TB ka full form है ट्यूबरक्लोसिस (Tuberculosis), जिसे हिंदी में तपेदिक या क्षय रोग कहते हैं। TB एक गंभीर संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस (Mycobacterium tuberculosis) नामक बैक्टीरिया से होती है। यह बीमारी न सिर्फ फेफड़ों को प्रभावित करती है बल्कि शरीर के दूसरे हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जिसमें रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स भी शामिल हैं। जो कपल प्रेगनेंसी प्लान कर रहे हैं, उनके लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि TB उनकी फर्टिलिटी को कैसे प्रभावित कर सकती है। चलिए विस्तार से समझते हैं कि TB क्या होती है, इसके कितने प्रकार हैं, और यह आपकी कंसीव करने की क्षमता को कैसे प्रभावित कर सकती है।
TB ka full form Tuberculosis है। यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो हवा के ज़रिये एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। जब कोई TB से संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो बैक्टीरिया युक्त छोटी-छोटी बूंदें हवा में फैल जाती हैं जिन्हें सांस के ज़रिये लेने पर स्वस्थ व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है।
बहुत से लोगों को यह नहीं पता कि TB सिर्फ फेफड़ों की बीमारी नहीं है। जब TB रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स को प्रभावित करती है, तो इसे जेनिटल TB या पेल्विक TB कहते हैं। यह फीमेल इनफर्टिलिटी के छिपे हुए कारणों में से एक है।
महिलाओं में जेनिटल TB फैलोपियन ट्यूब्स, यूट्रस (गर्भाशय), ओवरीज़, और सर्विक्स को प्रभावित कर सकती है। इससे निम्न समस्याएं हो सकती हैं:
पुरुषों में भी TB रिप्रोडक्टिव सिस्टम को प्रभावित कर सकती है, जिससे स्पर्म काउंट और क्वालिटी पर असर पड़ता है।
लेटेंट TB में बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होता है लेकिन सुप्त अवस्था में रहता है। इस स्थिति में कोई लक्षण नहीं होते और यह दूसरों में नहीं फैलता। हालांकि, प्रेगनेंसी के दौरान या इम्यूनिटी कमजोर होने पर यह एक्टिव TB में बदल सकता है। इसलिए अगर आप कंसीव करने की कोशिश कर रहे हैं और आपको लेटेंट TB है, तो प्रेगनेंसी से पहले इस टीबी को ख़त्म करने का इलाज करवाना ज़रूरी हो सकता है।
एक्टिव TB में बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ता है और लक्षण दिखाई देते हैं। यह दूसरों में फैल सकता है और इसमें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है। एक्टिव TB को दो भागों में बांटा जाता है:
यह सबसे आम रूप है जो 80-85% केसेस में पाया जाता है। इसके मुख्य लक्षण हैं:
पल्मोनरी TB वाली महिलाओं को प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले पूरा इलाज लेना बेहद ज़रूरी है क्योंकि TB की दवाएं और बीमारी दोनों ही भ्रूण को प्रभावित कर सकते हैं।
यह शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है। फर्टिलिटी की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण हैं:
यह TB का वह रूप है जो सीधे फर्टिलिटी को प्रभावित करता है। यह महिलाओं में इनफर्टिलिटी का एक छिपा हुआ कारण है। कई बार महिलाओं को पता ही नहीं चलता कि उन्हें जेनिटल TB है क्योंकि इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं।
जेनिटल TB के लक्षण:
महत्वपूर्ण बात यह है कि जेनिटल TB की डायग्नोसिस मुश्किल होती है क्योंकि कई बार स्पुटम टेस्ट और छाती का एक्स-रे नॉर्मल आ सकते हैं। फर्टिलिटी एक्सपर्ट एंडोमेट्रियल बायोप्सी, हिस्टेरोस्कोपी, या लैप्रोस्कोपी के ज़रिये इसकी जांच करते हैं।
पेट के अंगों में TB जो पेल्विक ऑर्गन्स को भी प्रभावित कर सकती है।
लिम्फ नोड्स में TB, खासकर गर्दन की ग्रंथियों में।
रीढ़ की हड्डी में TB।
दिमाग की झिल्लियों में TB, जो सबसे खतरनाक रूप है।
जब TB बैक्टीरिया नॉर्मल दवाओं के खिलाफ रेसिस्टेंट हो जाता है, तो इसे ड्रग-रेसिस्टेंट TB कहते हैं। MDR-TB और XDR-TB इसके गंभीर रूप हैं। ड्रग-रेसिस्टेंट TB का इलाज लंबा और मुश्किल होता है, और प्रेगनेंसी प्लानिंग को और भी जटिल बना देता है।
अगर आप लंबे समय से कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं और सफल नहीं हो पा रही, तो फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट जेनिटल TB की जांच की सलाह देते हैं। इस जांच में शामिल हैं:
TB का इलाज पूरी तरह संभव है। नॉर्मल TB का इलाज आमतौर पर 6 महीने का होता है, जिसमें कई एंटी-TB दवाओं का कॉम्बिनेशन दिया जाता है। इलाज को दो फेज़ में बांटा जाता है:
इस दौरान मरीज़ को रोज़ाना कई दवाएं एक साथ लेनी होती हैं। इस फेज़ का मकसद तेज़ी से बढ़ रहे TB बैक्टीरिया को मारना होता है।
इसमें कम दवाएं दी जाती हैं जो बचे हुए बैक्टीरिया को खत्म करती हैं और दोबारा TB होने से रोकती हैं।
इलाज में सबसे ज़रूरी बात यह है कि दवाओं का कोर्स बीच में बिल्कुल न छोड़ें, भले ही आप ठीक महसूस करने लगें। अधूरा इलाज लेने से TB दोबारा हो सकती है और बैक्टीरिया ड्रग-रेसिस्टेंट बन सकता है, जिसका इलाज बहुत मुश्किल और लंबा होता है।
अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रहे हैं और आपको या आपके पार्टनर को TB है, तो कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए:
ज़्यादातर डॉक्टर TB के इलाज के दौरान प्रेगनेंसी प्लान करने से मना करते हैं। हालांकि कुछ एंटी-TB दवाएं प्रेगनेंसी में अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन बेहतर है कि पूरा इलाज खत्म होने के बाद ही कंसीव करने की कोशिश करें। इससे माँ और बच्चे दोनों की सेहत सुरक्षित रहती है।
TB का पूरा इलाज लेने और TB-free होने के 3 से 6 महीने बाद आप प्रेगनेंसी प्लान कर सकती हैं। डॉक्टर आपको पूरी तरह ठीक होने की पुष्टि के लिए फॉलो-अप टेस्ट करेंगे। इस दौरान शरीर को रिकवर होने का समय मिलता है और दवाओं का असर पूरी तरह खत्म हो जाता है।
अगर जेनिटल TB की वजह से फैलोपियन ट्यूब्स में स्थायी नुकसान, स्कारिंग या ब्लॉकेज हो चुका है, तो नेचुरल कंसेप्शन मुश्किल हो सकता है। कई बार यूट्रस की लाइनिंग भी पतली या डैमेज हो जाती है, जिससे इम्प्लांटेशन में दिक्कत आती है। ऐसे केसेस में फर्टिलिटी एक्सपर्ट की मदद लेना बेहद ज़रूरी हो जाता है।
अगर TB की वजह से ट्यूबल डैमेज हो गया है लेकिन यूट्रस की कंडीशन अच्छी है, तो IVF (In Vitro Fertilization) एक सफल विकल्प हो सकता है। IVF में एग को लैब में फर्टिलाइज़ करके सीधे यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है, इसलिए फैलोपियन ट्यूब्स की ज़रूरत नहीं होती।
हालांकि, IVF से पहले यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि:
कई महिलाएं जिन्हें जेनिटल TB थी, सही इलाज और IVF की मदद से सफलतापूर्वक माँ बन चुकी हैं। फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट आपकी खास स्थिति को देखते हुए बेस्ट ट्रीटमेंट प्लान तैयार करेंगे।
TB ka full form Tuberculosis है, और यह सिर्फ फेफड़ों की बीमारी नहीं है। जेनिटल TB फीमेल इनफर्टिलिटी के छिपे हुए कारणों में से एक है जो फैलोपियन ट्यूब्स और यूट्रस को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। अगर आप लंबे समय से कंसीव करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सफल नहीं हो पा रहे, तो TB की जांच ज़रूरी है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर डायग्नोसिस और पूरा इलाज लेने से TB पूरी तरह ठीक हो सकती है। भले ही TB की वजह से कुछ स्थायी नुकसान हो गया हो, IVF जैसी तकनीकों से स्वस्थ प्रेगनेंसी और माँ बनने का सपना साकार हो सकता है।
हाँ, जेनिटल TB फैलोपियन ट्यूब्स और यूट्रस को नुकसान पहुंचाकर इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती है। यह फीमेल इनफर्टिलिटी के छिपे हुए कारणों में से एक है।
TB मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है - लेटेंट TB और एक्टिव TB। एक्टिव TB को पल्मोनरी (फेफड़ों की) और एक्स्ट्रापल्मोनरी (शरीर के दूसरे हिस्सों की) में बांटा जाता है।
नहीं, TB के इलाज के दौरान प्रेगनेंसी प्लान करने से बचें। पूरा इलाज लेने के 3-6 महीने बाद कंसीव करने की कोशिश करें।
अगर फैलोपियन ट्यूब्स में स्थायी नुकसान हो गया है, तो IVF (In Vitro Fertilization) एक सफल विकल्प हो सकता है।
लंबे समय से कंसीव न हो पाना, अनियमित पीरियड्स, पेट के निचले हिस्से में दर्द, और असामान्य वजाइनल डिस्चार्ज जेनिटल TB के लक्षण हो सकते हैं।
हाँ, सही समय पर पहचान और 6 महीने का पूरा इलाज लेने से TB 100% ठीक हो सकती है। भारत सरकार के NTEP प्रोग्राम के तहत मुफ्त जांच और इलाज उपलब्ध है।