एक साल तक नियमित और बिना सुरक्षा के संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण न हो पाना बांझपन (इन्फर्टिलिटी) कहलाता है। अगर आप प्राथमिक और द्वितीयक बांझपन के बीच का फर्क समझ लें, तो अपनी स्थिति को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। इस लेख में हम बांझपन के इन दोनों प्रकारों के सामान्य लक्षण और कारणों पर बात करेंगे, ताकि आपको अपनी स्थिति और उपलब्ध मेडिकल समाधान स्पष्ट रूप से समझ आ सकें।
बांझपन का मतलब है 12 महीनों या उससे अधिक समय तक नियमित, असुरक्षित संबंध के बावजूद गर्भ न ठहरना। यह स्थिति पुरुषों और महिलाओं, दोनों को प्रभावित कर सकती है, और इसे आमतौर पर दो प्रकारों में बांटा जाता है: प्राथमिक और द्वितीयक।
यह जानना जरूरी है कि बांझपन प्राथमिक है या द्वितीयक, क्योंकि इससे जांच और इलाज की दिशा तय होती है। द्वितीयक बांझपन में पहले गर्भधारण हो चुका होने के कारण भावनात्मक उलझन और निराशा अक्सर ज्यादा होती है।
जब किसी कपल में पहले कभी गर्भधारण नहीं हुआ हो और फिर भी एक साल तक नियमित, असुरक्षित संबंध बनाने के बाद गर्भ न ठहरे, तो इसे प्राथमिक बांझपन कहा जाता है। यह अक्सर उन कपल्स में देखा जाता है जो पहली बार परिवार शुरू करने की कोशिश कर रहे होते हैं। कुछ मामलों में प्राथमिक बांझपन आनुवंशिक भी हो सकता है, यानी यह माता-पिता से आगे पीढ़ी में आ सकता है। ऐसे मामलों में खास जांच और उपचार की जरूरत पड़ सकती है।
जब पहले एक या एक से ज्यादा बार गर्भधारण/सफल प्रेग्नेंसी हो चुकी हो, लेकिन अब दोबारा गर्भ ठहरने या प्रेग्नेंसी को पूरा समय तक ले जाने में परेशानी हो, तो इसे द्वितीयक बांझपन कहा जाता है। कई लोगों को लगता है कि यह उतना गंभीर नहीं होता, लेकिन यह प्राथमिक बांझपन जितना ही गंभीर हो सकता है, और कई बार मानसिक रूप से ज्यादा तकलीफदेह भी, क्योंकि पहले गर्भधारण हो चुका होता है और फिर अचानक दिक्कत आना शॉक जैसा लग सकता है।
चाहे आप किसी भी तरह की फर्टिलिटी समस्या से गुजर रहे हों, प्रोफेशनल सलाह लेना हमेशा बेहतर रहता है, ताकि सही जांच और सही दिशा में उपचार समय पर शुरू हो सके।
महिलाओं में प्राथमिक बांझपन के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर कारण स्त्री रोग से जुड़ी समस्याओं से संबंधित होते हैं। आम कारण ये हैं:
पुरुषों में बांझपन की वजह कई बार शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता से जुड़ी होती है, जैसे शुक्राणु कम होना, असामान्य होना, गति कम होना या शुक्राणु न होना। आम कारण ये हैं:
अगर पहले नेचुरली गर्भधारण हो चुका हो और बाद में दोबारा गर्भ ठहरने में परेशानी आने लगे, तो यह स्थिति कपल्स के लिए मानसिक रूप से काफी तनावपूर्ण हो सकती है। ऐसा कई नए या बदलते कारणों की वजह से हो सकता है। ये कारण महिला या पुरुष, किसी में भी हो सकते हैं और पहली प्रेग्नेंसी से पहले या बाद में विकसित हो सकते हैं।
द्वितीयक बांझपन के इलाज में असली कारण को पहचानना सबसे जरूरी होता है। कई बार सही जांच और लाइफस्टाइल/हेल्थ में सुधार से गर्भधारण की संभावना काफी बढ़ सकती है।
किसी भी इलाज की असली शुरुआत सही कारण पहचानने से होती है। प्राथमिक हो या द्वितीयक, दोनों तरह के बांझपन में आमतौर पर दोनों पार्टनर्स की जांच की जाती है, ताकि समस्या का स्रोत स्पष्ट हो सके।
महिलाओं में फर्टिलिटी जांच की शुरुआत आम तौर पर डिटेल्ड मेडिकल हिस्ट्री और ओव्यूलेशन ट्रैकिंग से होती है।
महिलाओं में फर्टिलिटी की जांच सबसे पहले विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री और ओव्यूलेशन की स्थिति समझने से शुरू होती है।
बेसल बॉडी टेम्परेचर पर नज़र रखना, ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट का इस्तेमाल करना, या हार्मोन लेवल (जैसे LH और प्रोजेस्टेरोन) की जांच से यह पता चलता है कि ओव्यूलेशन नियमित रूप से हो रहा है या नहीं।
खून के सैंपल से रिप्रोडक्टिव हार्मोन की जांच की जाती है, जैसे:
ओवरी और गर्भाशय की स्थिति देखने के लिए इमेजिंग की जाती है, जैसे फाइब्रॉएड, सिस्ट या अन्य असामान्यताएं तो नहीं हैं।
यह एक एक्स-रे जांच होती है, जिसमें डॉक्टर देखते हैं कि फैलोपियन ट्यूब खुली हैं या नहीं, और गर्भाशय की कैविटी सामान्य है या नहीं।
एंटी-मुल्लेरियन हार्मोन की जांच से ओवरी रिज़र्व का अंदाज़ा लगता है, यानी ओवरी में बचे अंडों की संख्या कितनी है। फर्टिलिटी पोटेंशियल समझने में यह टेस्ट काफी उपयोगी माना जाता है।
पुरुषों में जांच का फोकस मुख्य रूप से शुक्राणुओं की गुणवत्ता, हार्मोन और किसी संरचनात्मक समस्या पर होता है।
प्राथमिक या द्वितीयक बांझपन की जांच अक्सर दोनों पार्टनर्स की मिलकर की गई प्रक्रिया होती है और इसे पूरा होने में कई हफ्ते भी लग सकते हैं।
अगर आपको नीचे दिए गए संकेत दिखें, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है:
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प्राथमिक हो या द्वितीयक, दोनों तरह का बांझपन जीवन को प्रभावित कर सकता है और अनिश्चितता व भावनात्मक उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है। लेकिन अगर आप दोनों के बीच का फर्क, उनके कारण, और जांच की प्रक्रिया समझ लें, तो सही समय पर सही कदम उठा पाना आसान हो जाता है। कई मामलों में प्राथमिक और द्वितीयक बांझपन का इलाज दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से संभव होता है, बस समय और सही मार्गदर्शन जरूरी है। जल्दी जांच, समझदारी भरा सपोर्ट और विशेषज्ञ की सलाह आपके माता-पिता बनने की संभावना को बेहतर बना सकती है।
कुछ मामलों में हाँ, खासकर जब दूसरा बच्चा देर से प्लान किया जाए। हालांकि यह व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
कुछ मामलों में सुधार संभव है, जैसे वजन नियंत्रण, धूम्रपान/शराब छोड़ना, तनाव कम करना और सही डाइट अपनाना। लेकिन हर केस में सिर्फ लाइफस्टाइल से समाधान नहीं होता।
कारण के अनुसार इलाज तय होता है—ओव्यूलेशन की दवाएं, हार्मोन ट्रीटमेंट, ट्यूब/यूटेरस से जुड़ी समस्या का इलाज, और जरूरत पड़े तो आईयूआई/आईवीएफ जैसे विकल्प।
हाँ। उम्र बढ़ने के साथ अंडों की संख्या और गुणवत्ता घट सकती है, जिससे दोबारा गर्भधारण मुश्किल हो सकता है।
हाँ, कई मामलों में संभव है। सही जांच, कारण का इलाज और लाइफस्टाइल सुधार से नेचुरली कंसीव करने की संभावना बढ़ सकती है।