30-35 की उम्र के बाद अक्सर पुरुष सोचते हैं कि थकान, चिड़चिड़ापन, या सेक्स में रुचि कम होना उम्र का हिस्सा है। कुछ हद तक यह सच भी है क्योंकि 30 की उम्र के बाद हर साल टेस्टोस्टेरोन लगभग 1% कम होता जाता है। लेकिन जब यह गिरावट सामान्य से ज़्यादा हो, जिसे 'हाइपोगोनाडिज्म' (Hypogonadism) भी कहते हैं, तो यह चिंता की बात हो सकती है। Testosterone kam hone ke lakshan यानी टेस्टोस्टेरोन कम होने के लक्षण सिर्फ़ बेडरूम तक सीमित नहीं होते। यह हॉर्मोन मांसपेशियों से लेकर मूड तक और हड्डियों के कमजोर होने से लेकर याददाश्त में कमजोरी तक, पूरे शरीर को प्रभावित करता है। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि टेस्टोस्टेरोन की कमी आपके शरीर पर कैसे असर डालती है, इसे पहचानने के सही तरीके क्या हैं और आप इसे प्राकृतिक रूप से कैसे सुधार सकते हैं।
टेस्टोस्टेरोन पुरुषों का मुख्य सेक्स हॉर्मोन है जो अंडकोष यानी टेस्टिस (Testes) में बनता है। यह सिर्फ़ यौन क्षमता मतलब सैक्सुअल कैपेसिटी के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए ज़रूरी होता है। जब शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है, तो इन सभी कार्यों पर नकारात्मक असर पड़ने लगता है।
Testosterone kam hone ke lakshan इन तीन ज़ोन में सबसे साफ दिखते हैं, वह हैं शरीर, दिमाग और आपका बेडरूम।
अगर आप जिम में एक्सरसाइज करते हैं तो लगता है जैसे पहले जैसी ताकत नहीं बची। वज़न उठाने में दिक्कत होने लगती है। तो यह Testosterone kam hone ke lakshan में से एक लक्षण हो सकता है। क्योंकि जब यह हॉर्मोन कम हो जाता है, तो मसल मास घटने लगता है और मेहनत करने के बाद भी मसल्स नहीं बनतीं।
अगर आप वही खाना खा रहे हैं और रेगुलर एक्सरसाइज़ भी कर रहे हैं, फिर भी पेट निकलता जा रहा है, तो यह Testosterone kam hone ke lakshan हो सकते हैं। इस कंडीशन में शरीर फैट को अलग तरीके से स्टोर करने लगता है जिसमें पेट और छाती के आसपास चर्बी जमा होने लगती है। कुछ पुरुषों में छाती का आकार बढ़ने लगता है, जिसे गाइनेकोमेस्टिया (Gynecomastia) कहते हैं।
रात भर सोने के बाद भी सुबह थकान लगती है और दिन भर एनर्जी कम रहती है? यह टेस्टोस्टेरोन की कमी का एक आम लक्षण है। शरीर को वो fuel नहीं मिल रहा जो उसे active रखता है।
टेस्टोस्टेरोन हड्डियों की डेंसिटी बनाए रखता है। लंबे समय तक टेस्टोस्टेरोन की कमी रहने से ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) का खतरा बढ़ जाता है जिससे हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं और फ्रैक्चर होने का रिस्क बढ़ जाता है।
सिर के बाल तो उम्र के साथ कम होते ही हैं, लेकिन टेस्टोस्टेरोन कम होने पर शरीर और चेहरे के बाल भी कम होने लगते हैं जिससे दाढ़ी पतली हो जाती है, एवं छाती और बाँहों पर बाल कम हो जाते हैं।
अगर आपको छोटी-छोटी बातों पर जल्दी गुस्सा आ जाता है और पहले जैसा धैर्य यानी पेशेंस नहीं रह गया है, तो इसे Testosterone kam hone ke lakshan मान सकते हैं। टेस्टोस्टेरोन मूड को बैलेंस रखने में मदद करता है। जब इसका लेवल कम होता है, तो चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है।
मन में नेगेटिविटी चलती रहती है, किसी काम में मन नहीं लगता, और अकेलापन महसूस होता है। कई बार पुरुष इसे स्ट्रेस या काम का प्रेशर समझ लेते हैं। लेकिन यह सब लो-टी (Low -T) यानी लो टेस्टोस्टेरोन के लक्षण हो सकते हैं।
अगर आपको नाम याद रखने में दिक्कत होने लगी है, काम पर ध्यान नहीं टिकता, या छोटे-छोटे फैसले लेना भी मुश्किल लगने लगा है, तो इसके पीछे टेस्टोस्टेरोन की कमी हो सकती है।
रात को नींद नहीं आती या बार-बार टूटती है। कुछ पुरुषों को स्लीप एपनिया (sleep apnea), जो एक गंभीर स्लीपिंग डिसऑर्डर है जिसमें सोते समय आपकी सांस बार-बार रुकती और शुरू होती है, की समस्या भी हो जाती है। नींद की कमी से थकान और बढ़ जाती है और यह एक दुष्चक्र बन जाता है।
अगर आपको पहले जैसी इच्छा महसूस नहीं हो रही है या पार्टनर में रुचि कम हो गई है, तो यह लो टेस्टोस्टेरोन यानी testosterone kam hone ke lakshan हैं। टेस्टोस्टेरोन ही लिबिडो, यानी यौन इच्छा, को सीधे तौर पर कंट्रोल करता है।
इरेक्शन आने में समय लगता है या उसे बनाये रखना मुश्किल होता है। टेस्टोस्टेरोन नाइट्रिक ऑक्साइड रिलीज़ करने में मदद करता है जो इरेक्शन के लिए ज़रूरी है। हालाँकि इरेक्टाइल डिसफंक्शन (erectile dysfunction) के और भी कारण जैसे डाइबिटीज़ या हार्ट प्रॉब्लम्स हो सकते हैं।
अगर बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं और कंसीव नहीं हो पा रहा, तो लो टेस्टोस्टेरोन एक वजह हो सकती है क्योंकि यह हॉर्मोन स्पर्म प्रोडक्शन के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
सामान्य उम्र बढ़ने में एनर्जी धीरे-धीरे कम होती है, सेक्स ड्राइव थोड़ी घटती है लेकिन सेक्स में रुचि बनी रहती है। वज़न भी धीरे बढ़ता है और मूड में हल्के-फुल्के बदलाव दिखते हैं, जो समय के साथ मैनेज हो जाते हैं।
अगर आपकी एनर्जी अचानक बहुत कम हो गई है, सेक्स में बिल्कुल भी रुचि नहीं बची, पेट के आसपास तेज़ी से चर्बी बढ़ रही है, डिप्रेशन जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, या इरेक्शन की समस्या लगातार बनी हुई है तो यह सामान्य एजिंग नहीं मानी जाती।
अगर एक साथ कई ऐसे लक्षण दिख रहे हैं और समय के साथ बढ़ते जा रहे हैं, तो यह उम्र बढ़ने से नहीं, बल्कि टेस्टोस्टेरोन की कमी की वजह से हो रहा है। ऐसे में जाँच करवाना ज़रूरी हो जाता है।
40 की उम्र के बाद साल में एक बार टेस्टोस्टेरोन लेवल चेक करवाना अच्छी आदत है। कब चेकअप के लिए जाना है इसके लिए खुद से नीचे दिए गए पॉँच सवाल पूछें और अगर इनमें से तीन या ज़्यादा का जवाब ‘हाँ’ में है, तो आज ही टेस्टोस्टेरोन लेवल चेक करवायें।
टेस्टोस्टेरोन लेवल जानने के लिए एक साधारण ब्लड टेस्ट किया जाता है, जिसे टोटल टेस्टोस्टेरोन टेस्ट कहा जाता है। यह टेस्ट सुबह 7 से 10 बजे के बीच करवाना सबसे सही होता है, क्योंकि इसी समय शरीर में टेस्टोस्टेरोन का लेवल सबसे ज़्यादा होता है।
नॉर्मली टेस्टोस्टेरोन की रेंज 300 से 1000 ng/dL मानी जाती है। अगर रिपोर्ट में यह लेवल 300 ng/dL से कम आये, तो आपका टेस्टोस्टेरोन लेवल कम है।
अगर पहली रिपोर्ट में लेवल कम आता है, तो डॉक्टर दोबारा टेस्ट करके कंफर्म करते हैं कि कमी परमानेंट है या टेम्पररी।
अगर टेस्टोस्टेरोन लेवल थोड़ा कम है, तो सबसे पहले लाइफस्टाइल पर काम करना ज़रूरी होता है।
Testosterone kam hone ke lakshan को पहचानना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह हॉर्मोन सिर्फ़ सेक्स के लिए नहीं बल्कि पूरी हेल्थ के लिए ज़रूरी है। अगर शरीर, दिमाग और बेडरूम तीनों में बदलाव दिख रहे हैं, तो इसे बढ़ती उम्र कह कर नज़रअंदाज़ न करें। और पहला काम लाइफस्टाइल और डाइट को चेंज करने का करें।
अगर फिर भी फ़र्क नहीं पड़ता और लेवल बहुत कम है, तो डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Testosterone Replacement Therapy) यानी TRT की सलाह से सकते हैं। लेकिन TRT तभी करवाएं जब और सारे तरीके काम न कर रहे हों।
उम्र बढ़ना सबसे common कारण है। इसके अलावा मोटापा, diabetes, thyroid problems, और कुछ दवाइयाँ भी टेस्टोस्टेरोन कम कर सकती हैं।
हाँ, टेस्टोस्टेरोन स्पर्म production के लिए ज़रूरी है। कम लेवल से स्पर्म count और quality दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हाँ, जेनेटिक कंडीशन्स, टेस्टिकल्स में चोट, पिट्यूटरी ग्लैंड से जुड़ी समस्याएँ या कुछ खास इंफेक्शन्स की वजह से कम उम्र के पुरुषों में भी टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम हो सकता है।
डॉक्टर की निगरानी में TRT सेफ मानी जाती है। लेकिन इसके कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं जैसे मुंहासे (acne), स्लीप एपनिया (sleep apnea), या ब्लड क्लॉट (blood clots) का रिस्क।
अंडे, फैटी फिश, ड्राई फ्रूट्स, सीड्स और ज़िंक से भरपूर डाइट टेस्टोस्टेरोन को सपोर्ट करते हैं।