संतान न होने की स्थिति में अक्सर महिला को जिम्मेदार मान लिया जाता है और सारी जाँचें पहले महिला की ही करवाई जाती हैं। लेकिन गर्भधारण न हो पाने के लगभग 40 से 50 प्रतिशत मामलों में पुरुष की इनफर्टिलिटी (Male Infertility) यानी पुरुष निःसंतानता मुख्य वजह होती है, जिसका सीमेन एनालिसिस से पता लगाया जाता है। 'सीमेन एनालिसिस' (Semen Analysis) रिपोर्ट में 'लो स्पर्म काउंट' या 'लो मोटिलिटी' आने पर पुरुषों के मन में कई तरह के सवाल और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। उन्हें लगता है कि शायद अब वह कभी पिता नहीं बन पाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं है। आपको यह समझना होगा कि स्पर्म क्वांटिटी परमानेंट कंडीशन नहीं होती; बल्कि इससे आपके शरीर की सेहत का पता लगता है। एक स्वस्थ एम्ब्रीओ (Embryo) बनने के लिए केवल स्पर्म का एग से मिलना काफी नहीं है, बल्कि उसका हेल्दी होना भी जरूरी है ताकि वह एग की बाहरी दीवार Zona Pellucida को भेद कर उसे फर्टीलिज़े कर सके। इस स्थिति में डॉक्टर बताते हैं कि पुरुष sperm kaise badhaye और अपनी फर्टिलिटी का सही से इलाज कर सकें। आगे हम आर्टिकल में समझेंगे कि लाइफस्टाइल में बदलाव, सही डाइट, एक्सरसाइज और कुछ परिस्थितियों में मेडिकल ट्रीटमेंट की सहायता से पुरुष निःसंतानता को कैसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
सबसे पहले यह समझिये कि शुक्राणु यानी स्पर्म भले ही लगातार बन रहे हों, लेकिन एक नए स्पर्म की लाइफ- साइकिल 72-90 दिन की होती है यानी एक नए स्पर्म को बनने, विकसित होने और मैच्योर होकर बाहर आने में लगभग 72 से 90 दिन का समय लगता है। इसे 'स्पर्मेटोजेनेसिस' कहते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप आज से अपनी डाइट और आदतों में बदलाव करते हैं, तो उसका रिजल्ट आपकी रिपोर्ट में 3 महीने बाद दिखेगा। बहुत से पुरुष 15-20 दिन सप्लीमेंट लेकर सोचते हैं कि रिजल्ट क्यों नहीं मिला, जबकि असल में नए स्पर्म अभी बनने की प्रक्रिया में होते हैं। इसलिए, किसी भी उपाय को कम से कम एक पूरे 'साइकिल' यानी 90 दिन तक जारी रखें।
जब बात आती है कि sperm kaise badhaye, तो आपकी डाइट ही सबसे बड़ा हथियार है। स्पर्म बनाने के लिए शरीर को खास तरह के भोजन की जरूरत होती है, जैसे -
स्पर्म को 'ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस' से बचाना सबसे जरूरी है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस वह स्थिति है जब शरीर में फ्री रेडिकल्स ज़्यादा बनते हैं और एंटीऑक्सीडेंट्स उन्हें संभाल नहीं पाते, जिससे स्पर्म की कोशिकाएं यानी सेल्स, उनका DNA और उनकी मूवमेंट डैमेज हो जाती है और इसी वजह से स्पर्म काउंट, मोटिलिटी और क्वालिटी तीनों घट सकते हैं। इसीलिए आपकी डाइट में एंटीऑक्सीडेंट्स का होना जरुरी है।
कई बार सिर्फ डाइट में सुधार करना काफी नहीं होता, खासकर तब, जब स्पर्म काउंट बहुत कम हो। क्लिनिक में हम कुछ विशेष सप्लीमेंट्स की सलाह देते हैं।
स्पर्म शरीर के बाहर टेस्टिकल में इसलिए स्टोर होते हैं वह तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील यानी सेंसिटिव होते हैं। इसीलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि टेस्टिकल्स के आसपास के टेंपरेचर को कम रखा जाए , यानी उस एरिया में कोई अतिरिक्त गर्मी पैदा करने वाली कंडीशन न हो।
एक्सरसाइज का मतलब सिर्फ जिम में घंटों पसीने बहाना नहीं है। बहुत ज्यादा 'इंटेंस ट्रेनिंग' से भी स्पर्म काउंट गिर सकता है। मीडियम और मॉडरेट एक्सरसाइज स्पर्म की क्वालिटी और क्वांटिटी बढ़ाने के लिए सबसे सही तरीका है।
अगर तमाम कोशिशों के बाद भी स्पर्म काउंट बहुत कम है या स्पर्म इतना हेल्दी नहीं हो पाया कि एग को फर्टिलाइज कर सके, तो निराश न हों। मॉडर्न मेडिकल साइंस इस स्थिति में भी आपकी निःसंतानता का इलाज संभव कर सकता है।
स्पर्म की संख्या कम आना आपकी मर्दानगी का पैमाना नहीं है, बल्कि यह एक मेडिकल कंडीशन है जिसे सही इलाज और अनुशासन से बदला जा सकता है। यह आपके हाथ में ही है कि आप अपने sperm kaise badhaye। आपकी डाइट, आपकी नींद और आपका तनाव कम करना आपके पिता बनने की नींव है। अगर आप और आपकी पार्टनर कंसीव करने की कोशिश कर रहे हैं और सफलता नहीं मिल रही, तो किसी प्रकार की चिंता न करें और शर्म छोड़कर डॉक्टर से मिलें। मेडिकल साइंस आज इतनी एडवांस हो चुकी है कि लो स्पर्म काउंट अब आपके पिता बनने के सपने में रुकावट नहीं बन सकता।