बहुत सी महिलाएं वल्वा और वेजाइना योनि को एक ही समझती हैं। डॉक्टर के पास जाकर भी ‘नीचे की तरफ’ या ‘वहाँ’ कहकर बात करती हैं क्योंकि सही शब्द पता ही नहीं होता। यह भी सच है कि हमारे यहाँ इन अंगों के बारे में खुलकर बात होती ही नहीं।
लेकिन जब गर्भधारण की बात आती है, तो इन महिला के अंगों की सेहत बहुत मायने रखती है। Vulva meaning in hindi मतलब महिला के प्रजनन तंत्र यानी रिप्रोडक्टिव सिस्टम (reproductive system) का वह बाहरी हिस्सा, जो आपको दिखता है, जबकि योनि मतलब वेजाइना (Vagina) इसी रिप्रोडक्टिव सिस्टम के अंदर का रास्ता, जो गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) तक जाता है।
Vulva सिर्फ़ एक अंग नहीं है बल्कि यह आपके रिप्रोडक्टिव सिस्टम का पहला दरवाज़ा है। अगर इस दरवाज़े में कोई इंफेक्शन या समस्या है, तो यह अंदर तक फैल सकती है और गर्भधारण यानी प्रेगनेंसी (pregnancy) में दिक्कत पैदा कर सकती है।
कई महिलाएं डॉक्टर से पास जाती हैं जिन्हें सालों से खुजली या जलन रहती है, लेकिन उन्होंने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया। जब IVF की तैयारी शुरू होती है, तब उन्हें पता चलता है कि यह छोटी सी समस्या माँ बनने में कितनी बड़ी रुकावट बन सकती है।
वल्वा (Vulva) रिप्रोडक्टिव सिस्टम का वह पूरा बाहरी हिस्सा है जो दोनों पैरों के बीच बाहर से दिखाई देता है।
इस हिस्से में त्वचा की होंठ जैसी दो परतें होती हैं, जिन्हें लैबिया (Labia) कहा जाता है। बाहर की मोटी परत को बाहरी लैबिया (Labia Majora) और अंदर की पतली परत को अंदरूनी लैबिया (Labia Minora) कहते हैं। लैबिया का काम अंदर मौजूद संवेदनशील हिस्सों की सुरक्षा करना होता है।
वेजाइना (Vagina) एक अंदरूनी नली है जो इसके छेद यानी वेजाइनल ओपनिंग (vaginal opening) से शुरू होकर गर्भाशय के मुँह यानी सर्विक्स (Cervix) तक जाती है। यही वह रास्ता है जहाँ से पीरियड्स का खून बाहर आता है, संबंध बनाते समय पुरुष का लिंग जाता है और बच्चे का जन्म होता है।
जब लोग "वेजाइना" कहते हैं, तो अक्सर वे असल में वल्वा की बात कर रहे होते हैं। यह गलतफहमी इसलिए मायने रखती है क्योंकि डॉक्टर को अपनी समस्या बताते समय सही जगह बताना ज़रूरी होता है।
वल्वा एक ही अंग नहीं है। यह कई छोटे-छोटे हिस्सों से मिलकर बना होता है, और हर हिस्से का अपना अलग काम होता है। हर महिला का वल्वा एक-दूसरे से थोड़ा अलग दिख सकता है। रंग, आकार या होंठों की लंबाई में फर्क होना पूरी तरह सामान्य बात है।
ये वल्वा की बाहरी त्वचा की मोटी परतें होती हैं जो बाहर से दिखाई देती हैं। आमतौर पर इन पर बाल होते हैं। इनका मुख्य काम अंदर के संवेदनशील हिस्सों की सुरक्षा करना होता है।
ये पतली त्वचा की परतें बाहरी होंठों के अंदर होती हैं। इन पर बाल नहीं होते। ये यूरिन के छेद और यूरिन की नली के आसपास के हिस्से को ढक कर सुरक्षा देती हैं।
यह एक छोटा लेकिन बहुत सेंसिटिव हिस्सा होता है, जो अंदरूनी होंठों के ऊपर मिलने वाली जगह पर होती है। इसमें बहुत अधिक नसें यानी नर्व्ज़ एंडिंग्स (nerve endings) होती हैं, इसलिए यह यौन संवेदना यानी सेक्सुअल सेंसिटिविटी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
यह छोटा सा छेद होता है जहाँ से यूरिन शरीर से बाहर निकलता है। यह वेजाइना के छेद से अलग होता है और उससे थोड़ा ऊपर होता है।
यह वह जगह है जहाँ से वेजाइना की शुरुआत होती है। इसी रास्ते से पीरियड्स का रक्त बाहर आता है और प्रसव के समय बच्चा भी इसी रास्ते से बाहर आता है।
वल्वा से आपकी वेजाइनल हैल्थ के बारे में कई लक्षण दिखाई देते हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ करने से प्रेगनेंसी में मुश्किलें आ सकती हैं।
Vulva में कभी-कभार हल्की खुजली सामान्य हो सकती है, लेकिन अगर हफ्तों से खुजली हो रही है या बार-बार हो जाती है, तो यह इंफेक्शन का लक्षण है। यीस्ट इंफेक्शन में खुजली के साथ गाढ़ा सफ़ेद डिस्चार्ज होता है। बैक्टीरियल वेजिनोसिस (Bacterial vaginosis) में हल्की खुजली के साथ बदबूदार डिस्चार्ज होता है।
फर्टिलिटी से कनेक्शन: बैक्टीरियल वेजिनोसिस वाली महिलाओं में इनफर्टिलिटी तीन गुना ज़्यादा पाई जाती है। यह इंफेक्शन ऊपर की ओर फैलकर यूट्रस और फैलोपियन ट्यूब तक पहुँच सकता है। अगर आप माँ बनने की कोशिश कर रही हैं और आपको खुजली या जलन है, तो पहले इसका इलाज करवाएं।
सामान्य डिस्चार्ज साफ़ या हल्का सफ़ेद होता है और उसमें तेज़ बदबू नहीं होती। पीरियड साइकिल के हिसाब से इसकी मात्रा और गाढ़ापन बदलता रहता है। लेकिन अगर आपको:
फर्टिलिटी से कनेक्शन: असामान्य डिस्चार्ज अक्सर इंफेक्शन की वजह से होता है। इंफेक्शन का इलाज न हो तो यह PID यानी पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिज़ीज़ (Pelvic Inflammatory Disease) में बदल सकता है, जो फैलोपियन ट्यूब के लिए खतरनाक स्थिति है।
अगर संबंध बनाते समय आपको vulva या वेजाइना में दर्द होता है, तो इसे सामान्य मत समझिए। दर्द की कई वजहें हो सकती हैं जैसे वेजाइना का सूखापन, इंफेक्शन, या वेजिनिस्मस जिसमें योनि की मसल्स टाइट जाती हैं।
फर्टिलिटी से कनेक्शन: दर्द की वजह से संबंध बनाने में कमी आती है, जिससे प्रेगनेंसी मुश्किल हो जाती है। कुछ मामलों में दर्द की वजह एंडोमेट्रियोसिस या इंफेक्शन होता है, जिसका असर सीधे फर्टिलिटी पर पड़ता है। अगर आपको संबंध बनाते हुए हर बार दर्द होता है, तो डॉक्टर से बात करें।
पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द, ये सब यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (Urinary Tract Infection) के लक्षण हैं।
कभी कभार यूटीआई होना आम है। लेकिन अगर साल में तीन-चार बार हो रहा है, तो यह बार-बार होने वाला (Recurrent) यूटीआई है, जिसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
फर्टिलिटी से कनेक्शन: बार-बार यूटीआई होने से पेल्विक एरिया में लगातार सूजन रहती है। यह सूजन फैलोपियन ट्यूब को नुकसान पहुँचा सकती है। साथ ही, इलाज के लिए बार-बार एंटीबायोटिक लेने से वेजाइना का प्राकृतिक बैक्टीरिया संतुलन बिगड़ सकता है।
Vulva और वेजाइना का इंफेक्शन अगर समय पर ठीक न हो, तो यह ऊपर की ओर फैलता है। पहले योनि में इंफेक्शन होता है। फिर यह सर्विक्स तक पहुँच सकता है। वहाँ से यूट्रस के अंदर जाता है, इसे एंडोमेट्राइटिस (Endometritis) कहते हैं। यह इंफेक्शन आगे बढ़कर फैलोपियन ट्यूब तक पहुँच जाता है, इसे पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिज़ीज़ या PID कहते हैं।
PID फैलोपियन ट्यूब में निशान बना देता है। इन निशानों की वजह से ट्यूब ब्लॉक हो सकती है। ट्यूब के ब्लॉक होने की वजह से एग और स्पर्म मिल नहीं पाते। एक स्टडी में पाया गया कि PID के बाद लगभग 11 प्रतिशत महिलाओं में ट्यूबल इनफर्टिलिटी हो जाती है। इसीलिए वल्वा की छोटी सी समस्या को भी गंभीरता से लेना चाहिए।
IVF में भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (embryo) सीधे गर्भाशय यानी यूट्रस में रखा जाता है। इस प्रोसेस में एक पतली नली वेजाइना से होकर यूट्रस तक जाती है।
अगर उस समय वेजाइना या वल्वा में इंफेक्शन है, तो यह इंफेक्शन यूट्रस में भी पहुँच सकता है। इससे एम्ब्रीओ का इम्प्लांटेशन प्रभावित होता है और गर्भपात यानी मिसकैरिज़ (miscarriage) का खतरा बढ़ जाता है।
इसलिए अच्छे और प्रमाणित IVF clinic में IVF शुरू करने से पहले वेजाइना की जाँच की जाती है। अगर कोई इंफेक्शन है, तो पहले उसका इलाज होता है और इलाज के बाद ही IVF साइकिल शुरू की जाती है। बैक्टीरियल वेजिनोसिस का इलाज करने के बाद IVF की सक्सेस रेट बढ़ जाती है।
माँ बनने के सफर में अपने शरीर की सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। Vulva meaning in hindi जानने का मकसद सिर्फ नाम समझना नहीं, बल्कि अपनी सेहत के प्रति जागरूक होना है।
वल्वा पर होने वाला छोटा सा इन्फेक्शन भी आपके माँ बनने के सपने में बाधा डाल सकता है, खासकर अगर आप IVF जैसा इलाज ले रही हैं।
अगर आपको खुजली, जलन या डिस्चार्ज में कोई भी बदलाव दिखे, तो उसे शर्म की वजह से छिपाएं नहीं। सही समय पर डॉक्टर से बात करना और सही हाइजीन बनाए रखना आपकी फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका है।