अक्सर कपल्स सब कुछ सही होने के बाद भी प्रेगनेंसी प्लान नहीं कर पाते। रिपोर्ट्स नॉर्मल लगती हैं, लेकिन "गुड न्यूज़" नहीं मिलती। इसका एक छुपा हुआ कारण हो सकता है हाई प्रोलैक्टिन हार्मोन (Prolactin Hormone)। जिसे हम आम भाषा में 'मिल्क हार्मोन' कहते हैं, वह अगर गलत समय पर बढ़ जाए, तो यह शरीर के लिए एक "नेचुरल गर्भनिरोधक यानी नेचुरल कॉन्ट्रासेप्टिव (Natural Contraceptive) का काम करने लगता है। अगर आप prolactin test in hindi जानना चाहते हैं तो इस आर्टिकल में हम आसान भाषा में समझेंगे कि प्रोलैक्टिन टेस्ट क्या है, यह फर्टिलिटी को कैसे रोकता है, और हाई लेवल को नार्मल कैसे किया जाए।
प्रोलैक्टिन टेस्ट एक साधारण ब्लड टेस्ट है, जिससे शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन के स्तर की जांच की जाती है। यह हार्मोन प्रजनन स्वास्थ्य और स्तनपान से जुड़ा होता है। महिलाओं में इसके असंतुलन से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या गर्भधारण में दिक्कत आ सकती है, जबकि पुरुषों में यह यौन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह से यह टेस्ट करवाना जरूरी होता है।
हमारे दिमाग के निचले हिस्से में एक मटर के दाने जितनी ग्रंथि होती है, जिसे 'पिट्यूटरी ग्लैंड' (Pituitary Gland) कहते हैं। प्रोलैक्टिन इसी मास्टर ग्लैंड से निकलता है।
इसे आसान भाषा में समझें तो प्रोलैक्टिन का मुख्य काम "ममता का हार्मोन" बनना है। जब एक महिला गर्भवती होती है या बच्चे को जन्म देती है, तो यह हार्मोन शरीर को आदेश देता है कि "अब बच्चे के लिए दूध (Breast Milk) बनाने का समय है।" लेकिन समस्या तब आती है, जब आप गर्भवती नहीं हैं या आप पुरुष हैं फिर भी यह हार्मोन शरीर में बढ़ने लगता है।
यह हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण है। आखिर एक हार्मोन प्रेगनेंसी को कैसे रोकता है?
इसे "नेचर के लॉजिक" से समझें। जब कोई माँ अपने बच्चे को स्तनपान (Breastfeeding) करा रही होती है, तो कुदरती तौर पर उसका शरीर दोबारा गर्भवती होने से बचता है। प्रोलैक्टिन हार्मोन ओवरी (अंडाशय) को सिग्नल देता है कि "अभी बच्चा छोटा है, अभी दूसरा अंडा (Egg) मत बनाओ।"
लेकिन अगर बिना प्रेगनेंसी के ही आपके शरीर में प्रोलैक्टिन हाई (Hyperprolactinemia) हो जाए, तो आपका दिमाग कन्फ्यूज हो जाता है। उसे लगता है कि आप शिशु को फीड करा रही हैं, और वह ओव्यूलेशन (एग बनने की प्रक्रिया) को रोक देता है।
इसका नतीजा यह होता है कि पीरियड्स या तो बंद हो जाते हैं या अनियमित हो जाते हैं, और गर्भ ठहरना नामुमकिन सा हो जाता है।
कई बार लक्षण इतने हल्के होते हैं कि हम उन्हें इग्नोर कर देते हैं। लेकिन अगर आप प्रेगनेंसी के लिए कोशिश कर रहे हैं, तो इन इशारों को पहचानना जरूरी है:
प्रोलैक्टिन सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं है। पुरुषों में यह 'टेस्टोस्टेरोन' को कम कर देता है।
जब आप अपनी रिपोर्ट देखेंगे, तो उसमें एक वैल्यू लिखी होगी। यह वैल्यू नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर (ng/mL) में मापी जाती है। इसे समझने के लिए नीचे दिया गया चार्ट देखें:
| कौन (Who) | नार्मल रेंज (ng/mL) | मतलब |
|---|---|---|
| गैर-गर्भवती महिलाएं | 2 से 25 ng/mL | यह सामान्य है। |
| गर्भवती महिलाएं | 10 से 209 ng/mL | प्रेगनेंसी में बढ़ना अच्छा संकेत है। |
| पुरुष | 2 से 18 ng/mL | इससे ज्यादा होना समस्या है। |
(नोट: हर लैब की मशीन के हिसाब से रेंज में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है, अपनी रिपोर्ट में दी गई 'Reference Range' जरूर देखें।)
डॉक्टर अक्सर "प्रोलैक्टिनोमा (पिट्यूटरी ग्लैंड की एक छोटी सी, नॉन-कैंसरस गांठ) की बात करते हैं, जो हाई लेवल का एक बड़ा कारण है। लेकिन इसके अलावा भी कई कारण हैं जो हमारे लाइफस्टाइल में छिपे हैं:
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यह वो जानकारी है जो अक्सर लैब्स या आर्टिकल में नहीं बताई जाती, और इसी वजह से रिपोर्ट गलत आ सकती है। प्रोलैक्टिन बहुत ही संवेदनशील (Sensitive) हार्मोन है।
अच्छी बात यह है कि हाई प्रोलैक्टिन का इलाज बहुत आसान और कारगर है।
यह बहुत महंगा टेस्ट नहीं है। भारत में शहर और लैब की क्वालिटी के हिसाब से इसका खर्च ₹400 से ₹800 के बीच हो सकता है।
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प्रोलैक्टिन का बढ़ा होना सुनने में डरावना लग सकता है, लेकिन फर्टिलिटी की दुनिया में यह "सबसे आसानी से ठीक होने वाली समस्याओं" में से एक है। अगर आपकी रिपोर्ट में लेवल हाई आया है, तो घबराएं नहीं। सही डॉक्टर (Endocrinologist या Infertility Specialist) से मिलें। अक्सर दवा शुरू करने के कुछ ही हफ्तों में ओव्यूलेशन फिर से शुरू हो जाता है और प्रेगनेंसी की राह आसान हो जाती है। बस, टेस्ट सही समय पर और सही तरीके से करवाएं ताकि इलाज सही दिशा में हो सके।
हाई प्रोलैक्टिन ओव्यूलेशन (अंडे बनने) को रोक देता है, जिससे नेचुरल प्रेगनेंसी मुश्किल हो जाती है। लेकिन, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों से जब लेवल नार्मल हो जाता है, तो प्रेगनेंसी की संभावना तुरंत बढ़ जाती है।
सबसे सटीक रिजल्ट के लिए, सोकर उठने के 3 से 4 घंटे बाद ब्लड सैंपल दें। जैसे, अगर आप सुबह 6 बजे उठते हैं, तो 9 से 10 बजे के बीच टेस्ट कराएं।
जी हाँ, बहुत ज्यादा। तनाव होने पर शरीर में हार्मोनल उथल-पुथल होती है। इसलिए टेस्ट से पहले शांत रहना बहुत जरूरी है, नहीं तो रिपोर्ट में 'फाल्स हाई' आ सकता है।
जिंक और विटामिन B6 से भरपूर खाना फायदेमंद होता है। आप अपनी डाइट में साबुत अनाज, फलियाँ (Beans), केला, आलू, और नट्स शामिल कर सकते हैं।
अगर किसी पुरुष को सेक्स की इच्छा में कमी (Low Libido), इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या स्तनों में बदलाव महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर उन्हें यह टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।