टेस्टिस क्या हैं और पुरुष फर्टिलिटी में उनका क्या रोल है? (Testes Meaning in Hindi)

Last updated: March 02, 2026

Overview

अगर आप संतान पैदा करने की प्लानिंग कर रहे हैं लेकिन गर्भधारण में कठिनाई आ रही है, तो इस दौरान अक्सर पुरुष यानी मेल फर्टिलिटी (male fertility) की भी विस्तार से जांच की जाती है। testes का पिता बनने की क्षमता से क्या संबंध है, इसे समझने से पहले जानते हैं testes meaning in hindi.

Testes का मतलब अंडकोष होता है। ये पुरुष प्रजनन तंत्र यानी मेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम (Male Reproductive System) का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और स्क्रोटम (Scrotum) नाम की त्वचा की थैली में स्थित होते हैं। इनका मुख्य काम दो चीज़ें बनाना है, स्पर्म यानी शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन। स्पर्म गर्भधारण के लिए जरुरी होते हैं, जबकि टेस्टोस्टेरोन पुरुष शरीर के विकास, यौन इच्छा यानी लिबिडो, मसल्स स्ट्रेंथ और सामान्य हार्मोन बैलेंस के लिए जरुरी होता है।

यदि testes स्वस्थ और सक्रिय हैं, तो स्पर्म बनने का काम और हॉर्मोन का लेवल सामान्य रहता है। लेकिन इन्फेक्शन, वैरिकोसील, चोट, हार्मोन असंतुलन या जन्मजात कारणों से इनके काम में कमी आ सकती है, जिससे स्पर्म काउंट या क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि पुरुष निःसंतानता यानी मेल इनफर्टिलिटी (male infertility)को समझने में testes की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

testes यानी अंडकोष क्या हैं?

testes दो छोटी-सी ग्रंथियाँ हैं जो एक थैली में होती हैं जिसे स्क्रोटम (scrotum) कहते हैं। यह थैली पुरुष के लिंग यानी पीनस (penis) के ठीक नीचे होती है।

अगर आपने कभी ध्यान दिया हो तो एक testes दूसरे से थोड़ा नीचे लटकता है। यह बिल्कुल नॉर्मल है, क्योंकि इसके कारण ये दोनों आपस में नहीं टकराते।

एक हेल्दी testes का वॉल्यूम 15 से 25 ml होता है। डॉक्टर इसे ऑर्किडोमीटर (orchidometer) से मापते हैं या अल्ट्रासाउंड से पता करते हैं। अगर वॉल्यूम 12 ml से कम है तो इसका मतलब टेस्टिस अंडरडेवलप्ड हो सकते हैं जिसकी वजह से स्पर्म प्रोडक्शन पर असर पड़ सकता है।

testes शरीर के बाहर ही क्यों होते हैं?

यह सवाल अक्सर लोग पूछते हैं कि जब बाकी सब अंग शरीर के अंदर हैं तो testes ही बाहर क्यों होते हैं? इसका जवाब है एक निश्चित तापमान यानी टेंपरेचर की जरुरत ।

स्पर्म बनने के लिए टेस्टिस का टेंपरेचर शरीर से 2-3 डिग्री सेल्सियस कम होना चाहिए। शरीर का सामान्य टेंपरेचर 37°C है, लेकिन स्पर्म 34-35°C पर ही ठीक से बन पाते हैं।

इसीलिए स्क्रोटम एक स्मार्ट थैली की तरह काम करता है और,

  • ठंड में यह सिकुड़कर टेस्टिस को शरीर के करीब ले आता है
  • गर्मी में यह ढीला होकर टेस्टिस को नीचे छोड़ देता है

यही वजह है कि टाइट अंडरवियर, लैपटॉप को गोद में रखना, या गर्म पानी में ज़्यादा देर बैठना स्पर्म के लिए नुकसानदेह होता है।

स्पर्म कैसे बनते हैं?

testes के अंदर लाखों छोटी-छोटी नलियाँ होती हैं जिन्हें सेमिनिफेरस ट्यूब्यूल्स (seminiferous tubules) कहते हैं। स्पर्म यहीं बनते हैं।

स्पर्म बनने में कितना समय लगता है?

एक स्पर्म को शुरू से लेकर पूरी तरह तैयार होने में 72 से 74 दिन लगते हैं। इस प्रोसेस को स्पर्मेटोजेनेसिस (spermatogenesis) कहते हैं।

इसका मतलब यह है कि अगर आप आज से अपनी लाइफस्टाइल बदलते हैं यानी धूम्रपान (स्मोकिंग) छोड़ते हैं, अच्छा खाते हैं, एक्सरसाइज़ करते हैं, तो इसका असर आपकी रिपोर्ट में 3 महीने बाद दिखेगा।

स्पर्म प्रोडक्शन में दिमाग़ का क्या रोल है?

स्पर्म प्रोडक्शन सिर्फ़ testes पर नहीं, दिमाग पर भी निर्भर करता है। ब्रेन में पिट्यूटरी ग्लैंड होती है जो FSH यानी फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन (Follicle Stimulating Hormone) रिलीज़ करती है। यह हॉर्मोन टेस्टिस को सिग्नल देता है कि अब स्पर्म बनाना शुरू करने का टाइम है।

अगर तनाव बहुत ज़्यादा है या नींद पूरी नहीं हो रही, तो यह सिग्नल कमज़ोर पड़ जाता है और स्पर्म प्रोडक्शन घट जाता है।

टेस्टोस्टेरोन कहाँ से आता है?

टेस्टिस सिर्फ़ स्पर्म नहीं बनाते, वो टेस्टोस्टेरोन यानी पुरुषों का मुख्य सेक्स हॉर्मोन भी बनाते हैं।

testes के अंदर लेडिग सेल्स (Leydig cells) होती हैं। जब पिट्यूटरी ग्लैंड LH (Luteinizing Hormone) भेजती है, तो ये सेल्स टेस्टोस्टेरोन बनाना शुरू करती हैं।

टेस्टोस्टेरोन क्या-क्या करता है?

  • दाढ़ी-मूँछ और शरीर के बाल आना
  • आवाज़ का भारी होना
  • मांसपेशियों की मज़बूती
  • हड्डियों की डेंसिटी
  • सेक्स ड्राइव यानी यौन इच्छा (लिबिडो)
  • मूड और एनर्जी लेवल
  • स्पर्म प्रोडक्शन में मदद

नॉर्मल टेस्टोस्टेरोन लेवल क्या होना चाहिए?

खून में टेस्टोस्टेरोन का नॉर्मल रेंज 300-1000 ng/dL है। अगर यह 300 से नीचे है तो इसे लो-टेस्टोस्टेरोन या हाइपोगोनाडिज़्म (Hypogonadism) कहते हैं।

testes का साइज़ छोटा हो तो क्या होगा?

छोटे testes में सेमिनिफेरस ट्यूब्यूल्स कम होती हैं, जिसका मतलब स्पर्म बनाने की क्षमता कम होती है। इसके अलावा लेडिग सेल्स भी कम होने के कारण टेस्टोस्टेरोन भी कम बनता है।

छोटे टेस्टिस के संकेत:

  • स्पर्म काउंट कम आना
  • थकान और एनर्जी की कमी
  • सेक्स ड्राइव में कमी
  • दाढ़ी का पतला होना
  • मांसपेशियों का कमज़ोर होना

लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि छोटे testes वाले हर पुरुष को फर्टिलिटी की दिक्कत हो। कुछ पुरुषों में एक testes छोटा होता है लेकिन दूसरा नॉर्मल, और वो आसानी से पिता बन जाते हैं।

testes में कमी की वजह से क्या क्या दिक्कतें आ सकती हैं?

testes से जुड़ी कुछ कॉमन समस्याएँ हैं जो फर्टिलिटी को प्रभावित करती हैं।

वैरिकोसील (Varicocele)

टेस्टिस की नसें फूल जाती हैं, जैसे पैरों में वैरिकोज़ वेन्स होती हैं। इससे testes का तापमान बढ़ता है और स्पर्म प्रोडक्शन गिरता है। यह पुरुष निःसंतानता यानी मेल इनफर्टिलिटी की सबसे कॉमन वजह है और 35 से 40% निःसंतान पुरुषों में पाई जाती है।

अनडिसेंडेड टेस्टिस

कुछ बच्चों में जन्म के समय टेस्टिस नीचे नहीं उतरते और पेट या ग्रोइन में रह जाते हैं। अगर 1 साल की उम्र तक इसका ऑपरेशन नहीं हुआ तो आगे चलकर फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है।

ऑर्काइटिस (Orchitis)

टेस्टिस में इंफेक्शन होना। यह मम्प्स (कनपेड़े) के बाद या STI यानी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन (Sexually Transmitted Infection) से हो सकता है।

टेस्टिकुलर टॉर्शन

टेस्टिस अपनी जगह से घूम जाता है और खून की सप्लाई बंद हो जाती है। यह इमरजेंसी है जिसमें अगर 6 घंटे में सर्जरी न हो तो testes हमेशा के लिए खराब हो सकता है।

हाइड्रोसील

टेस्टिस के चारों तरफ पानी जमा हो जाता है। इससे सूजन तो होती है लेकिन आमतौर पर फर्टिलिटी पर ज़्यादा असर नहीं पड़ता।

testes की जाँच कैसे होती है?

अगर सीमेन रिपोर्ट में स्पर्म काउंट या मोटिलिटी कम है, तो डॉक्टर testes की जाँच करते हैं।

फिज़िकल एग्ज़ाम

डॉक्टर हाथ से टेस्टिस का साइज़, टेक्सचर और किसी गाँठ की जाँच करते हैं। वैरिकोसील भी इसी से पता चलता है।

स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड

यह एक आसान टेस्ट है जिसमें टेस्टिस का वॉल्यूम, ब्लड फ्लो, और किसी भी असामान्यता का पता चलता है।

हॉर्मोन टेस्ट

खून की जाँच से FSH, LH, और टेस्टोस्टेरोन लेवल पता चलता है। अगर FSH बहुत ज़्यादा है और टेस्टोस्टेरोन कम, तो इसका मतलब टेस्टिस में ही दिक्कत है।

सीमेन एनालिसिस

स्पर्म की संख्या, गति, और बनावट की जाँच। यह मेल फर्टिलिटी का सबसे ज़रूरी टेस्ट है।

टेस्टिस को हेल्दी कैसे रखें?

टेस्टिस की सेहत सीधे आपकी लाइफस्टाइल से जुड़ी है।

testes वाली जगह के टेम्परेचर का ध्यान रखें

  • टाइट अंडरवियर की जगह लूज़ कॉटन बॉक्सर पहनें
  • लैपटॉप को गोद में रखकर घंटों काम न करें
  • गर्म पानी के टब में ज़्यादा देर न बैठें
  • फ़ोन को पैंट की अगली जेब में न रखें

नशा छोड़ें

सिगरेट और शराब दोनों स्पर्म के DNA को डैमेज करते हैं। स्टडीज़ बताती हैं कि स्मोकिंग से स्पर्म काउंट 23% तक गिर सकता है।

वज़न कंट्रोल करें

मोटापे से एस्ट्रोजन बढ़ता है जो टेस्टोस्टेरोन को कम करता है। पेट की चर्बी कम करें तो हॉर्मोन बैलेंस सुधरेगा।

डाइट में क्या शामिल करें

  • ज़िंक: कद्दू के बीज, अखरोट, अंडा
  • विटामिन D: धूप, दूध, अंडे की ज़र्दी
  • एंटीऑक्सीडेंट्स: टमाटर, संतरा, हरी सब्ज़ियाँ
  • ओमेगा-3: अखरोट, अलसी, मछली

नींद और तनाव

टेस्टोस्टेरोन सबसे ज़्यादा गहरी नींद में बनता है। 7-8 घंटे की नींद ज़रूरी है। तनाव से कोर्टिसोल बढ़ता है जो टेस्टोस्टेरोन का दुश्मन है।

रेगुलर सेल्फ-एग्ज़ाम

महीने में एक बार नहाते समय testes को चेक करें। किसी भी गाँठ, सूजन, या दर्द को नज़रअंदाज़ न करें।

IVF में टेस्टिस का क्या रोल है?

अगर सारी कोशिशों के बाद भी स्पर्म काउंट बहुत कम है या ज़ीरो है, तो इस कंडीशन में भी मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी की सहायता से पिता बनना संभव है।

इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (Intracytoplasmic Sperm Injection)

IVF में अगर स्पर्म की क्वालिटी या क्वांटिटी कम है, तो ICSI की जाती है। इसमें एक हेल्दी स्पर्म को सीधे एग में इंजेक्ट किया जाता है।

TESA/micro-TESE

अगर वीर्य में स्पर्म बिल्कुल नहीं हैं यानी एज़ूस्पर्मिआ (Azoospermia) है, तो डॉक्टर testes से सीधे स्पर्म निकाल कर एग को फ़र्टिलाइज़ करवाते हैं। TESA में सुई से और micro-TESE में माइक्रोस्कोप की मदद से यह किया जाता है।

इसका मतलब है कि भले ही रिपोर्ट में ज़ीरो स्पर्म काउंट हो, लेकिन testes में कहीं स्पर्म बन रहे हों तो IVF से पिता बनना संभव है।

एक्सपर्ट की सलाह (Conclusion)

टेस्टिस पुरुष शरीर के सबसे ज़रूरी अंगों में से हैं। ये दो काम करते हैं, स्पर्म बनाना जिससे संतान हो सके, और टेस्टोस्टेरोन बनाना जिससे पुरुष की सेहत, एनर्जी और मर्दानगी बनी रहे।

अगर आपकी सीमेन रिपोर्ट में स्पर्म काउंट कम आया है या टेस्टोस्टेरोन लो है, तो सबसे पहले अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान दें। सही टेम्परेचर में रहें, हर तरह का नशा छोड़ें, अच्छा खाएँ और तनाव कम करें। 3 महीने बाद दोबारा टेस्ट करवाएँ, बहुत से मामलों में सिर्फ इतने से फ़र्क पड़ जाता है।

और अगर दिक्कत ज़्यादा गंभीर है, तो भी निराश न हों। आज की मेडिकल साइंस में ज़ीरो स्पर्म काउंट वाले पुरुष भी IVF और ICSI की मदद से पिता बन रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

एक टेस्टिस से बच्चा हो सकता है क्या?

 

हाँ। एक हेल्दी टेस्टिस पर्याप्त स्पर्म और टेस्टोस्टेरोन बना सकता है। बहुत से पुरुष एक टेस्टिस के साथ पिता बने हैं।

टेस्टिस का साइज़ बढ़ाया जा सकता है?

 

नहीं, टेस्टिस का साइज़ नैचुरली नहीं बढ़ता। लेकिन अगर वैरिकोसील जैसी कोई दिक्कत है जिसका इलाज हो, तो फंक्शन सुधर सकता है।

टेस्टिस में दर्द हो तो क्या करें?

 

हल्का दर्द कभी-कभी नॉर्मल हो सकता है। लेकिन अचानक तेज़ दर्द, सूजन, या बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ क्योंकि यह टॉर्शन या इंफेक्शन हो सकता है।

क्या मास्टरबेशन से टेस्टिस कमज़ोर होते हैं?

 

नहीं, मास्टरबेशन से टेस्टिस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता और न ही स्पर्म ख़त्म होते हैं क्योंकि शरीर लगातार नए स्पर्म बनाता रहता है।

टेस्टोस्टेरोन कम है तो स्पर्म भी कम होंगे?

 

ज़रूरी नहीं। टेस्टिस के अंदर टेस्टोस्टेरोन का लेवल खून में मौजूद लेवल से 50-100 गुना ज़्यादा होता है। इसलिए ब्लड टेस्ट में थोड़ा कम दिखे तो भी स्पर्म बन सकते हैं।

वैरिकोसील का ऑपरेशन ज़रूरी है क्या?

 

अगर वैरिकोसील की वजह से स्पर्म काउंट कम है या दर्द है, तो सर्जरी फ़ायदेमंद होती है। ऑपरेशन के 3 से 6 महीने बाद स्पर्म क्वालिटी में सुधार देखा जाता है।

कौन सी उम्र में टेस्टिस पूरी तरह डेवलप होते हैं?

 

टेस्टिस का विकास प्यूबर्टी यानी 12-14 साल की उम्र में तेज़ी से होता है और 18-20 साल तक पूरा हो जाता है। इसके बाद साइज़ में ज़्यादा बदलाव नहीं होता।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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