गर्भावस्था यानी प्रेगनेंसी (Pregnancy) के दौरान शिशु के सही विकास और अच्छे स्वास्थ्य में प्लेसेंटा (Placenta) बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शिशु तक जरूरी पोषण, पानी और ऑक्सीजन पहुंचाता है, जिससे बच्चा मजबूत और स्वस्थ रूप से बढ़ सके। हालांकि, कई महिलाओं को यह सही जानकारी नहीं होती कि placenta kya hai, यह कैसे काम करता है और मां और बच्चे दोनों के लिए यह इतना इम्पोर्टेन्ट क्यों है। प्लेसेंटा की सही जानकारी के जरिए महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी को बेहतर ढंग से समझ सकती हैं और बिना किसी डर के अपने बच्चे और अपनी सेहत का ध्यान रख सकती हैं।
प्लेसेंटा प्रेगनेंसी में बनने वाला एक टेम्पररी अंग है, जो माँ और बच्चे को जोड़ने के साथ ही बच्चे तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषण पहुंचाता है और बच्चे के शरीर से निकलने वाले बेकार पदार्थों यानी टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा, यह प्रेगनेंसी को सुरक्षित रखने वाले हार्मोन भी बनाता है, जो बच्चे को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। बच्चे के जन्म के बाद यह अंग अपने आप बाहर निकल जाता है, जिसे आफ्टर बर्थ कहा जाता है।
प्लेसेंटा गर्भावस्था में शिशु के विकास और माँ की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण अंग है। कन्सेप्शन के तुरंत बाद जब फर्टिलाइज़्ड एग गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की दीवार से चिपकता है तभी प्लेसेंटा बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। पहली तिमाही यानी 0 से 12 सप्ताह में यह माँ की रक्त वाहिकाओं यानी ब्लड वेसेल्स (Blood Vessels) से जुड़कर भ्रूण को पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाना शुरू करता है और हार्मोन बनाकर प्रेगनेंसी को सुरक्षित बनाए रखता है। दूसरी और तीसरी तिमाही में प्लेसेंटा पूरी तरह विकसित होकर गर्भनाल यानी अम्बिलिकल कॉर्ड (Umbilical Cord) के माध्यम से लगातार शिशु को पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाता है। बच्चे के जन्म के बाद यह शरीर से बाहर निकल जाता है, जिसे आमतौर पर ‘आफ्टर बर्थ’ (After Birth) कहा जाता है।
प्लेसेंटा प्रेगनेंसी के दौरान शिशु और माँ दोनों के लिए कई महत्वपूर्ण काम करता है, जैसे -
प्लेसेंटा प्रेगनेंसी को बनाए रखने के लिए HCG, प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन बनाता है।
प्लेसेंटा शिशु तक जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुँचाता है, जिससे बच्चा स्वस्थ और मजबूत बन सके।
प्लेसेंटा माँ के इम्यून सिस्टम से शिशु की सुरक्षा करता है, ताकि बच्चा सुरक्षित रह सके।
यह शिशु के शरीर में बनने वाले हानिकारक पदार्थों और अपशिष्ट को बाहर निकालने का काम करता है।
प्लेसेंटा शिशु को हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस से बचाने में मदद करता है।
प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान अलग-अलग स्थानों पर जुड़ सकता है, और इसके आधार पर इसे मुख्य रूप से चार प्रकारों में बाँटा जाता है।
एंटीरियर प्लेसेंटा बच्चेदानी की आगे की दीवार पर जुड़ा होता है। इसका मतलब है कि शिशु और माँ के बीच यह आगे की तरफ स्थित होता है। अधिकतर मामलों में यह सामान्य और सुरक्षित होता है।
पोस्टीरियर प्लेसेंटा बच्चेदानी की पीछे की दीवार पर होता है। इसे पीछे की तरफ होने के कारण कभी-कभी पेट में शिशु की गतिविधियाँ महसूस करना थोड़ा अलग लग सकता है, लेकिन यह भी सामान्य स्थिति है।
फंडल प्लेसेंटा बच्चेदानी के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है। शिशु के विकास के लिए यह सबसे सामान्य और सुरक्षित स्थिति मानी जाती है।
लो-लाइंग प्लेसेंटा बच्चेदानी के निचले हिस्से में जुड़ा होता है। कुछ मामलों में यह प्रेगनेंसी के दौरान ऊपर की तरफ बढ़ सकता है। लेकिन अगर यह नीचे ही बना रहे, तो डॉक्टर की निगरानी आवश्यक होती है।
Placenta kya hai समझने के बाद, जानते हैं कि प्लेसेंटा की सही पोज़ीशन पर होना क्यों जरुरी है। ऐसा इसलिए जरुरी है क्योंकि प्लेसेंटा भ्रूण तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण पहुंचा सके। जब प्लेसेंटा सही जगह पर होता है, तो शिशु का विकास सामान्य रूप से होता है और डिलीवरी (Delivery) भी सेफ हो जाती है।
गलत स्थिति, जैसे लो-लाइंग प्लेसेंटा, डिलीवरी को जटिल यानी कॉम्प्लिकेटेड बना सकती है। खासकर प्लेसेंटा प्रीविया (Placenta Previa) की स्थिति में नॉर्मल यानी वेजाइनल डिलीवरी (vaginal delivery) संभव नहीं होती और डॉक्टर सी-सेक्शन (C-Section) की सलाह दे सकते हैं। इसलिए प्लेसेंटा की सही स्थिति का पता लगाना और प्रेगनेंसी के दौरान इसकी निगरानी करना बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर प्लेसेंटा (Placenta) बच्चेदानी (Uterus) के मुँह को ढक देता है, तो सामान्य प्रसव (Normal Delivery) संभव नहीं होता। इस स्थिति में खून बहने (Bleeding) का खतरा बढ़ जाता है और बच्चे के जन्म के लिए अक्सर सी-सेक्शन (C-Section) की जरूरत पड़ती है।
जब प्लेसेंटा समय से पहले यूट्रस की दीवार से अलग हो जाता है, तो भ्रूण तक ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुँच पाता। इसके कारण माँ को पेट में तेज दर्द और ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरूरी है।
यदि प्लेसेंटा पूरी तरह विकसित नहीं होता है, तो शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है। इसलिए प्रेगनेंसी (Pregnancy) के दौरान नियमित रूप से डॉक्टर से जांच कराते रहना जरूरी है।
प्लेसेंटा और शिशु के सही विकास के लिए पौष्टिक आहार बेहद जरूरी है। आयरन, फोलिक एसिड और प्रोटीन से भरपूर खाने का सेवन करें। हरी सब्जियाँ, ताजे फल और साबुत अनाज अपनी रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करें।
धूम्रपान और शराब प्लेसेंटा की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। इससे शिशु का वजन कम हो सकता है और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी हो सकती हैं।
हल्का योग, टहलना या आसान एक्सरसाइज प्लेसेंटा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसे अपनी डेली रूटीन में शामिल करना फायदेमंद होता है।
अत्यधिक तनाव प्लेसेंटा के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान खुद को मानसिक रूप से शांत रखने की कोशिश करें।
प्रेगनेंसी के दौरान समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराएँ। अगर कोई असामान्यता दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
placenta kya hai का आसान भाषा में जवाब है प्लेसेंटा प्रेगनेंसी में माँ और शिशु के लिए बेहद जरूरी अंग है, जो शिशु को ऑक्सीजन और पोषण देता, अपशिष्ट निकालता और हार्मोन बनाता है। प्लेसेंटा की सही पोजीशन और इसके हेल्दी होने पर आमतौर पर कोई समस्या नहीं होती, लेकिन असामान्य स्थितियों जैसे लो-लाइंग या प्लेसेंटा प्रीविया में डॉक्टर की निगरानी जरूरी है। संतुलित आहार, हल्का व्यायाम, तनाव कम करना और नियमित जांच से प्लेसेंटा को स्वस्थ रखा जा सकता है।
प्लेसेंटा शिशु को ऑक्सीजन और पोषण पहुँचाने, अपशिष्ट पदार्थ निकालने, हार्मोन बनाने और संक्रमण से बचाने का काम करता है।
कई बार प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान ऊपर की तरफ खिसक जाता है। लेकिन अगर यह नीचे ही बना रहे, तो डॉक्टर प्रसव के लिए सी-सेक्शन की सलाह दे सकते हैं।
लो-लाइंग प्लेसेंटा बच्चेदानी के निचले हिस्से में होता है। कभी-कभी यह ऊपर की ओर खिसक जाता है, लेकिन अगर नीचे ही बना रहे, तो प्रसव के लिए सी-सेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।
एंटीरियर प्लेसेंटा बच्चेदानी (Uterus) की आगे की दीवार पर होता है। इस वजह से शिशु की हलचल (Baby Movement) महसूस करने में थोड़ा समय लग सकता है। वहीं पोस्टीरियर प्लेसेंटा बच्चेदानी की पीछे की दीवार पर स्थित होता है। इसमें शिशु की हलचल जल्दी महसूस होती है।
संतुलित आहार, हल्का व्यायाम, तनाव कम करना और धूम्रपान व शराब से दूर रहना प्लेसेंटा को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
हाँ, जब तक प्लेसेंटा सही तरीके से काम कर रहा हो, यह माँ और शिशु दोनों के लिए सुरक्षित रहता है। अगर इसमें कोई समस्या हो, तो यह खतरनाक भी हो सकता है।
प्लेसेंटा प्रीविया तब होता है जब प्लेसेंटा बच्चेदानी के मुँह को ढक देता है। इससे सामान्य प्रसव मुश्किल हो सकता है और खून बहने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी है। इसके अलावा किसी भी समस्या के संकेत मिलने पर तुरंत जांच कराएँ।