FSH, LH और प्रोलैक्टिन तीनों साथ में क्यों टेस्ट होते हैं?

Last updated: June 22, 2026

Overview

जब फर्टिलिटी की जाँच होती है तो डॉक्टर अक्सर तीन हॉर्मोन एक साथ टेस्ट करते हैं, वो हैं FSH, LH और प्रोलैक्टिन। ये तीनों हॉर्मोन मिलकर रिप्रोडक्टिव सिस्टम को कंट्रोल करते हैं। fsh lh prolactin test इसलिए जरूरी है क्योंकि इनमें से किसी एक हार्मोन का अकेला लेवल फ़र्टिलिटी की पूरी जानकारी नहीं देता। तीनों रिपोर्ट को साथ में देखने से डॉक्टर को पता चलता है कि ओव्यूलेशन हो रहा है या नहीं, ओवेरियन रिज़र्व कैसा है, और कहीं कोई हॉर्मोन बाकी दोनों हॉर्मोन के काम में रुकावट तो नहीं डाल रहा है।

Fsh lh prolactin क्या काम करते हैं?

FSH (फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन)

FSH ब्रेन की पिट्यूटरी ग्लैंड (pituitary gland) से बनता है। इसका काम अंडाशय यानी ओवरी (ovary) में फॉलिकल्स को ग्रो करना है। फॉलिकल्स वो थैलियाँ हैं जिनमें एग्स होते हैं। FSH हर महीने इन फॉलिकल्स को सिग्नल देता है कि बढ़ो और एग को मैच्योर करो।

LH (ल्यूटिनाइज़िंग हॉर्मोन)

LH भी पिट्यूटरी ग्लैंड से बनता है। इसका मुख्य काम ओव्यूलेशन (ovulation) ट्रिगर करना है। जब फॉलिकल पूरी तरह तैयार हो जाता है तो LH में अचानक तेज उछाल आता है जिसे LH सर्ज कहते हैं। यही सर्ज एग को फॉलिकल से बाहर निकालता है।

प्रोलैक्टिन (Prolactin)

प्रोलैक्टिन भी पिट्यूटरी ग्लैंड से बनता है। इसका प्राइमरी काम डिलीवरी के बाद दूध बनाना है। लेकिन अगर प्रोलैक्टिन प्रेगनेंसी के बिना ही बढ़ जाए तो यह FSH और LH दोनों को दबा देता है, जिससे ओव्यूलेशन रुक सकता है।


हॉर्मोन

मुख्य काम

FSH

एग को बढ़ने और मैच्योर होने में मदद करता है

LH

ओव्यूलेशन करवाता है

प्रोलैक्टिन

दूध बनाने वाला हॉर्मोन, बढ़ने पर ओव्यूलेशन रोक सकता है

Fsh lh prolactin तीनों साथ क्यों टेस्ट होते हैं?

अकेले FSH टेस्ट करने से सिर्फ़ ओवेरियन रिज़र्व (ovarian reserve) का अंदाज़ा मिलता है। अकेले LH से सिर्फ़ ओव्यूलेशन का अंदाज़ा मिलता है। लेकिन तीनों को साथ में देखने से डॉक्टर को रिप्रोडक्टिव सिस्टम की पूरी जानकारी मिलती है।

fsh lh prolactin test में तीनों हॉर्मोन इसलिए साथ टेस्ट होते हैं क्योंकि ये एक-दूसरे पर असर डालते हैं। प्रोलैक्टिन बढ़ा हो तो FSH और LH दोनों सही से काम नहीं कर पाते। FSH और LH का रेशियो बिगड़ा हो तो PCOS की तरफ इशारा होता है। और अगर FSH बहुत ज़्यादा हो जबकि LH नॉर्मल है, तो ओवेरियन रिज़र्व कम होने का संकेत मिलता है।

सीधे शब्दों में कहें तो एक हॉर्मोन टेस्ट एक दिक्कत बताता है, लेकिन तीनों मिलकर बताते हैं कि दिक्कत कहाँ है और क्यों है।

Fsh LH Prolactin कब और कैसे करवाना चाहिए?

तीनों टेस्ट के लिए ब्लड टेस्ट करवाना होता है। बाँह की नस से ब्लड का सैंपल लिया जाता है और तीनों हॉर्मोन एक ही सैंपल से चेक हो जाते हैं।

यह टेस्ट सही समय पर होना बहुत ज़रूरी है। FSH और LH के लिए पीरियड साइकल के Day 2 या Day 3 पर टेस्ट करवाना सबसे सही रहता है, क्योंकि इस समय दोनों हॉर्मोन अपने बेसलाइन लेवल पर होते हैं।

प्रोलैक्टिन के लिए कोई ख़ास दिन ज़रूरी नहीं है, लेकिन सुबह के समय लेवल सबसे सटीक आता है। स्ट्रेस, नींद की कमी, और ज़्यादा एक्सरसाइज़ प्रोलैक्टिन को अस्थायी तौर पर बढ़ा सकते हैं, इसीलिए टेस्ट से पहले अच्छी नींद लें और रिलैक्स रहें।

फ़ास्टिंग ज़रूरी नहीं है, लेकिन कुछ लैब्स सुबह खाली पेट आने की सलाह देती हैं।

Fsh LH Prolactin की नॉर्मल रेंज क्या है?

ये रेंज Day 2 या Day 3 पर ली गई वैल्यू के हिसाब से हैं।


हॉर्मोन

महिलाओं में नॉर्मल रेंज

पुरुषों में नॉर्मल रेंज

महिलाओं में रेंज से बाहर होने का मतलब 

पुरुषों में रेंज से बाहर होने का मतलब 

FSH

3–10 mIU/mL 

1.5–12.4 mIU/mL

ओवेरियन रिज़र्व कम होने और का लक्षण हो सकता है

स्पर्म प्रोडक्शन की समस्या 

LH

2–12 mIU/mL

1.8–8.6 mIU/mL

ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या और का लक्षण हो सकता है

टेस्टोस्टेरोन में गड़बड़ी

प्रोलैक्टिन

5–25 ng/mL

2–18 ng/mL 

बढ़ा हुआ प्रोलैक्टिन महिलाओं में ओव्यूलेशन पर नेगेटिव असर डाल सकता है। 

पुरुषों में फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है

रिपोर्ट में कॉम्बिनेशन कैसे पढ़ें?

fsh lh prolactin test तब सही से समझ आती है जब तीनों की वैल्यू को साथ में पढ़ा जाए।

FSH नॉर्मल, LH नॉर्मल, प्रोलैक्टिन नॉर्मल

यह सबसे अच्छी स्थिति है। इसका मतलब है कि हॉर्मोनल सिस्टम ठीक से काम कर रहा है। इनफर्टिलिटी की वजह हॉर्मोन नहीं बल्कि कोई अन्य कारण हो सकती है।

FSH नॉर्मल, LH बहुत ज़्यादा, प्रोलैक्टिन नॉर्मल

जब LH, FSH से दोगुना या तीन गुना हो, तो यह PCOS का एक क्लासिक पैटर्न है। PCOS में ओवरी में छोटे-छोटे फॉलिकल्स बनते हैं लेकिन कोई मैच्योर नहीं हो पाता जिससे ओव्यूलेशन नहीं होता।

FSH ज़्यादा, LH नॉर्मल या ज़्यादा, प्रोलैक्टिन नॉर्मल

FSH बढ़ा होना ओवेरियन रिज़र्व कम होने की तरफ इशारा करता है। ब्रेन ज़्यादा FSH इसलिए भेज रहा है क्योंकि ओवरी का रिस्पॉन्स कमज़ोर है।

FSH कम, LH कम, प्रोलैक्टिन बढ़ा हुआ

प्रोलैक्टिन बढ़ने से FSH और LH दोनों दब जाते हैं। नतीजा यह होता है कि ओव्यूलेशन होता ही नहीं। पीरियड्स अनियमित या बंद हो सकते हैं। प्रोलैक्टिन कंट्रोल करने से अक्सर बाकी हॉर्मोन अपने आप ठीक हो जाते हैं।

FSH कम, LH कम, प्रोलैक्टिन नॉर्मल

यह बताता है कि पिट्यूटरी ग्लैंड या हाइपोथैलेमस (hypothalamus) ठीक से सिग्नल नहीं भेज रहे। इसे हाइपोगोनैडोट्रोपिक हाइपोगोनैडिज़्म (hypogonadotropic hypogonadism) कहते हैं। बहुत ज़्यादा स्ट्रेस, कम वज़न, या ज़्यादा एक्सरसाइज़ इसकी वजह हो सकती है।


FSH

LH

प्रोलैक्टिन

मतलब

नॉर्मल

नॉर्मल

नॉर्मल

हॉर्मोनल सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहा है

नॉर्मल

बहुत ज़्यादा

नॉर्मल

PCOS का संकेत हो सकता है

ज़्यादा

नॉर्मल या ज़्यादा

नॉर्मल

ओवेरियन रिज़र्व कम होने का संकेत हो सकता है

कम

कम

बढ़ा हुआ

बढ़ा हुआ प्रोलैक्टिन ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकता है 

कम

कम

नॉर्मल

पिट्यूटरी ग्लैंड या हाइपोथैलेमस से सिग्नलिंग की समस्या का संकेत हो सकता है

प्रोलैक्टिन बढ़ा हो तो फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ता है?

प्रोलैक्टिन का बढ़ना fsh lh prolactin test में सबसे ज़्यादा दिखने वाली दिक्कत है। हाइपरप्रोलैक्टिनीमिया के कई कारण हो सकते हैं।

  • पिट्यूटरी ग्लैंड में छोटी सी गाँठ यानी प्रोलैक्टिनोमा (prolactinoma) सबसे कॉमन कारण है। यह ज़्यादातर बिनाइन होती है और दवाइयों से कंट्रोल हो जाती है।
  • थायरॉइड कम काम करे यानी हाइपोथायरॉइडिज़्म (hypothyroidism) से भी प्रोलैक्टिन बढ़ सकता है। कुछ दवाइयाँ जैसे एंटीसाइकोटिक्स और एंटी-नॉज़िया दवाइयाँ भी प्रोलैक्टिन बढ़ाती हैं।
  • प्रोलैक्टिन बढ़ने से GnRH (gonadotropin-releasing hormone) दब जाता है, जो FSH और LH दोनों को कंट्रोल करता है। इसीलिए प्रोलैक्टिन बढ़ने पर ओव्यूलेशन रुक जाता है और प्रेगनेंसी मुश्किल हो जाती है।

अच्छी बात यह है कि प्रोलैक्टिन को दवाइयों से कंट्रोल करना आसान है। कुछ दवाइयाँ प्रोलैक्टिन को तेज़ी से कम करती हैं और ओव्यूलेशन वापस शुरू हो जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

जब आप FSH, LH, prolactin test करवाएं, तब ध्यान रहे कि ये तीनों हॉर्मोन अकेले-अकेले नहीं बल्कि एक टीम की तरह काम करते हैं। FSH ओवेरियन रिज़र्व बताता है, LH ओव्यूलेशन की स्थिति बताता है, और प्रोलैक्टिन बताता है कि कहीं कोई ऐसा फ़ैक्टर तो नहीं जो बाकी दोनों हॉर्मोन को दबा रहा है। तीनों का कॉम्बिनेशन देखकर डॉक्टर सही डायग्नोसिस और सही ट्रीटमेंट प्लान बना पाते हैं।

Fsh lh prolactin test के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या तीनों टेस्ट एक साथ एक ही ब्लड सैंपल से होते हैं?

 

हाँ, एक ही ब्लड सैंपल से तीनों हॉर्मोन चेक हो जाते हैं। अलग-अलग बार ब्लड सैंपल देने की ज़रूरत नहीं होती।

Fsh lh prolactin test कितने रुपये में हो जाता है?

 

भारत में fsh lh prolactin test आमतौर पर 900 से 1500 रुपये में हो जाता है। ऑनलाइन बुकिंग पर कुछ डिस्काउंट भी मिल सकता है।

प्रोलैक्टिन बढ़ा हो तो क्या प्रेगनेंसी हो सकती है?

 

प्रोलैक्टिन सही किये बिना प्रेगनेंसी होना मुश्किल है क्योंकि बढ़े हुए प्रोलैक्टिन की वजह से ओव्यूलेशन रुक जाता है। लेकिन दवाइयों से प्रोलैक्टिन कंट्रोल होने के बाद ओव्यूलेशन वापस शुरू हो जाता है और नैचुरल प्रेगनेंसी संभव है।

क्या पुरुषों का भी यह टेस्ट होता है?

 

हाँ, पुरुषों में भी FSH, LH और प्रोलैक्टिन चेक किए जाते हैं। FSH स्पर्म प्रोडक्शन, LH टेस्टोस्टेरोन प्रोडक्शन, और प्रोलैक्टिन लिबिडो और इरेक्शन से जुड़ा है। पुरुषों में प्रोलैक्टिन बढ़ने से स्पर्म काउंट और सेक्स ड्राइव दोनों कम हो सकते हैं।

क्या स्ट्रेस से प्रोलैक्टिन बढ़ सकता है?

 

हाँ, स्ट्रेस प्रोलैक्टिन को अस्थायी तौर पर बढ़ा सकता है। इसीलिए एक बार प्रोलैक्टिन बढ़ा आने पर डॉक्टर दोबारा टेस्ट करवाते हैं ताकि कन्फर्म हो सके कि यह स्ट्रेस की वजह से है या असल में लेवल बढ़ा हुआ है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
© 2026 Indira IVF Hospital Limited. All Rights Reserved. T&C Apply | Privacy Policy| *Disclaimer