सारांश (Overview)
अगर आपका प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव आया था, लेकिन कुछ दिनों बाद ब्लीडिंग शुरू हो गई और अगली बार टेस्ट करने पर दूसरी लाइन भी हल्की पड़ने लगी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?
इसे chemical pregnancy कहा जाता है। यह प्रेगनेंसी की बहुत शुरुआती अवस्था में होने वाला प्रेगनेंसी लॉस (pregnancy loss) है, जिसका पता आमतौर पर प्रेगनेंसी टेस्ट या hCG की जांच से चलता है। अक्सर यह अल्ट्रासाउंड में प्रेगनेंसी दिखाई देने से पहले ही हो जाता है।
यह क्यों होता है, इसकी पहचान कैसे होती है और इसके बाद दोबारा प्रेगनेंसी की कोशिश कब की जा सकती है, आगे इन्हीं सवालों को समझेंगे।
केमिकल प्रेगनेंसी का पता अक्सर तब चलता है, जब प्रेगनेंसी टेस्ट पहले पॉज़िटिव आता है, लेकिन कुछ दिनों बाद दूसरी लाइन हल्की पड़ जाती है या टेस्ट नेगेटिव हो जाता है। इसके बाद पीरियड्स जैसी ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।
आमतौर पर अगर नीचे दिए गए सिम्पटम्स दिखाई देते हैं तो केमिकल प्रेगनेंसी होने के चांस हो सकते हैं।
ऐसे में यह मान लेना सही नहीं है कि पहला प्रेगनेंसी टेस्ट गलत था। शरीर में hCG बनने की वजह से ही टेस्ट पॉज़िटिव आया था। जब hCG का लेवल कम होने लगता है, तो टेस्ट की दूसरी लाइन भी हल्की पड़ सकती है।
यह सब कितने दिनों में होता है, इसे देख लेने से तस्वीर साफ हो जाती है।
प्रेगनेंसी का समय | शरीर में क्या हो रहा होता है |
|---|---|
ओव्यूलेशन के 8 से 10 दिन बाद | एम्ब्रीओ लाइनिंग से जुड़ने लगता है और hCG बनना शुरू होता है। |
12 से 14 दिन बाद | hCG इतना हो जाता है कि घर का प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव आ सकता है। |
चौथे से पांचवें हफ्ते के बीच | केमिकल प्रेगनेंसी में विकास यहीं रुक जाता है और hCG गिरने लगता है। |
पांचवें से छठे हफ्ते के बाद | अल्ट्रासाउंड में गर्भ की थैली दिखनी शुरू होती है। |
अल्ट्रासाउंड में आमतौर पर प्रेगनेंसी दिखाई नहीं देती, क्योंकि यह बहुत शुरुआती समय में ही रुक जाती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर hCG का ब्लड टेस्ट करवाकर स्थिति को समझ सकते हैं।
केमिकल प्रेगनेंसी में एग और स्पर्म मिलने के बाद एम्ब्रीओ बनता है। इसके बाद एम्ब्रीओ यूट्रस की ओर बढ़ता है और यूट्रस की लाइनिंग से जुड़ने की कोशिश करता है। इस दौरान शरीर में hCG बनना शुरू होता है, इसलिए प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव आता है।
लेकिन इस बार प्रेगनेंसी आगे नहीं बढ़ पाती। एम्ब्रीओ का विकास बहुत शुरुआती स्टेप में ही रुक जाता है और hCG का स्तर कम होने लगता है। इसके बाद ब्लीडिंग शुरू हो सकती है, जो अक्सर पीरियड्स जैसी लगती है।
यही वजह है कि chemical pregnancy आमतौर पर अल्ट्रासाउंड में दिखाई नहीं देती। प्रेगनेंसी इतनी शुरुआती अवस्था में रुक जाती है कि अल्ट्रासाउंड में कुछ दिखाई देने से पहले ही hCG कम होने लगता है।
कई बार महिला को पता भी नहीं चलता कि केमिकल प्रेगनेंसी हुई थी। उसे सिर्फ इतना लगता है कि पीरियड्स कुछ दिन देर से आया था।
केमिकल प्रेगनेंसी को भी बहुत शुरुआती मिसकैरेज माना जाता है। फर्क मुख्य रूप से इस बात का है कि प्रेगनेंसी कितनी आगे बढ़ी थी और उस समय जांच में क्या दिखाई दे रहा था।
केमिकल प्रेगनेंसी में प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव हो जाता है, लेकिन अल्ट्रासाउंड में प्रेगनेंसी दिखाई देने से पहले ही वह रुक जाती है। दूसरे तरह के शुरुआती मिसकैरेज में प्रेगनेंसी अल्ट्रासाउंड में दिखाई दे सकती है और उसके बाद उसका विकास रुकता है।
केमिकल प्रेगनेंसी | ब्लाइटेड ओवम | मिस्ड मिसकैरेज | |
|---|---|---|---|
प्रेगनेंसी में क्या हुआ? | प्रेगनेंसी बहुत शुरुआती समय में रुक गई। | गर्भ की थैली बनी, लेकिन एम्ब्रीओ विकसित नहीं हुआ | एम्ब्रीओ बना, लेकिन उसका विकास रुक गया। |
अल्ट्रासाउंड में क्या दिख सकता है? | प्रेगनेंसी दिखाई नहीं देती। | गर्भ की थैली दिख सकती है, लेकिन एम्ब्रीओ नहीं दिखता। | एम्ब्रीओ दिखाई देता है, लेकिन अल्ट्रासाउंड में उसकी धड़कन नहीं मिलती। |
कैसे पता चलता है? | पॉज़िटिव प्रेगनेंसी टेस्ट और बाद में hCG कम होने से। | अल्ट्रासाउंड में गर्भ की थैली दिखने पर। | अल्ट्रासाउंड में एम्ब्रीओ दिखने के बावजूद हार्टबीट न मिलने पर। |
ब्लीडिंग हमेशा होती है? | अक्सर होती है, लेकिन हर महिला में एक जैसी नहीं होती। | हो सकती है या कुछ समय बाद शुरू हो सकती है। | शुरुआत में ब्लीडिंग न भी हो सकती है। |
इसलिए अगर प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव आने के कुछ दिन बाद ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो इसे सिर्फ देर से आया पीरियड समझ लेना जरूरी नहीं है बल्कि केमिकल प्रेगनेंसी भी एक वजह हो सकती है। यह पता लगाने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार hCG की जांच और अल्ट्रासाउंड करते हैं।
केमिकल प्रेगनेंसी होने की सबसे आम वजह एम्ब्रीओ के क्रोमोसोम में ऐसी गड़बड़ी होती है, जिसकी वजह से उसका विकास सामान्य रूप से आगे नहीं बढ़ पाता। यह अक्सर संयोग से होती है और इसका मतलब यह नहीं है कि महिला से कुछ गलती हुई थी। 6 से 10 हफ्ते के बीच होने वाले 60% से ज्यादा प्रेगनेंसी लॉस के पीछे यही वजह मिलती है।
इसके अलावा कुछ दूसरी स्थितियां भी प्रेगनेंसी के शुरुआती विकास को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन हर chemical pregnancy के पीछे इनमें से कोई एक कारण हो, यह जरूरी नहीं है।
सामान्य रूप से गर्भधारण करने वाली महिलाओं में करीब 13 से 22% प्रेगनेंसी इसी तरह खत्म होती हैं। ज़्यादातर को पता भी नहीं चलता।
संभावित कारण या फैक्टर | इसका क्या असर हो सकता है? |
|---|---|
क्रोमोसोम में गड़बड़ी | एम्ब्रीओ का विकास सामान्य रूप से आगे नहीं बढ़ पाता। |
महिला की उम्र ज्यादा होना | 35 साल के बाद एग में क्रोमोसोम से जुड़ी गड़बड़ियों की संभावना बढ़ती जाती है। |
यूट्रस की बनावट या पॉलिप | सेप्टम, फाइब्रॉइड या पॉलिप वाली जगह पर एम्ब्रियो को ठीक से खून की सप्लाई नहीं मिल पाती। |
हॉर्मोन से जुड़ी समस्या | थायरॉइड या प्रोजेस्टेरोन की गड़बड़ी में लाइनिंग प्रेगनेंसी को संभालने लायक तैयार नहीं हो पाती। |
कुछ मेडिकल कंडीशन | थायरॉइड की समस्या, डायबिटीज जैसी स्थितियां अगर नियंत्रित न हों, तो प्रेगनेंसी पर असर पड़ सकता है। |
लाइनिंग 7 मिमी से पतली रह जाए, तो इम्प्लांटेशन ठीक से टिक नहीं पाता। |
प्रेगनेंसी ठहरने के बाद शरीर में hCG हॉर्मोन बनना शुरू होता है। इसी hCG की वजह से प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव आता है। सामान्य रूप से आगे बढ़ रही प्रेगनेंसी में hCG हर 48 से 72 घंटे में लगभग दोगुना होता है, और केमिकल प्रेगनेंसी में यह रफ्तार पकड़ ही नहीं पाता। केमिकल प्रेगनेंसी में शुरुआत में hCG का लेवल इतना बढ़ जाता है कि टेस्ट पर दूसरी लाइन दिखाई देने लगती है। लेकिन जब प्रेगनेंसी आगे नहीं बढ़ती, तो hCG का लेवल कम होने लगता है।
इसी बदलाव को देखने के लिए डॉक्टर जरूरत पड़ने पर hCG की जांच दोबारा करवाते हैं। एक रिपोर्ट से ज्यादा जरूरी यह देखना होता है कि कुछ समय बाद hCG बढ़ रहा है या कम हो रहा है।
hCG में क्या बदलाव दिख रहा है? | इसका क्या मतलब हो सकता है? |
|---|---|
hCG बढ़ रहा है | प्रेगनेंसी आगे बढ़ रही हो सकती है। |
hCG बहुत धीरे बढ़ रहा है या लगभग वहीं है | डॉक्टर को आगे निगरानी या दूसरी जांच की जरूरत पड़ सकती है। |
hCG कम हो रहा है | प्रेगनेंसी आगे नहीं बढ़ रही हो सकती है। |
लेकिन hCG कम होने का मतलब हमेशा chemical pregnancy ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी में भी hCG का स्तर असामान्य तरीके से बदल सकता है। अगर इसके साथ पेट के एक तरफ तेज दर्द, कंधे में दर्द, चक्कर या बहुत कमजोरी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
केमिकल प्रेगनेंसी के बाद कुछ दिनों तक ब्लीडिंग और पेट के निचले हिस्से में ऐंठन हो सकती है। इसके बाद hCG का स्तर धीरे-धीरे कम होता जाता है और आमतौर पर एक से दो हफ्ते में 5 mIU/mL से नीचे, यानी नेगेटिव रेंज में आ जाता है। अगला पीरियड आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों में आ सकता है।
ज्यादातर मामलों में किसी खास इलाज की जरूरत नहीं पड़ती और D&C जैसी प्रक्रिया भी आमतौर पर नहीं करनी पड़ती।
अगला पीरियड आने से पहले ही ओव्यूलेशन वापस आ सकता है। इसलिए अगर अभी दोबारा प्रेगनेंसी नहीं चाहती हैं, तो कंट्रासेप्शन (contraception) यानी गर्भनिरोधक चीजों का इस्तेमाल करें।
अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो या तेज दर्द, चक्कर या कमजोरी जैसी परेशानी हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
IVF के बाद भी केमिकल प्रेगनेंसी हो सकती है। एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद प्रेगनेंसी शुरू होती है, लेकिन वह बहुत शुरुआती समय में आगे बढ़ना बंद कर सकती है।
IVF में ऐसी प्रेगनेंसी का पता कई बार जल्दी चल जाता है, क्योंकि इलाज के दौरान तय समय पर hCG की जांच की जाती है। इसलिए बहुत शुरुआती pregnancy loss भी पकड़ में आ सकता है, जो प्राकृतिक रूप से हुई प्रेगनेंसी में शायद पता ही न चले। आंकड़ों में भी यह फर्क दिखता है। IVF कराने वाली महिलाओं में केमिकल प्रेगनेंसी करीब 22 से 31% तक दर्ज की गई है, जबकि सामान्य गर्भधारण में यह 13 से 22% के बीच रहती है।
एक बार केमिकल प्रेगनेंसी होने का मतलब यह नहीं है कि IVF की अगली कोशिश भी सफल नहीं होगी। आगे क्या करना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि पूरी IVF साइकिल में क्या हुआ और डॉक्टर को दूसरी रिपोर्ट्स में क्या दिखता है।
एक बार केमिकल प्रेगनेंसी होने के बाद अगली प्रेगनेंसी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना जरूरी नहीं होता। ब्लीडिंग रुकने के बाद, जब आप शारीरिक और भावनात्मक रूप से तैयार हों, तो दोबारा कोशिश कर सकती हैं।
अगला पीरियड आने से पहले भी ओव्यूलेशन हो सकता है। इसलिए अगर अभी प्रेगनेंसी नहीं चाहती हैं, तो कंट्रासेप्शन का इस्तेमाल करें।
एक बार केमिकल प्रेगनेंसी होने पर आमतौर पर किसी खास जांच की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अगर यह बार बार हो रही है, तो डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर पिछली प्रेगनेंसी और आपकी मेडिकल हिस्ट्री देखकर तय करेंगे कि किन जांचों की जरूरत है।
केमिकल प्रेगनेंसी बहुत शुरुआती समय में होने वाला मिसकैरेज है। एक बार ऐसा होने पर खुद को इसके लिए जिम्मेदार मानने की जरूरत नहीं है। अक्सर इसका कारण एम्ब्रीओ के क्रोमोसोम में ऐसी गड़बड़ी होती है, जिसे रोका नहीं जा सकता।
अगर एक बार ऐसा हुआ है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आगे प्रेगनेंसी नहीं ठहर सकती। लेकिन अगर केमिकल प्रेगनेंसी बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से बात करके इसकी वजह जानना जरूरी हो सकता है। इससे अगली प्रेगनेंसी के लिए सही कदम तय करने में मदद मिलती है।