IUI vs IVF: कौन अधिक दर्दनाक होता है? दर्द और असहजता का फर्क समझें

Last updated: January 06, 2026

Overview

यह गाइड आईयूआई (इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन) और आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) में होने वाली शारीरिक असहजता की तुलना करता है। इसमें दोनों प्रक्रियाओं के हर चरण को आसान तरीके से समझाया गया है, और यह भी बताया गया है कि किस स्टेप पर दर्द या असुविधा महसूस हो सकती है, जैसे हार्मोन इंजेक्शन से लेकर एग रिट्रीवल तक। मरीजों के अनुभव और विशेषज्ञों की राय के आधार पर यह लेख आपको यह समझने में मदद करता है कि क्या उम्मीद रखें और इस पूरे अनुभव को कैसे मैनेज करें।

भूमिका

बांझपन का सामना कर रहे कई कपल्स के मन में एक सवाल बार-बार आता है, “आईयूआई और आईवीएफ में ज्यादा दर्दनाक है?” और सच यह है कि दर्द सिर्फ शारीरिक नहीं होता, कई बार यह भावनात्मक भी होता है।

IUI इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन और (IVF इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन)दोनों ही गर्भधारण में मदद करने वाली प्रक्रियाएं हैं, लेकिन इनकी तीव्रता, स्टेप्स और महसूस होने वाली असहजता अलग-अलग होती है। कुछ लोगों को यह बस हल्का और जल्दी खत्म होने वाला दर्द लगता है, जबकि कुछ के लिए आईवीएफ, आईयूआई की तुलना में ज्यादा थकाने वाला अनुभव हो सकता है। यह गाइड दोनों विकल्पों में होने वाली असहजता को साफ़ तरीके से समझाता है, ताकि आपकी उम्मीदें वास्तविक रहें और आप बेहतर निर्णय ले सकें।

आईयूआई क्या है? (इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन)

आईयूआई एक आसान और कम इनवेसिव फर्टिलिटी प्रक्रिया है, जो आमतौर पर बिना एनेस्थीसिया या सर्जरी के की जाती है। इसका उद्देश्य शुक्राणुओं के अंडे तक पहुँचने की संभावना बढ़ाना होता है।

इस प्रक्रिया में ओव्यूलेशन के समय पतली कैथेटर की मदद से “वॉश किए हुए” शुक्राणु गर्भाशय में, सर्विक्स के रास्ते सीधे डाले जाते हैं। आईयूआई से पहले महिलाओं को ओव्यूलेशन इंडक्शन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें डॉक्टर फर्टिलिटी दवाएं देते हैं ताकि ओवरी एक से ज्यादा अंडे बना सके।

आईयूआई प्रक्रिया के दौरान दर्द और असहजता

1. ओव्यूलेशन इंडक्शन

ओव्यूलेशन इंडक्शन में हार्मोनल इंजेक्शन देकर ओवरी को एक से ज्यादा अंडे रिलीज़ करने के लिए स्टिमुलेट किया जाता है। ज्यादातर महिलाओं को इसमें बहुत ज्यादा दर्द नहीं होता, लेकिन कई इंजेक्शन लगने की वजह से बार-बार हल्की चुभन, इरीटेशन या इंजेक्शन वाली जगह पर हल्की सूजन/दर्द महसूस हो सकता है।

2. आईयूआई प्रक्रिया के दौरान

आईयूआई की प्रक्रिया ज्यादा समय नहीं लेती और इसे अक्सर पैप स्मियर जैसी प्रक्रिया से तुलना की जाती है। कैथेटर डालते समय कुछ महिलाओं को हल्का दबाव या माइल्ड क्रैम्प्स महसूस हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर यह कुछ ही मिनटों में हो जाता है। आईयूआई में थोड़ी असहजता हो सकती है, लेकिन यह आमतौर पर हल्की होती है और ज्यादा देर तक नहीं रहती। यह बिना एनेस्थीसिया के किया जाता है और ज्यादातर लोग प्रक्रिया के तुरंत बाद सामान्य महसूस करते हैं।

3. आईयूआई के बाद

आईयूआई के बाद रिकवरी आमतौर पर आसान होती है। लंबे समय तक बेड रेस्ट की जरूरत नहीं होती और अधिकतर लोग जल्दी ही अपनी सामान्य दिनचर्या पर लौट सकते हैं। हालांकि कुछ हल्के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे:

  • पेट फूलना (ब्लोटिंग)
  • स्तनों में दर्द/संवेदनशीलता
  • मतली या उल्टी
  • स्पॉटिंग या हल्का ब्लीडिंग
  • इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन
  • ओएचएसएस (ओवरी का ज्यादा स्टिमुलेट हो जाना)

प्रक्रिया के बाद अगर कोई असहजता महसूस हो, तो डॉक्टर को जानकारी देना बेहतर रहता है।

आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान दर्द और असहजता

1. हार्मोन इंजेक्शन

आईवीएफ की शुरुआत अक्सर हार्मोन इंजेक्शन से होती है, और यही वह चरण है जहां कुछ लोगों को असहजता महसूस होने लगती है। ओवरी में ज्यादा परिपक्व अंडे बनाने के लिए रोजाना इंजेक्शन लेने पड़ते हैं, जिनके कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

जैसे पेट फूलना (ब्लोटिंग) और पेट में भारीपन काफी आम है, और इंजेक्शन वाली जगह कुछ समय तक दर्द/सोरनेस भी रह सकती है। इसके अलावा:

  • थकान
  • मूड स्विंग्स

भावनात्मक तनाव, जो कई लोगों के लिए इस चरण को ज्यादा मुश्किल बना देता है

2. एग रिट्रीवल प्रक्रिया

एग रिट्रीवल थोड़ा दर्दनाक लग सकता है, क्योंकि इसमें सुई की मदद से ओवरी तक पहुंचकर परिपक्व अंडे निकाले जाते हैं। असहजता के पीछे कुछ कारण हो सकते हैं:

  • ओवरी का सूजना: एग रिट्रीवल से पहले ओवरी को स्टिमुलेट करने के लिए इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिससे ओवरी सामान्य से बड़ी हो सकती है। इससे प्रक्रिया से पहले ही पेट में भारीपन या ब्लोटिंग महसूस हो सकती है।
  • सुई का इस्तेमाल: अल्ट्रासाउंड की मदद से (आमतौर पर एनेस्थीसिया के तहत) योनि की दीवार के जरिए सुई डालकर फॉलिकल्स तक पहुंचा जाता है। इसके बाद कुछ समय तक दर्द या असहजता महसूस हो सकती है।
  • फॉलिकल का फ्लूइड निकालना: हर फॉलिकल में तरल होता है। जब वह निकाला जाता है, तो ओवरी में soreness हो सकती है, खासकर जब ज्यादा अंडे निकाले गए हों। जितने ज्यादा अंडे, उतनी ज्यादा टेंडरनेस महसूस होने की संभावना।

इसके बाद जब ओवरी धीरे-धीरे अपने सामान्य आकार में लौटती है, तो टिशू 1–2 दिन तक संवेदनशील रह सकता है। कुछ मरीजों को हल्का ब्लीडिंग/स्पॉटिंग भी हो सकता है, जिससे पेल्विक दर्द थोड़ा बढ़ा हुआ लग सकता है।

3. एम्ब्रियो ट्रांसफर

एम्ब्रियो ट्रांसफर एक जल्दी और सामान्यतः बहुत हल्की प्रक्रिया होती है, इसे अक्सर रूटीन पेल्विक एग्ज़ाम जैसा बताया जाता है। ज्यादातर लोगों को इसमें दर्द नहीं होता, बस हल्का क्रैम्प या थोड़ा दबाव महसूस हो सकता है।

आईवीएफ के शुरुआती चरणों की तुलना में इस स्टेप में आमतौर पर सेडेशन की जरूरत नहीं होती, क्योंकि एम्ब्रियो ट्रांसफर के दौरान असहजता बहुत कम रहती है।

आईयूआई बनाम आईवीएफ: दर्द और असहजता कितनी होती है?

यह अनुभव महिला से महिला में अलग होता है। जैसा पहले बताया गया, कुछ को हल्की असहजता और हल्का दर्द महसूस होता है, जबकि कुछ मामलों में दर्द ज्यादा भी हो सकता है। नीचे दी गई टेबल में आईयूआई और आईवीएफ के अनुभव की तुलना दी गई है:

विशेषता आईयूआई (इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन)
दर्द का स्तर आमतौर पर हल्की असहजता, पैप स्मियर या हल्के पीरियड क्रैम्प्स जैसी। एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती। अपेक्षाकृत ज्यादा असहजता, मुख्यतः रोज़ाना इंजेक्शन और एग रिट्रीवल के कारण (जो सेडेशन/एनेस्थीसिया में होता है)। एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद हल्का क्रैम्प हो सकता है।
इनवेसिवनेस बहुत कम इनवेसिव। पतली कैथेटर से स्पर्म को सीधे यूटेरस में डाला जाता है। ज्यादा इनवेसिव। हार्मोन इंजेक्शन, एग रिट्रीवल (छोटी प्रक्रिया) और एम्ब्रियो ट्रांसफर शामिल होते हैं।
मुख्य प्रक्रियाएँ ओव्यूलेशन इंडक्शन (वैकल्पिक, हल्की दवा/इंजेक्शन), स्पर्म वॉशिंग, और इनसेमिनेशन। ओवरी स्टिमुलेशन (रोज़ इंजेक्शन), एग रिट्रीवल, लैब में फर्टिलाइजेशन, एम्ब्रियो कल्चर, और एम्ब्रियो ट्रांसफर।
दवाएं जरूरत हो तो हल्की ओरल या इंजेक्टेबल फर्टिलिटी दवाएं। ओवरी स्टिमुलेशन के लिए ज्यादा इंटेंस, रोज़ाना हार्मोनल इंजेक्शन।
लागत आमतौर पर प्रति साइकिल कम खर्चीला। प्रक्रिया और लैब वर्क के कारण प्रति साइकिल काफी महंगा।

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दौरान दर्द कम करने के टिप्स

1. आईयूआई ज्यादा दर्दनाक है या आईवीएफ?

इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। लेकिन कुछ आसान कदम ऐसे हैं जो प्रक्रिया को शारीरिक और भावनात्मक रूप से थोड़ा आसान बना सकते हैं।

2. पर्याप्त पानी पिएं और हेल्दी डाइट लें

पानी खूब पीना और पौष्टिक भोजन लेना शरीर को दवाओं और बदलावों से बेहतर तरीके से निपटने में मदद करता है। आप अपनी डाइट में ये चीजें शामिल कर सकती हैं:

  • लीन प्रोटीन: चिकन, मछली (खासकर सैल्मन), अंडे, दालें, बीन्स, टोफू
  • होल ग्रेन्स: क्विनोआ, ब्राउन राइस, ओट्स, मिलेट्स आदि
  • हेल्दी फैट्स: बादाम, अखरोट, अलसी के बीज, ऑलिव ऑयल आदि
  • डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध, दही, चीज़

यह हार्मोन बैलेंस, पाचन और रिकवरी को सपोर्ट करता है। जब शरीर अच्छी तरह पोषित होता है, तो वह बदलावों और दवाओं को बेहतर ढंग से संभाल पाता है।

3. क्रैम्प्स या ब्लोटिंग के लिए गर्म सिकाई करें

हार्मोन इंजेक्शन के बाद हल्की ब्लोटिंग या माइल्ड क्रैम्प्स सामान्य हो सकते हैं। ऐसे में गर्म सिकाई या हीटिंग पैड से दर्द और असहजता कम हो सकती है, खासकर रिकवरी के दौरान।

4. योग या ब्रीदिंग एक्सरसाइज जैसे स्ट्रेस-रिलीफ तरीके अपनाएं

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का दर्द भावनात्मक भी हो सकता है। स्ट्रेचिंग, ध्यान, या कुछ गहरी सांसें—ये छोटी आदतें तनाव घटाने में मदद करती हैं और आईयूआई/आईवीएफ के अनुभव को थोड़ा आसान बना सकती हैं।

5. किसी भी असहजता के बारे में डॉक्टर को बताएं

अगर दर्द कम नहीं हो रहा, बहुत ज्यादा लग रहा है, या आप भावनात्मक रूप से बहुत परेशान महसूस कर रही हैं, तो डॉक्टर से बात करना जरूरी है। सही सलाह और सपोर्ट से पूरी प्रक्रिया ज्यादा स्मूद हो सकती है।

निष्कर्ष

जब यह सवाल आता है कि आईयूआई ज्यादा दर्दनाक है या आईवीएफ, तो जवाब अक्सर आईवीएफ की तरफ जाता है। इसकी वजह है इसके ज्यादा इनवेसिव स्टेप्स, जैसे हार्मोन इंजेक्शन और एग रिट्रीवल। वहीं आईयूआई आमतौर पर एक आसान प्रक्रिया होती है, जिसमें शारीरिक असहजता कम होती है। सही विकल्प आपकी फर्टिलिटी कंडीशन, भावनात्मक तैयारी और फर्टिलिटी विशेषज्ञ की सलाह पर निर्भर करता है।

इंदिरा आईवीएफ में उन्नत तकनीक, पर्सनलाइज्ड केयर और डॉक्टरों का सपोर्ट शारीरिक और भावनात्मक असहजता को कम करने में मदद करता है। हमारे अनुभवी फर्टिलिटी डॉक्टर जेंटल प्रक्रियाएं अपनाते हैं और मरीजों की सेहत पर लगातार नजर रखते हैं, ताकि पूरी जर्नी ज्यादा सहज हो सके।

अक्सर जाने वाले सवाल

क्या आईवीएफ में एग रिट्रीवल दर्दनाक होता है?

 

यह कुछ लोगों को असहज लग सकता है, लेकिन आमतौर पर यह सेडेशन/एनेस्थीसिया में किया जाता है, इसलिए प्रक्रिया के दौरान दर्द कम महसूस होता है।

आईयूआई या आईवीएफ के बाद दर्द कितने समय तक रहता है?

 

अक्सर हल्की असहजता कुछ घंटों से 1–2 दिन तक रह सकती है। अगर दर्द तेज हो या बढ़ता जाए तो डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या आईवीएफ में एनेस्थीसिया होता है लेकिन आईयूआई में नहीं?

 

आमतौर पर एग रिट्रीवल के समय आईवीएफ में सेडेशन/एनेस्थीसिया दिया जाता है, जबकि आईयूआई आम तौर पर बिना एनेस्थीसिया के होता है।

भावनात्मक रूप से कौन ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है, आईयूआई या आईवीएफ?

 

अधिकतर लोगों के लिए आईवीएफ ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इसकी प्रक्रिया लंबी होती है और स्टेप्स ज्यादा होते हैं।

क्या आईसीएसआई के साथ आईवीएफ ज्यादा सफल होता है?

 

कुछ मामलों में, खासकर जब स्पर्म से जुड़ी समस्या हो, तब आईसीएसआई से फर्टिलाइजेशन की संभावना बढ़ सकती है।

क्या आईवीएफ के दौरान नेचुरली प्रेग्नेंट होना संभव है?

 

कभी-कभी संभव हो सकता है, लेकिन यह व्यक्ति की स्थिति और ट्रीटमेंट प्लान पर निर्भर करता है, इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूरी है।

क्या आईवीएफ और एम्ब्रियो ट्रांसफर एक ही चीज है?

 

नहीं। आईवीएफ पूरी प्रक्रिया है, जबकि एम्ब्रियो ट्रांसफर उसका एक चरण है, जिसमें एम्ब्रियो को यूटेरस में रखा जाता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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