TVS टेस्ट क्या है? फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में क्यों है जरुरी?

Last updated: January 05, 2026

Overview

IVF ट्रीटमेंट की सफलता काफी हद तक सही समय पर सही जानकारी मिलने पर निर्भर करती है कि फॉलिकल (Follicle) कितना बड़ा हुआ, गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम (Endometrium) की मोटाई कितनी है, एग कब रिलीज होगा इत्यादि। यह सब जानकारी सिर्फ एक टेस्ट से मिलती है, जिसका नाम है, TVS यानी ट्रांसवेजाइनल सोनोग्राफी (Transvaginal Sonography)। पेट के ऊपर से किए जाने वाले सामान्य अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) की तुलना में TVS गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) और अंडाशय यानी ओवरी (Ovary) की बहुत ज्यादा क्लियर तस्वीर देता है। IVF साइकल में औसतन 4 से 6 बार TVS किया जाता है और हर स्कैन के आधार पर एक अहम फैसला लिया जाता है। अगर आप tvs test in hindi के बारे में जानना चाहती हैं, तो यह आर्टिकल आपको इस टेस्ट की पूरी प्रक्रिया, फर्टिलिटी में इसकी भूमिका और IVF में इसके महत्व को समझने में आपकी मदद करेगा।

TVS टेस्ट क्या होता है? (TVS Test in Hindi)

TVS का फुल फॉर्म है ट्रांसवेजाइनल सोनोग्राफी (Transvaginal Sonography), जिसे ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (Transvaginal Ultrasound) भी कहते हैं। यह एक इमेजिंग (Imaging) टेस्ट है जिसमें एक पतली प्रोब यानी ट्रांसड्यूसर (Transducer) को योनि यानी वेजाइना (Vagina) के अंदर डालकर हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स की मदद से यूट्रस, ओवरी, फैलोपियन ट्यूब्स (Fallopian Tubes) और गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स (Cervix) की डिटेल्ड तस्वीरें ली जाती हैं।

फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट TVS को इसलिए प्राथमिकता देते हैं क्योंकि इसमें ट्रांसड्यूसर रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स (Reproductive Organs) के बिल्कुल पास होता है। इससे 2-3 mm के छोटे फॉलिकल भी साफ दिखते हैं, जो पेट के अल्ट्रासाउंड में संभव नहीं है। मेडिकल स्टडीज के अनुसार, TVS की इमेज रेजोल्यूशन (Image Resolution) पेट के ऊपर से किये जाने वाले अल्ट्रासाउंड से 40 से 50% बेहतर होती है।

TVS कैसे किया जाता है?

TVS एक आसान प्रोसेस है जो 15 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है।

  • मूत्राशय यानी ब्लैडर (Bladder) खाली करके एग्जामिनेशन टेबल पर घुटने मोड़कर लेटना होता है
  • डॉक्टर ट्रांसड्यूसर पर कंडोम (Condom) और जेल (Gel) लगाकर धीरे से वेजाइना में डालते हैं
  • ट्रांसड्यूसर साउंड वेव्स भेजता है जो स्क्रीन पर रियल-टाइम इमेज (Real-time Image) बनाती हैं
  • डॉक्टर अलग-अलग एंगल से यूट्रस और ओवरी की तस्वीरें लेते हैं और मेजरमेंट (Measurement) करते हैं

इस प्रक्रिया में कोई रेडिएशन नहीं होता और यह पूरी तरह सेफ है। कुछ महिलाओं को हल्का प्रेशर महसूस हो सकता है, लेकिन दर्द नहीं होता।

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में TVS क्यों जरूरी है?

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में हर फैसला डाटा के आधार पर लिया जाता है और TVS के माध्यम से यह डाटा प्राप्त होता है। जो महिलाएं tvs test in hindi सर्च करती हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि यह टेस्ट सिर्फ इमेजिंग नहीं, बल्कि फर्टिलिटी का रोडमैप है।

AFC यानी एंट्रल फॉलिकल काउंट (Antral Follicle Count)

TVS से ओवरी में मौजूद एंट्रल फॉलिकल्स गिने जाते हैं। ये 2-10mm के छोटे फॉलिकल्स होते हैं जिनमें से हर एक में एक अंडा यानी एग (Egg) होता है। AFC आपकी ओवेरियन रिजर्व (Ovarian Reserve) यानी बचे हुए एग्स की संख्या पता करने का सबसे भरोसेमंद इंडिकेटर है।

एंडोमेट्रियल थिकनेस (Endometrial Thickness)

एंडोमेट्रियम वो जगह है जहां भ्रूण यानी एम्ब्रियो इम्प्लांट यानी चिपकता है। IVF में एम्ब्रियो ट्रांसफर के लिए आदर्श एंडोमेट्रियल थिकनेस 8 से 14mm होनी चाहिए। रिसर्च बताती है कि 7mm से कम थिकनेस में इम्प्लांटेशन रेट 25-30% तक गिर जाती है, जबकि 8 से 12mm में यह 45-50% तक होती है।

फॉलिकल ट्रैकिंग (Follicle Tracking)

IUI या टाइम्ड इंटरकोर्स में सही समय जानना बहुत है। TVS से फॉलिकल की ग्रोथ ट्रैक होती है। जब डॉमिनेंट फॉलिकल (Dominant Follicle) 18 से 22mm का हो जाता है, तब ट्रिगर इंजेक्शन (Trigger Injection) दिया जाता है। ट्रिगर के 36 घंटे बाद ओव्यूलेशन (Ovulation) होता है, जो IUI या इंटरकोर्स का सही समय माना जाता है।

IVF के हर स्टेप में TVS की भूमिका

IVF में TVS सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि पूरे ट्रीटमेंट का रोडमैप बनाने की कुंजी है। हर स्टेज पर इसकी जरूरत होती है।

Day 2-3: बेसलाइन स्कैन (Baseline Scan)

पीरियड्स के 2-3 दिन पर पहला TVS होता है। इससे पता चलता है कि ओवरी में कोई सिस्ट (Cyst) तो नहीं, AFC कितना है, और यूट्रस की स्थिति कैसी है। अगर 15 mm से बड़ी सिस्ट दिखे, तो साइकल कैंसिल या धीमी हो सकती है क्योंकि यह स्टिमुलेशन को प्रभावित कर सकती है।

Day 5-6: पहला फॉलो-अप स्कैन (Follow-up Scan)

स्टिमुलेशन इंजेक्शन के 3-4 दिन बाद TVS से देखा जाता है कि फॉलिकल्स की क्या प्रतिक्रिया हो रही है यानी वे रेस्पॉन्ड कर रहे हैं या नहीं। आदर्श रूप से, इस समय फॉलिकल्स 10-12mm के होने चाहिए। अगर रिस्पांस कम है तो दवाइयों की डोज बढ़ाई जाती है, और अगर ज्यादा है तो OHSS यानी ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (Ovarian Hyperstimulation Syndrome) के रिस्क को देखते हुए कम की जाती है।

Day 8-10: ट्रिगर टाइमिंग (Trigger Timing)

जब ज्यादातर फॉलिकल्स 17 से 20 mm के हो जाते हैं, तब ट्रिगर इंजेक्शन hCG या GnRH agonist का समय तय किया जाता है। ट्रिगर के ठीक 34 से 36 घंटे बाद एग रिट्रीवल (Egg Retrieval) किया जाता है। यह टाइमिंग बहुत सटीक होनी चाहिए क्योंकि जल्दी करने पर एग अपरिपक्व यानी इमैच्योर (immature) होते हैं, देर करने पर ओव्यूलेशन हो जाता है।

एग रिट्रीवल यानी OPU (Ovum Pick-Up)

एग्स निकालने की पूरी प्रक्रिया TVS को देखते हुए होती है। स्क्रीन पर देखते हुए डॉक्टर सुई को हर फॉलिकल में गाइड करते हैं और एग्स सुरक्षित निकालते हैं।

एम्ब्रियो ट्रांसफर से पहले

ट्रांसफर से पहले TVS से एंडोमेट्रियम की मोटाई और पैटर्न चेक किया जाता है। ट्रिपल लाइन पैटर्न (Triple Line Pattern) और 8 mm+ थिकनेस को इम्प्लांटेशन के लिए अच्छा माना जाता है। अगर एंडोमेट्रियम तैयार नहीं है, तो एम्ब्रियो को फ्रीज करके अगले साइकल में ट्रांसफर किया जा सकता है।

TVS से कौन सी समस्याएं पता चलती हैं?

TVS से कई ऐसी समस्याएं पकड़ में आती हैं जो फर्टिलिटी को सीधे प्रभावित करती हैं।

  • PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome): ओवरी में 12 से ज्यादा छोटे फॉलिकल्स (2-9mm) और बढ़ा हुआ ओवेरियन वॉल्यूम (Ovarian Volume) 10ml से ज्यादा।
  • ओवेरियन सिस्ट (Ovarian Cyst): फंक्शनल सिस्ट, डर्मॉइड सिस्ट (Dermoid Cyst) या एंडोमेट्रियोमा यानी चॉकलेट सिस्ट (Chocolate Cyst) ।
  • यूटेराइन फाइब्रॉइड (Uterine Fibroid): यूट्रस में बनने वाली नॉन-कैंसरस गांठें। सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड (Submucosal Fibroid) इम्प्लांटेशन में सबसे ज्यादा रुकावट डालते हैं।
  • एंडोमेट्रियल पॉलिप्स (Endometrial Polyps): यूट्रस की लाइनिंग में छोटी गांठें जो 25-30% इनफर्टिलिटी केसेज में पाई जाती हैं
  • हाइड्रोसैल्पिंक्स (Hydrosalpinx): ब्लॉक फैलोपियन ट्यूब में फ्लूइड जमा होना। यह IVF सक्सेस रेट को 50% तक कम कर सकता है, इसलिए ट्रांसफर से पहले इसका इलाज जरूरी है
  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic Pregnancy): यूट्रस के बाहर प्रेगनेंसी का समय से पहले पता लगना, जो लाइफ-सेविंग हो सकता है।

TVS और पेट के अल्ट्रासाउंड में फर्क

बहुत सी महिलाएं पूछती हैं कि पेट के ऊपर से अल्ट्रासाउंड क्यों नहीं होता, TVS क्यों जरूरी है।

  • इमेज क्वालिटी (Image Quality): TVS में ट्रांसड्यूसर ऑर्गन्स के पास होता है, इसलिए 2-3 mm के फॉलिकल भी दिखते हैं जबकि पेट के अल्ट्रासाउंड में यह इतनी साफ़ तस्वीर नहीं मिलती।
  • ब्लैडर: पेट के ऊपर से होने वाले अल्ट्रासाउंड भरे ब्लैडर में होता है जबकि TVS खाली ब्लैडर में होता है।
  • अर्ली प्रेगनेंसी (Early Pregnancy): 5 से 6 हफ्ते में TVS से गेस्टेशनल सैक (Gestational Sac) और 6-7 हफ्ते में हार्टबीट (Heartbeat) देखी जा सकती है। पेट के अल्ट्रासाउंड में यह और 1 से 2 हफ्ते बाद दिखती है।
  • ज्यादा वजन में: ओवरवेट (Overweight) महिलाओं में पेट की चर्बी इमेज क्वालिटी खराब करती है। TVS में यह समस्या नहीं होती।

TVS की तैयारी

TVS के लिए कोई खास तैयारी नहीं चाहिए।

  • टेस्ट से पहले ब्लैडर खाली कर लें
  • आरामदायक, ढीले कपड़े पहनें
  • फर्टिलिटी इवैल्यूएशन के लिए आमतौर पर पीरियड के दूसरे या तीसरे दिन पर बुलाया जाता है
  • पीरियड्स चल रहे हों तो भी स्कैन हो सकता है
  • रिलैक्स रहें क्योंकि मसल्स में तनाव होने से थोड़ी असुविधा हो सकती है

निष्कर्ष (Conclusion)

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में TVS वो आंखें हैं जिनसे डॉक्टर आपके रिप्रोडक्टिव सिस्टम (Reproductive System) को देखते हैं। IVF हो या IUI, ओव्यूलेशन ट्रैकिंग हो या प्रेगनेंसी कन्फर्मेशन – हर जगह TVS जरूरी है। यह सुरक्षित है, दर्द रहित है, और 15-20 मिनट में हो जाता है। अगर आपने tvs test in hindi सर्च करके यह आर्टिकल पढ़ा है, तो अब आप फॉलिकल साइज, AFC, एंडोमेट्रियल थिकनेस जैसी टर्म समझ गई होंगी। यह जानकारी आपको अपने ट्रीटमेंट में काफी मदद करेगी।

Common Questions Asked

TVS में दर्द होता है क्या?

 

नहीं। हल्का प्रेशर महसूस हो सकता है, लेकिन दर्द नहीं होता। IVF पेशेंट्स जो हर साइकल 4-5 TVS कराती हैं, इसे रूटीन मानती हैं।

TVS पीरियड्स में हो सकता है?

 

हां। फर्टिलिटी इवैल्यूएशन के लिए दूसरे या तीसरे दिन पर TVS किया जाता है जब पीरियड्स चल रहे होते हैं। यह normal practice है।

IVF में TVS कितनी बार होता है?

 

एक IVF साइकल में औसतन 4-6 बार बेसलाइन, स्टिमुलेशन के दौरान 2-3 बार, ट्रिगर से पहले, और एम्ब्रियो ट्रांसफर से पहले।

AFC कितना होना चाहिए?

 

सामान्य AFC 10-20 होता है। 10 से कम में हल्का ओवेरियन रिज़र्व माना जाता है। 20 से ज्यादा होने पर PCOS हो सकता है और OHSS का रिस्क बढ़ता है।

एग रिट्रीवल के लिए फॉलिकल साइज कितना होना चाहिए?

 

17-20mm के फॉलिकल्स मैच्योर एग्स के लिए आदर्श हैं।

एंडोमेट्रियल थिकनेस कम हो तो क्या करें?

 

7mm से कम थिकनेस में एस्ट्रोजन सप्लीमेंट (Estrogen Supplement), ब्लड फ्लो बढ़ाने वाली दवाइयां, या PRP थेरेपी (PRP Therapy) दी जा सकती है। कभी-कभी फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर (Frozen Embryo Transfer) को अगले साइकल में आगे बढ़ा दिया जाता है।

TVS से प्रेगनेंसी कितने हफ्ते में दिखती है?

 

5-6 हफ्ते में गेस्टेशनल सैक और 6-7 हफ्ते में हार्टबीट दिखती है। पेट के अल्ट्रासाउंड की तुलना में TVS 1-2 हफ्ते पहले प्रेगनेंसी पता कर लेता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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