़ार यानी टू-वीक वेट (Two-week wait) किसी सजा से कम नहीं लग रहा होगा। अक्सर क्लिनिक में देखा जाता है कि महिलाएं पीरियड्स मिस होने से 4-5 दिन पहले ही टेस्ट कर लेती हैं। यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि आपका शरीर कितनी भी जल्दी संकेत दे, लेकिन hCG हार्मोन को यूरिन में इतनी मात्रा में आने के लिए समय चाहिए होता है कि किट उसे पहचान सके। यह आर्टिकल उन महिलाओं के लिए है जो pregnancy test kaise karen यह जानना चाहती हैं, खासकर उन महिलाओं के लिए जो फर्टिलिटी ट्रीटमेंट या IVF की तैयारी कर रही हैं, जहाँ हर टेस्ट का सही होना बेहद जरूरी है। अगर आप इस कश्मकश में हैं कि टेस्ट कब और कैसे करना है, यह सारी बातें इस आर्टिकल के माध्यम से समझते हैं, जिसके बाद आपसे कभी गलती नहीं होगी।
बाजार में दर्जनों तरह की प्रेगनेंसी टेस्ट किट मौजूद हैं, ऐसे में वह किट चुनना सबसे मुश्किल हो जाता है जिसके रिजल्ट पर भरोसा किया जा सके। जब एग और स्पर्म के मिल कर फर्टिलाइजेशन कर देते हैं तो उसके बाद भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (Embryo) गर्भाशय की दीवार से चिपकता है, जिसे इम्प्लांटेशन कहते हैं। इसके बाद शरीर hCG (Human Chorionic Gonadotropin) नाम का हार्मोन बनाना शुरू कर देता है, प्रेगनेंसी हॉर्मोन भी कहा जाता है। घर पर इस्तेमाल होने वाली किट इसी हार्मोन के प्रति संवेदनशील यानी सेंसिटिव होती है। इसीलिए सबसे अच्छी किट वह नहीं है जो महंगी हो, बल्कि वह है जिसकी सेंसिटिविटी ज्यादा हो। मेडिकल टर्म में इसे mIU/mL में मापा जाता है।
बाजार में दो तरह की किट होती हैं पिंक डाई वाली और ब्लू डाई वाली। पिंक डाई वाली किट में लाइन साफ और शार्प आती है। अगर लाइन है, तो गुलाबी दिखेगी चाहे हल्की हो। अगर नहीं है, तो कुछ नहीं दिखेगा। इसमें "शायद है, शायद नहीं" वाली स्थिति कम बनती है।जबकि ब्लू डाई किट में समस्या यह है इसमें इवैपोरेशन लाइन यानी यूरिन सूखने पर बनने वाली धारी अक्सर हल्की नीली दिखती है। जो असली पॉजिटिव जैसी लगती है। TTC (trying to conceive) कम्युनिटी में इसे "false hope line" कहते हैं जो उम्मीद तो बंधाती है, लेकिन बाद में उसे तोड़ भी देती है।
अगर आपको 'हल्की लाइन' देखकर हमेशा कंफ्यूजन होता है, तो डिजिटल किट आपके लिए 'Ease of Testing' के लिहाज से बेहतर है। इसमें कोई लाइन नहीं देखनी पड़ती, सीधा 'Pregnant' या 'Not Pregnant' लिखा आता है, जिससे मन में कोई भ्रम यानी कन्फ्यूज़न (confusion) नहीं रहता। इसके अंदर वही स्ट्रिप होती है जो साधारण किट में होती है बस एक छोटा कंप्यूटर उसे पढ़कर शब्दों में बदल देता है। डिजिटल किट की सेंसिटिविटी अक्सर कम होती है (25 mIU/ml), इसलिए बहुत जल्दी टेस्ट करने पर यह नेगेटिव दिखा सकती है जबकि पिंक डाई स्ट्रिप हल्की पॉजिटिव दिखाती।
अक्सर पूछा जाता है कि pregnancy test kaise karen जिससे कोई गड़बड़ न हो। नीचे कुछ 'प्रो-टिप्स' दिए जा रहे हैं जो सही तरीके से टेस्ट करने में आपकी मदद करेंगे।
रिजल्ट विंडो को देखते समय इन तीन स्थितियों को समझें।
अगर आपका आईवीएफ ट्रीटमेंट चल रहा है और हाल ही में आपका एग रिट्रीवल इन आईवीएफ (egg retrieval in IVF) हुआ है, तो आपको घर पर टेस्ट करने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। आईवीएफ के दौरान दिए जाने वाले 'ट्रिगर इंजेक्शन' में खुद hCG हॉर्मोन होता है। यह इंजेक्शन लेने के 10-12 दिनों तक आपके शरीर में रह सकता है। अगर आप इस दौरान टेस्ट करती हैं, तो किट उस इंजेक्शन वाले हॉर्मोन को पकड़ लेगी और आपको 'फॉल्स पॉजिटिव' रिजल्ट दे देगी, जबकि असल में गर्भधारण नहीं हुआ होगा। इसीलिए, आईवीएफ में हमेशा एम्ब्रीओ ट्रांसफर के 14 दिन बाद लैब में Beta-hCG ब्लड टेस्ट ही करवाना चाहिए।
कुछ स्थितियों में घर का यूरिन टेस्ट भरोसेमंद नहीं होता। तब Beta-hCG ब्लड टेस्ट ही सही जवाब दे सकता है। लेकिन सवाल है कि ब्लड टेस्ट कब करवाएं।
Pregnancy test kaise karen यह समझना हर महिला के लिए ज़रूरी है, ताकि टेस्ट डर या जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि सही जानकारी के साथ किया जाए। सही समय, सही तरीका और सही समझ इन तीनों का संतुलन ही accurate रिज़ल्ट देता है। अगर आप धैर्य के साथ सही दिन पर टेस्ट करती हैं और ज़रूरत पड़ने पर मेडिकल जांच करवाती हैं, तो confusion की कोई जगह नहीं रहती।
पिंक डाई वाली किट जिसकी सेंसिटिविटी 25 mIU/ml या उससे कम हो। ब्लू डाई किट में इवैपोरेशन लाइन ज्यादा आती है जो कन्फ्यूज़न पैदा करती है।
पीरियड मिस होने के पहले दिन या उसके बाद। इससे पहले करने पर फॉल्स नेगेटिव का खतरा रहता है।
रात भर पेशाब ब्लैडर में रहता है, इसलिए hCG सबसे कंसन्ट्रेटेड होता है। दिन में पानी पीने के बाद पेशाब पतला हो जाता है और किट hCG पकड़ नहीं पाती।
अगर लाइन में रंग है और 3-5 मिनट में आई है, तो प्रेगनेंट हैं। 48 घंटे बाद दोबारा टेस्ट करें।
बेरंग या ग्रे लाइन जो 10 मिनट बाद दिखे वह इवैपोरेशन लाइन है। असली पॉजिटिव में रंग होता है और 3 से 5 मिनट में दिखती है।
3 से 4 दिन बाद दोबारा टेस्ट करें। अगर फिर भी रिजल्ट नेगेटिव है और पीरियड 10 दिन से ज्यादा लेट हैं, तो Beta-hCG ब्लड टेस्ट करवाएं।
डिजिटल पढ़ने में आसान है, लेकिन सेंसिटिविटी कम होती है। जल्दी टेस्ट करना हो तो पिंक डाई स्ट्रिप बेहतर है।
एम्ब्रियो ट्रांसफर के 12-14 दिन बाद। इससे पहले ट्रिगर इंजेक्शन का hCG फॉल्स पॉजिटिव दे सकता है।
एक बार काफी है। hCG बढ़ने में समय लगता है। अगर सुबह रिजल्ट नेगेटिव था, तो शाम को पॉजिटिव नहीं हो जाएगा। टेस्ट में 48 घंटे का अंतर रखें।