ट्यूब ब्लॉक और IVF: फ़ैसला लेने से पहले जो जानना ज़रूरी है

Last updated: August 12, 2026

Overview

"आपकी ट्यूब बंद है, अब IVF ही रास्ता है।"

ये वाक्य अक्सर एक HSG रिपोर्ट देखने के बाद कह दिया जाता है, और उसी दिन से तैयारी शुरू हो जाती है। पैसे का इंतज़ाम, छुट्टियाँ, घरवालों को बताना।

पर थोड़ा रुकिए। दो सवाल हैं जो इस फ़ैसले से पहले पूछ लेने चाहिए, और दोनों का असर सीधा नतीजे पर पड़ता है।

पहला - क्या ट्यूब वाक़ई बंद है?

दूसरा - अगर बंद है, तो किस तरह की बंद है? क्योंकि एक ख़ास क़िस्म ऐसी है जिसे IVF से पहले ठीक करना पड़ता है, वरना IVF की सफलता आधी रह जाती है।

दोनों पर बारी-बारी से।

HSG में "ब्लॉक" लिखा है - इसका मतलब हमेशा ब्लॉक नहीं होता

ये सुनकर हैरानी होती है, पर आँकड़े काफ़ी साफ़ हैं।

HSG में जब ट्यूब बंद दिखती है, तो लैप्रोस्कोपी में वो बात 62 प्रतिशत तक मामलों में confirm नहीं होती। यानी हर तीन में से लगभग दो महिलाओं की ट्यूब असल में खुली निकल सकती है।

वजह ज़्यादातर एक ही होती है - स्पाज़्म। ट्यूब का जो हिस्सा गर्भाशय से जुड़ता है वो बहुत पतला होता है, और दबाव या दर्द से वो कस जाता है। कैमरे में तस्वीर ऐसी बनती है जैसे रास्ता बंद हो, जबकि वो बस सिकुड़ा हुआ है।

इसीलिए साहित्य में एक-तरफ़ा प्रॉक्सिमल ब्लॉक को लेकर लिखा है कि ऐसी 16 से 80 प्रतिशत ट्यूब दोबारा HSG करने पर या लैप्रोस्कोपी में खुली मिल जाती हैं। एक बड़ी शृंखला में तो दबाव थोड़ा बढ़ाने भर से 72 प्रतिशत मामलों में रास्ता खुल गया।

अब उल्टी बात भी उतनी ही सच है, और ये राहत देने वाली है - अगर HSG कहती है कि ट्यूब खुली है, तो उसके बंद होने की संभावना बहुत कम रहती है। यानी ये जाँच "खुला है" बताने में भरोसेमंद है, "बंद है" बताने में उतनी नहीं।

तो इसका व्यावहारिक मतलब क्या हुआ?

अगर एक HSG में एक तरफ़ की ट्यूब बंद दिखी है और उसी आधार पर IVF की बात शुरू हो गई है, तो पूछने लायक़ सवाल ये है - क्या इसे लैप्रोस्कोपी से या दोबारा जाँच से confirm किया जाना चाहिए?

हाँ, एक अपवाद है। अगर HSG में दोनों तरफ़ प्रॉक्सिमल ब्लॉक दिखा है, तो उसके सही होने की संभावना काफ़ी ऊँची - क़रीब 90 प्रतिशत - बताई गई है। ऐसे में दोहराने का उतना मतलब नहीं रह जाता।

हाइड्रोसैल्पिंक्स - ये वाली बात सबसे ज़रूरी है

अब दूसरे सवाल पर, और अगर इस लेख से आपको एक ही चीज़ याद रखनी हो तो शायद यही होनी चाहिए।

हाइड्रोसैल्पिंक्स (Hydrosalpinx) उस स्थिति को कहते हैं जब ट्यूब का बाहरी सिरा बंद हो जाए और अंदर पानी भर जाए। ट्यूब फूलकर एक भरी हुई थैली जैसी हो जाती है।

दिक़्क़त ये है कि वो पानी वहीं नहीं रुकता। रिसकर गर्भाशय में आता रहता है - और भ्रूण को वहाँ टिकने नहीं देता। इसीलिए IVF में भ्रूण चाहे कितना भी अच्छा हो, नतीजा गिर जाता है।

गिरावट कितनी? आँकड़े देखिए।

हाइड्रोसैल्पिंक्स वाली महिलाओं में IVF से प्रेग्नेंसी दर 16.4 प्रतिशत रही, जबकि ट्यूब की दिक़्क़त होने के बावजूद हाइड्रोसैल्पिंक्स न होने वाली महिलाओं में यही दर 31.2 प्रतिशत थी। यानी लगभग आधी। मिसकैरेज की आशंका भी क़रीब 2.3 गुना ज़्यादा पाई गई।

एक दूसरे बड़े विश्लेषण में डिलीवरी की दर 13.4 प्रतिशत बनाम 23.4 प्रतिशत निकली - वही कहानी।

अच्छी ख़बर ये है कि इसका इलाज मौजूद है और असर साफ़ दिखता है।

Cochrane की समीक्षा का निष्कर्ष है कि IVF से पहले लैप्रोस्कोपी से ट्यूब निकालना (salpingectomy) या उसे बंद कर देना (tubal occlusion) - दोनों प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ा देते हैं। NICE भी IVF से पहले सैल्पिंजेक्टमी की सलाह देती है, और वो भी लैप्रोस्कोपी से।

स्कैंडिनेविया में हुए एक randomised trial में डिलीवरी दर 28.6 प्रतिशत बनाम 16.3 प्रतिशत रही। और जिन महिलाओं में दोनों तरफ़ हाइड्रोसैल्पिंक्स था और वो सोनोग्राफ़ी में साफ़ दिख रहा था, उनमें डिलीवरी दर साढ़े तीन गुना बढ़ गई।

तो सवाल ये बनता है - आपकी सोनोग्राफ़ी या HSG में हाइड्रोसैल्पिंक्स दिखा है या नहीं, और अगर दिखा है तो IVF से पहले उसका क्या करना है? ये बात साफ़ हो जानी चाहिए, क्योंकि इसे छोड़कर आगे बढ़ना महँगा पड़ता है।

एक बारीक़ी और। ट्यूब पूरी निकालने से कुछ महिलाओं में ओवरी की रक्त आपूर्ति पर असर की चिंता रहती है। ऐसे में विकल्प है - ट्यूब को गर्भाशय के पास से बस बंद कर देना, निकालना नहीं। तुलनात्मक अध्ययनों में दोनों तरीक़ों के नतीजे लगभग बराबर मिले हैं। कौन सा आपके लिए ठीक रहेगा, ये आपकी स्थिति देखकर सर्जन तय करेंगे।

सर्जरी से ट्यूब खुलवाएँ, या सीधे IVF?

ये सवाल हर मरीज़ के मन में आता है, और जवाब उतना सीधा नहीं जितना दोनों तरफ़ के लोग बताते हैं।

मोटे तौर पर, बाहरी सिरे की गंभीर रुकावट के मामलों में IVF को ही पहली पसंद माना जाता है, और ट्यूब की मरम्मत वाली सर्जरी की भूमिका काफ़ी सीमित रह गई है। वजह ये कि ऐसी सर्जरी के नतीजे आमतौर पर अच्छे नहीं रहते।

पर एक अपवाद है जो जानना चाहिए। ASRM की सामग्री में लिखा है कि सर्जरी अब भी कुछ चुनी हुई महिलाओं के लिए विचार की जा सकती है - जिनकी उम्र 35 से कम हो, ट्यूब की दिक़्क़त हल्की हो, और बाक़ी कोई फर्टिलिटी की समस्या साथ में न हो। साथ ही उनके लिए भी जो IVF नहीं करवाना चाहतीं या जिन तक उसकी पहुँच नहीं है।

तो अगर आप 28 साल की हैं, बाक़ी सब रिपोर्ट ठीक है, पति की रिपोर्ट भी ठीक है, और ट्यूब की दिक़्क़त हल्की है - तो ये विकल्प कम से कम बातचीत में आना चाहिए। सीधे IVF पर पहुँच जाना ज़रूरी नहीं।

और अगर दोनों ट्यूब पूरी तरह बंद हैं, या पहले ट्यूब निकाली जा चुकी है, तो वहाँ बहस की गुंजाइश नहीं। IVF ही रास्ता है।

IVF ट्यूब का काम करता कैसे है

ये समझ लेना अच्छा रहता है, क्योंकि इससे बहुत सी बेवजह की चिंता ख़त्म हो जाती है।

स्वाभाविक गर्भधारण में ट्यूब का काम मिलन की जगह देना है - अंडा ओवरी से निकलकर वहाँ पहुँचता है, शुक्राणु दूसरी तरफ़ से आते हैं, निषेचन वहीं होता है, और फिर भ्रूण कुछ दिन में गर्भाशय तक पहुँचता है।

IVF में ये पूरा हिस्सा शरीर के बाहर होता है। अंडे सीधे ओवरी से निकाले जाते हैं, लैब में निषेचन होता है, और भ्रूण सीधे गर्भाशय में रखा जाता है।

यानी ट्यूब की भूमिका ही ख़त्म हो जाती है। इसीलिए ट्यूब की वजह से बांझपन वाले मामलों में IVF इतना कारगर रहता है - बशर्ते हाइड्रोसैल्पिंक्स वाली बात पहले संभाल ली गई हो।

और इसका एक मतलब ये भी है कि आपकी IVF की सफलता अब ट्यूब पर निर्भर नहीं। वो उम्र, अंडों की गुणवत्ता, गर्भाशय की परत और पति की रिपोर्ट - इन चीज़ों पर निर्भर करेगी। ट्यूब वाला अध्याय बंद हो चुका होगा।

Frequently Asked Questions

एक ट्यूब बंद है, दूसरी खुली - तब भी IVF ज़रूरी है?

हाइड्रोसैल्पिंक्स की सर्जरी के बाद IVF कब शुरू कर सकते हैं?

ट्यूब निकलवाने से क्या ओवरी पर असर पड़ेगा?

HSG कराने में बहुत दर्द होता है, क्या इसका कोई विकल्प है?

IVF से पहले लैप्रोस्कोपी सबको करवानी चाहिए?

ट्यूब बंद होने से क्या पीरियड्स पर असर पड़ता है?

ट्यूब में रुकावट होती क्यों है?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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