स्पर्म क्वांटिटी और क्वालिटी कैसे ठीक करें (Sperm Kaise Badhaye)

Last updated: January 27, 2026

Overview

संतान न होने की स्थिति में अक्सर महिला को जिम्मेदार मान लिया जाता है और सारी जाँचें पहले महिला की ही करवाई जाती हैं। लेकिन गर्भधारण न हो पाने के लगभग 40 से 50 प्रतिशत मामलों में पुरुष की इनफर्टिलिटी (Male Infertility) यानी पुरुष निःसंतानता मुख्य वजह होती है, जिसका सीमेन एनालिसिस से पता लगाया जाता है। 'सीमेन एनालिसिस' (Semen Analysis) रिपोर्ट में 'लो स्पर्म काउंट' या 'लो मोटिलिटी' आने पर पुरुषों के मन में कई तरह के सवाल और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। उन्हें लगता है कि शायद अब वह कभी पिता नहीं बन पाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं है। आपको यह समझना होगा कि स्पर्म क्वांटिटी परमानेंट कंडीशन नहीं होती; बल्कि इससे आपके शरीर की सेहत का पता लगता है। एक स्वस्थ एम्ब्रीओ (Embryo) बनने के लिए केवल स्पर्म का एग से मिलना काफी नहीं है, बल्कि उसका हेल्दी होना भी जरूरी है ताकि वह एग की बाहरी दीवार Zona Pellucida को भेद कर उसे फर्टीलिज़े कर सके। इस स्थिति में डॉक्टर बताते हैं कि पुरुष sperm kaise badhaye और अपनी फर्टिलिटी का सही से इलाज कर सकें। आगे हम आर्टिकल में समझेंगे कि लाइफस्टाइल में बदलाव, सही डाइट, एक्सरसाइज और कुछ परिस्थितियों में मेडिकल ट्रीटमेंट की सहायता से पुरुष निःसंतानता को कैसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

क्या स्पर्म हमेशा बनते रहते हैं?

सबसे पहले यह समझिये कि शुक्राणु यानी स्पर्म भले ही लगातार बन रहे हों, लेकिन एक नए स्पर्म की लाइफ- साइकिल 72-90 दिन की होती है यानी एक नए स्पर्म को बनने, विकसित होने और मैच्योर होकर बाहर आने में लगभग 72 से 90 दिन का समय लगता है। इसे 'स्पर्मेटोजेनेसिस' कहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप आज से अपनी डाइट और आदतों में बदलाव करते हैं, तो उसका रिजल्ट आपकी रिपोर्ट में 3 महीने बाद दिखेगा। बहुत से पुरुष 15-20 दिन सप्लीमेंट लेकर सोचते हैं कि रिजल्ट क्यों नहीं मिला, जबकि असल में नए स्पर्म अभी बनने की प्रक्रिया में होते हैं। इसलिए, किसी भी उपाय को कम से कम एक पूरे 'साइकिल' यानी 90 दिन तक जारी रखें।

स्पर्म को सुपर हैल्थी बनाने वाले सुपर फूड्स

जब बात आती है कि sperm kaise badhaye, तो आपकी डाइट ही सबसे बड़ा हथियार है। स्पर्म बनाने के लिए शरीर को खास तरह के भोजन की जरूरत होती है, जैसे -

  • जिंक (Zinc): कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds) और तिल जिंक का सबसे बड़ा स्रोत हैं। जिंक स्पर्म की संख्या और टेस्टोस्टेरोन लेवल को सीधे प्रभावित करता है।
  • अखरोट (Walnuts): इसमें भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। रिसर्च बताती है कि मुट्ठी भर अखरोट रोज खाने से स्पर्म की मोटिलिटी यानी तैरने की क्षमता और बनावट यानी मॉर्फोलॉजी (Morphology) में सुधार होता है।
  • टमाटर (Lycopene): टमाटर को पकाकर खाने से उसमें मौजूद 'लाइकोपीन' बढ़ जाता है, जो शुक्राणुओं की संरचना में होने वाले डैमेज को रोकता है।
  • अंडा और दूध: विटामिन D और B12 के लिए अंडे और दूध आपकी डाइट में शामिल होने ही चाहिए। लो स्पर्म काउंट और लो टेस्टोस्टेरोन के लिए विटामिन D की कमी को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना गया है।
  • डार्क चॉकलेट: इसमें 'एल-आर्जिनिन' (L-Arginine) नाम का अमीनो एसिड होता है जो सीमेन के वॉल्यूम और स्पर्म काउंट को बढ़ा सकता है।

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और विटामिन्स

स्पर्म को 'ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस' से बचाना सबसे जरूरी है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस वह स्थिति है जब शरीर में फ्री रेडिकल्स ज़्यादा बनते हैं और एंटीऑक्सीडेंट्स उन्हें संभाल नहीं पाते, जिससे स्पर्म की कोशिकाएं यानी सेल्स, उनका DNA और उनकी मूवमेंट डैमेज हो जाती है और इसी वजह से स्पर्म काउंट, मोटिलिटी और क्वालिटी तीनों घट सकते हैं। इसीलिए आपकी डाइट में एंटीऑक्सीडेंट्स का होना जरुरी है।

  • विटामिन C: संतरा, नींबू और आंवला शुक्राणुओं को आपस में चिपकने (Agglutination) से रोकते हैं।
  • फोलिक एसिड: पालक और हरी पत्तेदार सब्जियां शुक्राणुओं के डीएनए (DNA) को सुरक्षित रखती हैं। अगर डीएनए डैमेज होगा, तो एम्ब्रीओ हेल्दी नहीं बनेगा।
  • क्या कम खायें: बहुत ज्यादा सोया प्रोडक्ट्स (Soy) खाने से बचें, क्योंकि इनमें मौजूद आइसोफ्लेवोन्स एस्ट्रोजन जैसा व्यवहार करते हैं, जो पुरुषों में स्पर्म काउंट कम कर सकते हैं।

सप्लीमेंट्स नुकसान करते हैं या फायदा?

कई बार सिर्फ डाइट में सुधार करना काफी नहीं होता, खासकर तब, जब स्पर्म काउंट बहुत कम हो। क्लिनिक में हम कुछ विशेष सप्लीमेंट्स की सलाह देते हैं।

  • Coenzyme Q10 (CoQ10): यह स्पर्म के माइटोकॉन्ड्रिया यानी पावरहाउस को एनर्जी देता है। यह एग तक पहुँचने की रेस में स्पर्म को विजेता बनाने में मदद करता है।
  • L-Carnitine: यह स्पर्म की गतिशीलता यानी मोटिलिटी सुधारने के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड सप्लीमेंट माना जाता है, इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
  • अश्वगंधा: यह एक एडेप्टोजेन है जिसे अपनी डाइट में शामिल करने पर तनाव यानी स्ट्रेस कम होता है और टेस्टोस्टेरोन को कुदरती तरीके से बढ़ाता है।
  • विटामिन D3: इसे 'फर्टिलिटी विटामिन' भी कहा जाता है। इसकी सही डोज़ स्पर्म की क्वालिटी में बड़ा बदलाव ला सकती है।

गर्मी, रेडिएशन और वो गलतियां जो स्पर्म की दुश्मन हैं

स्पर्म शरीर के बाहर टेस्टिकल में इसलिए स्टोर होते हैं वह तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील यानी सेंसिटिव होते हैं। इसीलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि टेस्टिकल्स के आसपास के टेंपरेचर को कम रखा जाए , यानी उस एरिया में कोई अतिरिक्त गर्मी पैदा करने वाली कंडीशन न हो।

  • लैपटॉप और मोबाइल: लैपटॉप को घंटों तक गोद में रखकर काम करना टेस्टिकल्स के टेम्परेचर को बढ़ा देता है। इसी तरह, पैंट की आगे वाली जेब में फोन रखने से रेडिएशन की वजह से स्पर्म मोटिलिटी को नुकसान पहुँचता है।
  • टाइट अंडरवियर: हमेशा लूज कॉटन के अंडरवियर पहनें। टाइट कपड़े टेस्टिकल्स को शरीर के बहुत करीब रखते हैं, जिससे वे गर्म हो जाते हैं और स्पर्म प्रोडक्शन रुक जाता है।
  • नशा: सिगरेट और शराब सीधे स्पर्म के डीएनए को डैमेज करते हैं। अगर आप पिता बनना चाहते हैं, तो इन आदतों को तुरंत छोड़ने पर विचार करना जरुरी है ।

कौन से योगासन और एक्सरसाइज फर्टिलिटी बढ़ती है?

एक्सरसाइज का मतलब सिर्फ जिम में घंटों पसीने बहाना नहीं है। बहुत ज्यादा 'इंटेंस ट्रेनिंग' से भी स्पर्म काउंट गिर सकता है। मीडियम और मॉडरेट एक्सरसाइज स्पर्म की क्वालिटी और क्वांटिटी बढ़ाने के लिए सबसे सही तरीका है।

  • योगासन: 'सूर्य नमस्कार', 'बद्ध कोणासन' यानी बटरफ्लाई पोज़ (Butterfly Pose) और 'हलासन' पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो बढ़ाते हैं।
  • प्राणायाम: 'अनुलोम-विलोम' और 'भ्रामरी' स्ट्रेस कम करते हैं। तनाव कम होने से शरीर में 'कोर्टिसोल' गिरता है और टेस्टोस्टेरोन बढ़ता है।
  • वॉक: रोजाना 30 से 40 मिनट की ब्रिस्क वॉकिंग फर्टिलिटी के लिए रामबाण उपाय है।

स्पर्म की समस्या का पक्का इलाज आईवीएफ (IVF) और आईसीएसआई (ICSI)

अगर तमाम कोशिशों के बाद भी स्पर्म काउंट बहुत कम है या स्पर्म इतना हेल्दी नहीं हो पाया कि एग को फर्टिलाइज कर सके, तो निराश न हों। मॉडर्न मेडिकल साइंस इस स्थिति में भी आपकी निःसंतानता का इलाज संभव कर सकता है।

  • आईसीएसआई (ICSI): यह आईवीएफ (IVF) का ही एक हिस्सा है। इसमें लाखों स्स्पर्म की जरूरत नहीं पड़ती। इसके लिए लैब में सबसे हेल्दी और सबसे अच्छी बनावट वाला केवल एक स्पर्म ही काफी होता है। डॉक्टर ऐसे एक स्पर्म को चुनते हैं और उसे सीधे एग के अंदर इंजेक्ट कर देते हैं, जिससे एग फ़र्टिलाइज़ होकर एम्ब्रीओ बना देता है।
  • TESA/MESA: अगर वीर्य में स्पर्म शून्य हैं यानी पुरुष को एज़ूस्पर्मिआ (Azoospermia) है, तो डॉक्टर छोटी सी सुई के जरिए सीधे टेस्टिस से स्पर्म निकाल लेते हैं। यानी ज़ीरो स्पर्म काउंट में भी आपकी संतान होना संभव है।

एक्सपर्ट की सलाह (Conclusion)

स्पर्म की संख्या कम आना आपकी मर्दानगी का पैमाना नहीं है, बल्कि यह एक मेडिकल कंडीशन है जिसे सही इलाज और अनुशासन से बदला जा सकता है। यह आपके हाथ में ही है कि आप अपने sperm kaise badhaye। आपकी डाइट, आपकी नींद और आपका तनाव कम करना आपके पिता बनने की नींव है। अगर आप और आपकी पार्टनर कंसीव करने की कोशिश कर रहे हैं और सफलता नहीं मिल रही, तो किसी प्रकार की चिंता न करें और शर्म छोड़कर डॉक्टर से मिलें। मेडिकल साइंस आज इतनी एडवांस हो चुकी है कि लो स्पर्म काउंट अब आपके पिता बनने के सपने में रुकावट नहीं बन सकता।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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