Skip to main content

Synopsis

जानिए आईवीएफ में क्या होता है, दोनों आईयूआई और आईवीएफ में कौनसी तकनीक है बेहतर | Indira IVF पर जाने दोनों के बीच का अंतर विस्तार मै और आईवीएफ क्यों बेहतर|

देश में जिस गति से बांझपन का विस्तार हो रहा है उसी गति से अवेयरनेस का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है। लोग निःसंतानता की गंभीरता को समझ कर नवीन उपचार तकनीकियों कोे अपना रहे हैं लेकिन इनफरटाईल कपल्स के सामने उपचार पद्धतियों में से किसी एक का चुनाव करना सबसे बड़ी चुनौती है । अनएक्सप्लेण्ड इनफर्टिलिटी व पुरूष बांझपन के मामलों में पहले कृत्रिम गर्भाधान की सबसे पुरानी व आसान तकनीक आईयूआई का सुझाव दिया जाता है लेकिन इसकी सफलता दर कम है इस कारण लोग उन्नत तकनीक आईवीएफ का सहारा ले रहे हैं।

निःसंतानता पहले ही दम्पती की मानसिक परेशानी का कारण होती है और जब वे एआरटी के माध्यम से संतान पैदा करने का प्रयास करते हैं तो काफी कन्फ्यूज होते हैं ऐसे में गलत सेंटर व कम सफल तकनीक का चयन होने की आंशका रहती है। दम्पती के सामने मुख्य रूप से दो तकनीकें होती हैं इनमें एक है सबसे पुरानी आईयूआई तकनीक व एक है लोकप्रिय आईवीएफ तकनीक।

सेंटर का चयन व जांचे – जो दम्पती कुदरती गर्भधारण में विफल होकर कृत्रिम प्रजनन तकनीक अपनाना चाहते हैं उनके लिए पति-पत्नी दोनों में से समस्या किसमें और क्या है जानना जरूरी है साथ ही अच्छे सेंटर का चयन भी महत्वपूर्ण है, इसके बाद उपचार शुरू करने से सफलता की संभावना अधिक होती है।

आईयूआई – इन्ट्रा यूटेराइन इन्सीमिनेशन पुरूष बांझपन (शुक्राणु की संख्या 10 से 15 मीलियन प्रति एमएल के बीच) व अस्पष्ट बांझपन के केसेज में पहले ट्राय की जाने वाली उपचार तकनीक है। जांच रिपोर्ट सामान्य होने पर कम आयु वाली यानि 25 वर्ष से से कम आयु की महिलाओं में एक आईयूआई चक्र में 20 प्रतिशत, 31 से 35 वर्ष में 10 से 15 प्रतिशत और 40 के बाद मात्र 2 से 5 प्रतिशत गर्भधारण करने की संभावनाएं होती है। यह प्राकृतिक गर्भधारण के समान प्रक्रिया है इसमें निषेचन का कार्य महिला के शरीर में ही होता है ।

प्रक्रिया – महिला को सामान्य से अधिक अण्डों के उत्पादन के लिए कुछ दवाइयां दी जाती हैं । ओव्युलेशन के समय पुरूष के शुक्राणुओं में से मृत, कम गतिशील व खराब बनावट वाले शुक्राणुओं को अलग कर बेस्ट शुक्राणुओं का चयन किया जाता है व शरीरिक संबंध के स्थान पर शुक्राणुओं को एक पतली कैथेटर के माध्यम से गर्भाशय में इंजेक्ट किया जाता है, जिससे प्राकृतिक निषेचन होने की संभावना रहती है । एकल महिला, महिला जोड़ों तथा वे पुरूष जिनके स्वयं के शुक्राणु अच्छे नहीं है उनके लिए डोनर शुक्राणु का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आईवीएफ में क्या होता है – यह महिला और पुरूष दोनों के बांझपन में समान रूप से लाभकारी है। सामान्यतया महिला की ओवरी में प्रति साईकिल एक अंडा बनता है वहीं इस प्रक्रिया में महिला के अंडाशय में अधिक संख्या में अंडे निर्माण के लिए दवाईयां और इंजेक्शन दिये जाते हैं। इस दौरान जांचो के माध्यम से अंडो के विकास पर निगरानी रखी जाती है और जब अंडे बन जाते हैं तो उन्हें निकाल कर लैब में संतुलित तापमान व वातावरण में सुरक्षित कर लिया जाता है, इसके बाद निषेचन की प्रक्रिया के लिए महिला के साथी के शुक्राणुओं का सेम्पल लेकर अच्छे शुक्राणुओं का चयन किया जाता है और फिर लैब में अण्डों के सामने शुक्राणुओं को छोड़ा जाता है, इससे निषेचन की संभावना आईयूआई की तुलना में अधिक होती है। चूंकि भ्रूण बनने का काम स्वाभाविक तरीके से नहीं होकर लैब में होता है ऐसे में उसके विकास व गुणवत्ता पर नजर रखी जाती है और भ्रूण को 3-5 दिन में महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। इसकी सफलता दर 70 प्रतिशत तक हासिल की जा सकती है।

आईवीएफ क्यों बेहतर, दोनों में अंतर –
आईयूआई में महिला की रिपोर्ट सामान्य होना आवश्यक लेकिन आईवीएफ में महिला में समस्या होने पर भी गर्भधारण किया जा सकता है ।
आईयूआई में सामान्य से थोड़े कम यानि 10 से 15 मीलियन शुक्राणु प्रति एमएल होने आवश्यक हैं अन्यथा डोनर शुक्राणु ही विकल्प लेकिन आईवीएफ में इससे कम होने पर भी अपने शुक्राणुओं से पिता बना जा सकता है।
आईयूआई की सफलता दर कम उम्र में भी अधिकतम 20 प्रतिशत वहीं आईवीएफ में अधिक उम्र में भी सफलता इससे काफी ज्यादा ।
आईयूआई उपचार में रजोनिवृत्ति के बाद गर्भधारण संभव नहीं लेकिन आईवीएफ में मां बना जा सकता है।
आईयूआई कम खर्चीली लेकिन कम सफल,आईयूआई की तुलना में आईवीएफ महंगी लेकिन अधिक प्रभावी।
आईयूआई में भ्रूण की गुणवत्ता परखी नहीं जा सकती, आईवीएफ में भ्रूण की क्वालिटी को पहले देखा जा सकता है ।
आईयूआई में मल्टिपल बर्थ की संभावनाएं अधिक तथा मां और संतान दोनों के स्वास्थ्य को खतरे की आशंका रहती है, आईवीएफ में आज के समय में मल्टिपल बर्थ की संभावना कम, स्वस्थ संतान के जन्म की संभावना ज्यादा।
बार -बार आईयूआई असफल होने मानसिक, शारीरिक व आर्थिक क्षति, आईवीएफ में अस्पताल की विजिट कम होती हैं और अधिक सफल

किसी भी दम्पती के लिए उपचार कोई भी हो सिर्फ सफलता मायने रखती है ऐसे में उपचार शुरू करवाने से पहले यह जानना जरूरी है कौनसी तकनीक बेहतर है। दम्पतियों के लिए आईवीएफ हर दृष्टिकोण से सफल तकनीक है।

Comments

Articles

2022

Infertility Treatment IUI

What is Intrauterine Insemination (IUI) Treatment

IVF Specialist

How do infertility treatments work and how effective are they? Thanks to me...

2022

Infertility Treatment IUI

Why Artificial Insemination Usually Fails

IVF Specialist

Author Name:Dr. Pooja Kumari||Mentor Name: Dr. Reema Sircaron April 27, 2020 ...

2022

Infertility Treatment IUI

What is IUI? When it should be done?

IVF Specialist

Author Name: ;Dr. Shweta Jain ;Mentor Name: ;Dr. Pratibha Singh ;on April 09, ...

2022

Infertility Treatment IUI

How Counsellor can help during IUI Treatment

IVF Specialist

Often people dealing with problems such as infertility need support and counse...

2022

Infertility Treatment IUI

Techniques used for IUI

IVF Specialist

WHAT IS IUI? Techniques used for IUI, Intrauterine insemination is the proc...

2022

Infertility Treatment IUI

How IUI Can Help In Infertility?

IVF Specialist

Infertility is not a disease, labelling it as a disease would be wrong. Infert...

2022

Infertility Treatment IUI

IUI उपचार की सफलता दर को बढ़ाने के 7 असरदार उपाय

IVF Specialist

अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान अथवा ...

2022

Infertility Treatment IUI

When is the best time for IUI?

IVF Specialist

Intrauterine insemination (IUI), in simple terms, is a simple procedure that i...

2022

Infertility Treatment IUI

IUI for Male Factor Infertility

IVF Specialist

IUI for Male Infertility Treatment Intrauterine Insemination (IUI) process ...

2022

Infertility Treatment IUI

Intrauterine insemination at 40

IVF Specialist

Infertility is relatively common these days, however fortunately there are tre...

Tools to help you plan better

Get quick understanding of your fertility cycle and accordingly make a schedule to track it

© 2022 Indira IVF Hospital Private Limited. All Rights Reserved.