सारांश (Overview)
प्रेगनेंसी में डिस्चार्ज बढ़ जाना ज्यादातर महिलाओं को परेशान करता है, क्योंकि लगता है कि कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं। असल में इन नौ महीनों में इसका बढ़ना शरीर का बचाव का तरीका है, जो वेजाइना से गर्भाशय तक इंफेक्शन पहुंचने से रोकता है। इसीलिए pregnancy me white discharge को लेकर असली सवाल यह नहीं है कि कितना हो रहा है, बल्कि यह है कि किस तरह का हो रहा है। रंग, गंध, गाढ़ापन और साथ में खुजली या जलन है या नहीं, यही चार बातें तय करती हैं कि यह सामान्य है या जांच की जरूरत है। आगे हम समझेंगे कि सामान्य डिस्चार्ज दिखता कैसा है, बढ़ता क्यों है, किन बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, इसे एम्नियोटिक फ्लूइड से कैसे अलग पहचानें, और कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
योनि मतलब वेजाइना (vegina) और सर्विक्स (cervix) से बनने वाला यह तरल पदार्थ प्रेगनेंसी के बिना भी हर महिला में होता है। इसका काम वेजाइना के अंदर की सफाई रखना और उसे इंफेक्शन से बचाना होता है। प्रेगनेंसी के समय व्हाइट डिस्चार्ज की मात्रा बढ़ जाती है, जिसे ल्यूकोरिया कहते हैं।
इसके अलावा प्रेगनेंसी में सर्विक्स के मुंह पर गाढ़े म्यूकस की एक परत जम जाती है, जिसे म्यूकस प्लग कहते हैं। म्यूकस प्लग वेजाइना की तरफ से आने वाले कीटाणुओं को बाहर ही रोक देता है जिससे वे गर्भाशय यानी यूट्रस के अंदर नहीं जा पाते।
सामान्य डिस्चार्ज पतला होता है, रंग में साफ या दूधिया सफेद, और इसमें कोई तेज गंध नहीं होती। इसके अलावा खुजली, जलन या दर्द नहीं होता, और अंडरवियर पर सूखने के बाद हल्का पीलापन छोड़ना भी सामान्य है।
व्हाइट डिस्चार्ज की मात्रा हर महिला में अलग होती है। किसी को थोड़ा ही महसूस होता है, तो किसी को पैंटी लाइनर बदलना पड़ता है। सिर्फ मात्रा ज्यादा होना चिंता की बात नहीं।
इसकी दो सीधी वजहें हैं।
NHS के अनुसार यह बढ़ा हुआ डिस्चार्ज वेजाइना से गर्भाशय तक इंफेक्शन पहुंचने से रोकने में मदद करता है, और प्रेग्नेंसी आगे बढ़ने के साथ इसकी मात्रा और बढ़ती जाती है।
व्हाइट डिस्चार्ज को उसके रंग और गंध यानी स्मेल के आधार पर पहचान कर उसके नॉर्मल होने या न होने के बारे में निश्चित किया जाता है।
इनमें से कुछ भी दिखे तो खुद दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि लक्षण एक जैसे दिखने पर भी इलाज अलग होता है।
सबसे आम वजह हार्मोन का बदलाव ही है, जो सामान्य है। लेकिन कुछ कारण ऐसे भी हैं जिनमें इलाज की जरूरत पड़ती है।
बैक्टीरियल वेजिनोसिस का समय पर इलाज जरूरी है, क्योंकि एक मेटा एनालिसिस में इसे प्रीटर्म डिलीवरी के दोगुने से ज्यादा जोखिम से जोड़ा गया है।
कई महिलाओं को प्रेगनेंसी का पता चलने से पहले ही बढ़ोतरी महसूस होने लगती है। इस दौरान यह पतला और दूधिया रहता है, और इसी समय म्यूकस प्लग भी बनने लगता है।
अब मात्रा और बढ़ जाती है और कई महिलाओं को रोज पैंटी लाइनर की जरूरत पड़ती है। रंग और गंध वही रहनी चाहिए, और अचानक कोई बदलाव आए तो उसे नोट करें।
डिस्चार्ज सबसे ज्यादा इसी तिमाही में होता है। डिलीवरी के आखिरी दिनों में इसमें गाढ़े, जेली जैसे गुलाबी म्यूकस की धारियां दिख सकती हैं, जिसे शो कहते हैं और यह म्यूकस प्लग निकलने का संकेत है।
लेकिन यही चीज अगर 37 हफ्ते से पहले दिखे, तो इंतजार न करें और अस्पताल को तुरंत बताएं, क्योंकि यह समय से पहले लेबर शुरू होने का संकेत हो सकता है।
यह अंतर पहचानना जरूरी है, क्योंकि एम्नियोटिक फ्लूइड का रिसाव पानी की थैली फटने का संकेत है।
पहचान | सामान्य डिस्चार्ज | एम्नियोटिक फ्लूइड |
|---|---|---|
गाढ़ापन | थोड़ा गाढ़ा, चिपचिपा | पानी जैसा पतला |
रंग | साफ या दूधिया सफेद | साफ या हल्का पीलापन लिए |
निकलने का तरीका | थोड़ा-थोड़ा, फिर रुक जाता है | लगातार रिसता रहता है |
पैड पर असर | पैड गीला नहीं करता | पैड भीग जाता है |
शक हो तो साफ पैड लगाकर आधा घंटा लेट जाएं। उठने पर दोबारा भीगने लगे तो यह डिस्चार्ज नहीं है। ऐसे में तुरंत अस्पताल से संपर्क करें, क्योंकि झिल्ली फटने के बाद मां और बच्चे को इंफेक्शन का खतरा रहता है।
वेजाइना के बाहरी हिस्से को सादे पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं, क्योंकि उस जगह नमी बनी रहने पर इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। टॉयलेट के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर साफ करें। वेजाइना के अंदर किसी घोल से सफाई यानी डूशिंग बिल्कुल न करें, इससे वहां का नेचुरल बैलेंस बिगड़ जाता है।
सूती अंडरवियर पहनें और जरूरत के हिसाब से बदलें, क्योंकि टाइट या सिंथेटिक कपड़े नमी रोकते हैं। पैंटी लाइनर ठीक है, लेकिन उसे कुछ कुछ घंटे में बदलती रहें।
खुशबू वाले प्रोडक्ट्स से बचें: खुशबू वाले साबुन, स्प्रे, वाइप्स और सुगंधित पैड का इस्तेमाल न करें।
टैम्पॉन का इस्तेमाल न करें: प्रेगनेंसी के दौरान टैम्पॉन की जगह डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें।
खुद से दवा शुरू न करें: दुकान से खुद एंटीफंगल या एंटीबायोटिक लेकर इस्तेमाल न करें।
प्रेगनेंसी में यीस्ट इन्फेक्शन की दवा डॉक्टर की सलाह से लें: CDC के अनुसार प्रेगनेंसी में यीस्ट इंफेक्शन के लिए 7 दिन वाली लोकल यानी वेजाइनल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर मुंह से ली जाने वाली फ्लुकोनाजोल 150 mg की खुराक से बचने की सलाह दी जाती है।
ACOG के अनुसार, प्रेगनेंसी में डिस्चार्ज में अचानक बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर डिस्चार्ज पानी जैसा या म्यूकस जैसा हो जाए, उसमें ब्लड आए या उसकी मात्रा अचानक बढ़ जाए, तो यह समय से पहले लेबर का संकेत हो सकता है। 37 हफ्ते पूरे होने से पहले ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
प्रेगनेंसी में व्हाइट डिस्चार्ज का बढ़ना सामान्य है और यह गर्भाशय तक इंफेक्शन पहुंचने से रोकता है। सामान्य डिस्चार्ज पतला, साफ या दूधिया सफेद और बिना तेज गंध वाला होता है, और इसके साथ खुजली या जलन नहीं होती। मात्रा तीनों तिमाही में बढ़ती जाती है और आखिरी दिनों में शो के रूप में गुलाबी म्यूकस दिख सकता है। चिंता की बात तब है जब रंग हरा, पीला या भूरा हो जाए, मछली जैसी गंध आए, दही जैसा गाढ़ापन और खुजली हो, खून दिखे, या पानी जैसा तरल लगातार रिसता रहे। सादे पानी से सफाई, सूती अंडरवियर और खुशबू वाले प्रोडक्ट से दूरी ही काम की सावधानियां हैं। और इन्फेक्शन की दवा खुद से शुरू न करें, क्योंकि प्रेगनेंसी में हर दवा सुरक्षित नहीं होती।