जब संतान की चाहत में समय बीतता जाये लेकिन कोशिश कामयाब न हो, तो मन में कई सवाल उठते हैं। सीमन एनालिसिस रिपोर्ट आई और उसमें पाया कि टेराटोज़ूस्पर्मिया (Teratozoospermia) लिखा है। डॉक्टर ने बताया कि स्पर्म की आकृति सामान्य नहीं है। अब सवाल यह है कि इसका मतलब क्या है और क्या इससे पिता बनना संभव है?
अगर सीमन एनालिसिस रिपोर्ट में यह आया है तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। Teratozoospermia meaning in hindi में समझें तो इसका अर्थ है स्पर्म का असामान्य आकार। यह पुरुष निःसंतानता का एक आम कारण है लेकिन सही इलाज से व्यक्ति का पिता बनना संभव है।
टेराटोज़ूस्पर्मिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सीमन में असामान्य आकृति वाले स्पर्म की संख्या सामान्य से अधिक होती है। WHO के मानकों के अनुसार अगर सीमन सैंपल में 4 प्रतिशत से कम स्पर्म सामान्य आकृति के हों तो इसे टेराटोज़ूस्पर्मिया कहा जाता है।
यह समझना ज़रूरी है कि हर पुरुष के सीमन में कुछ असामान्य स्पर्म होते हैं, यह स्वाभाविक है। समस्या तब होती है जब असामान्य स्पर्म की संख्या बहुत अधिक हो जाए। असामान्य आकृति वाले स्पर्म एग तक पहुंचने और उसे फर्टिलाइज़ करने में कठिनाई महसूस करते हैं जिससे गर्भधारण में समस्या आती है।
एक सामान्य स्पर्म के तीन मुख्य भाग होते हैं।
टेराटोज़ूस्पर्मिया में इन तीनों भागों में से किसी में भी असामान्यता हो सकती है जैसे हेड बहुत बड़ा या छोटा होना, दो हेड होना, टेल मुड़ी हुई या छोटी होना, या मिडपीस में दोष होना।
सामान्य आकृति वाले स्पर्म के प्रतिशत के आधार पर इसे तीन श्रेणियों में बांटा जाता है।
स्पर्म की असामान्य आकृति के कई कारण हो सकते हैं। कुछ कारण नीचे दिए जा रहे हैं।
कुछ जेनेटिक विकार स्पर्म के विकास को प्रभावित करते हैं। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome) और Y क्रोमोसोम माइक्रोडिलीशन जैसी स्थितियां स्पर्म की आकृति को प्रभावित कर सकती हैं।
टेराटोज़ूस्पर्मिया के कोई बाहरी लक्षण नहीं होते। पुरुष को कोई दर्द या असुविधा महसूस नहीं होती। यह स्थिति तभी पता चलती है जब गर्भधारण में कठिनाई के कारण सीमन एनालिसिस कराया जाए।
टेराटोज़ूस्पर्मिया का इलाज इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है:
हल्के मामलों में जीवनशैली में सुधार से फ़ायदा हो सकता है। धूम्रपान और शराब छोड़ना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, तनाव कम करना और पर्याप्त नींद लेना स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। स्पर्म का पूर्ण विकास चक्र लगभग 74 दिन का होता है, इसलिए जीवनशैली में बदलाव के परिणाम देखने में 3 महीने लग सकते हैं।
कुछ पोषक तत्व स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं जैसे ज़िंक, फोलिक एसिड, विटामिन C और E, सेलेनियम, कोएंज़ाइम Q10 और L-कार्निटीन। ये एंटीऑक्सीडेंट ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं जो स्पर्म को नुकसान पहुंचाता है।
टेराटोज़ूस्पर्मिया होने का मतलब यह नहीं है कि पिता बनना असंभव है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से इस स्थिति में भी गर्भधारण संभव है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि भले ही अधिकतर स्पर्म असामान्य हों, लेकिन कुछ सामान्य स्पर्म होते हैं। ICSI में विशेषज्ञ माइक्रोस्कोप के ज़रिए सबसे स्वस्थ स्पर्म को चुनकर उपयोग करते हैं।
इस आर्टिकल में हमने teratozoospermia meaning in hindi में विस्तार से समझाया कि यह स्थिति क्या है और इसका इलाज कैसे होता है। टेराटोज़ूस्पर्मिया पुरुष बांझपन का एक आम कारण है लेकिन यह उपचार योग्य है। सही निदान और उचित इलाज से पिता बनने का सपना पूरा हो सकता है।
अगर आपकी रिपोर्ट में टेराटोज़ूस्पर्मिया आया है तो घबराएं नहीं। पहले कारण का पता लगाएं, जीवनशैली में सुधार करें और विशेषज्ञ की सलाह से आगे का इलाज तय करें। ICSI जैसी तकनीकों से गंभीर मामलों में भी सफलता मिल रही है।
याद रखें कि फर्टिलिटी की यात्रा में धैर्य ज़रूरी है। स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार में समय लगता है। सही मार्गदर्शन और इलाज से आप भी पिता बन सकते हैं।
हां, हल्के मामलों में स्वाभाविक गर्भधारण संभव है। अगर सामान्य स्पर्म की संख्या 10 प्रतिशत से अधिक है और अन्य पैरामीटर ठीक हैं तो प्राकृतिक तरीके से भी गर्भधारण हो सकता है।
कुछ मामलों में जीवनशैली में बदलाव और उपचार से स्पर्म की आकृति में सुधार होता है। हालांकि आनुवंशिक कारणों से होने वाला टेराटोज़ूस्पर्मिया पूरी तरह ठीक नहीं होता लेकिन ICSI से गर्भधारण संभव है।
गंभीर टेराटोज़ूस्पर्मिया में ICSI सबसे प्रभावी इलाज है क्योंकि इसमें एक स्वस्थ स्पर्म को चुनकर सीधे एग में इंजेक्ट किया जाता है। हल्के मामलों में जीवनशैली में बदलाव और IUI भी प्रभावी हो सकते हैं।
ICSI में स्वस्थ स्पर्म का चयन किया जाता है इसलिए बच्चे में जन्मजात दोष का जोखिम सामान्य गर्भधारण जितना ही होता है। शोध बताते हैं कि ICSI से जन्मे बच्चे स्वस्थ होते हैं।
स्पर्म का पूर्ण विकास चक्र लगभग 74 दिन का होता है। इसलिए जीवनशैली में बदलाव या उपचार शुरू करने के बाद परिणाम देखने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं। इस दौरान धैर्य रखना महत्वपूर्ण है।
संतुलित आहार स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल और सब्जियां, ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त मछली, बादाम और अखरोट, ज़िंक युक्त फूड जैसे कद्दू के बीज फायदेमंद हैं। प्रोसेस्ड फूड, शराब और धूम्रपान से बचें।
टेराटोज़ूस्पर्मिया में स्पर्म की आकृति असामान्य होती है जबकि एस्थेनोज़ूस्पर्मिया (Asthenozoospermia) में स्पर्म की गतिशीलता कम होती है। कभी-कभी दोनों स्थितियां एक साथ भी हो सकती हैं जिसे एस्थेनोटेराटोज़ूस्पर्मिया कहते हैं।