फर्टिलिटी से प्रेगनेंसी तक सोनोग्राफी गाइड (Sonography kya hota hai)

Last updated: February 04, 2026

Overview

माँ बनने के सफ़र में सोनोग्राफी सबसे ज़रूरी जाँच है। चाहे आप कंसीव करने की कोशिश कर रही हों, फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रही हों, या प्रेगनेंट हों, सोनोग्राफी ही वह तरीका है जिससे हर स्टेज पर आपको और आपके डॉक्टर को सही जानकारी मिलती है। साइंस की भाषा में Sonography kya hota hai का जवाब समझते हैं, तो सोनोग्राफ़ी जिसे आम बोलचाल के तौर पर अल्ट्रासाउंड भी कहते हैं, एक ऐसी जाँच है जिसमें ध्वनि तरंगों यानी साउंड वेव्स की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीरें ली जाती हैं। याद रहे कि सोनोग्राफ़ी शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें कोई दर्द नहीं होता। इस आर्टिकल में समझेंगे कि फर्टिलिटी ट्रीटमेंट और प्रेगनेंसी में सोनोग्राफ़ी सोनोग्राफी कब जरुरी होती है, कौन सी सोनोग्राफ़ी कब करवानी चाहिए, इसके अलावा TVS और पेट की सोनोग्राफी में क्या फ़र्क है। इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण सवाल कि IVF जैसे ट्रीटमेंट में बार बार सोनोग्राफी क्यों करवानी पड़ती है, इस आर्टिकल के माध्यम से इन्हीं सवालों के जवाब एकदम साफ तरीके से दिए जायेंगे।

सोनोग्राफी क्या होती है और कैसे काम करती है?

सोनोग्राफी को अल्ट्रासाउंड भी कहते हैं। इसमें हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स शरीर के अंदर भेजी जाती हैं जो अंदर के अंगों से टकराकर वापस आती हैं और स्क्रीन पर तस्वीर बनाती हैं।

मानव शरीर के लिए यह सोनोग्राफ़ी पूरी तरह सुरक्षित है क्योंकि इसमें कोई हानिकारक किरणें जैसे X-Rays वगैरह नहीं होतीं। इसीलिए प्रेगनेंसी में बार-बार सोनोग्राफी करवाने में कोई नुकसान नहीं है।

फ़र्टिलिटी ट्रीटमेंट और प्रेगनेंसी में सोनोग्राफी का बड़ा महत्त्व होता है। इससे डॉक्टर को क्लियर पता चलता है कि आपके शरीर के अंदर क्या चल रहा है जिससे वह किसी अनुमान के आधार पर कोई निर्णय लेने के बजाय एकदम पक्की जानकारी के आधार पर आपके लिए निर्णय ले पाते हैं।

  • गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) और ओवरी की स्थिति कैसी है।
  • ओवरी में मौजूद फॉलिकल्स, जिनसे एग्स बनते हैं, उनकी संख्या कितनी है और वे सही तरह से बढ़ रहे हैं या नहीं।
  • एंडोमेट्रियम यानी गर्भाशय की परत की मोटाई कितनी है, जहाँ फर्टिलाइजेशन के बाद भ्रूण चिपकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे का विकास सही तरह से हो रहा है या नहीं।
  • प्लेसेंटा की स्थिति ठीक है या नहीं।
  • एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा पर्याप्त है या नहीं।

सोनोग्राफी के प्रकार: TVS, Abdominal, Doppler

TVS (ट्रांसवेजाइनल सोनोग्राफी)

टीवीएस अल्ट्रासाउंड में एक पतली प्रोब योनि मतलब वेजाइना के अंदर डाली जाती है। इससे बहुत साफ इमेज मिलती हैं क्योंकि प्रोब जिससे तरंगे निकलती हैं, वह गर्भाशय के करीब होती है। कल्पना करने में आपको थोड़ा असहज यानी अनकंफर्टेबल लग सकता है, लेकिन यह बहुत नार्मल प्रोसेस है और इसमें बिलकुल दर्द नहीं होता।

TVS अल्ट्रासाउंड कब जरुरी होता है?

  • फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में एग्स के बढ़ने की सटीक जानकारी के लिए TVS ज़रूरी है क्योंकि यह ओवरी के काफी करीब से साफ़ तस्वीर दिखाता है।
  • शुरुआती 6 से 10 हफ्तों में बच्चे की धड़कन और उसकी सही स्थिति को बारीकी से देखने के लिए पेट वाले स्कैन के बजाय TVS की सलाह दी जाती है।
  • ओवेरियन सिस्ट, फाइब्रॉइड या एंडोमेट्रियोसिस की बनावट और उनकी सही गहराई को समझने के लिए TVS सबसे सुरक्षित और सटीक तरीका है।
  • अगर आपको पीरियड्स में ब्लीडिंग की समस्या है, तो गर्भाशय की परत की मोटाई जांचने के लिए भी TVS की ज़रूरत पड़ती है।

Abdominal Sonography (पेट की सोनोग्राफी)

एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड में पेट पर जेल लगाकर प्रोब घुमाई जाती है। प्रेगनेंसी के 12 हफ्ते के बाद ज़्यादातर सोनोग्राफी इसी से होती है। इस जाँच से पहले पानी पीकर जाना चाहिए ताकि ब्लैडर भरा रहे और इमेज साफ आए।

Doppler Sonography (डॉपलर सोनोग्राफी)

डॉप्लर अल्ट्रासाउंड खास तरह की सोनोग्राफी है जिससे ब्लड फ्लो देखा जाता है।

डॉप्लर सोनोग्राफी कब जरुरी होती है?

  • बच्चे की नाल यानी अम्बिलिकल कॉर्ड (umbilical cord) में खून का बहाव जाँचने के लिए ताकि यह पक्का हो सके कि उसे ऑक्सीजन और पोषण सही मात्रा में मिल रहा है।
  • प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो की स्थिति देखने के लिए भी यह टेस्ट किया जाता है जिससे बच्चे की ग्रोथ में होने वाली किसी भी रुकावट का समय पर पता चल सके।
  • हाई-रिस्क प्रेगनेंसी जैसे कि बीपी (BP) या शुगर की समस्या होने पर बच्चे की सेहत और उसके विकास की बारीकी से निगरानी करने के लिए इसकी ज़रूरत पड़ती है।

3D/4D Sonography

इससे बच्चे की त्रि-आयामी यानी 3D इमेज मिलती है। 4D सोनोग्राफी में रियल-टाइम मूवमेंट भी देख सकते हैं। यह मेडिकल के लिहाज़ ज़रूरी नहीं है, लेकिन कुछ पेरेंट्स बच्चे का चेहरा देखने के लिए करवाते हैं।

IVF प्रेगनेंसी में सोनोग्राफी का शेड्यूल

IVF से हुई प्रेगनेंसी में सोनोग्राफी थोड़ी ज़्यादा बार होती है, खासकर शुरुआती हफ्तों में। ज़्यादा सोनोग्राफी इसलिए होती हैं ताकि हर चीज़ पर नज़र रहे और कोई दिक्कत हो तो जल्दी पता चले।

एम्ब्रीओ ट्रांसफर के 2-3 हफ्ते बाद: पहली सोनोग्राफी TVS होती है जिसमें जैस्टेशनल सैक (gestational sac) देखते हैं।

6-7 हफ्ते: इसमें बच्चे दिल की धड़कन यानी हार्टबीट कन्फर्म करते हैं ।

8-10 हफ्ते: बच्चे की ग्रोथ देखते हैं। इसके बाद आमतौर पर रेगुलर गायनेकोलॉजिस्ट को ट्रांसफर कर दिया जाता है।

आगे: नॉर्मल प्रेगनेंसी की तरह सोनोग्राफी जैसे NT स्कैन, एनोमली स्कैन, ग्रोथ स्कैन इत्यादि किये जाते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

Sonography kya hoti hai का मतलब है साउंड वेव्स से शरीर के अंदर देखने की जाँच, जो पूरी तरह सुरक्षित होती है। फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में सोनोग्राफी से फॉलिकल्स और एंडोमेट्रियम मॉनिटर होते हैं। प्रेगनेंसी में अलग-अलग स्टेज पर अलग-अलग सोनोग्राफी होती हैं जो बच्चे की ग्रोथ और सेहत की जानकारी देती हैं।

अगर आप फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रही हैं या IVF प्रेगनेंसी है, तो डॉक्टर की बताई तारीख पर सोनोग्राफी ज़रूर करवाएं। यह आपके और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

TVS में दर्द होता है क्या?

 

नहीं, दर्द नहीं होता। थोड़ी असहजता हो सकती है लेकिन यह बहुत जल्दी हो जाती है।

प्रेगनेंसी में कितनी बार सोनोग्राफी होनी चाहिए?

 

नॉर्मल प्रेगनेंसी में 3-4 बार। हाई रिस्क या IVF प्रेगनेंसी में ज़्यादा हो सकती है।

सोनोग्राफी से बच्चे को नुकसान होता है?

 

बिल्कुल नहीं क्योंकि इसमें साउंड वेव्स से इमेज बनाते हैं। यह पूरी तरह सेफ है।

IVF में इतनी बार सोनोग्राफी क्यों होती है?

 

फॉलिकल मॉनिटरिंग, एंडोमेट्रियम चेक, और शुरुआती प्रेगनेंसी कन्फर्म करने के लिए।

सोनोग्राफी का खर्च कितना आता है?

 

शहर और क्लिनिक के अनुसार रेट होता है। नॉर्मल सोनोग्राफी 800-1500 रुपये, TVS 1000-2000 रुपये, और 3D/4D 2500-5000 रुपये तक में हो सकती है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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