गर्भाशय क्या है और रिपोर्ट में इसका क्या मतलब है? (Uterus Meaning in Hindi)

Last updated: February 23, 2026

Overview

अगर आपने अल्ट्रासाउंड करवाया है और आपकी रिपोर्ट में लिखा है "uterus anteverted, endometrium 8mm, no adnexal mass", ऐसे में इन सब बातों का मतलब समझना काफी मुश्किल हो सकता है, आप जानना चाहेंगी कि क्या आपकी रिपोर्ट में सब नॉर्मल है?

ज़्यादातर महिलाएं पहली बार तब uterus के बारे में सर्च करती हैं जब उन्हें कोई रिपोर्ट समझनी होती है या डॉक्टर ने कुछ बताया होता है जो समझ नहीं आया।

Uterus meaning in hindi में बताने के लिए सिर्फ "गर्भाशय" की परिभाषा बताना काफी नहीं होगा। यूट्रस आपके शरीर का वो अंग है जो हर महीने खुद को तैयार करता है, कभी पीरियड्स के लिए, कभी प्रेगनेंसी के लिए। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि गर्भाशय असल में क्या है, यह क्या काम करता है, रिपोर्ट में लिखे शब्दों का क्या मतलब है, और सबसे ज़रूरी कि अगर आप माँ बनना चाहती हैं तो गर्भाशय की अच्छी सेहत क्यों जरुरी होती है।

गर्भाशय क्या है और कहाँ होता है?

Uterus meaning in hindi में समझें तो गर्भाशय वो अंग है जहाँ बच्चे का विकास होता है। इसे बच्चेदानी भी कहते हैं। यूट्रस पेट के निचले हिस्से में होता है। यह ब्लैडर यानी मूत्राशय के पीछे और रेक्टम यानी मलाशय के आगे स्थित होता है और पेल्विक कैविटी (pelvic cavity) में सुरक्षित रहता है।

आकार में यह उल्टे नाशपाती जैसा होता है। एक सामान्य गर्भाशय लगभग 7 से 8 सेंटीमीटर लंबा और 4 से 5 सेंटीमीटर चौड़ा होता है। लगभग आपकी मुट्ठी के बराबर यूट्रस, प्रेगनेंसी में यह इतना बड़ा हो जाता है कि पूरे पेट में फैल जाता है, और डिलीवरी के बाद वापस अपने साइज़ में आ जाता है।

यूट्रस के तीन मुख्य हिस्से हैं। सबसे ऊपर फंडस (Fundus) होता है जो गोल और चौड़ा होता है। बीच में बॉडी (Body) होती है जहाँ बच्चा बढ़ता है। और सबसे नीचे सर्विक्स (Cervix) होता है जो योनि मतलब वेजाइना से जुड़ता है और डिलीवरी के समय खुलता है।

गर्भाशय की बनावट कैसी होती है?

यूट्रस की दीवार तीन परतों से बनी होती है और हर परत का अपना काम है।

  • पेरिमेट्रियम (Perimetrium): यह सबसे बाहरी परत है जो यूट्रस को कवर करती है और उसे पेल्विस में अपनी जगह पर बनाये रखती है।
  • मायोमेट्रियम (Myometrium): यह बीच की परत है जो मांसपेशियों से बनी होती है। प्रेगनेंसी में यह परत बहुत स्ट्रेच होती है और डिलीवरी के समय कॉन्ट्रैक्ट करके बच्चे को बाहर धकेलती है। पीरियड्स में भी यही परत सिकुड़ती है जिससे क्रैम्प्स होते हैं।
  • एंडोमेट्रियम (Endometrium): यह सबसे अंदर की परत है और फर्टिलिटी के लिए सबसे ज़रूरी है। हर महीने यह परत मोटी होती है ताकि अगर प्रेगनेंसी हो तो एम्ब्रीओ यहाँ इम्प्लांट हो सके। अगर प्रेगनेंसी नहीं होती, तो यही परत टूटकर पीरियड्स के रूप में बाहर आती है। जब आप अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में "endometrium thickness" पढ़ती हैं, तो यह इसी परत की मोटाई है।

गर्भाशय हर महीने क्या करता है?

यूट्रस एक डायनामिक ऑर्गन है जो हर महीने खुद को तैयार करता है और यही इसे बाकी अंगों से अलग बनाता है।

  • पीरियड के दौरान (Day 1-5): एंडोमेट्रियम की पुरानी परत टूटकर ब्लीडिंग के रूप में बाहर आती है। इस समय एंडोमेट्रियम सबसे पतला करीब 2 से 4mm का होता है।
  • फॉलिक्युलर फेज़ (Day 6-14): एस्ट्रोजन हॉर्मोन बढ़ता है और एंडोमेट्रियम फिर से मोटा होने लगता है। यह परत ब्लड वेसल्स और पोषक तत्वों से भरपूर होती जाती है।
  • ओव्यूलेशन के बाद (Day 15-28): इस समय प्रोजेस्टेरोन लेवल बढ़ जाता है जो एंडोमेट्रियम को और मोटा और स्पंजी बनाता है। यह इसलिए ताकि अगर एम्ब्रीओ आए तो वो यहाँ आराम से टिक सके। इस समय एंडोमेट्रियम 8 से 14mm तक मोटा हो सकता है।
  • अगर प्रेगनेंसी नहीं हुई: इस कंडीशन में प्रोजेस्टेरोन लेवल कम हो जाता है, जिससे एंडोमेट्रियम टूटता है, और पीरियड आ जाता है। और यह साइकिल फिर शुरू हो जाती है।

रिपोर्ट में क्या लिखा होता है?

जब आप अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पढ़ती हैं, तो कुछ टर्म्स बार-बार आते हैं। आइए समझें uterus meaning in hindi के साथ इन शब्दों का मतलब क्या होता है।

  • Uterus size: नॉर्मल साइज़ लगभग 7-8 x 4-5 x 3-4 cm होता है। अगर इससे बड़ा लिखा है, तो इसे bulky uterus कहते हैं।
  • Endometrial thickness: यह साइकिल के दिन पर निर्भर करता है। पीरियड के बाद 4 से 8mm और ओव्यूलेशन के बाद 8 से 14mm नॉर्मल है।
  • Anteverted/Retroverted: यह यूट्रस की पोज़ीशन बताता है।
  • Homogeneous myometrium: मायोमेट्रियम एक जैसा दिख रहा है, यानी कोई गांठ नहीं है। यह अच्छी बात है।
  • No adnexal mass: ओवरी के आसपास कोई गांठ नहीं है। यह भी नॉर्मल फाइंडिंग है।
  • Bulky uterus: यूट्रस सामान्य से बड़ा है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे फाइब्रॉइड, एडिनोमायोसिस (adenomyosis), या कभी-कभी पीरियड के पहले भी गर्भाशय थोड़ा बड़ा दिखता है।

Anteverted और Retroverted में क्या फर्क है?

बहुत सी महिलाएं रिपोर्ट में "retroverted uterus" पढ़कर घबरा जाती हैं। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि यह क्या है।

  • एंटीवर्टेड यूट्रस (Anteverted uterus): इसका मतलब है कि यूट्रस आगे की तरफ झुका हुआ है यानी ब्लैडर की ओर। यह सबसे कॉमन पोज़ीशन है और लगभग 80% महिलाओं में यही होता है।
  • रेट्रोवर्टेड यूट्रस (Retroverted uterus): इस पोजीशन में यूट्रस पीछे यानी रेक्टम की तरफ झुका होता है। यह लगभग 20% महिलाओं में होता है और यह भी पूरी तरह नॉर्मल है।

रेट्रोवर्टेड यूट्रस का मतलब यह नहीं कि कुछ गलत है या प्रेगनेंसी में दिक्कत आएगी। ज़्यादातर महिलाएं जिनका यूट्रस रेट्रोवर्टेड है, वो बिल्कुल नॉर्मली कंसीव करती हैं और हेल्दी प्रेगनेंसी होती है। हालांकि, कुछ महिलाओं को रेट्रोवर्टेड यूट्रस की वजह से पीरियड्स में ज़्यादा दर्द या सेक्स के दौरान असुविधा हो सकती है।

हेल्दी यूट्रस का फर्टिलिटी में क्या रोल है?

अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं, तो यूट्रस की हैल्थ बहुत मायने रखती है।

  • एंडोमेट्रियम की मोटाई: प्रेगनेंसी के लिए एंडोमेट्रियम कम से कम 7 से 8mm मोटा होना चाहिए। इससे कम होने पर एम्ब्रीओ को इम्प्लांट होने में दिक्कत हो सकती है। 8 से 14mm की मोटाई सबसे अच्छी मानी जाती है।
  • एंडोमेट्रियम का पैटर्न: एंडोमेट्रियम की सिर्फ मोटाई ही नहीं, पैटर्न भी ज़रूरी है। ट्रिपल लाइन पैटर्न यानी तीन परतों वाला एंडोमेट्रियम सबसे अच्छा माना जाता है।
  • गर्भाशय की शेप: कुछ महिलाओं में जन्म से यूट्रस की शेप अलग होती है जैसे septate uterus यानी बीच में दीवार, bicornuate uterus यानी दो सींग वाला, या unicornuate uterus यानी एक तरफ छोटा। इनमें से कुछ में प्रेगनेंसी में थोड़ी अतिरिक्त केयर की ज़रूरत होती है।
  • फाइब्रॉइड की लोकेशन: सभी फाइब्रॉइड प्रेगनेंसी पर असर नहीं डालते। जो फाइब्रॉइड यूट्रस के अंदर यानी submucosal होते हैं, वो एम्ब्रीओ के इम्प्लांटेशन में रुकावट डाल सकते हैं। जो बाहर यानी subserosal होते हैं, वो आमतौर पर कोई दिक्कत नहीं करते।

IVF में यूट्रस की तैयारी कैसे होती है?

जो महिलाएं IVF से माँ बनने की कोशिश कर रही हैं, उनके लिए यूट्रस की तैयारी बहुत ज़रूरी स्टेप है।

IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर से पहले डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि एंडोमेट्रियम सही मोटाई और पैटर्न में हो।

  • एंडोमेट्रियम कैसे तैयार होता है: एस्ट्रोजन की दवाइयां या पैचेस दी जाती हैं जो एंडोमेट्रियम को मोटा करती हैं। फिर प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट शुरू होता है जो एंडोमेट्रियम को स्पंजी और रिसेप्टिव (receptive) बनाता है ताकि एम्ब्रीओ इम्प्लांट हो सके।
  • ट्रांसफर से पहले अल्ट्रासाउंड: एम्ब्रीओ ट्रांसफर से पहले अल्ट्रासाउंड से देखा जाता है कि एंडोमेट्रियम 8mm से ज़्यादा है और ट्रिपल लाइन पैटर्न दिख रहा है।
  • अगर एंडोमेट्रियम पतला रहे: कुछ महिलाओं में एंडोमेट्रियम सही मोटाई तक नहीं पहुंचता। ऐसे में डॉक्टर एस्ट्रोजन की डोज़ बढ़ा सकते हैं, वजाइनल सिल्डेनाफिल दे सकते हैं जो ब्लड फ्लो बढ़ाता है, या कुछ मामलों में PRP थेरेपी भी की जाती है।
  • फ्रोज़न एम्ब्रीओ ट्रांसफर (FET): इसमें एंडोमेट्रियम की तैयारी और भी कंट्रोल्ड होती है क्योंकि ओवरी स्टिम्युलेशन का असर नहीं होता। इसीलिए कई क्लिनिक्स में FET की सक्सेस रेट फ्रेश ट्रांसफर से बेहतर होती है।

कब चिंता करें, कब नहीं?

यूट्रस से जुड़ी हर फाइंडिंग चिंताजनक नहीं होती। रेट्रोवर्टेड यूट्रस सिर्फ पोज़ीशन है, कोई बीमारी नहीं। छोटे फाइब्रॉइड जो 3cm से कम हों और कोई लक्षण न दें तो चिंता नहीं करनी चाहिए। एंडोमेट्रियम की मोटाई साइकिल के हिसाब से बदलना नॉर्मल है। Nabothian cyst सर्विक्स पर छोटी सिस्ट है जो बिल्कुल हार्मलेस होती है।

लेकिन अगर पीरियड्स बहुत हैवी हों या 7 दिन से ज़्यादा चलें, पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग हो, पेल्विक एरिया में लगातार दर्द रहे, सेक्स के दौरान दर्द हो तो डॉक्टर से बात करें। इसके अलावा अगर एक साल कोशिश के बाद भी प्रेगनेंसी न हो, अल्ट्रासाउंड में कुछ असामान्य जैसे बड़ा फाइब्रॉइड, पॉलिप, या बहुत मोटा एंडोमेट्रियम दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरुरी होता है।

एक्सपर्ट की सलाह

Uterus meaning in hindi में समझने के बाद अब आप जानती हैं कि यूट्रस सिर्फ एक अंग नहीं है बल्कि यह एक डायनामिक सिस्टम है जो हर महीने खुद को तैयार करता है। एंडोमेट्रियम की परत बनती है, टूटती है, फिर बनती है और यह साइकिल आपकी पूरी फ़र्टिलिटी वाली ऐज तक चलती रहती है।

अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं, तो यूट्रस की हेल्थ पर ध्यान दें। एंडोमेट्रियम की सही मोटाई और पैटर्न प्रेगनेंसी के लिए ज़रूरी है। और अगर आप IVF या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रही हैं, तो एंडोमेट्रियम की तैयारी एक अहम स्टेप है जिस पर डॉक्टर खास ध्यान देते हैं।

कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो अपने गाइनेकोलॉजिस्ट से ज़रूर मिलें। सही समय पर सही जानकारी और इलाज से ज़्यादातर समस्याएं आसानी से ठीक हो जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Retroverted uterus में प्रेगनेंसी हो सकती है?

 

हाँ। रेट्रोवर्टेड यूट्रस सिर्फ पोज़ीशन है, कोई बीमारी नहीं। लगभग 20% महिलाओं का यूट्रस रेट्रोवर्टेड होता है।

Bulky uterus का मतलब क्या है?

 

बल्की यूट्रस का मतलब है कि यूट्रस सामान्य साइज़ से बड़ा है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे फाइब्रॉइड, एडिनोमायोसिस, या हाल ही में प्रेगनेंसी।

प्रेगनेंसी के लिए एंडोमेट्रियम कितना मोटा होना चाहिए?

 

प्रेगनेंसी के लिए एंडोमेट्रियम कम से कम 7 से 8mm होना चाहिए। IVF में 8mm से ज़्यादा और ट्रिपल लाइन पैटर्न को आइडियल माना जाता है।

क्या फाइब्रॉइड होने पर प्रेगनेंसी नहीं हो सकती?

 

ऐसा नहीं है। सभी फाइब्रॉइड प्रेगनेंसी पर असर नहीं डालते। जो फाइब्रॉइड गर्भाशय के अंदर यानी submucosal होते हैं, वो इम्प्लांटेशन में दिक्कत दे सकते हैं। बाकी फाइब्रॉइड के साथ कई महिलाएं नॉर्मली कंसीव करती हैं।

IVF में एंडोमेट्रियम पतला रहे तो क्या होता है?

 

अगर एंडोमेट्रियम 7mm से कम रहे, तो डॉक्टर एस्ट्रोजन बढ़ा सकते हैं, वजाइनल सिल्डेनाफिल दे सकते हैं जिससे ब्लड फ्लो बढ़ जाता है, या PRP थेरेपी कर सकते हैं। कई बार अगली साइकिल में बेहतर रिस्पॉन्स मिलता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
© 2026 Indira IVF Hospital Limited. All Rights Reserved. T&C Apply | Privacy Policy| *Disclaimer