एग फ्रीजिंग एक फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन प्रक्रिया है, जिसमें महिला के अंडों को निकालकर भविष्य में इस्तेमाल के लिए फ्रीज करके सुरक्षित रखा जाता है। इसमें एग रिट्रीवल और विट्रिफिकेशन जैसे चरण शामिल होते हैं।
इसमें एग फ्रीजिंग की सही उम्र, प्रक्रिया, फायदे, जोखिम, सफलता दर और भारत में खर्च के साथ इससे जुड़े सामान्य सवालों की जानकारी दी गई है।
Egg freezing, जिसे मेडिकल भाषा में oocyte cryopreservation (ओसाइट क्रायोप्रिज़र्वेशन) कहा जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महिला के अंडाशय (ovaries) से अंडे (eggs) निकालकर उन्हें बेहद कम तापमान पर फ्रीज करके सुरक्षित रख लिया जाता है, ताकि महिला भविष्य में जब चाहे, इन अंडों की मदद से माँ बन सके।
आसान शब्दों में, जब कोई कहता है कि किसी महिला ने "अपने eggs freeze करवा लिए," तो इसका मतलब है कि उसने आज की उम्र के स्वस्थ अंडे सुरक्षित रखवा लिए हैं, ताकि करियर, सही जीवनसाथी का इंतज़ार, या किसी मेडिकल इलाज (जैसे कीमोथेरेपी) के कारण प्रेगनेंसी टालने पर भी भविष्य में जैविक (biological) संतान की संभावना बनी रहे।
एग फ्रीजिंग करवाने के कारण मुख्य रूप से दो श्रेणियों में आते हैं:
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कीमोथेरेपी और पेल्विक रेडिएशन थेरेपी जैसी प्रक्रियाएं महिला की प्रजनन क्षमता (fertility) को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में इलाज शुरू होने से पहले eggs freeze करवाकर भविष्य में माँ बनने की संभावना सुरक्षित रखी जा सकती है। इसके अलावा premature ovarian failure (समय से पहले अंडाशय की कार्यक्षमता घटना), जल्दी मेनोपॉज़ का पारिवारिक इतिहास, या endometriosis जैसी स्थितियों में भी डॉक्टर एग फ्रीजिंग की सलाह दे सकते हैं।
कई महिलाएं करियर, पढ़ाई, आर्थिक स्थिरता, या सही जीवनसाथी न मिलने के कारण प्रेगनेंसी को कुछ साल टालना चाहती हैं। चूंकि उम्र बढ़ने के साथ अंडों की गुणवत्ता और संख्या दोनों घटती हैं, कम उम्र में eggs freeze करवाना भविष्य के लिए एक समझदारी भरा विकल्प बन जाता है।
पूरी प्रक्रिया आमतौर पर 2 से 3 हफ्ते में पूरी हो जाती है और इसके तीन मुख्य चरण हैं:
सामान्यतः हर मासिक चक्र (menstrual cycle) में अंडाशय केवल एक अंडा बनाते हैं। हार्मोन इंजेक्शन की मदद से अंडाशय को एक साथ कई अंडे बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है - जितने ज़्यादा अंडे, सफलता की संभावना उतनी बेहतर। डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा में लगभग 10 से 12 दिनों तक पेट पर 2–3 हार्मोन इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इस दौरान अंडों के विकास पर नज़र रखने के लिए नियमित ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं।
अंडे तैयार होने पर एक छोटी-सी प्रक्रिया के ज़रिए उन्हें निकाला जाता है। यह हल्की एनेस्थीसिया (mild anaesthesia) में होती है और आमतौर पर 15 से 30 मिनट में पूरी हो जाती है। डॉक्टर एक पतली सुई की मदद से अंडाशय से अंडे निकालते हैं। ज़्यादातर महिलाएं उसी दिन घर लौट जाती हैं।
निकाले गए स्वस्थ अंडों को vitrification नामक फ्लैश-फ्रीजिंग तकनीक से तुरंत फ्रीज कर दिया जाता है। बर्फ के क्रिस्टल बनने से रोकने के लिए फ्रीजिंग से पहले अंडों में एक विशेष सुरक्षात्मक द्रव डाला जाता है। फिर इन्हें liquid nitrogen से भरे विशेष टैंकों में शून्य से बहुत नीचे के तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है, जहां ये कई वर्षों तक सुरक्षित रह सकते हैं।
फ्रोज़न eggs से भविष्य में माँ बनने की सफलता दर लगभग 21% से 48% के बीच रहती है। यह दर मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करती है:
ध्यान रखें कि एग फ्रीजिंग प्रेगनेंसी की गारंटी नहीं है - कुछ महिलाओं को IVF के एक से अधिक साइकिल की ज़रूरत पड़ सकती है।
एग फ्रीजिंग एक अपेक्षाकृत सुरक्षित प्रक्रिया है। ज़्यादातर साइड इफेक्ट्स हल्के होते हैं और हार्मोन इंजेक्शन की वजह से होते हैं - जैसे अस्थायी पेट फूलना (bloating), सिरदर्द और मूड स्विंग्स। बहुत ही दुर्लभ मामलों में Ovarian Hyperstimulation Syndrome (OHSS) हो सकता है, इसीलिए स्टिमुलेशन के दौरान डॉक्टर नियमित ब्लड टेस्ट से निगरानी रखते हैं। इसके अलावा यह प्रक्रिया भावनात्मक और आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, इसलिए मानसिक रूप से तैयार होकर ही निर्णय लें।
सबसे अच्छे परिणाम तब मिलते हैं जब eggs 20s के आखिरी सालों या 30s की शुरुआत में फ्रीज करवाए जाएं, क्योंकि इस उम्र में अंडों की गुणवत्ता और संख्या अपने सर्वोत्तम स्तर के करीब होती है। 35 की उम्र के बाद अंडों की गुणवत्ता घटने लगती है, जिससे सफलता की संभावना कम हो जाती है। फर्टिलिटी डॉक्टर FSH (follicle-stimulating hormone) और AMH (anti-mullerian hormone) ब्लड टेस्ट से अंडों की स्थिति का अनुमान लगाते हैं।
भारत में एग फ्रीजिंग के एक साइकिल का खर्च आमतौर पर ₹1,00,000 से ₹2,30,000 के बीच आता है, जिसमें हार्मोन दवाइयां, मॉनिटरिंग और egg retrieval प्रक्रिया शामिल होती है। इसके अलावा अंडों को स्टोर रखने का कुछ सालाना खर्च अलग से लगता है। भारत में ज़्यादातर इंश्योरेंस प्लान इलेक्टिव एग फ्रीजिंग को कवर नहीं करते। हालाँकि कुछ लोन ऑप्शन उपलब्ध हैं।