गर्भाशय का संक्रमण क्या होता है, जानिये इसके लक्षण, कारण और इलाज (Uterus infection treatment in hindi)

Last updated: December 26, 2025

Overview

गर्भाशय का संक्रमण संक्रमण गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus), उसके आसपास की मांसपेशियों या प्रजनन अंगों (रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स) में होने वाले इन्फेक्शन को कहते हैं, जिसका लंबे समय तक इलाज न किया जाए तो यह प्रेगनेंसी के साथ-साथ सामान्य जीवन पर भी गलत असर डाल सकता है।

कई बार महिलाओं को इसके शुरुआती स्टेज में कोई खास लक्षण नहीं दिखते, जिससे संक्रमण बढ़ने लगता है और गंभीर बीमारियों का कारण बन जाता है। uterus infection treatment in hindi समझने से पहले जानते हैं कि यूट्रस इन्फेक्शन के मुख्य लक्षण क्या हैं, इसके प्रमुख कारण क्या हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि इसे समय पर कैसे पहचान कर सही इलाज किया जा सकता है।

गर्भाशय संक्रमण क्या होता है?

गर्भाशय यानी बच्चेदानी में बैक्टीरिया या वायरस की वजह से होने वाले संक्रमण को गर्भाशय का इंफेक्शन कहते हैं। इसे मेडिकल भाषा में एंडोमेट्राइटिस (Endometritis) कहा जाता है। यह संक्रमण केवल बच्चेदानी तक ही नहीं रहता है, बल्कि इसके आसपास की मांसपेशियों और रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स (Reproductive Organs) तक भी फैल सकता है।

बच्चेदानी में इन्फेक्शन से होने वाले संभावित खतरे

बच्चेदानी में हुए इन्फेक्शन का अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह महिला की हेल्थ और रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर बुरा असर डाल सकता है और कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। नीचे इससे जुड़े कुछ मुख्य लक्षण बताए जा रहे हैं।

गर्भाशय के आसपास अंगों पर असर (Effect on Surrounding Organs)

इंफेक्शन सिर्फ गर्भाशय तक ही नहीं रहता, यह ओवरी और फैलोपियन ट्यूब तक फैल सकता है। जिससे प्रेग्नेंसी में मुश्किल हो सकता है और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है।

गर्भावस्था में समस्याएं (Problems During Pregnancy)

अगर इंफेक्शन प्रेगनेंसी के दौरान हो जाए तो यह समय से पहले डिलीवरी, गर्भपात या गर्भाशय में असामान्य बदलाव का कारण बन सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान इन्फेक्शन का होना बेहद खतरनाक होता है।

ओवरी और ट्यूब में पस जमा होना (Pus Accumulation in Ovaries and Tubes)

इंफेक्शन के कारण ओवरी या फैलोपियन ट्यूब में पस यानी मवाद जमा हो सकता है। इससे तेज दर्द होता है और कभी-कभी सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।

खून में फैलना (Blood Infection)

कभी-कभी इंफेक्शन खून में फैल सकता है, जिसे सेप्सिस कहते हैं। यह स्थिति गंभीर होने के साथ ही कभी-कभी जानलेवा भी हो सकती है।

पीरियड्स में बदलाव (Changes in Menstrual Cycle)

इंफेक्शन के कारण पीरियड्स का समय बदल सकता है। जिससे यह ज्यादा दर्दनाक, अनियमित या असामान्य हो सकते हैं।

गर्भाशय में इंफेक्शन के कारण

गर्भाशय में इंफेक्शन के कुछ कारण नीचे दिए गए हैं।

  • डिलीवरी या गर्भपात के बाद : डिलीवरी या गर्भपात के बाद सही से सफाई और देखभाल न करने पर बैक्टीरिया फैलने लगते हैं, जिससे गर्भाशय में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • असुरक्षित यौन संबंध : बिना प्रोटेक्शन के शारीरिक संबंध बनाने से बैक्टीरिया और वायरस गर्भाशय में जा सकते हैं और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
  • पेल्विक इंफेक्शन: कभी-कभी पेल्विक संक्रमण भी गर्भाशय और इसके आसपास की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए।
  • सेनेटरी सफाई का ध्यान न रखना: पीरियड्स के दौरान सफाई का ध्यान न रखना भी इंफेक्शन का कारण बन सकता है। इसलिए सैनिटरी पैड या कप को समय-समय पर बदलें।
  • सर्जरी या गर्भनिरोधक उपकरण : सर्जरी या आईयूडी लगाने के दौरान अगर सफाई का ध्यान न रखा जाए तो इंफेक्शन फैल सकता है।
  • कमजोर इम्यूनिटी: अगर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी कमजोर है तो बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैल सकते हैं।
  • एक से ज्यादा यौन पार्टनर: एक से ज्यादा पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बनाने से भी इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

बच्चेदानी में इन्फेक्शन होने के संकेत और पहचान

गर्भाशय के इंफेक्शन के कुछ लक्षण और संकेत नीचे दिए गए हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

पीरियड्स में बदलाव (Irregular Menstrual Cycle)

इंफेक्शन के कारण पीरियड्स का समय बदल सकता है। कभी जल्दी, कभी देर से आना या इरेगुलर होना इसके लक्षण हो सकते हैं।

थकान और कमजोरी (Fatigue and Weakness)

इंफेक्शन के दौरान शरीर जल्दी थकता है। रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लग सकता है और लगातार कमजोरी महसूस होती है।

बुखार और ठंड लगना (Fever and Chills)

इंफेक्शन के चलते बुखार और ठंड लग सकती है। इससे शरीर में कमजोरी और थकान बढ़ जाती है।

पेशाब में जलन (Burning Sensation During Urination)

इंफेक्शन के कारण पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस हो सकता है।

असामान्य डिस्चार्ज (Abnormal Vaginal Discharge)

योनि (वेजाइना) से असामान्य डिस्चार्ज आ सकता है। यह सफेद, पीला या बदबूदार हो सकता है, जो इन्फेक्शन का साफ सिम्प्टम है।

यौन संबंध बनाते समय दर्द (Pain During Intercourse)

इंफेक्शन के दौरान सेक्स करते समय असहजता या दर्द महसूस हो सकता है।

पेट में दर्द (Lower Abdominal Pain)

इंफेक्शन होने पर पेट के निचले हिस्से में लगातार या दबाव डालने पर दर्द महसूस होता है।

गर्भाशय में इन्फेक्शन का सही इलाज और देखभाल

बच्चेदानी में इन्फेक्शन को समय रहते पहचान कर सही इलाज करना बेहद जरूरी है। इससे इंफेक्शन बढ़ने और गंभीर समस्याएं होने से बचा जा सकता है।

समय पर इलाज

इंफेक्शन के लक्षण दिखते ही, जैसे पेट में दर्द, बदबूदार डिस्चार्ज, अनियमित पीरियड्स या जलन, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। समय पर इलाज कराने से इंफेक्शन जल्दी ठीक होता है और भविष्य में बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है।

दर्द और सूजन कम करना

इंफेक्शन में पेट या निचले हिस्से में दर्द और सूजन हो सकती है। पेनकिलर या दवा से इसे कम किया जा सकता है।

एंटीबायोटिक दवाएं

बैक्टीरिया के कारण होने वाले इन्फेक्शन में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं, ताकि इंफेक्शन खत्म हो और बैक्टीरिया फैलने न पाए।

सर्जरी की जरूरत

कभी-कभी पस जमा होने या फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

अस्पताल में भर्ती

अगर इंफेक्शन ज्यादा बढ़ गया हो या गंभीर लक्षण दिखें तो डॉक्टर अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दे सकते हैं।

गर्भाशय में इन्फेक्शन के घरेलू उपाय और बचाव के तरीके

गर्भाशय में हल्का इंफेक्शन होने पर कुछ घरेलू नुस्खे राहत दे सकते हैं, और सही सावधानियां अपनाकर आप इस इंफेक्शन से बच भी सकती हैं। नीचे ऐसे आसान और असरदार उपाय दिए गए हैं, जो रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाए जा सकते हैं।

  • खूब पानी पिएं : पर्याप्त पानी पीने से शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और इंफेक्शन कम होने में मदद मिलती है।
  • तुलसी की पत्तियां : तुलसी प्राकृतिक एंटीबायोटिक की तरह काम करती है। 4 से 5 पत्तियां पानी में उबालकर पीने से काफी राहत मिलती है।
  • हल्दी : हल्दी में सूजन और बैक्टीरिया कम करने वाले गुण होते हैं। गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीना फायदेमंद है।
  • मेथी : मेथी इम्यूनिटी मजबूत करती है। रातभर भिगोई मेथी का पानी सुबह पीना शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है।
  • ग्रीन टी : ग्रीन टी शरीर से टॉक्सिन निकालती है और इंफेक्शन से लड़ने में मदद करती है। इसे दिन में 1 से 2 बार लिया जा सकता है।
  • दही : दही में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया इंफेक्शन को कम करते हैं और प्राइवेट पार्ट की हेल्थ बेहतर रखते हैं।
  • लहसुन : लहसुन के एंटी-बैक्टीरियल गुण इंफेक्शन को रोकने में मदद करते हैं। रोज 1 या 2 कच्ची कलियां खाना फायदेमंद है।
  • निजी साफ-सफाई (Personal Hygiene) : अपने प्राइवेट पार्ट को हमेशा साफ रखें। केमिकल वाले साबुन का इस्तेमाल न करें और हल्के गुनगुने पानी से सफाई करें। इसके अलावा पीरियड्स में सैनिटरी पैड समय पर बदलें। मेंस्ट्रुअल कप का सही तरीके से इस्तेमाल और नियमित सफाई भी बहुत जरूरी है।
  • हेल्दी डाइट (Healthy Diet) : इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन C से भरपूर फल और सब्जियां शामिल करें और साथ ही बैलेंस और हेल्दी डाइट अपनाएं।
  • असुरक्षित सर्जरी और गर्भपात से बचें : गर्भपात या बच्चेदानी से जुड़ी किसी भी सर्जरी के लिए हमेशा अनुभवी डॉक्टर की ही सलाह लें।

निष्कर्ष (Conclusion)

महिलाओं में गर्भाशय यानी यूट्रस में इंफेक्शन होना बहुत कॉमन है। इंफेक्शन के लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं। ऐसे में अगर आपके पेट में दर्द, बदबूदार डिस्चार्ज, बुखार या पीरियड्स में बदलाव दिखें, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें। इसके अलावा साफ-सफाई रखना, सुरक्षित यौन संबंध बनाना, अच्छी डाइट लेना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराते रहना भी गर्भाशय को हेल्दी रखने में बहुत मदद करता है।

बच्चेदानी में इन्फेक्शन से जुड़े सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या गर्भाशय में इंफेक्शन होने से प्रेगनेंसी में दिक्कत आ सकती है?

 

हां, अगर इंफेक्शन बढ़ जाए और इसका इलाज समय पर ना हो तो प्रेगनेंसी में परेशानी आ सकती है। लेकिन समय पर इलाज करवाने से खतरा काफी कम हो जाता है।

क्या यह इंफेक्शन यौन संबंधों से फैलता है?

 

हां, असुरक्षित यौन संबंध रखने से बैक्टीरिया फैल सकते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

बदबूदार डिस्चार्ज क्या हमेशा इंफेक्शन का संकेत होता है?

 

ज्यादातर मामलों में हां। अगर डिस्चार्ज बदबूदार, पीला या हरा हो रहा है, तो यह इंफेक्शन का संकेत है। तुरंत डॉक्टर से मिलें।

क्या इसका असर पीरियड्स पर भी पड़ता है?

 

हां, इंफेक्शन के कारण पीरियड्स लेट, जल्दी या इरेगुलर हो सकते हैं।

क्या इंफेक्शन फिर से दोबारा हो सकता है?

 

हां, अगर सफाई न रखी जाए या दवाएं पूरी न ली जाएं तो इंफेक्शन वापस हो सकता है।

क्या यह फर्टिलिटी पर असर डालता है?

 

हां, लंबे समय तक इलाज न मिलने पर फर्टिलिटी में दिक्कत आ सकती है।

बार-बार इन्फेक्शन क्यों होता है?

 

गलत सफाई, असुरक्षित सेक्स, दवाएं अधूरी छोड़ना, कमजोर इम्यूनिटी या बार-बार पार्टनर बदलने से ऐसा हो सकता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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