Antiphospholipid Syndrome: एक रिपोर्ट से तय नहीं होता

Last updated: October 14, 2026

सारांश (Overview)

दो बार या उससे ज्यादा मिसकैरेज होने के बाद डॉक्टर एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम (Antiphospholipid Syndrome) की जांच की सलाह दे सकते हैं। लेकिन APLA टेस्ट में एक बार एंटीबॉडी पॉजिटिव आने का मतलब यह नहीं है कि आपको एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम है। निदान के लिए जरूरी है कि एंटीबॉडी 12 हफ्ते के अंतर पर दो बार पॉजिटिव आएं।

इस आर्टिकल में जानिए इसके तीन मुख्य टेस्ट कौन से हैं, जांच कब करानी चाहिए, एक पॉजिटिव रिपोर्ट को दोबारा जांचने की जरूरत क्यों पड़ती है, प्रेगनेंसी में इसका इलाज क्या है और IVF के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Antiphospholipid syndrome क्या है और शरीर में होता क्या है?

एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम एक ऑटोइम्यून कंडीशन है। इसमें शरीर की सुरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही शरीर में मौजूद कुछ पदार्थों के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने लगती है। इन्हें एंटीफॉस्फोलिपिड एंटीबॉडी कहा जाता है।

इन एंटीबॉडी की वजह से खून में थक्का बनने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। इससे शरीर की नसों में खून का बहाव रुक सकता है।

प्रेगनेंसी में इसका असर प्लेसेंटा पर पड़ सकता है। प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचता है। अगर वहां खून का बहाव कम हो जाए या थक्का बन जाए, तो प्रेगनेंसी के रुकने या दूसरी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि बार-बार मिसकैरेज APS की एक अहम पहचान हो सकता है।

यह कंडीशन अकेले भी हो सकती है और ल्यूपस जैसी दूसरी ऑटोइम्यून बीमारी के साथ भी।

Antiphospholipid syndrome के लक्षण क्या होते हैं?

  • बार-बार मिसकैरेज होना: और खासकर तब, जब मिसकैरेज की कोई दूसरी वजह न मिले।
  • 10 हफ्ते के बाद प्रेगनेंसी रुकना: यह APS का एक साइन हो सकता है, इसे बिलकुल इग्नोर न करें।
  • पैर की नस में थक्का बनना: इससे एक पैर में सूजन, दर्द या गर्माहट हो सकती है।
  • कम उम्र में स्ट्रोक या हार्ट प्रॉब्लम होना: खासकर जब इसकी कोई दूसरी स्पष्ट वजह न मिले।
  • प्लेटलेट्स कम होना: जांच में प्लेटलेट्स बार-बार कम मिल सकते हैं।
  • त्वचा पर जाल जैसे बैंगनी निशान पड़ना: इन्हें लिवेडो रेटिकुलरिस कहते हैं और ये ठंड में ज्यादा दिखाई दे सकते हैं।

इन लक्षणों में से कोई एक होने का मतलब यह नहीं है कि आपको APS है। कई लोगों में कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देता और APS का पता किसी दूसरी जांच या प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्या की जांच के दौरान चलता है। 

APS की जांच में कौन से तीन टेस्ट होते हैं?

APS की जांच के लिए तीन मुख्य टेस्ट किए जाते हैं। APLA पैनल करवाते समय यह देखना जरूरी है कि इन तीनों की जांच शामिल है या नहीं। 

टेस्ट

क्या देखता है

ध्यान देने की बात

ल्यूपस एंटीकोआगुलंट (LA)

खून में ल्यूपस एंटीकोआगुलंट की मौजूदगी 

खून पतला करने की दवा चल रही हो तो रिपोर्ट गलत आ सकती है

एंटीकार्डियोलिपिन (aCL) IgG और IgM

एक खास एंटीबॉडी की मात्रा

हल्की बढ़त और ज्यादा बढ़त का मतलब अलग होता है 

एंटी-बीटा-2-ग्लाइकोप्रोटीन I (anti-β2GPI) IgG और IgM

दूसरी खास एंटीबॉडी

अक्सर पैनल में छूट जाता है, पूछकर करवाइए

APS की डायग्नोसिस के लिए यही तीन जांचें होती हैं, ल्यूपस एंटीकोआगुलंट, एंटीकार्डियोलिपिन IgG या IgM, और एंटी-बीटा-2-ग्लाइकोप्रोटीन I IgG या IgM।

गाइडलाइन के अनुसार मिसकैरेज वाली महिलाओं को ल्यूपस एंटीकोआगुलंट और एंटीकार्डियोलिपिन IgG तथा IgM की जांच की सलाह दी जाती है, और एंटी-बीटा-2-ग्लाइकोप्रोटीन I की भी जांच करवाने के लिए कहा जाता है। इसलिए रिपोर्ट लेते समय देख लीजिए कि तीनों जांचें उसमें हैं या नहीं।

APS Testing_ Three Key IVF Blood Tests

एक पॉजिटिव रिपोर्ट से antiphospholipid syndrome क्यों तय नहीं होता?

एक बार एंटीफॉस्फोलिपिड एंटीबॉडी पॉजिटिव आने से एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम की पुष्टि नहीं होती। सही डायग्नोसिस के लिए वही एंटीबॉडी 12 हफ्ते के अंतर पर दो बार पॉजिटिव आनी चाहिए। 

कई बार इन्फेक्शन, बुखार और कुछ दूसरी कंडीशन में ये एंटीबॉडी कुछ समय के लिए बढ़ सकती हैं और बाद में अपने आप नॉर्मल हो सकती हैं। इसका APS से कोई लेना देना नहीं होता।  

2023 में ACR और EULAR ने APS की पहचान के लिए नए क्राइटेरिया जारी किए। इनकी स्पेसिफिसिटी 99% थी, इस नए क्राइटेरिया यानी गलत तरीके से APS मान लिए जाने की संभावना कम रखने पर खास जोर दिया गया।

2023 में ACR और EULAR ने APS की पहचान के लिए एक नया क्राइटेरिया (criteria) जारी किया है। इसकी ‘स्पेसिफिसिटी’ 99% है, यानी इस नए क्राइटेरिया को फॉलो करने पर किसी दूसरे रोग के मरीज को गलती से APS का मरीज मान लिए जाने की संभावना बहुत कम रहती है। 

कितने मिसकैरेज के बाद APS की जांच करानी चाहिए?

दो या उससे ज्यादा प्रेगनेंसी लॉस होने पर एंटीफॉस्फोलिपिड एंटीबॉडी की जांच करवा लेनी चाहिए।  लेकिन APS की डायग्नोसिस में हर प्रेगनेंसी लॉस को एक जैसा नहीं माना जाता। इन तीन कंडीशन को खास तौर पर देखा जाता है। 

प्रेगनेंसी में क्या हुआ? 

APS के क्राइटेरिया में कब आता है? 

दस हफ्ते से पहले लगातार मिसकैरेज

तीन या उससे ज्यादा बार हुआ हो और कोई दूसरी वजह न मिली हो 

दस हफ्ते या उसके बाद प्रेगनेंसी रुकना

एक बार भी हुआ हो, लेकिन बच्चे की बनावट सामान्य रही हो 

34 हफ्ते से पहले डिलीवरी

एक्लैंप्सिया, प्री-एक्लैंप्सिया या प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या की वजह से हुई हो 

बार-बार मिसकैरेज वाली महिलाओं में करीब 20% में एंटीफॉस्फोलिपिड एंटीबॉडी पॉजिटिव मिलती हैं। इसलिए हर मिसकैरेज की वजह APS हो, ऐसा जरूरी नहीं है।

Antiphospholipid syndrome प्रेग्नेंसी पर क्या असर डालता है?

APS की वजह से प्लेसेंटा तक ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है। इसके कारण प्रेगनेंसी में नीचे दी हुयी दिक्कतें आ सकती हैं।  

  • मिसकैरेज का रिस्क बढ़ सकता है।
  • प्री-एक्लैंप्सिया हो सकता है।
  • बच्चे का वजन गर्भावस्था की उम्र के हिसाब से कम रह सकता है।
  • समय से पहले डिलीवरी की जरूरत पड़ सकती है।
Pregnancy Blood Flow Infographic

APS का इलाज प्रेग्नेंसी में क्या होता है और कितना काम करता है?

APS कन्फर्म होने पर प्रेगनेंसी में आमतौर पर कम डोज वाली एस्पिरिन और हेपरिन दी जाती है। साथ में प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे की ग्रोथ, बीपी और प्री-एक्लैंप्सिया जैसी कम्प्लेक्सिटी पर नजर रखी जाती है।

 

दवा

कब शुरू होती है

क्या करती है

कम डोज वाली एस्पिरिन

कंसीव करने से पहले से

ब्लड क्लॉट बनने का रिस्क कम करना 

प्रोफाइलैक्टिक डोज हेपरिन या LMWH

प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद से

प्लेसेंटा तक खून का बहाव बनाए रखने में मदद

रेगुलर निगरानी

पूरी प्रेगनेंसी

ग्रोथ स्कैन, बीपी और प्री-एक्लैंप्सिया पर नजर

लेकिन इलाज कितना असर करता है, इस पर रिसर्च पूरी तरह एक जैसी नहीं है। अकेली एस्पिरिन की तुलना में एस्पिरिन और हेपरिन साथ लेने पर जीवित जन्म की संभावना बेहतर पाई गई। हालांकि, इस रिजल्ट पर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें शामिल स्टडीज से मिलने वाले प्रूफ सीमित थे। 

APS में ट्रिपल पॉजिटिव का क्या मतलब है?

अगर APS के तीनों टेस्ट ल्यूपस एंटीकोआगुलंट के साथ एंटीकार्डियोलिपिन और एंटी-बीटा-2-ग्लाइकोप्रोटीन पॉजिटिव आते हैं, तो इसे ट्रिपल पॉजिटिव कहा जाता है। इस कंडीशन में ब्लड क्लॉट बनने और प्रेगनेंसी में दिक्कत होने का रिस्क ज्यादा हो सकता है।

इसलिए रिपोर्ट में सिर्फ पॉजिटिव या नेगेटिव न देखें। तीनों टेस्ट की वैल्यू और नॉर्मल वैल्यू भी देखें और डॉक्टर से इसका मतलब समझें। 

IVF करा रही हैं तो APS पर क्या ध्यान दें?

IVF में एग रिट्रीवल और एम्ब्रीओ ट्रांसफर की तारीख पहले से तय होती है। अगर आप एस्पिरिन या हेपरिन जैसी दवा ले रही हैं, तो इसकी जानकारी IVF टीम को पहले ही दें, ताकि प्रोसीजर के हिसाब से दवा को मैनेज किया जा सके।

अगर बार-बार इम्प्लांटेशन फेल हो रहा है और APLA की जांच कराई जाती है, तो एक पॉजिटिव रिपोर्ट को APS का पक्का डायग्नोसिस न मानें। जरूरत होने पर 12 हफ्ते बाद दोबारा जांच की जाती है।

APS का इलाज चल रहा हो, तब भी थायरॉइड, गर्भाशय की बनावट और एम्ब्रीओ की क्वालिटी जैसी दूसरी वजहों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

याद रखने वाली मुख्य बातें (Key takeaways)

  • एक पॉजिटिव रिपोर्ट से APS का डायग्नोसिस नहीं होता। वही एंटीबॉडी 12 हफ्ते के अंतर पर दो बार पॉजिटिव आनी चाहिए।
  • प्रेगनेंसी लॉस का समय मायने रखता है। 10 हफ्ते के बाद एक बार प्रेगनेंसी रुकना भी क्राइटेरिया में शामिल है, जबकि 10 हफ्ते से पहले तीन मिसकैरेज होने चाहिए।
  • हर बार-बार होने वाले मिसकैरेज की वजह APS नहीं होती। करीब 20% महिलाओं में ही एंटीफॉस्फोलिपिड एंटीबॉडी पॉजिटिव मिलती हैं।
  • तीनों टेस्ट पॉजिटिव होना ज्यादा रिस्क से जुड़ा है। इसलिए रिपोर्ट में सिर्फ पॉजिटिव या नेगेटिव नहीं, तीनों टेस्ट की वैल्यू भी देखना जरूरी है।

निष्कर्ष (Conclusion)

बार-बार मिसकैरेज के बाद APS (Antiphospholipid syndrome) का पता चलना चिंता की बात हो सकती है, लेकिन यह ऐसी कंडीशन है जिसे इलाज और निगरानी के साथ मैनेज किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात है कि सिर्फ एक पॉजिटिव रिपोर्ट के आधार पर APS मानकर इलाज शुरू न किया जाए।

अगर आपकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, तो डॉक्टर से यह जरूर पूछें कि क्या 12 हफ्ते बाद दोबारा जांच की जरूरत है और क्या बार-बार मिसकैरेज की दूसरी वजहों की भी जांच हो चुकी है। इससे आगे का इलाज सही वजह को ध्यान में रखकर तय किया जा सकेगा।

Antiphospholipid syndrome पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम क्या हिंदी में क्या कहलाता है?

APLA टेस्ट पॉजिटिव आ गया तो क्या मुझे APS है?

APLA टेस्ट कब कराना चाहिए?

क्या APS के साथ नॉर्मल प्रेग्नेंसी हो सकती है?

हेपरिन के इंजेक्शन कब तक लगते हैं?

क्या APS पूरी तरह ठीक हो जाता है?

क्या APS की वजह से IVF फेल हो जाता है?

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