गर्भाशय का संक्रमण संक्रमण गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus), उसके आसपास की मांसपेशियों या प्रजनन अंगों (रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स) में होने वाले इन्फेक्शन को कहते हैं, जिसका लंबे समय तक इलाज न किया जाए तो यह प्रेगनेंसी के साथ-साथ सामान्य जीवन पर भी गलत असर डाल सकता है।
कई बार महिलाओं को इसके शुरुआती स्टेज में कोई खास लक्षण नहीं दिखते, जिससे संक्रमण बढ़ने लगता है और गंभीर बीमारियों का कारण बन जाता है। uterus infection treatment in hindi समझने से पहले जानते हैं कि यूट्रस इन्फेक्शन के मुख्य लक्षण क्या हैं, इसके प्रमुख कारण क्या हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि इसे समय पर कैसे पहचान कर सही इलाज किया जा सकता है।
गर्भाशय यानी बच्चेदानी में बैक्टीरिया या वायरस की वजह से होने वाले संक्रमण को गर्भाशय का इंफेक्शन कहते हैं। इसे मेडिकल भाषा में एंडोमेट्राइटिस (Endometritis) कहा जाता है। यह संक्रमण केवल बच्चेदानी तक ही नहीं रहता है, बल्कि इसके आसपास की मांसपेशियों और रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स (Reproductive Organs) तक भी फैल सकता है।
बच्चेदानी में हुए इन्फेक्शन का अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह महिला की हेल्थ और रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है और कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। नीचे इससे जुड़े कुछ मुख्य लक्षण बताए जा रहे हैं।
इंफेक्शन सिर्फ गर्भाशय तक ही नहीं रहता, यह ओवरी और फैलोपियन ट्यूब तक फैल सकता है। जिससे प्रेग्नेंसी में मुश्किल हो सकता है और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है।
अगर इंफेक्शन प्रेगनेंसी के दौरान हो जाए तो यह समय से पहले डिलीवरी, गर्भपात या गर्भाशय में असामान्य बदलाव का कारण बन सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान इन्फेक्शन का होना बेहद खतरनाक होता है।
इंफेक्शन के कारण ओवरी या फैलोपियन ट्यूब में पस यानी मवाद जमा हो सकता है। इससे तेज दर्द होता है और कभी-कभी सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।
कभी-कभी इंफेक्शन खून में फैल सकता है, जिसे सेप्सिस कहते हैं। यह स्थिति गंभीर होने के साथ ही कभी-कभी जानलेवा भी हो सकती है।
इंफेक्शन के कारण पीरियड्स का समय बदल सकता है। जिससे यह ज्यादा दर्दनाक, अनियमित या असामान्य हो सकते हैं।
गर्भाशय में इंफेक्शन के कुछ कारण नीचे दिए गए हैं।
गर्भाशय के इंफेक्शन के कुछ लक्षण और संकेत नीचे दिए गए हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
इंफेक्शन के कारण पीरियड्स का समय बदल सकता है। कभी जल्दी, कभी देर से आना या इरेगुलर होना इसके लक्षण हो सकते हैं।
इंफेक्शन के दौरान शरीर जल्दी थकता है। रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लग सकता है और लगातार कमजोरी महसूस होती है।
इंफेक्शन के चलते बुखार और ठंड लग सकती है। इससे शरीर में कमजोरी और थकान बढ़ जाती है।
इंफेक्शन के कारण पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस हो सकता है।
योनि (वेजाइना) से असामान्य डिस्चार्ज आ सकता है। यह सफेद, पीला या बदबूदार हो सकता है, जो इन्फेक्शन का साफ सिम्प्टम है।
इंफेक्शन के दौरान सेक्स करते समय असहजता या दर्द महसूस हो सकता है।
इंफेक्शन होने पर पेट के निचले हिस्से में लगातार या दबाव डालने पर दर्द महसूस होता है।
बच्चेदानी में इन्फेक्शन को समय रहते पहचान कर सही इलाज करना बेहद जरूरी है। इससे इंफेक्शन बढ़ने और गंभीर समस्याएं होने से बचा जा सकता है।
इंफेक्शन के लक्षण दिखते ही, जैसे पेट में दर्द, बदबूदार डिस्चार्ज, अनियमित पीरियड्स या जलन, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। समय पर इलाज कराने से इंफेक्शन जल्दी ठीक होता है और भविष्य में बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है।
इंफेक्शन में पेट या निचले हिस्से में दर्द और सूजन हो सकती है। पेनकिलर या दवा से इसे कम किया जा सकता है।
बैक्टीरिया के कारण होने वाले इन्फेक्शन में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं, ताकि इंफेक्शन खत्म हो और बैक्टीरिया फैलने न पाए।
कभी-कभी पस जमा होने या फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
अगर इंफेक्शन ज्यादा बढ़ गया हो या गंभीर लक्षण दिखें तो डॉक्टर अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दे सकते हैं।
गर्भाशय में हल्का इंफेक्शन होने पर कुछ घरेलू नुस्खे राहत दे सकते हैं, और सही सावधानियां अपनाकर आप इस इंफेक्शन से बच भी सकती हैं। नीचे ऐसे आसान और असरदार उपाय दिए गए हैं, जो रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाए जा सकते हैं।
महिलाओं में गर्भाशय यानी यूट्रस में इंफेक्शन होना बहुत कॉमन है। इंफेक्शन के लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं। ऐसे में अगर आपके पेट में दर्द, बदबूदार डिस्चार्ज, बुखार या पीरियड्स में बदलाव दिखें, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें। इसके अलावा साफ-सफाई रखना, सुरक्षित यौन संबंध बनाना, अच्छी डाइट लेना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराते रहना भी गर्भाशय को हेल्दी रखने में बहुत मदद करता है।
हां, अगर इंफेक्शन बढ़ जाए और इसका इलाज समय पर ना हो तो प्रेगनेंसी में परेशानी आ सकती है। लेकिन समय पर इलाज करवाने से खतरा काफी कम हो जाता है।
हां, असुरक्षित यौन संबंध रखने से बैक्टीरिया फैल सकते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
ज्यादातर मामलों में हां। अगर डिस्चार्ज बदबूदार, पीला या हरा हो रहा है, तो यह इंफेक्शन का संकेत है। तुरंत डॉक्टर से मिलें।
हां, इंफेक्शन के कारण पीरियड्स लेट, जल्दी या इरेगुलर हो सकते हैं।
हां, अगर सफाई न रखी जाए या दवाएं पूरी न ली जाएं तो इंफेक्शन वापस हो सकता है।
हां, लंबे समय तक इलाज न मिलने पर फर्टिलिटी में दिक्कत आ सकती है।
गलत सफाई, असुरक्षित सेक्स, दवाएं अधूरी छोड़ना, कमजोर इम्यूनिटी या बार-बार पार्टनर बदलने से ऐसा हो सकता है।