अंडकोष की थैली और पुरुष फर्टिलिटी पर इसका असर (Scrotum Meaning in Hindi)

Last updated: March 16, 2026

साराँश (Overview)

पुरुषों में निःसंतानता की जाँच के दौरान अक्सर डॉक्टर Scrotal Ultrasound करवाते हैं। और जब रिपोर्ट में "scrotum" या "scrotal sac" लिखा होता है तो कई लोग सोचते हैं कि यह क्या है और इसका फर्टिलिटी से क्या लेना-देना है। Scrotum meaning in hindi समझें तो यह अंडकोष है, वो थैली जो पुरुषों के दोनों अंडकोष (Testes) को बाहर से ढककर रखती है, और इसका सीधा संबंध स्पर्म बनने की प्रक्रिया से है।

स्पर्म बनने के लिए शरीर के तापमान से 2 से 3 डिग्री कम तापमान चाहिए। इसीलिए अंडकोष शरीर के बाहर इस थैली में होते हैं। अगर इस थैली या इसके अंदर की संरचनाओं में कोई समस्या हो, तो स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं।

पुरुष निःसंतानता के लगभग 40% मामलों में Scrotum से जुड़ी कोई न कोई समस्या पाई जाती है जैसे वैरीकोसेल (Varicocele), हाइड्रोसील (Hydrocele), या इन्फेक्शन (Infection)। अच्छी बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर का इलाज संभव है।

इस आर्टिकल में सबसे पहले समझते हैं Scrotum meaning in hindi, उसके बाद जानेंगे कि इसका मेल फ़र्टिलिटी से क्या संबंध है। इसके अलावा यह भी समझेंगे कि अगर scrotum में समस्या की वजह से आप पिता नहीं बन पा रहे हैं तो मॉडर्न मेडिकल साइंस आपके लिए क्या समाधान प्रदान कर सकती है।

Scrotum क्या है और यह फर्टिलिटी के लिए क्यों ज़रूरी है?

Scrotum meaning in hindi है अंडकोष यानी त्वचा की वह थैली जो पुरुषों के लिंग मतलब पेनिस (Penis) के नीचे लटकी रहती है। इसके अंदर दो अंडकोष यानी टेस्टिस (Testes) होते हैं जो स्पर्म और टेस्टोस्टेरोन बनाते हैं।

Scrotum के अंदर सिर्फ़ अंडकोष नहीं होते, बल्कि इसके अंदर कुछ और महत्वपूर्ण हिस्से भी होते हैं जो स्पर्म बनने और उसे आगे पहुँचाने के लिए बहुत जरुरी होते हैं।

  • टेस्टिस (Testes): यही वह जगह है जहाँ स्पर्म बनते हैं और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन बनता है।
  • एपिडिडाइमिस (Epididymis): यह टेस्टिस के पीछे लगी एक पतली कुंडली जैसी नली होती है। स्पर्म कुछ समय तक यहाँ रह कर पूरी तरह मैच्योर (mature) होते हैं।
  • स्पर्मेटिक कॉर्ड (Spermatic Cord): यह नसों और वेइन्स (veins) यानी रक्त वाहिकाओं का गुच्छा होता है जो scrotum तक खून पहुँचाता है और उनसे जुड़े सिग्नल को शरीर तक ले जाता है।

स्पर्म बनने के लिए सही टेंपरेचर की जरूरत

शरीर का नॉर्मल टेंपरेचर लगभग 37°C होता है। स्पर्म बनने के लिए शरीर के सामान्य से थोड़ा कम टेंपरेचर चाहिए होता है। आमतौर पर 34 से 35°C का टेंपरेचर इसके लिए सबसे सही माना जाता है। इसी वजह से टेस्टिस शरीर के बाहर इस थैली में रहते हैं।

Scrotum का एक खास काम टेंपरेचर को संतुलित रखना भी है। जब मौसम ठंडा होता है, तो यह थैली सिकुड़कर टेस्टिस को शरीर के थोड़ा करीब ले आती है ताकि वे गर्म रहें। और जब गर्मी होती है, तो यह ढीली होकर टेस्टिस को नीचे लटका देती है ताकि उनका तापमान कम रहे। आसान भाषा में कहें तो स्क्रोटम एक तरह की प्राकृतिक “तापमान नियंत्रण प्रणाली” है, जो स्पर्म को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Scrotum की समस्या #1: वैरिकोसील (Varicocele)

Varicocele को हिंदी में वैरिकोसील या अंडकोष की नसों में सूजन कहते हैं। यह scrotum की नसों में खून जमा होने से होता है बिल्कुल वैसे जैसे पैरों में वैरिकोज़ वेन्स होती हैं।

वैरिकोसील कितना कॉमन है?

लगभग 15% पुरुषों में वैरिकोसील होता है। लेकिन जो पुरुष पिता नहीं बन पा रहे, उनमें से 40% को वैरिकोसील होता है।

वैरिकोसील का स्पर्म पर क्या असर पड़ता है?

नसों में खून जमा होने से अंडकोष का टेंपरेचर बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ टेंपरेचर स्पर्म बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे स्पर्म की क्वालिटी घट जाती है।

वैरिकोसील की पहचान कैसे करें?

वैरिकोसील होने पर आपको खड़े होने पर scrotum में "कीड़ों की गठरी" जैसा महसूस होता है। स्क्रोटम में एक तरफ़, आमतौर पर बाईं ओर, सूजन या भारीपन, और दिन भर खड़े रहने के बाद हल्का दर्द होता है।

वैरिकोसील का इलाज क्या है?

वैरिकोसील होने पर सर्जरी की जरुरत पड़ती है। सर्जरी के बाद कई मामलों में स्पर्म काउंट और स्पर्म क्वालिटी दोनों में सुधार हो जाता है।

Scrotum की समस्या #2: हाइड्रोसील (Hydrocele)

हाइड्रोसील में अंडकोष के चारों ओर पानी जैसा तरल पदार्थ जमा हो जाता है। आमतौर पर यह धीरे-धीरे बढ़ता है और कई लोगों को शुरुआत में इसका पता भी नहीं चलता।

हाइड्रोसील का फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ता है?

छोटे हाइड्रोसील का आमतौर पर फर्टिलिटी पर सीधा असर नहीं पड़ता। लेकिन अगर यह बड़ा हो जाए, तो टेस्टिस पर दबाव पड़ सकता है और वहाँ का तापमान बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसा रहने से स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

हाइड्रोसील की पहचान कैसे करें?

हाइड्रोसील होने पर scrotum एक तरफ़ से फूला दिखाई देता है। आमतौर पर इसमें तेज़ दर्द नहीं होता, लेकिन भारीपन महसूस हो सकता है। इसकी एक और पहचान यह है कि अगर टॉर्च की रोशनी टेस्टिस पर डालें, तो रोशनी अंदर से गुजरती हुई दिखाई देती है क्योंकि अंदर पानी भरा होता है।

हाइड्रोसील का इलाज क्या है?

अगर हाइड्रोसील छोटा है और परेशानी नहीं दे रहा, तो कई बार डॉक्टर सिर्फ निगरानी रखने की सलाह देते हैं। लेकिन अगर सूजन ज़्यादा हो या असहजता बढ़ रही हो, तो एक छोटी सर्जरी से इसे ठीक किया जा सकता है।

Scrotum की समस्या #3: एपिडिडीमाइटिस (Epididymitis)

एपिडिडाइमिस वह पतली नली होती है जो अंडकोष के पीछे लगी रहती है। यही वह जगह है जहाँ स्पर्म कुछ समय तक रहकर मैच्योर होते हैं। जब इस नली में इन्फेक्शन हो जाता है, तो उसे एपिडिडीमाइटिस (Epididymitis) कहते हैं।

एपिडिडीमाइटिस क्यों होता है?

यह अक्सर किसी इंफेक्शन की वजह से होता है। कई बार यह STI यानी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ जैसे क्लैमीडिया (Chlamydia) या गोनोरिया (Gonorrhea) से हो सकता है। कुछ केस में पेशाब के रास्ते होने वाले इंफेक्शन यानी यूटीआई (UTI) की वजह से भी हो जाता है। कभी-कभी कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चलता, फिर भी इंफेक्शन हो सकता है।

एपिडिडीमाइटिस का स्पर्म पर क्या असर पड़ता है?

अगर इस इंफेक्शन का समय पर इलाज न हो, तो एपिडिडाइमिस में सूजन और रुकावट आ सकती है। इससे स्पर्म का रास्ता बंद हो सकता है। ऐसी स्थिति को ऑब्सट्रक्टिव एज़ूस्पर्मिआ (Obstructive Azoospermia) कहते हैं, जिसमें सीमेन में स्पर्म दिखाई नहीं देते।

एपिडिडीमाइटिस की पहचान कैसे करें?

इसमें अंडकोष में दर्द होता है जो धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। साथ में सूजन और लालिमा भी दिखाई दे सकती है। कई लोगों को पेशाब करते समय जलन, बुखार या शरीर में कमजोरी भी महसूस होती है।

एपिडिडीमाइटिस का इलाज क्या है?

इसका इलाज आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। अगर इंफेक्शन का जल्दी इलाज हो जाए, तो फर्टिलिटी पर पड़ने वाले असर को टाला जा सकता है।

Scrotum की समस्या #4: टेस्टिकुलर टॉर्सन (Testicular Torsion)

टेस्टिकुलर टॉर्सन एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें टेस्टिस अपनी जगह पर घूम जाता है और उससे जुड़ी खून की नसें मुड़ जाती हैं। इससे टेस्टिस तक खून की सप्लाई अचानक कम या बंद हो जाती है।

इसमें कितना समय होता है?

टेस्टिकुलर टॉर्सन में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर 6 घंटे के अंदर इलाज न मिले, तो टेस्टिस को परमानेंट नुकसान हो सकता है।

टेस्टिकुलर टॉर्सन की पहचान कैसे करें?

इसमें अचानक बहुत तेज़ दर्द होता है। टेस्टिस में सूजन आ जाती है और कई बार मतली या उल्टी भी हो सकती है। कुछ लोगों को लगता है कि अंडकोष ऊपर की तरफ खिंच गया है या अपनी सामान्य स्थिति में नहीं है।

ऐसी स्थिति में क्या करें?

अगर अचानक ऐसा दर्द हो, तो इसे सामान्य दर्द समझकर इंतज़ार नहीं करना चाहिए। तुरंत नज़दीकी अस्पताल या इमरजेंसी में जाएँ। टेस्टिकुलर टॉर्सन में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और जल्दी इलाज से टेस्टिस को बचाया जा सकता है।

खुद कैसे जाँचें कि कहीं समस्या तो नहीं?

  • पुरुषों को महीने में एक बार अपने टेस्टिस की जाँच खुद करनी चाहिए, ताकि किसी भी समस्या को जल्दी पकड़ा जा सके।
  • यह जाँच नहाने के बाद करें, जब अंडकोष ढीले और रिलैक्स होते हैं।
  • आईने के सामने खड़े होकर देखें कि दोनों टेस्टिस का आकार लगभग बराबर है या नहीं। एक का थोड़ा नीचे होना सामान्य है।
  • अब एक-एक करके टेस्टिस को हल्के से पकड़ें और अंगूठे व उंगलियों के बीच धीरे-धीरे घुमाकर महसूस करें।
  • देखें कि कहीं कोई गाँठ, सूजन या असामान्य कठोरता तो महसूस नहीं हो रही।
  • अंडकोष के पीछे की नरम नली (Epididymis) को अंडकोष से अलग पहचानने की कोशिश करें।
  • अगर नई गाँठ, असामान्य सूजन, दर्द, भारीपन या त्वचा में बदलाव दिखे, तो डॉक्टर से मिलना चाहिए।

Scrotum की सेहत और आपकी फर्टिलिटी

कई बार सीमेन रिपोर्ट नॉर्मल होने के बावजूद स्पर्म की क्वालिटी अच्छी नहीं होती। इसका कारण अक्सर कोई बीमारी नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की आदतें होती हैं जो धीरे-धीरे scrotum के तापमान और माइक्रो-एनवायरनमेंट को प्रभावित करती हैं।

  • लैपटॉप और लगातार बैठना: घंटों गोद में लैपटॉप रखकर काम करने या लंबे समय तक बैठे रहने से scrotum का तापमान 2 से 3°C तक बढ़ सकता है। इससे स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
  • प्लास्टिक और केमिकल एक्सपोज़र: प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म खाना, या ऐसे साबुन-लोशन जिनमें फ्थेलेट (Phthalates) जैसे केमिकल होते हैं, शरीर के हॉर्मोन संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं और स्पर्म क्वालिटी पर असर डाल सकते हैं।
  • मानसिक तनाव (Stress): लंबे समय तक स्ट्रेस रहने पर शरीर की मसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे टेस्टिस शरीर के ज्यादा पास आ जाते हैं। इससे उन्हें वह ठंडा वातावरण नहीं मिल पाता जो स्वस्थ स्पर्म बनने के लिए जरूरी होता है।

निष्कर्ष

अंडकोष की छोटी-सी दिखने वाली समस्याएँ भी पुरुष फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं। Varicocele, Hydrocele या संक्रमण जैसे कारण कई बार स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता को कम कर देते हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें से कई समस्याओं का इलाज संभव है, खासकर अगर समय पर पहचान हो जाए। इसलिए अगर अंडकोष में दर्द, सूजन, गाँठ या भारीपन महसूस हो, या सीमेन एनालिसिस में स्पर्म कम आए हों, तो जाँच करवाना ज़रूरी है। सही समय पर की गई जाँच और इलाज से कई पुरुषों की फर्टिलिटी में सुधार हो सकता है और प्राकृतिक गर्भधारण भी संभव हो जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

वेरीकोसील के बावजूद संतान हो सकती है?

टेस्टिस में दर्द हो तो क्या करें?

स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड (Scrotal Ultrasound) कब करवाना चाहिए?

क्या टाइट अंडरवियर से स्पर्म पर असर पड़ता है?

टेस्टिस में गाँठ हो तो क्या यह कैंसर है?

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