सारांश (Overview)
i-Pill लेने के बाद सबसे ज्यादा घबराहट दो बातों से होती है। पहली, शरीर में जो बदलाव महसूस हो रहे हैं वे नॉर्मल हैं या नहीं, और दूसरी, यह डर कि कहीं इससे आगे मां बनने में दिक्कत तो नहीं आएगी। दूसरी बात का जवाब पहले ही जान लें, क्योंकि इससे जुड़ी गलतफहमी सबसे ज्यादा फैली हुई है। इमरजेंसी पिल लेने से आगे चलकर प्रेग्नेंट होने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता। रही बात साइड इफेक्ट्स की, तो i-Pill में लेवोनॉर्जेस्ट्रेल नाम का हार्मोन एक बड़ी खुराक में जाता है, इसलिए शरीर कुछ दिन उसका असर दिखाता है। मतली, थकान, सिरदर्द और पीरियड्स का समय आगे-पीछे हो जाना इन्हीं में गिने जाते हैं। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि i pill side effects in hindi में कौन से असर सामान्य माने जाते हैं, वे कितने दिन रहते हैं, पीरियड्स में क्या बदलाव आ सकते हैं, कौन से लक्षण सामान्य नहीं होते, और किन हालात में डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
i-Pill एक इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल है, जिसमें 1.5 mg लेवोनॉर्जेस्ट्रेल (Levonorgestrel) होता है। यह असुरक्षित संबंध के बाद या कॉन्ट्रासेप्शन फेल हो जाने पर, जैसे कंडोम फट जाने पर, प्रेग्नेंसी रोकने के लिए ली जाती है।
यह काम कैसे करती है, यह समझना जरूरी है। यह ओव्यूलेशन को टालकर या रोककर काम करती है, यानी एग ही रिलीज नहीं होने देती। इसका मतलब यह है कि अगर प्रेगनेंसी पहले ही ठहर चुकी है, तो यह गोली उसे खत्म नहीं करती। यह अबॉर्शन पिल नहीं है, और जितनी जल्दी ली जाए उतना बेहतर काम करती है।
यह सबसे आम शिकायत है। यहां एक जरूरी नियम याद रखें, अगर गोली लेने के दो घंटे के भीतर उल्टी हो जाए, तो दूसरी गोली लेनी पड़ती है, वरना दवा असर नहीं करेगी। गोली खाने के साथ लेने से मतली कम रहती है।
हार्मोन के अचानक बदलाव से हल्का सिरदर्द या चक्कर महसूस हो सकता है। पानी पीते रहें और थोड़ा आराम करें, यह एक-दो दिन में ठीक हो जाता है।
पेट के निचले हिस्से में पीरियड्स जैसी ऐंठन होना आम है। यह हल्की होती है और अपने आप कम हो जाती है।
कुछ महिलाओं को दो-तीन दिन तक असामान्य थकान और सुस्ती महसूस होती है। यह भी हार्मोन के असर का हिस्सा है।
छाती में भारीपन या छूने पर दर्द महसूस हो सकता है। यह अगले पीरियड तक अपने आप ठीक हो जाता है।
एक सिस्टेमैटिक रिव्यू में पीरियड्स की अनियमितता को ही इस दवा का सबसे मुख्य साइड इफेक्ट पाया गया, और उसमें कोई गंभीर दुष्प्रभाव सामने नहीं आया।
चूंकि यह गोली ओव्यूलेशन के समय को बदल देती है, इसलिए पीरियड का समय भी बदल सकता है।
पीरियड कुछ दिन पहले भी आ सकता है और कुछ दिन देर से भी। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने साइकिल के किस दिन गोली ली थी। ज्यादातर मामलों में यह अपने अपेक्षित समय के आसपास ही आ जाता है।
गोली लेने के कुछ दिन बाद हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। इसे पीरियड न समझें, क्योंकि यह हार्मोन के असर से होने वाली अलग ब्लीडिंग है और इससे अगले पीरियड की तारीख नहीं बदलती।
अगला पीरियड सामान्य से भारी या हल्का हो सकता है और दिन भी घट-बढ़ सकते हैं। एक-दो चक्र में यह अपने आप सामान्य हो जाता है। अगर लगातार तीन चक्र तक गड़बड़ी बनी रहे, तो डॉक्टर से मिलें।
पेट से जुड़े और शरीर पर दिखने वाले ज्यादातर असर, जैसे मतली, सिरदर्द, थकान और छाती में दर्द, आमतौर पर 24 से 48 घंटे में कम होने लगते हैं और दो-तीन दिन में चले जाते हैं।
पीरियड्स से जुड़े बदलाव थोड़ा लंबा चलते हैं, क्योंकि उनका असर पूरे चक्र पर पड़ता है। इसलिए अगला पीरियड आगे-पीछे होना या उसकी मात्रा बदलना उसी महीने तक सीमित रहता है, और उसके बाद चक्र अपनी सामान्य लय में लौट आता है।
कोई भी इमरजेंसी पिल 100 प्रतिशत गारंटी नहीं देती। इसकी कामयाबी सबसे ज्यादा इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कितनी जल्दी ली, इसलिए जितनी जल्दी ली जाए उतना अच्छा है।
दो और बातें असर घटा सकती हैं। पहली, वजन, क्योंकि FSRH के अनुसार वजन 70 kg से ज्यादा या BMI 26 से ऊपर होने पर डबल डोज पर विचार किया जाता है। दूसरी, समय, क्योंकि इसी गाइडलाइन के अनुसार संबंध के 96 घंटे बाद ली गई लेवोनॉर्जेस्ट्रेल पिल असरदार नहीं मानी जाती। मिर्गी, टीबी या HIV की कुछ दवाएं भी इसका असर घटाती हैं, ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेकर ही आगे बढ़ें।
गोली लेने के दो घंटे के भीतर उल्टी हो जाए, पेट के एक तरफ तेज दर्द उठे, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो, या पीरियड एक हफ्ते से ज्यादा लेट हो जाए, तो डॉक्टर से मिलें।
इसके अलावा अगर आपको बार-बार इस गोली की जरूरत पड़ रही है, तो यही सबसे सही समय है डॉक्टर से नियमित गर्भनिरोधक विकल्पों पर बात करने का, क्योंकि वे ज्यादा असरदार भी हैं और शरीर पर हर बार बड़ी हार्मोन खुराक का बोझ भी नहीं डालते।
i-Pill में मौजूद लेवोनॉर्जेस्ट्रेल ओव्यूलेशन को टालकर प्रेग्नेंसी रोकता है, इसलिए यह जितनी जल्दी ली जाए उतनी असरदार रहती है। इसके आम साइड इफेक्ट्स में मतली, सिरदर्द, चक्कर, थकान, पेट में ऐंठन और छाती में दर्द शामिल हैं, जो दो-तीन दिन में अपने आप ठीक हो जाते हैं। सबसे आम असर पीरियड्स पर पड़ता है, जो जल्दी या देर से आ सकता है और सामान्य से हल्का या भारी हो सकता है, पर एक-दो चक्र में सब सामान्य हो जाता है। पेट के एक तरफ तेज दर्द, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग या एलर्जी के लक्षण सामान्य नहीं हैं और इनमें तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि यह गोली भविष्य में मां बनने की क्षमता पर असर नहीं डालती, लेकिन इसे नियमित गर्भनिरोधक का विकल्प भी नहीं मानना चाहिए।