IVF ट्रीटमेंट की सफलता काफी हद तक सही समय पर सही जानकारी मिलने पर निर्भर करती है कि फॉलिकल (Follicle) कितना बड़ा हुआ, गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम (Endometrium) की मोटाई कितनी है, एग कब रिलीज होगा इत्यादि। यह सब जानकारी सिर्फ एक टेस्ट से मिलती है, जिसका नाम है, TVS यानी ट्रांसवेजाइनल सोनोग्राफी (Transvaginal Sonography)। पेट के ऊपर से किए जाने वाले सामान्य अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) की तुलना में TVS गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) और अंडाशय यानी ओवरी (Ovary) की बहुत ज्यादा क्लियर तस्वीर देता है। IVF साइकल में औसतन 4 से 6 बार TVS किया जाता है और हर स्कैन के आधार पर एक अहम फैसला लिया जाता है। अगर आप tvs test in hindi के बारे में जानना चाहती हैं, तो यह आर्टिकल आपको इस टेस्ट की पूरी प्रक्रिया, फर्टिलिटी में इसकी भूमिका और IVF में इसके महत्व को समझने में आपकी मदद करेगा।
TVS का फुल फॉर्म है ट्रांसवेजाइनल सोनोग्राफी (Transvaginal Sonography), जिसे ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (Transvaginal Ultrasound) भी कहते हैं। यह एक इमेजिंग (Imaging) टेस्ट है जिसमें एक पतली प्रोब यानी ट्रांसड्यूसर (Transducer) को योनि यानी वेजाइना (Vagina) के अंदर डालकर हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स की मदद से यूट्रस, ओवरी, फैलोपियन ट्यूब्स (Fallopian Tubes) और गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स (Cervix) की डिटेल्ड तस्वीरें ली जाती हैं।
फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट TVS को इसलिए प्राथमिकता देते हैं क्योंकि इसमें ट्रांसड्यूसर रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स (Reproductive Organs) के बिल्कुल पास होता है। इससे 2-3 mm के छोटे फॉलिकल भी साफ दिखते हैं, जो पेट के अल्ट्रासाउंड में संभव नहीं है। मेडिकल स्टडीज के अनुसार, TVS की इमेज रेजोल्यूशन (Image Resolution) पेट के ऊपर से किये जाने वाले अल्ट्रासाउंड से 40 से 50% बेहतर होती है।
TVS एक आसान प्रोसेस है जो 15 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है।
इस प्रक्रिया में कोई रेडिएशन नहीं होता और यह पूरी तरह सेफ है। कुछ महिलाओं को हल्का प्रेशर महसूस हो सकता है, लेकिन दर्द नहीं होता।
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में हर फैसला डाटा के आधार पर लिया जाता है और TVS के माध्यम से यह डाटा प्राप्त होता है। जो महिलाएं tvs test in hindi सर्च करती हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि यह टेस्ट सिर्फ इमेजिंग नहीं, बल्कि फर्टिलिटी का रोडमैप है।
TVS से ओवरी में मौजूद एंट्रल फॉलिकल्स गिने जाते हैं। ये 2-10mm के छोटे फॉलिकल्स होते हैं जिनमें से हर एक में एक अंडा यानी एग (Egg) होता है। AFC आपकी ओवेरियन रिजर्व (Ovarian Reserve) यानी बचे हुए एग्स की संख्या पता करने का सबसे भरोसेमंद इंडिकेटर है।
एंडोमेट्रियम वो जगह है जहां भ्रूण यानी एम्ब्रियो इम्प्लांट यानी चिपकता है। IVF में एम्ब्रियो ट्रांसफर के लिए आदर्श एंडोमेट्रियल थिकनेस 8 से 14mm होनी चाहिए। रिसर्च बताती है कि 7mm से कम थिकनेस में इम्प्लांटेशन रेट 25-30% तक गिर जाती है, जबकि 8 से 12mm में यह 45-50% तक होती है।
IUI या टाइम्ड इंटरकोर्स में सही समय जानना बहुत है। TVS से फॉलिकल की ग्रोथ ट्रैक होती है। जब डॉमिनेंट फॉलिकल (Dominant Follicle) 18 से 22mm का हो जाता है, तब ट्रिगर इंजेक्शन (Trigger Injection) दिया जाता है। ट्रिगर के 36 घंटे बाद ओव्यूलेशन (Ovulation) होता है, जो IUI या इंटरकोर्स का सही समय माना जाता है।
IVF में TVS सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि पूरे ट्रीटमेंट का रोडमैप बनाने की कुंजी है। हर स्टेज पर इसकी जरूरत होती है।
पीरियड्स के 2-3 दिन पर पहला TVS होता है। इससे पता चलता है कि ओवरी में कोई सिस्ट (Cyst) तो नहीं, AFC कितना है, और यूट्रस की स्थिति कैसी है। अगर 15 mm से बड़ी सिस्ट दिखे, तो साइकल कैंसिल या धीमी हो सकती है क्योंकि यह स्टिमुलेशन को प्रभावित कर सकती है।
स्टिमुलेशन इंजेक्शन के 3-4 दिन बाद TVS से देखा जाता है कि फॉलिकल्स की क्या प्रतिक्रिया हो रही है यानी वे रेस्पॉन्ड कर रहे हैं या नहीं। आदर्श रूप से, इस समय फॉलिकल्स 10-12mm के होने चाहिए। अगर रिस्पांस कम है तो दवाइयों की डोज बढ़ाई जाती है, और अगर ज्यादा है तो OHSS यानी ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (Ovarian Hyperstimulation Syndrome) के रिस्क को देखते हुए कम की जाती है।
जब ज्यादातर फॉलिकल्स 17 से 20 mm के हो जाते हैं, तब ट्रिगर इंजेक्शन hCG या GnRH agonist का समय तय किया जाता है। ट्रिगर के ठीक 34 से 36 घंटे बाद एग रिट्रीवल (Egg Retrieval) किया जाता है। यह टाइमिंग बहुत सटीक होनी चाहिए क्योंकि जल्दी करने पर एग अपरिपक्व यानी इमैच्योर (immature) होते हैं, देर करने पर ओव्यूलेशन हो जाता है।
एग्स निकालने की पूरी प्रक्रिया TVS को देखते हुए होती है। स्क्रीन पर देखते हुए डॉक्टर सुई को हर फॉलिकल में गाइड करते हैं और एग्स सुरक्षित निकालते हैं।
ट्रांसफर से पहले TVS से एंडोमेट्रियम की मोटाई और पैटर्न चेक किया जाता है। ट्रिपल लाइन पैटर्न (Triple Line Pattern) और 8 mm+ थिकनेस को इम्प्लांटेशन के लिए अच्छा माना जाता है। अगर एंडोमेट्रियम तैयार नहीं है, तो एम्ब्रियो को फ्रीज करके अगले साइकल में ट्रांसफर किया जा सकता है।
TVS से कई ऐसी समस्याएं पकड़ में आती हैं जो फर्टिलिटी को सीधे प्रभावित करती हैं।
बहुत सी महिलाएं पूछती हैं कि पेट के ऊपर से अल्ट्रासाउंड क्यों नहीं होता, TVS क्यों जरूरी है।
TVS के लिए कोई खास तैयारी नहीं चाहिए।
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में TVS वो आंखें हैं जिनसे डॉक्टर आपके रिप्रोडक्टिव सिस्टम (Reproductive System) को देखते हैं। IVF हो या IUI, ओव्यूलेशन ट्रैकिंग हो या प्रेगनेंसी कन्फर्मेशन – हर जगह TVS जरूरी है। यह सुरक्षित है, दर्द रहित है, और 15-20 मिनट में हो जाता है। अगर आपने tvs test in hindi सर्च करके यह आर्टिकल पढ़ा है, तो अब आप फॉलिकल साइज, AFC, एंडोमेट्रियल थिकनेस जैसी टर्म समझ गई होंगी। यह जानकारी आपको अपने ट्रीटमेंट में काफी मदद करेगी।
नहीं। हल्का प्रेशर महसूस हो सकता है, लेकिन दर्द नहीं होता। IVF पेशेंट्स जो हर साइकल 4-5 TVS कराती हैं, इसे रूटीन मानती हैं।
हां। फर्टिलिटी इवैल्यूएशन के लिए दूसरे या तीसरे दिन पर TVS किया जाता है जब पीरियड्स चल रहे होते हैं। यह normal practice है।
एक IVF साइकल में औसतन 4-6 बार बेसलाइन, स्टिमुलेशन के दौरान 2-3 बार, ट्रिगर से पहले, और एम्ब्रियो ट्रांसफर से पहले।
सामान्य AFC 10-20 होता है। 10 से कम में हल्का ओवेरियन रिज़र्व माना जाता है। 20 से ज्यादा होने पर PCOS हो सकता है और OHSS का रिस्क बढ़ता है।
17-20mm के फॉलिकल्स मैच्योर एग्स के लिए आदर्श हैं।
7mm से कम थिकनेस में एस्ट्रोजन सप्लीमेंट (Estrogen Supplement), ब्लड फ्लो बढ़ाने वाली दवाइयां, या PRP थेरेपी (PRP Therapy) दी जा सकती है। कभी-कभी फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर (Frozen Embryo Transfer) को अगले साइकल में आगे बढ़ा दिया जाता है।
5-6 हफ्ते में गेस्टेशनल सैक और 6-7 हफ्ते में हार्टबीट दिखती है। पेट के अल्ट्रासाउंड की तुलना में TVS 1-2 हफ्ते पहले प्रेगनेंसी पता कर लेता है।