बांझपन के 3 प्रकार: इनके कारण समझें और कब डॉक्टर से मदद लें

Last updated: January 06, 2026

Overview

यह लेख आपको बांझपन के तीन मुख्य प्रकार, प्राइमरी, सेकेंडरी और अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी, को समझने में मदद करने के लिए तैयार किया गया है, ताकि आप परिवार शुरू करने या बढ़ाने को लेकर सही और समझदारी भरे कदम उठा सकें।

इसमें बताया गया है कि हर प्रकार का क्या मतलब होता है, इसके पीछे क्या-क्या कारण हो सकते हैं, और कौन-से शुरुआती संकेत यह बताते हैं कि अब डॉक्टर से सलाह लेने का समय आ गया है। चाहे आप पहली बार गर्भधारण की कोशिश कर रहे हों या पहले की प्रेग्नेंसी के बाद अब दिक्कतों का सामना कर रहे हों, यह लेख आपको समझने में मदद करेगी कि आपकी फर्टिलिटी को क्या प्रभावित कर सकता है।

साथ ही, इसमें विशेषज्ञों द्वारा की जाने वाली जांचों और उपलब्ध इलाज के विकल्पों की भी जानकारी दी गई है। लाइफस्टाइल में बदलाव से लेकर IUI और IVF जैसे एडवांस ट्रीटमेंट तक, यह लेख आपको आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए जरूरी समझ देता है।

भूमिका

बांझपन एक मेडिकल स्थिति है। जब कोई कपल एक साल या उससे ज्यादा समय तक नियमित, बिना सुरक्षा के संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण नहीं कर पाता और बीच में कोई इलाज/हस्तक्षेप भी नहीं लिया गया हो, तो इसे बांझपन कहा जाता है।

इनफर्टिलिटी की समस्या सिर्फ महिलाओं में नहीं होती, पुरुष, महिला या दोनों में से किसी को भी हो सकती है। इसके पीछे कभी कोई स्वास्थ्य कारण होता है, तो कभी जीवनशैली से जुड़ी आदतें। इसलिए जितनी जल्दी पहचान हो, उतनी जल्दी सही इलाज शुरू किया जा सकता है। जब डॉक्टर को असली कारण समझ में आ जाता है, तो वे उसी हिसाब से टेस्ट और उपचार का प्लान बनाते हैं, जो उस व्यक्ति या कपल के लिए सबसे सही हो।

बांझपन के अलग-अलग प्रकार समझना भी जरूरी है, क्योंकि हर प्रकार में जांच और इलाज का तरीका अलग हो सकता है।

प्राथमिक बांझपन क्या है?

प्राथमिक बांझपन उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई कपल एक साल तक लगातार कोशिश करने के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पाता। यह डायग्नोसिस उन कपल्स को दिया जाता है जिनकी पहले कभी भी प्रेग्नेंसी नहीं हुई होती। प्राथमिक बांझपन पुरुष या महिला, किसी भी कारण से हो सकती है, और यह बांझपन का सबसे आम प्रकार माना जाता है।

प्राथमिक बांझपन के सबसे आम कारण ये हो सकते हैं:

प्राथमिक बांझपन के पीछे अक्सर कुछ आम कारण होते हैं, जैसे ओव्यूलेशन में समस्या, शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम होना, फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना या हार्मोनल गड़बड़ी। इन वजहों को समझना जरूरी है, क्योंकि इसी के आधार पर डॉक्टर सही जांच और इलाज तय कर पाते हैं।

  • ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या: थायरॉयड की दिक्कत या पीसीओएस जैसी स्थिति के कारण अंडा समय पर रिलीज़ नहीं होता या नियमित रूप से नहीं होता।
  • शुक्राणुओं की गुणवत्ता कम होना: स्पर्म काउंट कम होना, स्पर्म की गति कम होना या उनकी बनावट में गड़बड़ी ये सब पुरुषों में गर्भधारण की संभावना घटा सकते हैं।
  • फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना: संक्रमण, एंडोमेट्रियोसिस या पहले की सर्जरी के कारण ट्यूब में रुकावट आ सकती है, जिससे अंडा और शुक्राणु मिल नहीं पाते। ब्लॉक्ड फैलोपियन ट्यूब्स महिलाओं में बांझपन का कारण बन सकती हैं।
  • हार्मोनल असंतुलन: ऐसे हार्मोन बदलाव जो पीरियड्स के टाइमिंग और अंडे के रिलीज़ होने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, गर्भधारण में देरी का कारण बन सकते हैं।

डॉक्टर से कब मदद लें?

अगर नीचे में से कोई भी बात आपके साथ हो रही है, तो डॉक्टर या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है:

  • आप 12 महीनों से कोशिश कर रहे हैं और गर्भ नहीं ठहरा (अगर उम्र 35 से ज्यादा है, तो 6 महीने के बाद ही सलाह लें)।
  • आपके पीरियड्स अनियमित हैं या कई बार आते ही नहीं हैं।
  • आपको पहले से कोई प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या रही है या उसका इतिहास मौजूद है।

द्वितीयक बांझपन क्या है?

जब पहले एक या एक से ज्यादा बार गर्भधारण/सफल प्रेग्नेंसी हो चुकी हो, लेकिन अब दोबारा गर्भ ठहरने या प्रेग्नेंसी को पूरा समय तक ले जाने में परेशानी हो, तो इसे द्वितीयक बांझपन कहा जाता है। कई लोगों को लगता है कि यह उतना गंभीर नहीं होता, लेकिन यह प्राथमिक बांझपन जितना ही गंभीर हो सकता है, और कई बार मानसिक रूप से ज्यादा तकलीफदेह भी, क्योंकि पहले गर्भधारण हो चुका होता है और फिर अचानक दिक्कत आना शॉक जैसा लग सकता है।

इसके पीछे के कारण

द्वितीयक बांझपन के पीछे कई बार कुछ नए बदलाव या पुरानी समस्याएं जिम्मेदार होती हैं। आम कारण ये हो सकते हैं:

  • उम्र का असर: खासकर 35 के बाद प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है।
  • गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं: जैसे पॉलीप्स, फाइब्रॉएड या स्कार टिशू।
  • पहली प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताएं: जैसे इंफेक्शन होना या प्लेसेंटा का टिशू पूरी तरह साफ न होना।
  • लाइफस्टाइल बदलाव: वजन बढ़ना, बीएमआई बढ़ना, धूम्रपान या शराब का सेवन।
  • स्वास्थ्य/उम्र से जुड़ी बीमारियां: जैसे डायबिटीज, थायरॉयड या ऑटोइम्यून समस्याएं।
  • शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी: उम्र बढ़ने या किसी बीमारी के कारण स्पर्म क्वालिटी घट सकती है।

फर्टिलिटी विशेषज्ञ से कब मिलें?

अगर इनमें से कोई स्थिति हो, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना सही रहेगा:

  • 6-12 महीनों की कोशिश के बाद भी गर्भ नहीं ठहर रहा है।
  • बार-बार गर्भ ठहरकर गिर जाता है (रीकरेंट मिसकैरेज)।
  • पीरियड्स अनियमित हो गए हैं या शरीर में कोई नया हेल्थ चेंज महसूस हो रहा है।
  • आपके या आपके पार्टनर का वजन काफी बढ़ गया है, या कोई नई बीमारी/स्वास्थ्य समस्या सामने आई है।

अज्ञात कारणों से होने वाला बांझपन

जब कोई व्यक्ति या दंपती गर्भधारण नहीं कर पाते, लेकिन सामान्य फर्टिलिटी टेस्ट (जैसे ओव्यूलेशन, ट्यूब्स, हार्मोन, स्पर्म रिपोर्ट आदि) ठीक आते हैं, तो इस स्थिति को अज्ञात कारण वाला बांझपन कहा जाता है।

यहाँ “अज्ञात” शब्द का मतलब यह नहीं है कि कोई वजह मौजूद ही नहीं है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि वजह अभी तक टेस्ट में पकड़ में नहीं आई है या अभी डायग्नोस नहीं हो पाई है।

इसके संभावित कारण/फैक्टर्स

कुछ कारण ऐसे होते हैं जो स्टैंडर्ड टेस्ट में साफ़ नजर नहीं आते, लेकिन फर्टिलिटी पर असर डाल सकते हैं:

  • हल्का हार्मोनल असंतुलन: हार्मोन में छोटे बदलाव ओव्यूलेशन या इम्प्लांटेशन को प्रभावित कर सकते हैं, और कई बार ये रूटीन टेस्ट में दिखते नहीं।
  • अंडे या शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी: रिपोर्ट में स्पर्म/एग सामान्य लग सकते हैं, लेकिन फर्टिलाइजेशन ठीक से न हो, एम्ब्रियो सही तरह न बने, या स्पर्म अंडे तक पहुंचकर उसे फर्टिलाइज न कर पाए।
  • तनाव और मानसिक स्वास्थ्य: लगातार तनाव या एंग्जायटी से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकते हैं, जो ओव्यूलेशन को बिगाड़ सकते हैं और कुल मिलाकर फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं।
  • एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की परत) की तैयारी में दिक्कत: ओव्यूलेशन और फर्टिलाइजेशन सही होने के बावजूद, अगर यूटेरस की परत इम्प्लांटेशन के लिए तैयार नहीं है, तो प्रेग्नेंसी नहीं टिक पाती।
  • फैलोपियन ट्यूब की हल्की कार्य-गड़बड़ी: स्कैन में ट्यूब्स खुली दिख सकती हैं, लेकिन उनका काम (अंडे/एम्ब्रियो को आगे बढ़ाना) ठीक से न हो, तो गर्भधारण प्रभावित हो सकता है।
  • लाइफस्टाइल से जुड़े कारण: ज्यादा कैफीन/अल्कोहल, स्मोकिंग, एक्सरसाइज़ की कमी, बहुत कम या बहुत ज्यादा वजन, ये सब असर डाल सकते हैं, भले ही टेस्ट में तुरंत “समस्या” न दिखे।

क्या किया जा सकता है?

भले ही वजह साफ़ न हो, फिर भी गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए कुछ कदम मदद कर सकते हैं:

  • लाइफस्टाइल में बदलाव: हेल्दी वजन में आना, स्मोकिंग छोड़ना, अल्कोहल और/या कैफीन कम करना।
  • ओव्यूलेशन ट्रैक करना: ओव्यूलेशन किट, ऐप्स या बेसल बॉडी टेम्परेचर के जरिए अपने फर्टाइल दिनों की पहचान करना।
  • टाइम्ड इंटरकोर्स: ओव्यूलेशन के आसपास सही समय पर संबंध बनाना, ताकि गर्भधारण के चांस बढ़ें।
  • फर्टिलिटी ट्रीटमेंट: अगर 1 साल तक कोशिश के बाद भी प्रेग्नेंसी नहीं हो रही, तो डॉक्टर अक्सर IUI (इंट्रायूटेराइन इंसिमिनेशन) या IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) जैसे विकल्प सुझा सकते हैं।

जांच और निदान

बांझपन किस प्रकार का है और इलाज का सही रास्ता क्या होगा यह तय करने की शुरुआत सही निदान (डायग्नोसिस) से होती है। कई बार मेडिकल हिस्ट्री, फिजिकल जांच और कुछ खास टेस्ट से यह समझ आ जाता है कि गर्भधारण में रुकावट कहाँ हो रही है। फर्टिलिटी विशेषज्ञ आमतौर पर ये जांचें करवाते हैं:
  • हार्मोनल ब्लड टेस्ट: इनमें FSH, LH, AMH और थायरॉयड हार्मोन जैसे जरूरी रिप्रोडक्टिव हार्मोन की जांच होती है, जो ओव्यूलेशन और पीरियड्स साइकिल को प्रभावित करते हैं।
  • सीमन एनालिसिस : इसमें स्पर्म काउंट, उनका आकार (morphology) और उनकी गति (motility) देखी जाती है, ताकि पुरुष प्रजनन से जुड़ी समस्या है या नहीं, यह जांचने के लिए।जांचने के लिए।
  • ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड: इससे ओवरी और यूटेरस की स्पष्ट तस्वीर मिलती है, जिससे सिस्ट, फाइब्रॉइड या यूटेरस की अंदरूनी परत (uterine lining) से जुड़ी समस्या पकड़ी जा सकती है।
  • हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राफी (HSG): यह एक X-ray जांच है, जिससे यह पता चलता है कि फैलोपियन ट्यूब्स खुली हैं या नहीं और यूटेरस की कैविटी सामान्य है या नहीं।
  • एडवांस फर्टिलिटी टेस्टिंग: अगर वजह साफ़ न मिले, तो डॉक्टर कुछ और जांचें सुझा सकते हैं—जैसे एंडोमेट्रियल बायोप्सी या लैप्रोस्कोपी।

टेस्ट के बाद फर्टिलिटी विशेषज्ञ से मिलकर रिपोर्ट की सही व्याख्या करना और अगले कदम तय करना आसान हो जाता है, ताकि इलाज में देरी न हो।

निष्कर्ष

समाधान की दिशा में पहला कदम यह समझना है कि बांझपन का प्रकार कौन सा है, प्राथमिक, द्वितीयक या अज्ञात कारण वाला। हर प्रकार की अपनी चुनौतियाँ होती हैं, और उसी के हिसाब से उपचार भी तय होता है।

आज फर्टिलिटी रिसर्च और तकनीक में काफी प्रगति हुई है, इसलिए कई कपल्स के लिए माता-पिता बनना पहले से ज्यादा संभव हो गया है। समय पर जांच, सही मार्गदर्शन और फर्टिलिटी विशेषज्ञ की पर्सनलाइज्ड सलाह के साथ आप अपने लिए सबसे सही विकल्प चुन सकते हैं और पैरेंटहुड की ओर आत्मविश्वास से कदम बढ़ा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बांझपन ठीक हो सकता है?

 

कई मामलों में हाँ। कारण पर निर्भर करता है, लाइफस्टाइल बदलाव, दवाइयों, सर्जरी या IUI/IVF जैसे इलाज से गर्भधारण संभव हो सकता है।

क्या द्वितीयक बांझपन, प्राथमिक से ज्यादा आम है?

 

यह व्यक्ति की उम्र, पहले की प्रेग्नेंसी और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। दोनों ही आम हैं, सही जांच के बाद ही स्पष्ट होता है।

अज्ञात कारण वाले बांझपन का भावनात्मक असर क्या होता है?

 

बार-बार कोशिश के बाद भी कारण न मिलना तनाव, चिंता, निराशा और रिश्ते में दबाव बढ़ा सकता है।

कपल्स को कितनी जल्दी फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से मिलना चाहिए?

 

अगर 12 महीने में गर्भधारण न हो (35+ उम्र में 6 महीने), या पीरियड्स अनियमित हों, तो जल्दी सलाह लेनी चाहिए।

क्या IVF और IUI हर प्रकार के बांझपन में सही हैं?

 

हर बार नहीं। कारण, उम्र और रिपोर्ट्स के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि IUI सही है या IVF की जरूरत है।

गर्भधारण की संभावना कैसे बढ़ाई जा सकती है?

 

ओव्यूलेशन ट्रैक करें, सही समय पर संबंध बनाएं, वजन नियंत्रण रखें, स्मोकिंग/अल्कोहल से बचें और डॉक्टर की सलाह लें।

फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट की भूमिका क्या होती है?

 

वे कारण पहचानने के लिए जांच करवाते हैं, रिपोर्ट समझाते हैं और आपके लिए सही ट्रीटमेंट प्लान बनाते हैं।

कौन से लाइफस्टाइल बदलाव फर्टिलिटी में मदद करते हैं?

 

हेल्दी वजन, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और स्मोकिंग/अल्कोहल छोड़ना मदद कर सकता है।

ओव्यूलेशन के संकेत क्या होते हैं?

 

मिड-साइकिल हल्का पेट दर्द, सर्वाइकल म्यूकस का अंडे की सफेदी जैसा होना, हल्का स्पॉटिंग, और कुछ महिलाओं में सेक्स ड्राइव बढ़ना।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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