अगर आपने अल्ट्रासाउंड करवाया है और आपकी रिपोर्ट में लिखा है "uterus anteverted, endometrium 8mm, no adnexal mass", ऐसे में इन सब बातों का मतलब समझना काफी मुश्किल हो सकता है, आप जानना चाहेंगी कि क्या आपकी रिपोर्ट में सब नॉर्मल है?
ज़्यादातर महिलाएं पहली बार तब uterus के बारे में सर्च करती हैं जब उन्हें कोई रिपोर्ट समझनी होती है या डॉक्टर ने कुछ बताया होता है जो समझ नहीं आया।
Uterus meaning in hindi में बताने के लिए सिर्फ "गर्भाशय" की परिभाषा बताना काफी नहीं होगा। यूट्रस आपके शरीर का वो अंग है जो हर महीने खुद को तैयार करता है, कभी पीरियड्स के लिए, कभी प्रेगनेंसी के लिए। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि गर्भाशय असल में क्या है, यह क्या काम करता है, रिपोर्ट में लिखे शब्दों का क्या मतलब है, और सबसे ज़रूरी कि अगर आप माँ बनना चाहती हैं तो गर्भाशय की अच्छी सेहत क्यों जरुरी होती है।
Uterus meaning in hindi में समझें तो गर्भाशय वो अंग है जहाँ बच्चे का विकास होता है। इसे बच्चेदानी भी कहते हैं। यूट्रस पेट के निचले हिस्से में होता है। यह ब्लैडर यानी मूत्राशय के पीछे और रेक्टम यानी मलाशय के आगे स्थित होता है और पेल्विक कैविटी (pelvic cavity) में सुरक्षित रहता है।
आकार में यह उल्टे नाशपाती जैसा होता है। एक सामान्य गर्भाशय लगभग 7 से 8 सेंटीमीटर लंबा और 4 से 5 सेंटीमीटर चौड़ा होता है। लगभग आपकी मुट्ठी के बराबर यूट्रस, प्रेगनेंसी में यह इतना बड़ा हो जाता है कि पूरे पेट में फैल जाता है, और डिलीवरी के बाद वापस अपने साइज़ में आ जाता है।
यूट्रस के तीन मुख्य हिस्से हैं। सबसे ऊपर फंडस (Fundus) होता है जो गोल और चौड़ा होता है। बीच में बॉडी (Body) होती है जहाँ बच्चा बढ़ता है। और सबसे नीचे सर्विक्स (Cervix) होता है जो योनि मतलब वेजाइना से जुड़ता है और डिलीवरी के समय खुलता है।
यूट्रस की दीवार तीन परतों से बनी होती है और हर परत का अपना काम है।
यूट्रस एक डायनामिक ऑर्गन है जो हर महीने खुद को तैयार करता है और यही इसे बाकी अंगों से अलग बनाता है।
जब आप अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पढ़ती हैं, तो कुछ टर्म्स बार-बार आते हैं। आइए समझें uterus meaning in hindi के साथ इन शब्दों का मतलब क्या होता है।
बहुत सी महिलाएं रिपोर्ट में "retroverted uterus" पढ़कर घबरा जाती हैं। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि यह क्या है।
रेट्रोवर्टेड यूट्रस का मतलब यह नहीं कि कुछ गलत है या प्रेगनेंसी में दिक्कत आएगी। ज़्यादातर महिलाएं जिनका यूट्रस रेट्रोवर्टेड है, वो बिल्कुल नॉर्मली कंसीव करती हैं और हेल्दी प्रेगनेंसी होती है। हालांकि, कुछ महिलाओं को रेट्रोवर्टेड यूट्रस की वजह से पीरियड्स में ज़्यादा दर्द या सेक्स के दौरान असुविधा हो सकती है।
अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं, तो यूट्रस की हैल्थ बहुत मायने रखती है।
जो महिलाएं IVF से माँ बनने की कोशिश कर रही हैं, उनके लिए यूट्रस की तैयारी बहुत ज़रूरी स्टेप है।
IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर से पहले डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि एंडोमेट्रियम सही मोटाई और पैटर्न में हो।
यूट्रस से जुड़ी हर फाइंडिंग चिंताजनक नहीं होती। रेट्रोवर्टेड यूट्रस सिर्फ पोज़ीशन है, कोई बीमारी नहीं। छोटे फाइब्रॉइड जो 3cm से कम हों और कोई लक्षण न दें तो चिंता नहीं करनी चाहिए। एंडोमेट्रियम की मोटाई साइकिल के हिसाब से बदलना नॉर्मल है। Nabothian cyst सर्विक्स पर छोटी सिस्ट है जो बिल्कुल हार्मलेस होती है।
लेकिन अगर पीरियड्स बहुत हैवी हों या 7 दिन से ज़्यादा चलें, पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग हो, पेल्विक एरिया में लगातार दर्द रहे, सेक्स के दौरान दर्द हो तो डॉक्टर से बात करें। इसके अलावा अगर एक साल कोशिश के बाद भी प्रेगनेंसी न हो, अल्ट्रासाउंड में कुछ असामान्य जैसे बड़ा फाइब्रॉइड, पॉलिप, या बहुत मोटा एंडोमेट्रियम दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरुरी होता है।
Uterus meaning in hindi में समझने के बाद अब आप जानती हैं कि यूट्रस सिर्फ एक अंग नहीं है बल्कि यह एक डायनामिक सिस्टम है जो हर महीने खुद को तैयार करता है। एंडोमेट्रियम की परत बनती है, टूटती है, फिर बनती है और यह साइकिल आपकी पूरी फ़र्टिलिटी वाली ऐज तक चलती रहती है।
अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं, तो यूट्रस की हेल्थ पर ध्यान दें। एंडोमेट्रियम की सही मोटाई और पैटर्न प्रेगनेंसी के लिए ज़रूरी है। और अगर आप IVF या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रही हैं, तो एंडोमेट्रियम की तैयारी एक अहम स्टेप है जिस पर डॉक्टर खास ध्यान देते हैं।
कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो अपने गाइनेकोलॉजिस्ट से ज़रूर मिलें। सही समय पर सही जानकारी और इलाज से ज़्यादातर समस्याएं आसानी से ठीक हो जाती हैं।
हाँ। रेट्रोवर्टेड यूट्रस सिर्फ पोज़ीशन है, कोई बीमारी नहीं। लगभग 20% महिलाओं का यूट्रस रेट्रोवर्टेड होता है।
बल्की यूट्रस का मतलब है कि यूट्रस सामान्य साइज़ से बड़ा है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे फाइब्रॉइड, एडिनोमायोसिस, या हाल ही में प्रेगनेंसी।
प्रेगनेंसी के लिए एंडोमेट्रियम कम से कम 7 से 8mm होना चाहिए। IVF में 8mm से ज़्यादा और ट्रिपल लाइन पैटर्न को आइडियल माना जाता है।
ऐसा नहीं है। सभी फाइब्रॉइड प्रेगनेंसी पर असर नहीं डालते। जो फाइब्रॉइड गर्भाशय के अंदर यानी submucosal होते हैं, वो इम्प्लांटेशन में दिक्कत दे सकते हैं। बाकी फाइब्रॉइड के साथ कई महिलाएं नॉर्मली कंसीव करती हैं।
अगर एंडोमेट्रियम 7mm से कम रहे, तो डॉक्टर एस्ट्रोजन बढ़ा सकते हैं, वजाइनल सिल्डेनाफिल दे सकते हैं जिससे ब्लड फ्लो बढ़ जाता है, या PRP थेरेपी कर सकते हैं। कई बार अगली साइकिल में बेहतर रिस्पॉन्स मिलता है।