Surgical Sperm Retrieval: स्पर्म निकालने की प्रक्रिया और प्रकार

Last updated: September 24, 2026

सारांश (Overview)

सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल में टेस्टिस या एपिडिडिमिस से सीधे स्पर्म निकाले जाते हैं। इसकी जरूरत तब पड़ती है, जब सीमेन में एक भी स्पर्म नहीं मिलता। लेकिन सीमेन में स्पर्म न मिलने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि स्पर्म बन ही नहीं रहे हैं।

इस आर्टिकल में जानेंगे कि निल स्पर्म काउंट (nil sperm count) होने पर Surgical Sperm Retrieval कैसे किया जाता है, यह कितने तरह से किया जा सकता है, इसके रिस्क क्या हो सकते हैं और इसके बाद IVF कैसे होता है।

Surgical Sperm Retrieval क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ती है?

सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल एक छोटा प्रोसीजर है, जिसमें टेस्टिस या एपिडिडिमिस से सीधे स्पर्म निकाले जाते हैं। इसकी जरूरत तब पड़ती है, जब सीमेन में स्पर्म नहीं मिलते या किसी समस्या की वजह से बाहर नहीं आ पाते।  इस कंडीशन यानी सीमेन में एक भी स्पर्म न मिलने को एजूस्पर्मिया (Azoospermia) कहा जाता है। निकाले गए स्पर्म से ICSI के जरिए एग को फर्टिलाइज किया जाता है।

इस प्रोसीजर के बाद स्पर्म बनने शुरू नहीं हो जाते। यह सिर्फ उन स्पर्म तक पहुंचने का तरीका है, जो टेस्टिस में पहले से बन रहे हैं, भले ही उनका काउंट बहुत कम हो।

पुरुषों में Surgical Sperm Retrieval कब किया जाता है?

Surgical Sperm Retrieval तब किया जाता है, जब दो अलग-अलग सीमेन सैंपल्स में से एक में भी स्पर्म न मिले। इसके बाद हार्मोन टेस्ट और जरूरत पड़ने पर जेनेटिक टेस्ट से यह देखा जाता है कि दिक्कत स्पर्म के रास्ते में है या स्पर्म बनने में।

  • स्पर्म का रास्ता बंद होना (Obstructive Azoospermia): टेस्टिस में स्पर्म नॉर्मल रूप से बनते हैं, लेकिन बाहर आने का रास्ता कहीं बंद होता है। ऐसे केसेस में स्पर्म नॉर्मल रूप से बनते रहते हैं, इसलिए स्पर्म मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
  • स्पर्म कम बनना (Non-Obstructive Azoospermia): इसमें स्पर्म बाहर आने का रास्ता तो खुला होता है, लेकिन टेस्टिस में स्पर्म बहुत कम बनते हैं। फिर भी टेस्टिस के कुछ हिस्सों में स्पर्म मिल सकते हैं।।

Surgical Sperm Retrieval की प्रक्रिया कैसे की जाती है?

सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है, इसलिए प्रोसीजर के दौरान दर्द नहीं होता। सुई या छोटे चीरे से टेस्टिस या एपिडिडिमिस से सैंपल लिया जाता है और लैब में माइक्रोस्कोप से उसमें स्पर्म ढूंढे जाते हैं। आप आमतौर पर उसी दिन घर जा सकते हैं।

तैयारी और एनेस्थीसिया (Anesthesia)

प्रोसीजर से पहले खाली पेट रहने को कहा जा सकता है। PESA और TESA आमतौर पर लोकल एनेस्थीसिया में हो जाते हैं, जबकि TESE और Micro-TESE में अक्सर जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है।

सैंपल लेना

सर्जरी के तरीके के हिसाब से सुई से सैंपल खींचा जाता है या छोटा चीरा लगाकर टेस्टिस का टिश्यू लिया जाता है। इसमें कुछ मिनट से लेकर एक-दो घंटे तक लग सकते हैं।

लैब में स्पर्म की खोज

सैंपल तुरंत IVF लैब भेजा जाता है, जहां एम्ब्रीओलॉजिस्ट माइक्रोस्कोप से उसमें स्पर्म ढूंढते हैं। मिले हुए स्पर्म उसी दिन ICSI में इस्तेमाल किए जा सकते हैं या फ्रीज करके रखे जा सकते हैं।

Surgical Sperm Retrieval के प्रकार

सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल चार तरह से किया जा सकता है। 

  • PESA यानी परक्यूटेनियस एपिडिडाइमल स्पर्म एस्पिरेशन (Percutaneous Epididymal Sperm Aspiration)
  • TESA यानी टेस्टिकुलर स्पर्म एस्पिरेशन (Testicular Sperm Aspiration)
  • TESE यानी टेस्टिकुलर स्पर्म एक्सट्रैक्शन (Testicular Sperm Extraction)
  • Micro-TESE 

इनमें अंतर इस बात का है कि स्पर्म एपिडिडिमिस से लिया जा रहा है या टेस्टिस से, और सुई से लिया जा रहा है या चीरा लगाकर।

PESA क्या है?

PESA में पतली सुई से सीधे एपिडिडिमिस से स्पर्म निकाले जाते हैं। एपिडिडिमिस वह नली है, जहां टेस्टिस में बने स्पर्म स्टोर होते हैं। इसमें चीरा नहीं लगता और यह उस केस में किया जाता है जब स्पर्म निकलने का रास्ता बंद हो।

TESA क्या है?

TESA  में सुई सीधे टेस्टिस में डालकर स्पर्म निकाले जाते हैं। यह भी बिना चीरे का प्रोसीजर है। स्पर्म कम बनने वाले केसेस में इससे स्पर्म मिलने की संभावना कम रहती है, क्योंकि सुई टेस्टिस के छोटे हिस्से से ही सैंपल ले पाती है।

TESE क्या है?

TESE में छोटा चीरा लगाकर टेस्टिस से टिश्यू का सैंपल लिया जाता है। सुई की तुलना में इससे ज्यादा टिश्यू मिल जाते हैं, इसलिए स्पर्म मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

Micro-TESE क्या है?

Micro-TESE में सर्जन माइक्रोस्कोप की मदद से टेस्टिस के अंदर उन सेमिनिफेरस ट्यूब्यूल्स (seminiferous tubules) को पहचानते हैं, जिनमें स्पर्म मिलने की संभावना ज्यादा होती है। इसके बाद इन ट्यूब्यूल्स से टिशू का छोटा सैंपल लेकर लैब में स्पर्म की जांच की जाती है। AUA और ASRM की गाइडलाइन के अनुसार, जिन पुरुषों में स्पर्म कम बनते हैं, उनमें स्पर्म निकालने के लिए Micro-TESE किया जाना चाहिए।

Surgical Sperm Retrieval और नॉर्मल Sperm Collection में क्या अंतर है?

नॉर्मल कलेक्शन में सीमेन का सैंपल दिया जाता है और लैब में उससे स्पर्म अलग किए जाते हैं। सर्जिकल रिट्रीवल तब की जाती है जब जब सीमेन में स्पर्म नहीं मिलते, और तब स्पर्म सीधे टेस्टिस या एपिडिडाइमिस से निकालना पड़ता है।

 

नॉर्मल स्पर्म कलेक्शन

सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल

स्पर्म कैसे मिलते हैं

सीमेन सैंपल से

सुई या छोटे चीरे से

स्पर्म की संख्या

आमतौर पर लाखों में

बहुत कम

IVF का तरीका

IVF या ICSI

लगभग हमेशा ICSI

सर्जरी से निकले स्पर्म की संख्या बहुत कम होती है, इसलिए ICSI से ही IVF किया जाता है।

Surgical Sperm Retrieval के फायदे

सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सीमेन में स्पर्म न होने पर भी संतान हो सकती है। यानी कई कपल्स के लिए डोनर स्पर्म के बिना अपने जेनेटिक बच्चे की संभावना बनी रहती है।

  • कम स्पर्म भी काफी: ICSI में हर एग के लिए एक ही स्पर्म चाहिए होता है।
  • स्पर्म फ्रीज करने का ऑप्शन: मिले हुए स्पर्म फ्रीज करके बाद में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
  • जांच में भी मदद: सैंपल से यह भी पता चलता है कि टेस्टिस में स्पर्म बन रहे हैं या नहीं।

Surgical Sperm Retrieval के संभावित जोखिम और सीमाएं

प्रोसीजर के बाद कुछ दिन सूजन, दर्द या हल्का नील पड़ना आम है, जो ज्यादातर अपने आप ठीक हो जाता है। सबसे बड़ी लिमिटेशन यह है कि हर केस में स्पर्म मिल जाएं, यह फिक्स नहीं है, खासकर जिन पुरुषों में स्पर्म कम बनते हैं।

Micro-TESE के बाद कुछ महीनों तक टेस्टोस्टेरोन हार्मोन कम हो सकता है। कई पुरुषों में यह 12 से 18 महीनों में धीरे-धीरे सुधर जाता है। जिनके टेस्टिस छोटे हैं या टेस्टोस्टेरोन पहले से कम है, उनमें यह रिस्क ज्यादा होता है।

इसलिए प्रोसीजर से पहले डॉक्टर से यह भी पूछ लें कि अगर स्पर्म न मिले, तो आगे क्या ऑप्शन हैं।

Surgical Sperm Retrieval के बाद क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

कुछ दिन सूजन और खिंचाव महसूस होना नॉर्मल है। इस दौरान आराम, सपोर्टिव अंडरवियर और साफ-सफाई सबसे जरूरी है। कितने दिन आराम करना है, यह प्रोसीजर के प्रकार पर निर्भर करता है।

  • भारी काम से बचें: कुछ दिन वजन उठाने, जिम और बाइक की लंबी सवारी से बचें।
  • जगह को साफ और सूखा रखें: टांकों या सुई की जगह की देखभाल डॉक्टर के बताए अनुसार करें।
  • अनॉर्मल लक्षण होने पर तुरंत बताएं: तेज दर्द, ज्यादा सूजन, बुखार या जगह से खून या पस आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Surgical Sperm Retrieval के बाद IVF कैसे किया जाता है?

अगर सर्जरी से स्पर्म मिले हैं तो लगभग हमेशा ICSI ही किया जाता है। इसमें एम्ब्रियोलॉजिस्ट एक स्पर्म चुनकर सीधे एग के अंदर इंजेक्ट करते हैं। इसलिए इस प्रोसीजर का समय फीमेल पार्टनर की IVF साइकिल और एग रिट्रीवल को ध्यान में रखकर तय किया जाता है।

AUA और ASRM गाइडलाइन के अनुसार ICSI ताजा निकाले गए स्पर्म से भी किया जा सकता है और फ्रीज किए गए स्पर्म से भी। यानी स्पर्म पहले निकालकर फ्रीज किए जा सकते हैं, और दोनों प्रोसीजर एक ही दिन करना जरूरी नहीं होता।

Surgical Sperm Retrieval की सफलता किन Factors पर निर्भर करती है?

सफलता सबसे ज्यादा इस बात पर निर्भर करती है कि दिक्कत रास्ते में है या स्पर्म बनने में। रास्ता बंद होने पर स्पर्म मिलने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। स्पर्म कम बनने वाले मामलों में चुना गया तरीका भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।

15 स्टडीज और 1,890 पुरुषों के डाटा में, जिन पुरुषों में स्पर्म कम बनते हैं, उनमें Micro-TESE से 52%, TESE से 35% और TESA से 28% पुरुषों में स्पर्म मिले। यानी Micro-TESE से हर 100 में से करीब 52 पुरुषों में स्पर्म मिल गए, जबकि TESA से करीब 28 में।

यहां यह समझना जरूरी है कि यह स्पर्म मिलने का डेटा है, प्रेगनेंसी की सफलता का नहीं।

  • सर्जन और लैब का अनुभव: स्पर्म बहुत कम होते हैं, इसलिए उन्हें ढूंढने में लैब का बड़ा रोल होता है।
  • फीमेल पार्टनर की उम्र और एग की क्वालिटी: स्पर्म मिलने के बाद IVF की सफलता इस पर भी निर्भर करती है।

याद रखने वाली मुख्य बातें (Key takeaways)

  • Surgical Sperm Retrieval में टेस्टिस या एपिडिडिमिस से सीधे स्पर्म निकाले जाते हैं।
  • स्पर्म कम बनने वाले मामलों में Micro-TESE से हर 100 में से करीब 52 पुरुषों में स्पर्म मिलते हैं।
  • निकाले गए स्पर्म से लगभग हमेशा ICSI किया जाता है, और इन्हें फ्रीज भी किया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

सीमेन में स्पर्म न मिलने का मतलब यह नहीं है कि अपना बच्चा नहीं हो सकता। कई मामलों में टेस्टिस से स्पर्म निकालकर ICSI किया जा सकता है, लेकिन हर मामले में स्पर्म मिलना तय नहीं है।

अगर डॉक्टर आपको सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल की सलाह देते हैं, तो उनसे पूछें कि आपके लिए कौन सा तरीका सही है और स्पर्म मिलने की कितनी संभावना है।

Surgical Sperm Retrieval पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Surgical Sperm Retrieval किन पुरुषों के लिए किया जाता है?

Surgical Sperm Retrieval के कितने प्रकार होते हैं?

Surgical Sperm Retrieval और ICSI में क्या संबंध है?

आईवीएफ में स्पर्म कैसे निकलता है?

पुरुष का स्पर्म कितना होना चाहिए जिससे बच्चा ठहर सकता है?

क्या पुरुष अपना स्पर्म डोनेट कर सकते हैं?

स्पर्म डोनेट के कितने पैसे मिलते हैं?

स्पर्म कहाँ डोनेट कर सकते हैं?

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