अगर आपका फर्टिलिटी का इलाज चल रहा है या आप पीरियड्स की अनियमितता से परेशान हैं, तो ऐसे में डॉक्टर आपको Progesterone tablet लेने की सलाह देते हैं। अक्सर महिलाएं इस टैबलेट को सिर्फ 'प्रेगनेंसी की दवा' समझ लेती हैं, लेकिन असल में यह उससे कहीं बढ़कर है। प्रोजेस्टेरोन एक प्राकृतिक हॉर्मोन है जो महिलाओं की ओवरी यानी अंडाशय में बनता है। इसे प्रेगनेंसी हॉर्मोन भी कहा जाता है क्योंकि इसके बिना न तो प्रेग्नेंट होना संभव है और न ही प्रेगनेंसी का ठीके रहना। जब शरीर में इस हॉर्मोन का स्तर गिर जाता है, तो डॉक्टर बाहर से सप्लीमेंट के रूप में प्रोजेस्टेरोन टैबलेट देते हैं। इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे कि किन 7 कंडीशन में डॉक्टर यह गोली लेने को कहते हैं और इसे लेने का सही तरीका क्या है।
प्रोजेस्टेरोन का महिला के शरीर में मुख्य काम गर्भाशय की भीतरी परत यानी एंडोमेट्रियम (Endometrium) को तैयार करना है। हर महीने जब ओव्यूलेशन यानी एग रिलीज होता है, तो ओवरी में'कॉर्पस लुटियम' नाम की एक छोटी ग्रंथि बनती है जो प्रोजेस्टेरोन रिलीज करती है। इसके 3 मुख्य कार्य हैं।
आजकल फर्टिलिटी ट्रीटमेंट (IVF/IUI) में प्रोजेस्टेरोन देना अनिवार्य हो गया है। असल में, IVF की प्रक्रिया के दौरान जो दवाइयां (Injections) दी जाती हैं, वे शरीर के नेचुरल प्रोजेस्टेरोन बनाने वाले सिस्टम को कुछ समय के लिए सुस्त कर देती हैं। इसे मेडिकल भाषा में 'लुटियल फेज डिफेक्ट' कहते हैं। इसका मतलब है कि भ्रूण यानी एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद हो सकता शरीर शायद उस एम्ब्रीओ को संभालने के लिए पर्याप्त हॉर्मोन न बना पाए।
इसलिए, एग रिट्रीवल (Egg Retrieval) वाले दिन से ही बाहर से प्रोजेस्टेरोन देना शुरू किया जाता है। यह एम्ब्रीओ के चिपकने यानी इम्प्लांटेशन (Implantation) में मदद करता है। अगर प्रेगनेंसी पॉज़िटिव आती है, तो इसे कम से कम 10-12 हफ्तों तक जारी रखा जाता है, जब तक कि प्लेसेंटा (Placenta) पूरी तरह से तैयार नहीं हो जाता।
दो या तीन बार गर्भपात होना किसी भी महिला के लिए मानसिक और शारीरिक तौर पर बहुत दुखद होता है। कई बार इसका कारण गर्भाशय में प्रोजेस्टेरोन की कमी होती है।
अगर आपकी हिस्ट्री ऐसी रही है, तो कई बार गर्भधारण की कोशिश के दौरान ही इसे शुरू कर दिया जाता है। यह गर्भाशय के वातावरण को इतना मजबूत बना देता है कि शुरुआती हफ्तों का समय सुरक्षित निकल जाए। रिसर्च बताती है कि जिन महिलाओं को पहले मिसकैरेज हुआ है, उनमें प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट से सफल डिलीवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है।
अगर आपके पीरियड्स कभी 20 दिन में आ जाते हैं तो कभी 2 महीने तक नहीं आते तो इसका मतलब है कि आपकी ओवरी में एग सही समय पर नहीं बन रहा या रिलीज नहीं हो रहा।
ऐसी कंडीशन में आपको 10 से 12 दिन के लिए Progesterone tablet खाने की सलाह दी जाती है। जब आप यह गोली बंद करती हैं, तो शरीर में अचानक हॉर्मोन का लेवल गिरता है। शरीर को लगता है कि ओव्यूलेशन हो चुका है और अब सफाई का वक्त है। इससे 2 से 7 दिन के भीतर ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। इसे 'विड्रॉल ब्लीडिंग' कहते हैं, जो आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल को दोबारा पटरी पर लाने में मदद करती है।
PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) में ओव्यूलेशन न होने के कारण प्रोजेस्टेरोन बन ही नहीं पाता। इसकी वजह से एंडोमेट्रियम मोटी होती जाती है लेकिन बाहर नहीं निकलती।
अगर 3-4 महीने तक पीरियड्स न आएं, तो यह परत बहुत ज्यादा मोटी यानी एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया (Endometrial Hyperplasia) हो सकती है, जो भविष्य में कैंसर का खतरा भी पैदा कर सकती है। इसलिए, समय-समय पर प्रोजेस्टेरोन का 10 दिन का कोर्स दिया जाता है ताकि गर्भाशय की पुरानी परत साफ हो जाए।
प्रेगनेंसी के पहले 3 महीनों में हल्की सी भी ब्लीडिंग या ब्राउन डिस्चार्ज दिखना डरावना हो सकता है। इसे हम थ्रेटेड अबॉर्शन (Threatened Abortion) कहते हैं।
ऐसी कंडीशन में प्रोजेस्टेरोन एक इमरजेंसी दवा की तरह काम करता है। यह तुरंत गर्भाशय को रिलैक्स करता है और ब्लीडिंग को रोकने की कोशिश करता है।
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें गर्भाशय की परत जैसे टिशू शरीर के अन्य अंगों पर उगने लगते हैं। इससे पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द होता है।
प्रोजेस्टेरोन इन बाहरी टिशू की ग्रोथ को रोकता है। जब आप लंबे समय तक यानी 3 से 6 महीने Progesterone tablet लेती हैं, तो ये टिशू धीरे-धीरे सूखने लगते हैं और दर्द में काफी आराम मिलता है।
जब पीरियड्स बंद होने वाले होते हैं, तो शरीर में हॉर्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। अगर आप मेनोपॉज़ के लक्षणों जैसे अचानक गर्मी लगना या हड्डियों का दर्द के लिए एस्ट्रोजन ले रही हैं, तो उसके साथ Progesterone tablet लेना बहुत जरूरी है। अगर सिर्फ एस्ट्रोजन लिया जाए, तो यूट्रस की लाइनिंग बेकाबू होकर बढ़ सकती है। प्रोजेस्टेरोन इसे कंट्रोल में रखता है।
मरीजों को अक्सर अलग-अलग फॉर्म में यह दवा दी जाती है।
जब प्रोजेस्टेरोन आपके खून में घुलता है, तो शरीर कुछ सिग्नल देता है। इन्हें साइड इफेक्ट्स समझकर डरें नहीं, इससे पता चलता है कि दवा काम कर रही है।
Progesterone tablet आपके शरीर की नेचुरल कैपेसिटी को दिया गया एक सपोर्ट है। चाहे आप मां बनने की कोशिश कर रही हों या अपनी सेहत को संतुलित करना चाहती हों, यह हॉर्मोन आपके सफर को आसान बनाता है।
बस याद रखें कि हॉर्मोन्स के साथ छेड़छाड़ न करें। डॉक्टर ने जैसा और जितने समय के लिए बताया है, उसे सख्ती से फॉलो करें। अगर आपको पैरों में तेज दर्द, अचानक सांस फूलना या आंखों के सामने धुंधलापन महसूस हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।