जब आपको पहली बार गर्भवती होने का पता चलता है, तो आपके मन में बहुत सारे सवाल होते हैं। पहली तिमाही, या जैसा हम कहते हैं "first trimester", ये 12 वीक आपके शरीर और बच्चे के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
इन हफ़्तों में बच्चा बहुत तेज़ी से विकसित होता है और आपके शरीर में बड़े बदलाव होने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि असल में पहली तिमाही शुरू कब होती है और इन 12 हफ़्तों में क्या-क्या होता है? आइए समझते हैं, हफ़्ता दर हफ़्ता।
पहली तिमाही का मतलब प्रेगनेंसी के पहले 12 वीक होते हैं। और ये 12 हफ़्ते, आपके आखिरी पीरियड के पहले दिन वाली डेट से जिसे LMP यानी लास्ट मेंस्ट्रुअल पीरियड (Last menstrual period) भी कहते हैं, गिने जाते हैं।
इसका कारण यह है कि ज्यादातर महिलाओं को ठीक-ठीक पता नहीं होता कि फर्टिलाइजेशन कब हुआ होगा, लेकिन पीरियड की तारीख़ याद रहती है।
अगर आपका LMP 1 जनवरी को था, तो आपकी प्रेगनेंसी 1 जनवरी से ही गिनी जाएगी, भले ही फर्टिलाइजेशन कुछ दिनों के बाद हुआ हो।
टेक्निकली देखा जाये तो, प्रेगनेंसी के पहले दोनों हफ़्तों में आप प्रेगनेंट नहीं होती हैं। पहले वीक में आपके शरीर में हॉर्मोन प्रेगनेंसी की तैयारी कर रहे होते हैं। दूसरे वीक के अंत में ओव्यूलेशन होता है, यानी आपकी ओवरी से एग निकलता है। इसी दौरान अगर आपको संबंध बनाने का मौका मिले, तो स्पर्म और एग मिल सकते हैं। यह समय ही आपकी प्रेगनेंसी की सबसे महत्वपूर्ण समय होती है।
तीसरे वीक में स्पर्म और एग मिलते हैं और फर्टिलाइजेशन होता है। फर्टिलाइज़्ड एग अब भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (Embryo) बन जाता है।
अगले कुछ दिनों में यह एम्ब्रीओ फैलोपियन ट्यूब में से होता हुआ गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की तरफ़ बढ़ने लगता है। यूट्रस तक पहुँचने में इसे 5-6 दिन लगते हैं।
इस दौरान एम्ब्रीओ लगातार विभाजित होता रहता है, पहले 2 कोशिकाएँ यानी सेल्स (cells) बनती हैं, 2 से फिर 4, फिर 8, और इस तरह विभाजन आगे बढ़ता रहता है।
चौथे वीक में यह एम्ब्रीओ गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम से चिपक जाता है, जिसे इम्प्लांटेशन कहते हैं। टेक्निकली अब आप प्रेगनेंट हुई हैं।
इंप्लांटेशन के बाद कुछ महिलाओं को हल्की स्पॉटिंग या ब्लीडिंग हो सकती है, जिसे इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग कहते हैं। यह पीरियड जैसा नहीं होता, बहुत हल्का होता है। साथ ही कुछ महिलाओं को हल्के ऐंठन या पेट में हल्का दर्द भी हो सकता है। कुछ को कुछ भी नहीं होता।
पाँचवें वीक तक आपका शरीर प्रेगनेंसी हॉर्मोन बनाने लगता है जिसे हम hCG कहते हैं। यह हॉर्मोन आपके यूरिन और ब्लड में दिखने लगता है, इसीलिए टेस्ट करने पर प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आता है।
इसी वीक में भ्रूण के दिल में धड़कन शुरू हो जाती है, जिसे हार्टबीट आना कहते हैं।
छठे वीक तक, भ्रूण लगभग एक मटर जितना बड़ा होता है। यूट्रस में गेस्टेशनल सैक, यॉक सैक, और भ्रूण खुद भी दिखाई दे रहा होता है। इसी समय में मॉर्निंग सिकनेस, ब्रेस्ट में सूजन, और थकान जैसे लक्षण शुरू हो सकते हैं। अगर आपको कोई लक्षण नहीं भी है, तो चिंता न करें।
सातवें वीक में भ्रूण का आकार अब आधा इंच के आसपास होता है, और उसके हाथ-पैर की नली जैसी आकृतियां दिखने लगती हैं। आठवें वीक तक, भ्रूण का नर्वस सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण अंग बनने लगते हैं।
इस दौरान भ्रूण की हरकत भी शुरू हो जाती है, लेकिन आप अभी नहीं महसूस कर सकती क्योंकि भ्रूण अभी बहुत छोटा है। लेकिन अल्ट्रासाउंड पर आप इन हरकतों को देख सकते हैं।
इन हफ़्तों में आपकी प्रेगनेंसी के लक्षण और तेज़ हो सकते हैं।
ये सब सामान्य है और ज़्यादातर दूसरी तिमाही यानी सेकंड ट्राइमेस्टर में ठीक हो जाता है।
नवें और दसवें वीक में भ्रूण का विकास बहुत तेज़ी से होता है। मस्तिष्क, दिल, फेफड़े, पेट, किडनी, सब कुछ अब बनने लगता है।
भ्रूण के चेहरे की विशेषताएँ भी अब स्पष्ट होने लगती हैं। अल्ट्रासाउंड पर अब आप देख सकती हो कि कान, नाक, आँख सब कहाँ हैं। हाथ-पैर की उँगलियाँ अब अलग-अलग दिखने लगती हैं।
यह वीक बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भ्रूण के सभी अंग अब मूलरूप से बन गए होते हैं।
इसी समय में आपके शरीर में और बदलाव हो रहे होते हैं।
ग्यारहवें और बारहवें वीक तक, भ्रूण लगभग 2.5 इंच का हो जाता है। आप अब अल्ट्रासाउंड पर साफ़-साफ़ उसके चेहरे की विशेषताएँ देख सकती हो। हाथ-पैर अब ठीक से बने हुए होते हैं। लड़का है या लड़की, यह अभी साफ़ नहीं दिखता।
पहली बार जब आप डॉक्टर के पास जाती हो, तो आपका CBC यानी कम्पलीट ब्लड काउंट (complete blood count) होता है।
1st Trimester के आखिर में, लगभग 11-13 वीक में NT स्कैन होता है, जिसमें ब्लड टेस्ट भी होता है। इसे फर्स्ट ट्राइमेस्टर स्कैनिंग (first trimester screening) कहते हैं।
ब्लड टेस्ट के द्वारा PAPP-A और hCG का लेवल चेक किया जाता है। NT स्कैन में गर्दन के पीछे की जगह मापी जाती है। अगर ये सब नॉर्मल हैं, तो डाउन सिंड्रोम और अन्य क्रोमोज़ोम से संबंधित समस्याओं की संभावना बहुत कम है।
हर महिला को अल्ट्रासाउंड स्कैन 1st ट्राइमेस्टर में कम से कम एक बार करवाना चाहिए। यह 8 से 12 वीक के बीच हो सकता है। इसमें देखा जाता है कि प्रेगनेंसी यूट्रस में है या नहीं, हार्टबीट है या नहीं, और किसी तरह की समस्या तो नहीं है।
कुछ महिलाओं को जेनेटिक समस्या का रिस्क है, तो डॉक्टर उन्हें cvs कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (chorionic villus sampling) कराने सलाह दे सकते हैं। यह एक स्पेशल टेस्ट है जो बहुत रेयर कंडीशन में किया जाता है।
1st ट्राइमेस्टर में कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
1st Trimester आपकी प्रेगनेंसी का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इन 12 वीक में फर्टिलाइजेशन से लेकर भ्रूण के सभी अंग बनते हैं। इस समय आपके शरीर में भी बड़े बदलाव होते हैं। 1st Trimester meaning in Hindi पढ़ते हुए आप यह समझती हैं कि समय भ्रूण की ग्रोथ बहुत तेजी से हो रही होती है और आपको हर समय विशेष रूप से सतर्क रहना होता है। इसीलिए आप अपना रेगुलर चेकअप करवाएं, सही खानपान रखें, और कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो डॉक्टर से बात करें।