Teratozoospermia Meaning in Hindi: टेराटोज़ूस्पर्मिया क्या है?

Last updated: January 05, 2026

Overview

जब संतान की चाहत में समय बीतता जाये लेकिन कोशिश कामयाब न हो, तो मन में कई सवाल उठते हैं। सीमन एनालिसिस रिपोर्ट आई और उसमें पाया कि टेराटोज़ूस्पर्मिया (Teratozoospermia) लिखा है। डॉक्टर ने बताया कि स्पर्म की आकृति सामान्य नहीं है। अब सवाल यह है कि इसका मतलब क्या है और क्या इससे पिता बनना संभव है?

अगर सीमन एनालिसिस रिपोर्ट में यह आया है तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। Teratozoospermia meaning in hindi में समझें तो इसका अर्थ है स्पर्म का असामान्य आकार। यह पुरुष निःसंतानता का एक आम कारण है लेकिन सही इलाज से व्यक्ति का पिता बनना संभव है।

टेराटोज़ूस्पर्मिया क्या है? (Teratozoospermia meaning in hindi)

टेराटोज़ूस्पर्मिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सीमन में असामान्य आकृति वाले स्पर्म की संख्या सामान्य से अधिक होती है। WHO के मानकों के अनुसार अगर सीमन सैंपल में 4 प्रतिशत से कम स्पर्म सामान्य आकृति के हों तो इसे टेराटोज़ूस्पर्मिया कहा जाता है।

यह समझना ज़रूरी है कि हर पुरुष के सीमन में कुछ असामान्य स्पर्म होते हैं, यह स्वाभाविक है। समस्या तब होती है जब असामान्य स्पर्म की संख्या बहुत अधिक हो जाए। असामान्य आकृति वाले स्पर्म एग तक पहुंचने और उसे फर्टिलाइज़ करने में कठिनाई महसूस करते हैं जिससे गर्भधारण में समस्या आती है।

स्पर्म की सामान्य संरचना

एक सामान्य स्पर्म के तीन मुख्य भाग होते हैं।

  • हेड (Head): अंडाकार आकार का होता है जिसमें जेनेटिक मटीरियल यानी DNA होता है। हेड के आगे एक्रोसोम (Acrosome) होता है जो एग की बाहरी परत को तोड़ने में मदद करता है।
  • मिडपीस (Midpiece): यह हेड और टेल को जोड़ता है। इसमें माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं जो स्पर्म को तैरने के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
  • टेल (Tail): लंबी और पतली होती है जो स्पर्म को आगे बढ़ने में मदद करती है। सामान्य टेल सीधी और एक समान मोटाई की होती है।

टेराटोज़ूस्पर्मिया में इन तीनों भागों में से किसी में भी असामान्यता हो सकती है जैसे हेड बहुत बड़ा या छोटा होना, दो हेड होना, टेल मुड़ी हुई या छोटी होना, या मिडपीस में दोष होना।

टेराटोज़ूस्पर्मिया के प्रकार

सामान्य आकृति वाले स्पर्म के प्रतिशत के आधार पर इसे तीन श्रेणियों में बांटा जाता है।

  • हल्का (Mild): जब 10 से 14 प्रतिशत स्पर्म सामान्य आकृति के हों। इस स्थिति में स्वाभाविक गर्भधारण की संभावना बनी रहती है।
  • मध्यम (Moderate): जब 5 से 9 प्रतिशत स्पर्म सामान्य आकृति के हों। इसमें IUI या अन्य सहायक प्रजनन तकनीकों की आवश्यकता हो सकती है।
  • गंभीर (Severe): जब 4 प्रतिशत से कम स्पर्म सामान्य आकृति के हों। इसमें IVF या ICSI की आवश्यकता होती है।

टेराटोज़ूस्पर्मिया के कारण

स्पर्म की असामान्य आकृति के कई कारण हो सकते हैं। कुछ कारण नीचे दिए जा रहे हैं।

आनुवंशिक कारण

कुछ जेनेटिक विकार स्पर्म के विकास को प्रभावित करते हैं। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome) और Y क्रोमोसोम माइक्रोडिलीशन जैसी स्थितियां स्पर्म की आकृति को प्रभावित कर सकती हैं।

लाइफस्टाइल संबंधी कारण

  • धूम्रपान और तंबाकू का सेवन: स्पर्म की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
  • अत्यधिक शराब का सेवन: स्पर्म उत्पादन और आकृति दोनों को प्रभावित करता है।
  • मोटापा और अस्वस्थ खानपान: हॉर्मोनल असंतुलन पैदा करते हैं जो स्पर्म विकास को प्रभावित करता है।
  • अत्यधिक तनाव और नींद की कमी: स्पर्म की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर डालती है।

चिकित्सा संबंधी कारण

  • वैरिकोसील (Varicocele): अंडकोष की नसों में सूजन जो वृषण के तापमान को बढ़ाती है और स्पर्म उत्पादन को प्रभावित करती है।
  • संक्रमण: वृषण या प्रोस्टेट में संक्रमण स्पर्म के विकास को प्रभावित कर सकता है।
  • हॉर्मोनल असंतुलन: टेस्टोस्टेरॉन या अन्य हॉर्मोन्स में असंतुलन स्पर्म उत्पादन को प्रभावित करता है।
  • कीमोथेरेपी या रेडिएशन: कैंसर का इलाज स्पर्म उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकता है।

पर्यावरणीय कारण

  • कीटनाशकों और रसायनों के संपर्क में रहना।
  • अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहना: जैसे गर्म पानी में नहाना या लैपटॉप को गोद में रखना।
  • भारी धातुओं जैसे सीसा या कैडमियम के संपर्क में आना।

लक्षण और डायग्नोसिस

टेराटोज़ूस्पर्मिया के कोई बाहरी लक्षण नहीं होते। पुरुष को कोई दर्द या असुविधा महसूस नहीं होती। यह स्थिति तभी पता चलती है जब गर्भधारण में कठिनाई के कारण सीमन एनालिसिस कराया जाए।

निदान के लिए टेस्ट:

  • सीमन एनालिसिस: यह प्राथमिक जांच है जिसमें स्पर्म की संख्या, गतिशीलता और आकृति की जांच होती है। क्रूगर स्ट्रिक्ट क्राइटेरिया (Kruger Strict Criteria) के अनुसार स्पर्म की आकृति का मूल्यांकन किया जाता है।
  • हॉर्मोन टेस्ट: FSH, LH, टेस्टोस्टेरॉन और प्रोलैक्टिन के स्तर की जांच।
  • स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड: वृषण और आसपास की संरचनाओं की जांच, विशेषकर वैरिकोसील की पहचान के लिए।
  • जेनेटिक टेस्टिंग: गंभीर मामलों में क्रोमोसोमल असामान्यताओं की जांच।
  • स्पर्म DNA फ्रैगमेंटेशन टेस्ट: स्पर्म के DNA में टूट-फूट की जांच जो बार-बार गर्भपात का कारण हो सकती है।

टेराटोज़ूस्पर्मिया का क्या इलाज है?

टेराटोज़ूस्पर्मिया का इलाज इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है:

लाइफस्टाइल में बदलाव

हल्के मामलों में जीवनशैली में सुधार से फ़ायदा हो सकता है। धूम्रपान और शराब छोड़ना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, तनाव कम करना और पर्याप्त नींद लेना स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। स्पर्म का पूर्ण विकास चक्र लगभग 74 दिन का होता है, इसलिए जीवनशैली में बदलाव के परिणाम देखने में 3 महीने लग सकते हैं।

सप्लीमेंट्स

कुछ पोषक तत्व स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं जैसे ज़िंक, फोलिक एसिड, विटामिन C और E, सेलेनियम, कोएंज़ाइम Q10 और L-कार्निटीन। ये एंटीऑक्सीडेंट ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं जो स्पर्म को नुकसान पहुंचाता है।

चिकित्सा उपचार:

  • वैरिकोसील सर्जरी: अगर वैरिकोसील है तो सर्जरी से स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
  • हॉर्मोन थेरेपी: हॉर्मोनल असंतुलन होने पर दवाओं से उपचार।
  • संक्रमण का इलाज: अगर संक्रमण है तो एंटीबायोटिक्स से उपचार।

सहायक प्रजनन तकनीकें:

  • IUI (इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन): हल्के से मध्यम मामलों में तैयार किए गए सीमन को सीधे गर्भाशय में डाला जाता है।
  • IVF (इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन): एग और स्पर्म को प्रयोगशाला में मिलाया जाता है और फिर एम्ब्रीओ को गर्भाशय में रखा जाता है।
  • ICSI (इंट्रासाइटोप्लाज़्मिक स्पर्म इंजेक्शन): गंभीर टेराटोज़ूस्पर्मिया में यह सबसे प्रभावी विकल्प है। इसमें एक स्वस्थ स्पर्म को सीधे एग के अंदर इंजेक्ट किया जाता है। इससे स्पर्म की आकृति की समस्या दूर हो जाती है क्योंकि स्पर्म को खुद एग तक तैरकर नहीं जाना होता।

पिता बनने की संभावना

टेराटोज़ूस्पर्मिया होने का मतलब यह नहीं है कि पिता बनना असंभव है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से इस स्थिति में भी गर्भधारण संभव है।

  • हल्के मामलों में: जीवनशैली में बदलाव और सप्लीमेंट्स से स्वाभाविक गर्भधारण संभव है।
  • मध्यम मामलों में: IUI से 15 से 20 प्रतिशत सफलता दर होती है।
  • गंभीर मामलों में: ICSI से 50 से 80 प्रतिशत तक फर्टिलाइज़ेशन दर प्राप्त होती है और प्रेगनेंसी दर 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि भले ही अधिकतर स्पर्म असामान्य हों, लेकिन कुछ सामान्य स्पर्म होते हैं। ICSI में विशेषज्ञ माइक्रोस्कोप के ज़रिए सबसे स्वस्थ स्पर्म को चुनकर उपयोग करते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस आर्टिकल में हमने teratozoospermia meaning in hindi में विस्तार से समझाया कि यह स्थिति क्या है और इसका इलाज कैसे होता है। टेराटोज़ूस्पर्मिया पुरुष बांझपन का एक आम कारण है लेकिन यह उपचार योग्य है। सही निदान और उचित इलाज से पिता बनने का सपना पूरा हो सकता है।

अगर आपकी रिपोर्ट में टेराटोज़ूस्पर्मिया आया है तो घबराएं नहीं। पहले कारण का पता लगाएं, जीवनशैली में सुधार करें और विशेषज्ञ की सलाह से आगे का इलाज तय करें। ICSI जैसी तकनीकों से गंभीर मामलों में भी सफलता मिल रही है।

याद रखें कि फर्टिलिटी की यात्रा में धैर्य ज़रूरी है। स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार में समय लगता है। सही मार्गदर्शन और इलाज से आप भी पिता बन सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या टेराटोज़ूस्पर्मिया से स्वाभाविक गर्भधारण संभव है?

 

हां, हल्के मामलों में स्वाभाविक गर्भधारण संभव है। अगर सामान्य स्पर्म की संख्या 10 प्रतिशत से अधिक है और अन्य पैरामीटर ठीक हैं तो प्राकृतिक तरीके से भी गर्भधारण हो सकता है।

क्या टेराटोज़ूस्पर्मिया ठीक हो सकता है?

 

कुछ मामलों में जीवनशैली में बदलाव और उपचार से स्पर्म की आकृति में सुधार होता है। हालांकि आनुवंशिक कारणों से होने वाला टेराटोज़ूस्पर्मिया पूरी तरह ठीक नहीं होता लेकिन ICSI से गर्भधारण संभव है।

टेराटोज़ूस्पर्मिया में कौन सा इलाज सबसे अच्छा है?

 

गंभीर टेराटोज़ूस्पर्मिया में ICSI सबसे प्रभावी इलाज है क्योंकि इसमें एक स्वस्थ स्पर्म को चुनकर सीधे एग में इंजेक्ट किया जाता है। हल्के मामलों में जीवनशैली में बदलाव और IUI भी प्रभावी हो सकते हैं।

क्या टेराटोज़ूस्पर्मिया से बच्चे में कोई समस्या होती है?

 

ICSI में स्वस्थ स्पर्म का चयन किया जाता है इसलिए बच्चे में जन्मजात दोष का जोखिम सामान्य गर्भधारण जितना ही होता है। शोध बताते हैं कि ICSI से जन्मे बच्चे स्वस्थ होते हैं।

स्पर्म की आकृति सुधारने में कितना समय लगता है?

 

स्पर्म का पूर्ण विकास चक्र लगभग 74 दिन का होता है। इसलिए जीवनशैली में बदलाव या उपचार शुरू करने के बाद परिणाम देखने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं। इस दौरान धैर्य रखना महत्वपूर्ण है।

क्या खानपान से स्पर्म की आकृति सुधर सकती है?

 

संतुलित आहार स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल और सब्जियां, ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त मछली, बादाम और अखरोट, ज़िंक युक्त फूड जैसे कद्दू के बीज फायदेमंद हैं। प्रोसेस्ड फूड, शराब और धूम्रपान से बचें।

टेराटोज़ूस्पर्मिया और एस्थेनोज़ूस्पर्मिया में क्या अंतर है?

 

टेराटोज़ूस्पर्मिया में स्पर्म की आकृति असामान्य होती है जबकि एस्थेनोज़ूस्पर्मिया (Asthenozoospermia) में स्पर्म की गतिशीलता कम होती है। कभी-कभी दोनों स्थितियां एक साथ भी हो सकती हैं जिसे एस्थेनोटेराटोज़ूस्पर्मिया कहते हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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